केवल सुंदरकांड पढ़ने और सुनने से कोई लाभ नहीं होगा,पूरी कथा पढ़ना चाहिए : पूज्य प्रेमभूषण जी महाराज
▪️केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह श्रीराम कथा में शामिल हुए: दक्षिणमुखी हनुमान जी की उतारी आरती
तीनबत्ती न्यूज: 06 फरवरी ,2026
सागर। श्री रामचरितमानस में भगवान की पूरी कथा है। मानस जी में ही लिखा है कि भगवान की कथा अति हरि कृपा होने से ही प्राप्त होती है। कथा प्रारंभ से अंत तक पढ़नीऔर सुननी चाहिए, खंडित करके नहीं। कक्षा 2, 4, 5 में नहीं पढ़कर सीधे मास्टर की पढ़ाई की जा सकती है क्या?
उक्त बातें मध्य प्रदेश के सागर स्थित रुद्राक्ष धाम में निर्मित भव्य कथा मंडप में सप्त दिवसीय श्री राम कथा का गायन के क्रम में पूर्णाहुति सत्र की कथा का गायन करते हुए पूज्यश्री प्रेमभूषण जी महाराज ने व्यासपीठ से कहीं। श्रीराम कथा के पूर्णाहुति सत्र में केंद्रीय कृषि कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान, पूर्व मंत्री पं गोपाल भार्गव,अनेक विधायक, पूर्व मंत्री, पूर्व विधायकों सहित अनेक जनप्रतिनिधि शामिल हुए। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान कथा पंडाल के पश्चात रुद्राक्ष धाम प्रांगण पहुंच कर दक्षिणमुखी हनुमान जी मंदिर के दर्शन किए और आरती की।
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श्री रुद्राक्षधाम मंदिर: केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने श्री हनुमान जी की पूजन-अर्चना
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सरस् श्रीराम कथा गायन के लिए लोक ख्याति प्राप्त प्रेममूर्ति प्रेमभूषण जी महाराज ने प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री एवं विधायक भूपेन्द्र सिंह के पावन संकल्प से आयोजित रामकथा के क्रम में किष्किंधा कांड, सुंदरकांड, लंका कांड और श्री राम राज्याभिषेक तक की कथा का गायन करते हुए कहा कि सनातन समाज में अखंड रामायण की परंपरा रही है। इस परंपरा का ही पालन किया जाना सबके हित में है। गृहस्थी में रहने वाले लोगों को भी क्रम से ही मानस जी का पाठ करना चाहिए। क्रम से पढ़ने और सुनने से ही कुछ प्राप्त हो पाता है।महाराज जी ने कहा कि कथा तो भगवान की ही सुनने लायक है। हर जीव के पास उसकी कथा से ज्यादा उसकी व्यथा है। भगवान की कथा जीव की व्यथा का हरण कर लेती है। प्रभु की कथा हम जितनी बार सुनते हैं नित्य नई लगती है और मन को शांति प्रदान करती है। महाराज जी ने कहा कि मनुष्य का मूल कार्य है सत्कर्म में लगे रहना, लेकिन अधिकांश लोग तो मूल को ही भूल कर बैठ जाते हैं। मनुष्य को संसार की चर्चा और चिंता करने से पहले स्वयं के बारे में विचार करने की आवश्यकता है। हमें अपने स्वयं के लिए भगवान के आश्रय में ले जाने की आवश्यकता होती है किसी और के लिए नहीं। भक्ति पथ पर बने रहने के लिए ही निरंतर भगवान की कथा का श्रवण करना आवश्यक है। केवल जगदीश में रमने से ही कल्याण होगा।
