Editor: Vinod Arya | 94244 37885

माता-पिता को संतुष्ट करने वाली संतानें संसार में दुर्लभ हैं : पूज्य श्री प्रेमभूषण जी महाराज ▪️श्री राम कथा में प्रदेश प्रभारी महेन्द्र सिंह, मंत्री गोविंद राजपूत, पूर्वमंत्री गोपाल भार्गव आदि हुए शामिल

माता-पिता को संतुष्ट करने वाली संतानें संसार में दुर्लभ हैं :  पूज्य श्री प्रेमभूषण जी महाराज

▪️श्री राम कथा में प्रदेश प्रभारी महेन्द्र सिंह, मंत्री गोविंद राजपूत, पूर्वमंत्री गोपाल भार्गव आदि हुए शामिल


तीनबत्ती न्यूज: 03 फरवरी, 2026

सागर: माता-पिता को संतुष्ट करने वाले संतान संसार में दुर्लभ हैं। वह माता-पिता भाग्यशाली हैं जिनके पास आज्ञाकारी पुत्र और पुत्री हैं जो उनके मन के अनुसार चलते हैं। भगवान राम ने तो सिर्फ इतना ही सुना की पिताजी ने माता जी को दो वचन दिए हैं और चुपचाप अपने पिताजी के वचनों का पालन करने वन यात्रा पर  निकल पड़े। यह उद्गार मध्य प्रदेश के सागर स्थित रुद्राक्ष धाम में निर्मित भव्य कथा मंडप में सप्त दिवसीय श्री राम कथा का गायन के चौथे सत्र में पूज्य प्रेमभूषण जी महाराज ने व्यासपीठ से कथा वाचन करते हुए व्यक्त किए। श्रीराम कथा के चौथे दिवस कथा श्रवण हेतु अनेक वरिष्ठ भाजपा नेता, संगठन पदाधिकारी, आयोग के अध्यक्ष, विधायक, पूर्व मंत्री, अनेक पूर्व विधायक, महापौर सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों से नेता गण पहुंचे।

यह भी पढ़ें: श्रद्धा और विश्वास है तो जीवन में सब कुछ मिलता है: पूज्य प्रेमभूषण जी महाराज ▪️रुद्राक्ष धाम में सप्त दिवसीय श्री राम कथा शुरू

मनुष्य अपने कर्म बिगाड़ करके ही जीवन में दुख कष्ट पाता है

सरस् श्रीराम कथा गायन के लिए लोक ख्याति प्राप्त प्रेममूर्ति प्रेमभूषण जी महाराज ने मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री एवं वर्तमान विधायक भूपेन्द्र सिंह  के पावन संकल्प से आयोजित रामकथा के क्रम में श्री सीताराम विवाह से आगे के प्रसंगों का गायन करते हुए कहा कि मनुष्य अपने कर्म बिगाड़ करके ही जीवन में दुख कष्ट और बीमारी प्राप्त करता है। मनुष्य को खासकर अपने विवाह के बाद अपने कर्मों के प्रति सावधान जरूर हो जाना चाहिए। कर्म करने में लापरवाही का परिणाम भी सामने आता है। सीखने के लिए एक अवस्था होती है जीवन भर बार-बार गलती कर करके नहीं सीखा जा सकता है।


पूज्य महाराज श्री ने कहा कि जिसके पास जो होता है दूसरे को वही वस्तु दे सकता है। अपने कष्ट और दुख के लिए हम बेवजह भगवान को दोष लगाते हैं। भगवान किसी को दुख या कष्ट दे ही नहीं सकते हैं, क्योंकि उनके पास ना तो दुख है, ना कष्ट है। भगवान के पास कोई बीमारी भी नहीं है तो वह देंगे कहां से? हमारे हाथ में केवल हमारा कर्म है। हमारे कर्म से ही हमारा प्रारब्ध बनता है। कोई भी व्यक्ति किसी और के भाग्य को बदल नहीं सकता है। क्योंकि उसका भाग्य तो उसके अपने ही कर्मों से बना होता है। कर्म का फल हर हाल में खाना होता है और सनातन धर्म विश्वास पर ही टिका है।

यह भी पढ़ेंमनुष्य को भटकने से बचाता है सत्संग : पूज्य प्रेमभूषण जी महाराज ▪️पूज्य श्री रावतपुरा सरकार के सानिंध्य में प्राण-प्रतिष्ठा संपन्न : दक्षिणमुखी हनुमान जी मंदिर में दर्शन प्रारंभ

