चीतों की पुनर्वसाहट का नया बसेरा बनेगा बुंदेलखंड : सीएम डॉ. यादव ने वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में सॉफ्ट रिलीज बोमा का किया भूमिपूजन
▪️बामनेर नदी में विमुक्त किए 14 कछुए
तीनबत्ती न्यूज: 25 मार्च 2026
सागर: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने जन्मदिवस के पावन अवसर पर प्रदेश के वन्यजीव प्रेमियों और बुंदेलखंड वासियों को एक ऐतिहासिक उपहार दिया है। मुख्यमंत्री ने वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में चीतों के पुनर्वास की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सॉफ्ट रिलीज बोमा का विधि-विधान से भूमि पूजन किया। कूनो नेशनल पार्क में चीता प्रोजेक्ट की सफलता के बाद अब वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व को चीतों के घर के रूप में विकसित किया जा रहा है। सॉफ्ट रिलीज बोमा तकनीक के तहत चीतों को नए परिवेश में ढालने के लिए एक बड़े क्षेत्र में विशेष बाड़े (बोमा) तैयार किए जाते हैं, जहाँ उन्हें शुरुआती निगरानी में रखा जाता है।
मुख्यमंत्री ने कहा है कि यह परियोजना न केवल वन्यजीव संरक्षण को मजबूती देगी, बल्कि बुंदेलखंड में इको-टूरिज्म और रोजगार के नए द्वार भी खोलेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व का घनत्व और यहाँ के घास के मैदान चीतों के लिए बेहद अनुकूल हैं।मुख्यमंत्री ने कहा कि कूनो के बाद अब वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व चीतों की अठखेलियों का नया केंद्र बनेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश सरकार केवल थलचर ही नहीं, बल्कि नभचर और जलचर जीवों के संरक्षण की दिशा में भी मिशन मोड पर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा, कि जंगल की असली खूबसूरती वहाँ के जानवरों से ही होती है। यह कदम न केवल बुंदेलखंड के प्राकृतिक संतुलन और पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा बल्कि यहां रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा।
बामनेर नदी में विमुक्त किए 14 कछुए
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज अपने 61वें जन्मदिवस के अवसर पर सागर जिले की रहली तहसील स्थित वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक नई पहल की। मुख्यमंत्री ने टाइगर रिजर्व से गुजरने वाली बामनेर नदी में कुल 14 कछुओं को उनके प्राकृतिक आवास में विमुक्त (रिलीज) किया। इस दौरान उन्होंने पारिस्थितिकी तंत्र में कछुओं की महत्ता पर जोर देते हुए जल संरचनाओं के संरक्षण का आह्वान किया।
वन विभाग के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में जिन 14 कछुओं को नदी में छोड़ा गया, वे दो विशिष्ट प्रजातियों के हैं, पहली टेरा प्रिंस प्रजाति के 06 कछुए और सुंदरी प्रजाति के 08 कछुए। विशेषज्ञों के अनुसार, ये प्रजातियाँ नदी की स्वच्छता बनाए रखने और जलीय जैव-विविधता के संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर कहा, प्रकृति और वन्यजीवों की सेवा ही ईश्वर की सच्ची सेवा है। कछुओं का विमुक्तिकरण और चीता पुनर्वास की दिशा में बढ़ते कदम मध्य प्रदेश को वन्यजीव पर्यटन और संरक्षण के वैश्विक मानचित्र पर और अधिक मजबूती प्रदान करेंगे।
बदलेगी बुंदेलखंड की तस्वीर
वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व का विस्तार 2,339 वर्ग किमी में है। यह एमपी का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है, जो सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिलों तक फैला है। इसे लैंड ऑफ वुल्व्स (भेड़ियों की धरती) भी कहा जाता है और वर्तमान में यहाँ करीब 32 बाघ निवास कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि टाइगर रिजर्व में चीतों के अनुकूल भूमि उपलब्ध है। इस प्रकार की भूमि दक्षिण अफ्रीका में पायी जाती है। शीघ्र ही कूनो अभयारण्य से चीतों को लाकर यहाँ बसाया जायेगा। अभयारण्य में चिड़ियों की 240 प्रजातियाँ पायी जाती हैं, जो आकर्षण का केन्द्र बनी हुई हैं। टाइगर रिजर्व में विभिन्न प्रजाति के पशु-पक्षी हैं, जिसमें टाइगर, पैंथर, भेड़िया, भालू, सियार, लकड़बग्घा, लोमड़ी, सुअर, नीलगाय, जंगली सुअर, चौसिंगा, काला हिरण, चिंकारा, कछुआ और मगरमच्छ आदि शामिल हैं। इसके विकास के साथ वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में पर्यटन के साथ रोजगार की अपार संभावनाएँ हैं।
मुख्यमंत्री ने जंगल सफारी का लिया आनंद
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में करीब 10 किलोमीटर लंबी सफारी का आनंद लिया। इस दौरान उन्होंने बामनेर नदी में कछुओं को प्राकृतिक आवास में मुक्त किया और वन्य जीव संरक्षण तथा जैव विविधता के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रतिबद्धता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में पर्यटन के विस्तार की अपार संभावनाएं हैं। डॉ. यादव ने बताया कि कूनो नेशनल पार्क और गांधी सागर अभयारण्य के बाद, वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व जल्द ही चीतों का तीसरा घर बनेगा। यहाँ का भू-दृश्य दक्षिण अफ्रीका के घास के मैदानों के समान है, जो चीतों के लिए अनुकूल है।
मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कृषक श्री हरदास के खेत पर खाट पर बैठकर किया भोजन
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, कृषक हरदास रैकवार के खेत पर पहुंचे। जहां कृषक परिवार ने कलश रखकर, चंदन रोरी का तिलक लगाते हुए पारंपरिक तरीके से मुख्यमंत्री का स्वागत किया। तत्पश्चात मुख्यमंत्री डॉ यादव ने ग्रामीण परिवेश में आम के वृक्ष की छांव में खाट पर बैठकर भोजन ग्रहण किया। भोजन के पूर्व उन्होंने गौ माता को चारा भी खिलाया। साथ में यूवी मंत्री गोपाल भार्गव ने खाना खाया।
मुख्यमंत्री ने बुन्देली भोजन की तारीफ की और कढ़ी, बिर्रा की रोटी, समां के चावल की खीर, खीचला-पापड़ आदि व्यंजनों का स्वाद चखा। इस अवसर पर उन्होंने किसान से शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से मिल रहे लाभ की जानकारी भी ली।किसान श्री हरदास ने बताया कि परिवार में उनकी माता, पत्नी अनीता रैकवार, चार बच्चे हैं, जिनमें दो-दो जुड़वा बच्चे शामिल हैं। परिवार के पास लगभग 1.5 एकड़ कृषि भूमि है। उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, बीपीएल कार्ड, आयुष्मान कार्ड, लाड़ली बहना योजना तथा प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ मिल रहा है। साथ ही उनकी माता श्रीमती शीलरानी को विधवा पेंशन प्राप्त हो रही है।बच्चियों को काजू कतली खिलाकर मनाया जन्मदिन, प्रदान किए ड्राइविंग लायसेंस
ये रहे मौजूद
भूमिपूजन के अवसर पर वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार, पूर्व मंत्री एवं रहली विधायक गोपाल भार्गव, देवरी विधायक बृज बिहारी पटेरिया, नरयावली विधायक प्रदीप लारिया, जिला पंचायत उपाध्यक्ष देवेंद्र सिंह, जिलाध्यक्ष श्याम तिवारी, श्रीमती रानी कुशवाहा, प्रधान सचिव, वन विभाग, मध्यप्रदेश संदीप यादव, वन बल प्रमुख शुभरंजन सिंह सेन, संभागायुक्त अनिल सुचारी, पुलिस महानिरीक्षक श्रीमती हिमानी खन्ना, पुलिस उपमहानिरीक्षक सचिंद्रनाथ चौहान, कलेक्टर संदीप जी आर, पुलिस अधीक्षक विकास शाहवाल, मुख्य वन संरक्षक दीपू दमन सिंह भदौरिया, डीएफओ रजनीश सिंह एवं वरुण यादव सहित जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी भी मौजूद रहे।














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