पूज्य श्री ने कहा कि अपने घर में अगर हम भाव के साथ भगवान की सेवा करें तो भगवान खाते भी हैं, नहाते भी हैं, सोते भी हैं और मनुष्य जो भी उत्तम व्यवहार करता है, वह सब करते हैं। समस्या यह है कि सामान्य मनुष्य ने भगवान की जीव भाव रख कर उनकी सेवा कभी की ही नहीं। हमारे घर में जो भगवान हैं या हमारे साथ जो भगवान चलते हैं। सुबह स्नान करते हैं, जलपान करते हैं और वह भोग भी लगाते हैं और वही प्रसाद हम पाते हैं। आम आदमी जो कुछ भी सात्विक भोजन करता है, हमारे भगवान वही पाते हैं। पूज्यश्री ने कहा कि आश्चर्य तो तब होता है जब भगवान को लोग एक छोटी सी कटोरी में मिश्री के चार दाने भोग लगा देते हैं और खुद तरह-तरह के पकवान खाते रहते हैं।
महाराज श्री ने बताया कि हमारे सनातन सदग्रंथों में यह स्पष्ट बताया गया है कि हर वस्तु की अंतिम इच्छा अपने उद्गम में ही समाहित होने की होती है। जिस प्रकार धरती पर कहीं भी जल हो उसकी इच्छा नदियों के माध्यम से जाकर समुद्र में ही समाहित होना होता है। इसी प्रकार ईश्वर का अंश, हर जीव पुनः ईश्वर में ही समाहित होने के लिए ही प्रयासरत होता है। यही उसका अंतिम लक्ष्य होता है। यह अलग बात है कि अपने लक्ष्य के बारे में जानने वाले लोग बहुत कम होते हैं। लक्ष्य को जानने और पाने में कई जन्म बीत जाते हैं। पूज्य महाराज श्री ने बताया कि सबसे बड़ी समस्या यह है कि व्यक्ति अपने शरीर को ही स्वयं की उपस्थिति मान लेता है। जबकि वास्तविकता यह है कि शरीर तो एक माध्यम है, उस आत्मा का जो परमात्मा से यह कह कर धरती पर आता है कि हम आप का ही गुणगान करते हुए आपके चरणों तक पहुंचने का प्रयास करेंगे। पूज्य महाराज श्री ने कहा कि भगवान को पहले मानें फिर उन्हें जान लेंगे। अगर सामान्य मनुष्य को भगवान तक पहुंचने की यात्रा करनी है तो सबसे पहले उन्हें सदगुरु के आश्रय में जाने की आवश्यकता है। भगवान की अति कृपा के बिना धाम में किसी मनुष्य का पहुंचना भी संभव नहीं हो पाता है। गृहस्थ जीवन में रहने वाले लोगों को अपने सारे कार्य करते हुए साल में एक दो बार किसी न किसी धाम में पहुंचने का प्रयास अवश्य करना चाहिए।
पूज्य श्री ने कहा कि अपने जीवन मे मनुष्य अपनी संपत्ति का उत्तराधिकारी तो तय कर देता है, लेकिन उसने जो परमार्थ कार्य किया है, उसे भी आगे बढ़ाने की कोई व्यवस्था नहीं सोचता है। महाराज जी ने कई सुमधुर भजनों से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। हजारों की संख्या में उपस्थित रामकथा के प्रेमी भजनों का आनन्द लेते और झूमते रहे।
धर्म का महायज्ञ मानव को सेवा और प्रेम का मार्ग दिखाता है : शिवराज सिंह चौहान