केवट जी को 17 जन्मों के बाद भगवान के पांव पखारने का अवसर मिला था। निषाद राज गुह को लक्ष्मण जी ने राम जी के बारे में बताते हुऐ कहा था -‘‘ आप व्यर्थ में कैकई माता को दोषी मान रहे हैं। कोई चाह कर भी किसी को सुख या दुख नहीं दे सकता है। मनुष्य तो अपने कर्म से ही सुख अथवा दुख पाता है लेकिन हमारे राम जी तो भगवान हैं। भगवान विकारों से रहित हैं और उन्हें कोई सुख अथवा दुख प्रभावित नहीं कर सकता है।“ महाराज जी ने बताया कि मानस में कुल सात गीता हैं और यह प्रसंग गुह गीता के नाम से जाना जाता है। यह प्रसंग हमें बताता है कि सीताराम जी के चरणों में प्रेम रखते हुए और अपने परिश्रम से अर्जित धन का सदुपयोग करने वाले ही सदा सुखी रह सकते हैं। लक्ष्मण जी ने निषाद राज गुह को यह शिक्षण दिया लेकिन उसको पकड़ लिया वहाँ उपस्थित केवट जी ने और अगले दिन उन्होंने भगवान के चरणों में अपनी प्रीत का दर्शन भी करा दिया। प्रभु के चरण पखार कर वह जन्म मरण के बंधन से मुक्त हो गए।

धरती का संसार भगवान की रचना है और इसकी हर रचना पर भगवान की ही दृष्टि है। भगवान को वही जान पाता है जिसे भगवान स्वयं जनवाना चाहते हैं और भगवान को जान जाने वाला भगवान का ही होकर ही रह जाता है। भगवान ने केवट जी, शबरी जी और निषाद जी को जो सौभाग्य प्रदान किया वह अपने आप में यह बताने के लिए पर्याप्त है कि भगवान कभी भी भगत में जात-पात का भेद नहीं देखना चाहते हैं। धरती के किसी भी मनुष्य के लिए भगवान का गुणगान करने के लिए जाति और कुल का कोई महत्व नहीं होता है। हमारे सनातन सद्ग्रन्थों में यह बार-बार बताया गया है कि जो कोई भी चाहे प्रभु को जप ले और अपना जीवन धन्य कर ले। कोई भी गा ले, फल अवश्य मिलेगा।

यह भी पढ़ें: आनंद प्राप्ति के लिए स्वयं प्रयास करना पड़ता है, कोई और यह नहीं दे सकता है : पूज्य प्रेमभूषण जी महाराज

महाराज श्री ने कहा कि भारत की भूमि देवभूमि है, धर्म की भूमि है। यहां धर्म का पालन करने वाले ही सदा सुखी रहते हैं और अधर्म पथ पर चलने वाले लोगों को दुख भोगने ही पड़ते हैं। लेकिन हाल के वर्षों में सनातन धर्म और परंपरा के साथ कई तरह के खिलवाड़ की घटनाएं हो रही है जो चिंता का विषय है। हमारी संस्कृति धर्म पर आधारित है जैसे तैसे नहीं चलती है। धर्म और परंपराओं का सब विधि से पालन होना चाहिए और तभी समाज का कल्याण संभव है। पूज्यश्री ने कहा कि भगवान अविकारी हैं और मनुष्य अर्थात जीव विकारों से परिपूर्ण है। भगवान और मनुष्य में यही मूल अंतर है। अपने कर्मों के माध्यम से जीव अगर अपने विकारों से रहित हो जाता है या विकारों को कम करना शुरू कर देता है तो वह भगवान के तुल्य होने लगता है। निरंतर सतकर्मों में रहने वाला व्यक्ति ही विकारों से छुटकारा पाता है। 

जानबूझ कर किया गया अपकर्म या पाप मनुष्य का पीछा नहीं छोड़ता है 


पूज्य प्रेमभूषण जी महाराज ने कहा कि जानबूझ कर किया गया अपकर्म या पाप मनुष्य का पीछा नहीं छोड़ता है और उसका फल हर हाल में भोगना ही पड़ता है। अगर ऐसा नहीं होता तो लोग रोज-रोज पाप करते और गंगा जी में नहा कर पाप धो लेते। फिर तो धरती पर कोई पापी बचता ही नहीं। सनातन सदग्रंथों में हर बात की व्याख्या की गई है, हमें इन पर विश्वास रखते हुए जीवन जीने का प्रयास करना चाहिए। महाराज श्री ने अनेक संगीतमय भजनों से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। बड़ी संख्या में उपस्थित रामकथा के प्रेमी, भजनों का आनन्द लेते रहे। कथा मंच का संचालन तारकेश्वर मिश्र ने किया।



