सागर में भगवान शिव की 71 फीट की प्रतिमा : नीचे 12 ज्योतिर्लिंग के दर्शन
सागर : बुंदेलखंड के सागर में भी एक ऐसा ही अद्भुत स्थान श्री शिव शक्ति धाम है जहां 71 फीट ऊंचे भगवान शिव की प्रतिमा है और प्रतिमा के नीचे गुफा बनी हुई है जिसमें 12 ज्योतिर्लिंग स्वरूप विराजमान हैं। यहां पर भोलेनाथ की पूजा अर्चना करने और उनके दर्शन करने के लिए रोजाना सैकड़ो की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं तीज त्योहार पर विशेष आयोजन यहां पर होते हैं जिसमें हजारों की संख्या में लोग धाम पर पहुंच कर ज्योतिर्लिंग स्वरूप के दर्शन करते हैं। गुफा में दर्शन के लिए सैकड़ो की संख्या में श्रद्धालुओं की लाइन लगती है जहां पर श्रद्धालु खड़े होते हैं वहां अलग-अलग ज्योतिर्लिंग का अलग-अलग वर्णन फ्लैक्स एवं फोटो के माध्यम से जैप है जिन्हें लोग पढ़कर इनका महत्व समझ सकते हैं। इसके बाद गुफा के अंदर प्रवेश करते ही सबसे पहले सोमनाथ फिर मल्लिकार्जुन, जैसे-जैसे आगे बढ़ते जाते हैं तो ओंकारेश्वर, बैद्यनाथ, भीम शंकर, रामेश्वर, नागेश्वर, विश्वनाथ, त्र्यंबकेश्वर, केदारनाथ, घुश्मेश्वर के दर्शन होते जाते हैं और दूसरी तरफ से गुफा से बाहर निकल आते हैं।
शिवशक्ति धाम की स्थापना
इस संसार में सबसे जल्दी प्रसन्न होने वाले देवाधिदेव महादेव के 12 ज्योतिर्लिंग स्वरूप के सुबह शाम स्मरण करने मात्र से मनुष्य के सात जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं और अगर इन स्वरूप के एक साथ दर्शन हो तो लोगों के निश्चित ही भाग्य बदल जाते है। जहां बाबा भोलेनाथ के शिवलिंग के सामने बैठने पर मन को अनूठी शांति मिलती है शिवशक्ति धाम की महिमा अपरंपार है। इस धाम में प्रतिवर्ष शिवरात्रि के पावन सुअवसर पर शिवशक्ति जागरण का भव्य कार्यक्रम होता आया है।
धाम की स्थापना की कहानी बहुत मनोरंजक एवं भाव-विभोर कर देने वाली है। शिवशक्ति धाम मंदिर की आधारशिला साल 1968 में देवों के देव महादेव ने रखा था। एक साधारण दम्पति दिल्ली में रहते थे, बड़े ही दयालु शिव भगत अपना जीवन यापन कर रहे थे। इस परिवार को व्यापार के काम से साल 2004 में सागर (म.प्र) आना हुआ। इस परिवार ने सागर में व्यापार करने के लिए साल 2006 में जमीन खरीदी। तब यहां पीपल का पेड़ और पीपल के पेड़ के पास शिव मंदिर स्थापित था। परिवार को अनुभूति हुई कि देवों के देव महादेव ने जैसे उन्हें आदेश दिया हैं, कि यहाँ एक सुन्दर मंदिर की स्थापना हो तब कर्नाटक के मूर्तिकारों के द्वारा भगवान शिव की विशाल मूर्ति को आकार दिया गया।
महाशिवरात्रि का आयोजन
महाशिवरात्रि के दिन यहां पर 50 हजार से 1 लाख लोग दर्शन करने आते हैं। जितने भी लोग यहां आते हैं वे यहां के भंडारे में जरूर प्रसाद ग्रहण करते हैं। यज्ञ, हवन, आरती, रुद्राभिषेक, भजन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ देर रात तक मंदिर में पूजा-अर्चना की जाती है। शिव शक्ति धाम बहेरिया के सेवा धारी बाबू सिंह राजपूत ने कहा कि भगवान भोलेनाथ की प्रेरणा से दिल्ली के पवन जिंदल साहब ने यह स्थान बनवाने के लिए बुंदेलखंड को चुना यह हम सबके लिए हर्ष की बात है। साल 2007 में इस मंदिर का निर्माण शुरू हुआ था। 71 फीट ऊंची शिव प्रतिमा और उसके नीचे 12 ज्योतिर्लिंग स्वरूप में भगवान विराजमान है, 2009 से यहां श्रद्धालुओं को दर्शन करने का लाभ मिल रहा है। यह मंदिर परिसर करीब पौने दो एकड़ की जगह में फैला हुआ है। जो भी भक्त सच्चे मन से श्रद्धा भाव से आकर भगवान के दर्शन करता है
शिवशक्ति धाम की स्थापना
इस संसार में सबसे जल्दी प्रसन्न होने वाले देवाधिदेव महादेव के 12 ज्योतिर्लिंग स्वरूप के सुबह शाम स्मरण करने मात्र से मनुष्य के सात जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं और अगर इन स्वरूप के एक साथ दर्शन हो तो लोगों के निश्चित ही भाग्य बदल जाते है। जहां बाबा भोलेनाथ के शिवलिंग के सामने बैठने पर मन को अनूठी शांति मिलती है शिवशक्ति धाम की महिमा अपरंपार है। इस धाम में प्रतिवर्ष शिवरात्रि के पावन सुअवसर पर शिवशक्ति जागरण का भव्य कार्यक्रम होता आया है।
महाशिवरात्रि का आयोजन
महाशिवरात्रि के दिन यहां पर 50 हजार से 1 लाख लोग दर्शन करने आते हैं। जितने भी लोग यहां आते हैं वे यहां के भंडारे में जरूर प्रसाद ग्रहण करते हैं। यज्ञ, हवन, आरती, रुद्राभिषेक, भजन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ देर रात तक मंदिर में पूजा-अर्चना की जाती है। शिव शक्ति धाम बहेरिया के सेवा धारी बाबू सिंह राजपूत ने कहा कि भगवान भोलेनाथ की प्रेरणा से दिल्ली के पवन जिंदल साहब ने यह स्थान बनवाने के लिए बुंदेलखंड को चुना यह हम सबके लिए हर्ष की बात है। साल 2007 में इस मंदिर का निर्माण शुरू हुआ था। 71 फीट ऊंची शिव प्रतिमा और उसके नीचे 12 ज्योतिर्लिंग स्वरूप में भगवान विराजमान है, 2009 से यहां श्रद्धालुओं को दर्शन करने का लाभ मिल रहा है। यह मंदिर परिसर करीब पौने दो एकड़ की जगह में फैला हुआ है। जो भी भक्त सच्चे मन से श्रद्धा भाव से आकर भगवान के दर्शन करता है
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