दानवीर , सागर विवि के संस्थापक डॉ हरि सिंह गौर की जयंती,26 नवम्बर ।

सोमवार, 28 दिसंबर 2020

सागर: गौ शाला में संगीत की धुनें भी बजेंगी

सागर: गौ शाला में संगीत की धुनें भी बजेंगी

 

सागर।  त्रैता युग में श्रीकृष्ण की वंशी की तान पर जिस तरह गायें खुश और मस्त रहती थी, ठीक वैसा ही वातावरण दिये जाने का गौशालाओं में प्रयास किया गया। गौशालाओं को गौ मंदिर के रूप में न सिर्फ आस्था का केन्द्र बनाये जाने का प्रयास है बल्कि वहां आवासित गौ वंश को उत्तम परिवेश दिये जाने की दिशा में महिला स्व-सहायता समूह जुट गये है। पडरिया गौशाला में जनसहयोग से अब तक 50 भक्कू भूसा और 4 बडे छबला एकत्रित किये है। ग्राम पडरिया के आस-पास के परिवेश में गौशाला में उत्तम गौसेवा का माहौल बनना शुरू हो गया है। यहां आवासित 170 गौ वंश को अब संगीत सुनाये जाने की भी पहल की जा रही है। ग्राम नोडल राधे तिवारी ने बताया कि फिलहाल ये प्रयास ट्रायल पर है उच्च कोटी के साउंड सिस्टम क्रय के उपरांत इसे नियमित कर दिया जावेगा। यहां आवासित उत्तम स्वास्थ्य के पुशओं की डीवर्मिग शुरू कराते हुये उनको हीट पर आने की अवस्था में भारतीय शुद्व नस्ल जैसे गिर, साहीवाल अथवा थारपारकर नस्ल के बीज से कृत्तिम गर्भाधान कराये जाकर उत्तम पशु नस्ल तैयार की जानी है। 
डॉ. आर.पी यादव उपसंचालक पशु चिकित्सा का कहना है कि गौशालाओं में रह रही इन निराशित गायो से कृत्तिम गर्भाधान के माध्यम से न केवल नस्ल सुधार कार्यक्रम किया जा सकता है बल्कि प्राप्त होने वाले नये वंश से गौशालाओं को आत्म निर्भर भी बनाया जा सकता है। शाहगढ के दलपतपुर में 195, वरायठा में 175, रहली के छिरारी में 110, गौवंश का पालन शुरू हो गया है। सागर जिले में अब तक 16 गौशालायें जो स्व-सहायता समूह के द्वारा संचालित है उनमें निरासरित गौवंशों को पालन प्रारंभ कर दिया है।
डॉ. इच्छित गढपाले मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत ने बताया कि सड़को पर घूम रहे निरासरित गौवंशो को इन गौशालाओं में प्रवेशन दिया जा रहा है। इससे न केवल यातायात सुगम होगा बल्कि इन मवेशियों को सहारा देकर प्राप्त गौ मूत्र, गोबर और दूध से उत्तम उत्पादों का निर्माण कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी सुधार हो सकेगा।
श्री दीपक सिंह, कलेक्टर सागर के अनुसार गौ शालाओं के संचालन में महिला समूहों की अधिक से अधिक भूमिका को रखा गया है। महिलायें गोबर से अब पंरपरागत् कंडे निर्माण नही बल्कि गौकास्ट, दीपक, गमले, जैविक खाद, जैविक कीटनाशक निर्माण में प्रशिक्षित की जा रही है। इनके उपयोग से जिले की खेती को उत्तम और उपजाउ बनाये जाने का प्रयास है।

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