कथा के चौथे दिवस उमड़े श्रद्धालु : अनेक मंत्री ,नेता हुए शामिल

श्रीराम कथा के चौथे दिवस मुख्य यजमान पूर्व गृहमंत्री एवं खुरई विधायक तथा उनके परिवार के साथ कथा श्रवण, श्री रामायण जी व व्यास पीठ के आरती पूजन में महेन्द्र सिंह प्रदेश प्रभारी भाजपा म.प्र.,केबिनेट मंत्री  गोविंद सिंह राजपूत, संभागीय भाजपा प्रभारी श्री गौरव रणदिवे, पूर्व केबिनेट मंत्री पं. गोपाल भार्गव, श्रीमती मालती राय महापौर भोपाल, अवधेशप्रताप सिंह मानव अधिकार आयोग अध्यक्ष म.प्र., जिला भाजपा अध्यक्ष श्याम तिवारी, सुश्री प्रियंका बृजबिहारी पटैरिया देवरी, श्रीमती सरोजसिंह राजपूत जिला अध्यक्ष भाजपा टीकमगढ़, सुरेन्द्र सिंह पूर्व राज्यसभा सांसद, पूर्व सांसद राजबहादुर सिंह, हरिसिंह रघुवंशी विधायक गंजबासौदा, पूर्व विधायक संजय जैन टप्पू, महेश राय बीना पूर्व विधायक, पूर्व विधायक धरमू राय, पूर्व विधायक तरवर सिंह, पूर्व विधायक सुनील जैन, सतेन्द्रभूषण सिंह भोपाल पूर्व प्रदेश कार्यालय मंत्री भाजपा, महापौर प्रतिनिधि डॉ. सुशील तिवारी, मुकेश तिवारी कुरवाई जिला महामंत्री विदिशा, रविकरण त्रिपाठी शहडोल संभागीय अध्यक्ष ब्राह्मण समाज, राजा ठाकुर जिला उपाध्यक्ष किसान मोर्चा उज्जैन, विशाल राजौरिया जिला महामंत्री उज्जैन, अनिल सोनकर जिला महामंत्री विदिशा, पूर्व सपा प्रदेशाध्यक्ष गौरीसिंह यादव, पूर्व मंत्री नारायण कबीरपंथी,  कुलदीप खरे पूर्व जिलाध्यक्ष युवा मोर्चा भोपाल, सिद्धार्थसिंह बामोरा, ऋषि लोधी दमोह पूर्व प्रदेश मंत्री भाजपा, डॉ. मनोहर सिंह मंडल अध्यक्ष तारादेही दमोह, लखन सिंह बामोरा क्षत्रिय महासभा अध्यक्ष, युवा भाजपा नेता अविराज सिंह, पार्षद श्रीमती रानी अहिरवार, पार्षद श्रीमती रूबी पटेल, पार्षद राजकुमार पटेल, अनुराग प्यासी, राजकुमार पचौरी पूर्व जिला अध्यक्ष कांग्रेस, डॉ. राकेश शर्मा, श्रीमती वर्षा शर्मा, कांग्रेस ब्लाक अध्यक्ष नारायण विश्वकर्मा, रिशांक तिवारी, राजाराज सिंह करैया, नरेन्द्र सिंह पप्पू, बंटी श्रीवास्तव, राजकुमार सिंह, मनीष मिश्रा, वीनू शमशेर जंगबहादुर राणा, अजीत सिंह भैंसा, कृष्णा सिंह महुआखेड़ा, अजीत सिंह चीलपहाड़ी, अवधसिंह लंबरदार, राजेंद्र सिंह दरी, यशवंत करोसिया, मंगलसिंह सागौनी, पार्षद याकृति जड़िया, पार्षद अनूप उर्मिल, पार्षद शैलेश केशरवानी, जाहर सिंह, अनिल हजारी, लक्ष्मण सिंह, संतोष दुबे, नवीन भट्ट, अजय लंबरदार, लल्लू बिलानी, उमेश यादव, शुभम घोषी, राजू तिवारी, श्याम जी दुबे, राकेश चौबे, बाटू दुबे, मनोज शुक्ला, अंकित विश्वकर्मा, प्रदीप पांडे, जित्तू मास्साब, राजीव सोनी, आदित्य सिंह, विजय पटेल, संदीप सिंह, विशाल गुरु, विक्रम सिंह, रावराजा राजपूत, गोलूप्रताप राय, राजेंद्र नामदेव, संजय बापट, राहुल सिंह चौरा, लखन सिंह कुसुमगढ़, पूर्व शहर कांग्रेस अध्यक्ष राजकुमार पचौरी, पप्पू गुप्ता, चक्रेश जैन, नकुल हजारी, सुरेश हसरेजा एवं हरेमाधव टीम सागर एवं खुरई, विवेक शर्मा अध्यक्ष एलएनसीटी कॉलेज भोपाल सहित अनेक गणमान्य जन शामिल रहे। 

