शुक्रवार, 6 दिसंबर 2019

रेपिस्टों के इनकाउंटर से महिलाओं को सुकून मिला:डॉ वंदना गुप्ता

रेपिस्टों के इनकाउंटर से महिलाओं को सुकून मिला:डॉ वंदना गुप्ता
सागर । महिला हितों की लड़ाई लड़ने वाली  स्नाज सेवी डॉक्टर वंदना गुप्ता  ने महिला अपराधों और दुष्कर्मो के मामलों पर कहा है कि  रेपिस्ट को अपराध सिद्ध हो जाने के बाद भी लगातार सजा से बचाने वाली मानसिकता,न्याय में लगातार देरी,रेपिस्ट की मनोदशा को बिना समझे कुछ समय की सजा के बाद बेल पर छोड़ देना व ऐसे रेपिस्ट का समाज में पुनः घटनाओं को अंजाम देना राष्ट्र के सभी कानून व न्यायविदों को मालूम है व सभी के परिवार हैं ।फिर भी न्यायिक दंड प्रक्रिया क्यों आधी आबादी के इस दर्द को महसूस नहीं करती।मोहिंदर सिंह जो छोटी बच्चियों के साथ बलात्कार कर उनको मार कर उनके अंग उपांग खाता था उसको  कानून ने क्या सजा दी?
 इन सभी झकझोरने वाली घटनाओं में न्यायायिक प्रक्रिया की देरी ने रेपिस्ट मानसिकता को भयमुक्त किया और निरन्तर एक से बढ़कर एक जघन्य घटनाये बढ़ी। एनकाउन्टर की इस घटना से महिलाओं में आज यह संतोष इसलिए है कि किसी रेपिस्ट को उसकी सजा तो मिली चाहे जो भी परिस्थितियाँ रहीं हो।
उन्होंने कहा कि निर्भया के केस में अपराधियों को बचाने वाले भी निश्चित रूप से रेपिस्ट मानसिकता के होगे।समाज द्वारा ऐसे लोगों का सामाजिक बहिष्कार भी करना चाहिए । जेल में बंद रहने पर रेपिस्ट को कानूनी सुरक्षा अलग मिल जाती है ।
अब समय आ गया है दरिंदगी भरे अपराधों में 
शीघ्रातिशीघ्र नया कानून बने और पहले के दुष्कर्म के प्रकरणों में पीड़िताओ  को अतिशीघ्र न्याय मिले।तभी आधी आबादी न्याय के प्रति इस प्रकार के अपराधों में  कानून पर विश्वास कर पायेगी ।
क्या यह कभी सोचा गया कि ऐसी महिलाओं का पूरा जीवन समाज के बीच प्रतिदिन मरने के समान होता है उनकी मानसिक दशा क्या होती है?उनके परिवार का दर्द क्या होता है?
कानून बनाते समय ये बिन्दु जरूरी है 
1.बलात्कारी मानसिकता को पोषित करने वाली सोशल मीडिया साइट्स पर सरकार के द्वारा बंद किया जाए ।
2.स्वस्थ मनोरंजन से संबंधित फिल्मों व सीरियल को विशेष सहयोग सरकार दे।
3.फिल्मों में प्रस्तुत अश्लील दृश्यों को कहानी की मांग कहकर सेन्सर बोर्ड पल्ला न झाड़े।
4.हम सब ये कभी न भूलें कि यह समाज हमारा है ।बलात्कारी भी हमारे ही बीच से किसी न किसी परिवार का सदस्य है अतः अपने घर परिवारके सदस्यों की बिगड़ती आदतों पर भी हम सभी को ध्यान देना होगा ।
इसी लिए भारतीय संस्कृति में संस्कारो का महत्व है ।  अच्छा संस्कार हमारे विवेक को जागृत रखता है और गलत करने से हमे रोकता है।इसलिए संस्कार युक्त शिक्षा का महत्व है ।

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