धर्म का वास्तविक स्वरूप सेवा और प्रेम में निहित है। केन्द्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि धर्म का महायज्ञ मानव को स्वार्थ से ऊपर उठकर सेवा, भक्ति और प्रेम का मार्ग दिखाता है। परमपूज्य पं. प्रेमभूषण जी महाराज के सान्निध्य में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मानव जीवन का परम लक्ष्य परमात्मा की प्राप्ति और समाज के कल्याण के लिए कर्मरत रहना है।यह उद्गार केंद्रीय कृषि कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने रुद्राक्ष धाम मंदिर प्रांगण में आयोजित श्रीराम कथा मंच से अपने संबोधन में व्यक्त किए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केन्द्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि व्यासपीठ पर विराजमान परमपूज्य पं. प्रेमभूषण जी महाराज का जीवन प्रेम, ज्ञान और भक्ति का अनुपम उदाहरण है। आत्मा के मोक्ष और जगत के कल्याण के लिए की जाने वाली उनकी कथाएं समाज को सही दिशा देती हैं। उन्होंने कहा कि दक्षिणमुखी हनुमान जी के भव्य मंदिर का निर्माण कराने वाले आदरणीय भूपेन्द्र सिंह वास्तव में सौभाग्यशाली हैं। ऐसे कार्य केवल ईश्वर की विशेष कृपा से ही संभव होते हैं। उन्होंने सभी संतगणों एवं उपस्थित अतिथियों को सादर प्रणाम किया।
श्री चौहान ने कहा कि अभी उन्हें नेता कहकर संबोधित किया गया, लेकिन सच्चा आनंद नेता बनने में नहीं बल्कि सेवक बनकर कार्य करने में है। मानव जीवन का अंतिम लक्ष्य परमात्मा की प्राप्ति और आनंद की अनुभूति है। शास्त्रों में भगवान को प्राप्त करने के तीन मार्ग बताए गए हैंकृज्ञान, भक्ति और कर्म।
उन्होंने कहा कि ज्ञान मार्ग में यह बताया गया है कि सत्य केवल ब्रह्म है और शेष सब मिथ्या है, जैसा कि प्रेमभूषण जी महाराज अपने उपदेशों से समझा रहे हैं। भक्ति मार्ग पर चलने वाला भक्त भगवान की भक्ति में पूर्णतः रम जाता हैकृकोई उन्हें स्वामी मानता है तो कोई पिता। कर्म मार्ग में भगवान द्वारा निर्धारित कर्तव्यों को ईमानदारी और परिश्रम से निभाने की प्रेरणा दी गई है। भगवान श्रीकृष्ण ने भी कहा है कि कर्म किए बिना कोई रह नहीं सकता। अपने संबोधन में श्री चौहान ने रामायण की एक प्रेरक कथा का उल्लेख करते हुए कहा कि माता सीता द्वारा हनुमान जी को दी गई मोतियों की माला को हनुमान जी ने इसलिए तोड़ दिया क्योंकि उसमें उन्हें अपने प्रभु श्रीराम और माता सीता दिखाई नहीं दिए। उन्होंने अपने सीने को चीरकर राम-सीता को प्रकट कर यह सिद्ध किया कि उनके लिए वही वस्तु मूल्यवान है जिसमें प्रभु का वास हो। उन्होंने कहा कि सृष्टि के कण-कण में सीता-राम विराजमान हैं, इसलिए सभी को अपने समान मानना चाहिए। प्रेम ही भगवान की सबसे बड़ी पूजा है और सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं। जितनी सेवा संभव हो, उतनी सेवा करनी चाहिए, क्योंकि वास्तव में दूसरा कोई है ही नहीं। श्री चौहान ने कहा कि जब तक जीवन है, तब तक दूसरों के सुख और आनंद के लिए कार्य करना ही सच्ची साधना है, और वे स्वयं भी निरंतर इसी प्रयास में लगे हुए हैं।