कथा स्थल की व्यवस्था में राजपाल सिंह मण्डल अध्यक्ष धनौरा, अनिल पाराशर मण्डल अध्यक्ष बांदरी, नीतेश यादव मण्डल अध्यक्ष बरोदियाकलां, अरविन्द सिंह रामछायरी मण्डल अध्यक्ष मालथौन, राहुल चौधरी मण्डल अध्यक्ष खुरई नगर, रविन्द सिंह राजपूत मण्डल अध्यक्ष खुरई ग्रामीण, जितेन्द्र सिंह धनौरा, रामकुमार बघेल पूर्व मण्डल अध्यक्ष, काशीराम अहिरवार टेलर, राजकुमार अहिरवार सरपंच, राहुलसिंह बाहरपुर, सुजान सिंह लोधी, तेवरी रघुराज सिंह, बरोदियाबामन, रामबाबू सिंह खैरा, रविन्द्र सिंह गंमिरियाबुजुर्ग, नीरज रघुवंशी, चैनसिंह तेवरी, अर्जुन अहिरवार गोलनी, रमन यादव बूधौन, प्रेमसिंह गौड कनेरागौड, राजेन्द्र गौड बसियागौड, शिवराज कुशवाहा कुमरोल, रघुराज सिंह बाहरपुर, नरेन्द्र सिंह धरमपुर, मालकसींग घोषी, बलोप जसवीर सिंह, गढौलाजागीर सुरेन्द्र सिंह धनौरा, उदयसिंह नगदा, सत्यम कुर्मी बेरी, इमरत लोधी मुडिया, सरदार सिंह राजपूत दुगाहाकलां, इमरत सिंह आसौली, वीरसींग प्रजापति, उजनेट, जाहर सिंह चकेरी, गजेन्द्र विश्वकर्मा पथरियाचिंताई, भानूसिंह दुगाहाखुर्द, दशरथ सिंह गंगउवा, रामकुमार सिंह इमलियादुगाहा, सनमान सिंह राजपूत बडराहा, नन्हेभाई गौड मुहांसा, रंजीत सिंह राजपूत पिपरियागौड, अजय सिंह बलउ, सुरेन्द्र सिंह पतराज, राजपाल सिंह राजपूत, धनौरा, बलराम सिंह बाडौली, श्रीमती पुष्पा लोधी गढौलाजागीर, अनिल सेंगर कुमरोल, राकेश यादव हनुमतपहाडी, ऋषि व्यास मुहलीखुर्द, गजेन्द्र सिंह तुरकाई, केशव पाराशर गंभीरियाबुजुर्ग, मनोज राय बेरखेडी, प्रमोद सिंह गौड कनेरागौड, दारा सिंह दांगी बाहरपुर, दीपक यादव बलोप, रामकुमार कटारे गढौलाजागीर, जगदीश कुशवाहा धनौरा, सुनील कुर्मी बेरी, रविन्द्र सिंह रहरोन, बाबू सिंह चकेरी, देवी सिंह ठाकुर पथरियाचिंताई, कोमल चढार दुगाहाखुर्द, विस्तार सिंह बडराहो, मूरत सिंह बलउ, विनोद पटवा, रामाधार शर्मा, अक्षय जैन धनोरा मंडल, रामशास्त्री, गोलू राय, बलबीर सिंह, सुरेन्द्र लोधी, तोरण सिंह सहित सभी व्यवस्था प्रभारी शामिल रहे। 


Share:

0 comments:

एक टिप्पणी भेजें

www.Teenbattinews.com

Archive