डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय और इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केंद्र के बीच ऐतिहासिक शैक्षणिक समझौता
कला, संस्कृति, पुरातत्व और पांडुलिपियों के संरक्षण व शोध को मिलेगा बढ़ावा; विद्यार्थियों को मिलेगी इंटर्नशिप की सुविधा
सागर, 09 जुलाई 2026: डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के लिए आज का दिन एक ऐतिहासिक उपलब्धि लेकर आया। विश्वविद्यालय और संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत कार्यरत प्रतिष्ठित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA), नई दिल्ली के बीच एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक समझौता पत्र (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस ऐतिहासिक समझौते का उद्देश्य दोनों प्रतिष्ठित संस्थानों के बीच शैक्षणिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को मजबूत करना है। इस अवसर पर दोनों ही संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने समझौता पत्रक पर हस्ताक्षर कर इस नए अध्याय की शुरुआत की।
कला और सांस्कृतिक धरोहरों का होगा संरक्षण
इस शैक्षणिक समझौते के तहत मुख्य रूप से कला, संस्कृति, पुरातत्व, लोक परंपराओं तथा दुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण, शोध और शैक्षणिक सहयोग को व्यापक स्तर पर बढ़ावा दिया जाएगा। योजना के अनुसार, आगामी दिनों में दोनों संस्थान मिलकर संयुक्त सेमिनार, कार्यशालाएं (Workshops) और प्रदर्शनियां (Exhibitions) आयोजित करेंगे। इसके साथ ही, सांस्कृतिक धरोहरों के डिजिटलीकरण (Digitization) पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा, जिससे हमारी अनमोल विरासत को आधुनिक तकनीक के माध्यम से सुरक्षित रखा जा सके।
विद्यार्थियों और शोधार्थियों को मिलेंगे नए अवसर
इस समझौते की एक सबसे महत्वपूर्ण कड़ी विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए इंटर्नशिप तथा उन्नत शोध सुविधाएं (Research Facilities) प्रदान करना है। इसके माध्यम से छात्रों को राष्ट्रीय स्तर के संस्थान में व्यावहारिक अनुभव और शोध करने का सुनहरा अवसर मिलेगा, जो उनके अकादमिक और व्यावसायिक करियर के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा।
गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ समझौता
इस ऐतिहासिक समझौते के अवसर पर डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वाई. एस. ठाकुर, इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी, विश्वविद्यालय के संकाय मामलों के निदेशक एवं विभागाध्यक्ष प्रो. अजीत जायसवाल सहित संस्कृति मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
"सांस्कृतिक विरासत को मिलेगी नई पहचान" — कुलपति
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वाई. एस. ठाकुर ने इस सहयोग पर अत्यंत प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा, "इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केंद्र जैसे शीर्ष राष्ट्रीय संस्थान के साथ यह जुड़ाव हमारे विद्यार्थियों को भारतीय कला और संस्कृति को बेहद करीब से समझने का एक अभूतपूर्व अवसर प्रदान करेगा। यह समझौता केवल शैक्षणिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में ही एक मील का पत्थर साबित नहीं होगा, बल्कि यह उपलब्धि मध्य प्रदेश के साथ-साथ पूरे देश की सांस्कृतिक विरासत को एक नई व विशिष्ट पहचान देगी।"






