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शनिवार, 5 दिसंबर 2020

बुन्देलखण्ड मेडिकल कालेज सागर में तीन महीने में 92 नवजात बच्चों की मौत, डेथ रेट पहुचा 32 फीसदी ★बढ़ते डेथ रेत से मचा हड़कम्प, प्रशासन ने बनाई जांच कमेटी ★पूर्व मंत्री सुरेंद्र चौधरी ने दोषियों पर कार्यवाही की मांग की ★ सांसद राजबहादुर और विधायक शेलेन्द्र जैन ने कहा मामला गम्भीर है, जांच होगी

बुन्देलखण्ड मेडिकल कालेज सागर में तीन महीने में 92 नवजात बच्चों की मौत, डेथ रेट पहुचा 32 फीसदी

★बढ़ते  डेथ रेत से मचा हड़कम्प,  प्रशासन ने बनाई जांच कमेटी
★पूर्व मंत्री सुरेंद्र चौधरी ने दोषियों पर कार्यवाही की मांग की
★  सांसद राजबहादुर और विधायक शेलेन्द्र जैन ने कहा मामला गम्भीर है, जांच होगी


सागर। एमपी के शहडोल में बच्चों की मौत का मामला थम नही पाया है। कुछ इसी तरह की खबर  सागर के  शासकीय बुन्देलखण्ड मेडीकल कॉलेज की सामने आई है।  जहाँ बीते अप्रैल मे शुरू किए गये नवजात शिशु बच्चो के इलाज़ के लिए पीडियाट्रेक गहन चिकित्सा ईकाई ओर एन आई सी यू ,एस एन सी यू मे इलाज़ के लिए भर्ती नवजात शिशुओं के मौत के आंकड़े चौकने वाले आए है । जिसके बाद इस मामले मे मेडीकल कॉलेज प्रंबधन कटघरे मे खड़ा दिखाई दे रहा ओर उसकी बेहतर चिकित्सीय सेवाओ पर सवालिया निशान लग रहा बीते तीन माह मे यहां भर्ती 92 बच्चो की मौत होने की जानकारी के वायरल होने के बाद खलबली मची है ।
जहाँ इस मामले मे मेडीकल कॉलेज प्रशासन अब बचाव की मुद्रा मे नज़र आ रहा ओर मौत के कारणो को लेकर अपना ही राग अलाप रहा। एक डॉक्टरों की जांच कमेटी मेडिकल कालेज प्रशाशन बनाई  है। 

मध्यप्रदेश के शहडोल मे बच्चो की मौत के मामले की जांच अभी पूरी ही नही हुई थी की अब बुन्देलखण्ड के सागर मेडीकल कॉलेज मे उसी तर्ज पर नवजात शिशुओं के मौत का बढ़ा आंकड़ा निकलकर सामने आया है जहाँ  बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के SNCU और PICU वार्ड में पिछले तीन महीनों में भर्ती 92 नवजातों की इलाज के दौरान मौत हुई,मृत्यु दर सामान्य से दोगुनी 32 प्रतिशत पहुँची, सिर्फ नवंबर माह ही 37 नवजातों की मौत हो गयी,अक्टूबर में 32 और सितंबर में 23 नवजातों की जान नही बचाई जा सकी।
इस मामले में बुंदेलखंड मेडिकल कालेज प्रबंधन के डीन डां आर एस वर्मा ने भी मौत की संख्या मे इजाफा की बात स्वीकार की है । उनका कहना है डेथ रेट बढ़ है। कई दफा परिजनों  के देरी से इलाज़ के लिए यहाँ  पर भी मौत हो जाती है। वही चिकित्सीय अमले की कमी को भी है। 
उधर  सांसद राजबहादुर सिंह और  विधायक शेलेन्द्र जैन के मुताबिक यह गम्भीर मामला है। जो भी लापरवाही सामने आएंगी उनका पता किया जा रहा है। उसमें  कार्यवाही होगी। इस सम्बंध में डीन से चर्चा हुई है। 

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बुंदेलखंड क्षेत्र में बच्चों की मृत्यु दर में वृद्धि को लेकर कांग्रेस चिंतित, शिवराज सरकार के स्वास्थ्य सेवा गारंटी के दावे खोखले : पूर्व मंत्री सुरेंद्र चौधरी

बुंदेलखंड क्षेत्र के संभागीय मुख्यालय सागर स्थित बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज सागर में बच्चों मौतों में लगातार हो रही वृद्धि पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री श्री सुरेंद्र चौधरी ने शासन/  प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि भाजपा के सांसद /  विधायक और स्वास्थ्य आयुक्त श्री पिथोड़े ने संभागीय मुख्यालय सागर में समीक्षा बैठक के दौरान बच्चों की मौतों की बढ़ती दर को गंभीरता से लिया होता तो बढ़ती मृत्यु दर को रोका जा सकता था । किंतु शासन/  प्रशासन की लचर व्यवस्था के चलते पिछले तीन माह में बच्चों की मृत्यु दर में लगातार वृद्धि हुई है । जिसमें माह सितंबर, अक्टूबर में बढ़ोतरी होने के साथ-साथ माह नवंबर में मृत्यु दर में बेतहाशा वृद्धि हुई। श्री चौधरी ने कहा कि बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज सागर में संभाग भर से रिफर किए जाने वाले गंभीर बच्चों को इलाज हेतु लाया जाता है किंतु प्रशासनिक लापरवाही के साथ-साथ चिकित्सीय सुविधाओं के अभाव में बच्चों को अपनी जान गवाना पड़ रही है बावजूद इसके शासन / प्रशासन के जिम्मेदारों का इस ओर ध्यान नहीं है जो भाजपा सरकार के स्वास्थ्य सेवा गारंटी के दावे खोखले साबित करता है। श्री चौधरी ने शासन/  प्रशासन से मांग करते हुए कहा है कि बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में बच्चों की बढ़ती मृत्यु दर की निष्पक्ष एजेंसी से जांच कराई जाकर बच्चों को उचित एवं पर्याप्त चिकित्सीय सुविधाएं मुहैया कराई जावे।।

कमिश्नर श्री मुकेश शुक्ला रविवार को बीएमसी में शिशुओं की मृत्यु के मामले की समीक्षा करेंगे,समिति गठित

सागर सम्भाग के कमिश्नर  मुकेश शुक्ला रविवार 6 दिसंबर को सुबह 11बजे बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में पिछले तीन माह में नवजात शिशुओं की मृत्यु के मामले की समीक्षा करेंगे । कमिश्नर श्री शुक्ला को आज इस प्रकरण की जानकारी मिलने पर उन्होंने  बीएमसी के डीन को  चिकित्सको की एक  समिति गठित करने के निर्देश दिए , जो पूरे मामले की जांच कर शिशुओं की मृत्यु को रोकने के लिए अपने सुझाव देगी  । कमिश्नर के निर्देश पर गठित समिति में एक एक शिशु रोग विशेषज्ञ, स्त्री रोग विशेषज्ञ और मेडिसिन विभाग के चिकित्सक को रखा गया है । 


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