पूर्व गृहमंत्री भूपेन्द्र सिंह ने किया आभार ज्ञापित
आभार ज्ञापन करते हुए पूर्व गृहमंत्री, खुरई विधायक भूपेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले सात दिनों में भगवान श्री राधाकृष्ण जी व दक्षिण मुखी हनुमान जी के दर्शन और श्री राम कथा का आप सभी ने धर्म लाभ लिया। रुद्राक्ष धाम भगवान की जागृत भूमि है। यहां हमारे गुरु देव प्रभाकर शास्त्री दद्दा के सानिंध्य में 2014 में सात दिवस में 39 करोड़ पार्थिव शिवलिंग का निर्माण हुआ था और उनका रुद्र अभिषेक हुआ था। ऐसा सौभाग्य प्राप्त करने वाली यह भारत की इकलौती भूमि है। 108 पुराण, श्री मद्भागवत कथा भी उन सात दिनों में हुई, इसीलिए इसका नाम रुद्राक्ष धाम रखा गया, यहां के कण कण में शिव हैं। भगवान श्री राम ने लंका विजय प्राप्त करने से पूर्व रामेश्वरम में बालू के शिवलिंग बना कर अभिषेक किया और लंका पर विजय प्राप्त कर ली थी। पूज्य गुरु दद्दा जी ने 4 जुलाई,2016 को राधाकृष्ण जी की प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा की, प्रतिमा का चयन भी उन्हीं ने किया था। पूर्व गृहमंत्री भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि रुद्राक्ष धाम मंदिर में कभी भी किसी भी निर्माण, व्यवस्था, कथा आदि के लिए कभी एक रुपए का चंदा, आर्थिक सहयोग नहीं लिया गया। जो भी हुआ वह भगवान की कृपा थी मुझे निमित्त मात्र बनाया है भगवान ने। उन्होंने कहा कि जब तक भारत में श्री राम कथा है तब तक भारत का कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। यह कथा भारत की संस्कृति और अस्तित्व की संरक्षक है।
ये रहे शामिल
मुख्य यजमान पूर्व गृहमंत्री खुरई विधायक भूपेंद्र सिंह के परिवार के साथ व्यास पीठ पर विराजमान भगवान और रामायण जी कीपूजा करने वाले अतिथियों में केंद्रीय कृषि कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान, पूर्व मंत्री विधायक पं गोपाल भार्गव, म.प्र. पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष रामकृष्ण कुसमरिया, बिजावर विधायक राजेश शुक्ला,विधायक खिलचीपुर, तेंदुखेड़ा विधायक संजय शर्मा, जबलपुर विधायक अभिलाश पांडे, हजारीलाल रघुवंशी, चित्रकूट विधायक सुरेंद्र सिंह गहरवार, बंडा विधायक वीरेंद्र सिंह लोधी,महापौर श्रीमती संगीता तिवारी, पूर्व सांसद राजबहादुर सिंह, पूर्व विधायक बाबूलाल मेवरा, पूर्व विधायक बीना महेश राय, पूर्व विधायक श्रीमती पारुल साहू केसरवानी, पूर्व मंत्री सुरेंद्र चौधरी, पूर्व विधायक श्रीमती सोनाबाई अहिरवार, भाजपा जिलाध्यक्ष श्याम तिवारी, डा सुशील तिवारी, अविराज सिंह, श्रीमती संध्या भार्गव, पाठ्य-पुस्तक निगम पूर्व अध्यक्ष माधवसिंह दांगी दतिया, श्रीमती रेखा चौधरी प्रदेश महासचिव कांग्रेस, शिरोमण सिंह कोषाध्यक्ष राष्ट्रीय क्षत्रिय समाज, तोरण सिंह प्रदेश अध्यक्ष दांगी क्षत्रिय समाजपूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष विदिशा, गोविंद सिंह, कृपाल सिंह दांगी अध्यक्ष बर्रीटौरिया कुरवाई, भारत सिंह, दीपक सिंह अध्यक्ष युवा दांगी क्षत्रिय समाज, दीप सिंह दांगी, अरविंद सिंह अध्यक्ष दांगी क्षत्रिय समाज जिला अशोक नगर, प्रमेंद्र गोलू रिछारिया, अजीतसिंह जिला पंचायत सदस्य, , पूर्व मंत्री सुरेंद्र चौधरी, संजय बापट बीना, राजेंद्र सिंह दरी, राजेंद्र सिंह सेंगर,आरपी राय, एसडीएम मनोज चौरसिया, गजेंद्र सिंह राजपूत, प्रवीण शर्मा, बंटी श्रीवास्तव, पत्रकार ब्रह्मदत्त दुबे, अभिषेक यादव,लक्ष्मण सिंह, मनीष मिश्रा ,नरेन्द्र सिंह ठाकुर पप्पू, अशोक जैन, राजेंद्र भट्ट,एड.श्वेता यादव, अनुराग प्यासी, डा लक्ष्मी ठाकर, सुशील पांडे ढाना,श्री शिवराज सिंह, लखन सिंह, सतेंद्र सिंह, अशोक सिंह, उत्तम सिंह, राजकुमार सिंह, नरेन्द्र सिंह, रुद्रप्रताप सिंह, पृथ्वी सिंह, प्रभात सिंह, राजकिशोर श्रीवास्तव, वीरेंद्र सिंह रघुवंशी मंडी बामोरा, साहब राज यादव मंडीबामोरा, नीलेश सराफ, दयाराम चौरसिया, बलराम सिंह बरोलिया, राजेश सैनी, शरद अग्रवाल, डा मदन केशरवानी, लल्लू बिलानी, कृपाशंकर चौबे, विधायक प्रतिनिधि राजेंद्र बघेल, राघवेंद्र यादव, इंद्रपाल लोधी, रविंद्र यादव, बंटी पिठौरिया, पार्षद रामू ठेकेदार, सोमेश जड़िया,अरविंद ददरया, उमेश यादव, शुभम घोसी, प्रतीक चौकसे, रूबीपटेल, रानी अहिरवार, सूरज घोसी, राजकुमार पटेल, देवेंद्र अहिरवार, यशवंत करोसिया, अंकित विश्वकर्मा, गोलू प्रताप राय, प्रवीण जैन गढ़ौला, रणधीर सिंह गब्बर, राजेश पाराशर, महेश ठाकुर पार्षद, राजा सेन, सौरभ नेमा, देवेंद्र सिंह ठाकुर, श्रीपाल सिंह ठाकुर, रविंद्र सिंह, महेंद्र यादव, खुरई से पार्षद बलराम यादव, राजेंद्र यादव कल्लू, अजीत सिंह अजमानी, विष्णु पाराशर, अमित दुबे, हिमांशु बजाज, करतार यादव, नितिन पटैरिया, कोमल यादव, वैभव सिंह, हर्षवर्धन सिंह, शुभांशु सिंह, राजवर्धन सिंह, सत्यम सिंह, अनुराग सिंह, अंकित सिंह, अभिनव सिंह, देवांश सिंह, केशव सिंह, गौरांग सिंह, दीपांशु सिंह, असमित सिंह, आर्यवर्धन सिंह, अधिराज सिंह, विनायक सिंह, कार्तिक सिंह, अक्षप सिंह, देवेन्द्र सिंह जी पठारी, जितेन्द्र सिंह कदंवा, अरविन्द साहू बंडा, हनुमत सिंह झागरी, शैलू जैन पार्षद, शिवम बाला गोस्वामी, सुरेन्द्र सिंह लोधी बांदरी, महेश परासर, दयाराम चौरसिया, धर्मेंद्र बबलू मेनगांव, विजय सिंह राजपूत चंद्रपुर बांदरी, अरविंद सिंह ठाकुर बम्होरी हुड्डा, देवीदयाल कुशवाहा सादपुर, श्रीमती मीना बाई अध्यक्ष नगर बरोदियाकलां, आकाश सिंह परिहार, अखिलेश गौर, रामशास्त्री खुरई, पं. संतोष कुमार दुबे प्रदेश अध्यक्ष अखिल भारतवर्षीय ब्राहम्ण सभा म.प्र., कुमार आनंद अग्रवाल, कमलेश राय पूर्व न.प.अध्यक्ष सहित अनेक गणमान्य जन शामिल हुए।













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