सागर में प्रो. सुरेश आचार्य के संस्मरणात्मक उपन्यास 'शनीचरी मुहल्ला' का हुआ विमोचन, 80वें जन्मदिन पर हुआ सम्मान
तीनबत्ती न्यूज:02 अगस्त, 2026
सागर। श्री सरस्वती पुस्तकालय एवं वाचनालय ट्रस्ट, सागर द्वारा शहर के वरिष्ठ साहित्यकार एवं व्यंग्यकार प्रो. सुरेश आचार्य के संस्मरणात्मक उपन्यास 'शनीचरी मुहल्ला' के विमोचन एवं उनके 80वें जन्मदिन पर सम्मान समारोह का भव्य आयोजन किया गया। समारोह में साहित्य, शिक्षा और समाजसेवा से जुड़े अनेक गणमान्य नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व सांसद लक्ष्मीनारायण यादव थे, जबकि अध्यक्षता वरिष्ठ अधिवक्ता के.के. सिलाकारी ने की। विशिष्ट अतिथियों में वरिष्ठ पत्रकार पलाश सुरजन एवं प्रसिद्ध कहानीकार रेखा कस्तवार शामिल रहीं।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इसके बाद संस्था के सचिव पं. शुकदेव प्रसाद तिवारी ने स्वागत भाषण देते हुए प्रो. सुरेश आचार्य को उनके 80वें जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि साहित्य किसी भी समाज की आत्मा होता है। यह केवल शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि विचारों, संस्कारों, संवेदनाओं और जीवन-दर्शन का अमूल्य दस्तावेज है। व्यंग्य समाज का वह सशक्त माध्यम है जो मुस्कुराते हुए सामाजिक विसंगतियों पर प्रहार करता है और आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करता है।
अभिनंदन पत्र एवं सम्मान से किया गौरवान्वित
इस अवसर पर श्री सरस्वती पुस्तकालय एवं वाचनालय ट्रस्ट की ओर से प्रो. सुरेश आचार्य को अभिनंदन पत्र भेंट किया गया। अभिनंदन पत्र का वाचन श्रीमती कविता शुक्ला ने किया। संस्था के अध्यक्ष के.के. सिलाकारी, सचिव शुकदेव प्रसाद तिवारी, जी.एल. छत्रसाल, आर.एस. यादव, डॉ. लक्ष्मी पाण्डेय एवं जगदीश महेश्वरी ने शाल, श्रीफल एवं अभिनंदन पत्र देकर उनका सम्मान किया। इसके अतिरिक्त साहित्य सरस्वती मंच सहित शहर की अनेक साहित्यिक एवं सामाजिक संस्थाओं ने भी प्रो. आचार्य का सम्मान कर उनके दीर्घ साहित्यिक योगदान को नमन किया।
'शनीचरी मोहल्ला' मेरी ही नहीं, डॉ. हरीसिंह गौर की भी जन्मस्थली है : प्रो. आचार्य
अपने उद्बोधन में प्रो. सुरेश आचार्य ने उपन्यास की विषयवस्तु पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उन्होंने अपने बचपन की स्मृतियों और पुरानी यादों को संस्मरणात्मक उपन्यास के रूप में सहेजने का प्रयास किया है।उन्होंने कहा कि "शनीचरी मोहल्ला केवल इसलिए महत्वपूर्ण नहीं है कि वह मेरी जन्मस्थली है, बल्कि इसलिए भी विशेष है क्योंकि यह डॉ. हरीसिंह गौर की जन्मस्थली है। यही कारण है कि इस स्थान का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व और अधिक बढ़ जाता है।"
समाज को दिशा देती हैं प्रो. आचार्य की रचनाएं : लक्ष्मीनारायण यादव
मुख्य अतिथि एवं पूर्व सांसद लक्ष्मीनारायण यादव ने कहा कि प्रो. सुरेश आचार्य ने अपनी लेखनी के माध्यम से समाज की वास्तविकताओं, मानवीय संवेदनाओं और समकालीन चुनौतियों को सरल, प्रभावशाली एवं सारगर्भित शब्दों में अभिव्यक्त किया है। उनकी रचनाएं केवल मनोरंजन नहीं करतीं, बल्कि समाज के प्रति जागरूक और उत्तरदायी बनने की प्रेरणा भी देती हैं। उन्होंने कहा कि 'शनीचरी मोहल्ला' वास्तव में एक अद्भुत उपन्यास है, जिसमें शनीचरी क्षेत्र तथा डॉ. हरीसिंह गौर से जुड़े अनेक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहलुओं को बेहद प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है।
साहित्य में योगदान की सराहना
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता के.के. सिलाकारी ने प्रो. सुरेश आचार्य को बधाई देते हुए साहित्य के क्षेत्र में उनके दीर्घकालीन योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रो. आचार्य का साहित्य आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा।कार्यक्रम का सफल संचालन आशीष ज्योतिषी ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन डॉ. लक्ष्मी पाण्डेय ने व्यक्त किया।
ये रहे उपस्थित
समारोह में श्यामलम संस्था के अध्यक्ष उमाकांत मिश्रा, संतोष सोहगौरा , संतोष रोहित, लक्ष्मीनारायण चौरसिया, जी.एल. छत्रसाल, आर.एस. यादव, जगदीश महेश्वरी, पूरन सिंह, डॉ. सरोज गुप्ता, श्रीमती निरंजना अनिल जैन, डॉ. पदमा आचार्य, डॉ. शैलेश आचार्य, संजय आचार्य, शांतनु आचार्य, गजाधर सागर, ममता भूरिया, हरीसिंह ठाकुर , कविता शुक्ला, अंजना चतुर्वेदी,सहित प्रो. सुरेश आचार्य के परिजन, शहर के अनेक साहित्यकार, बुद्धिजीवी एवं गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
अमेजन पर उपलब्ध है 'शनीचरी मोहल्ला'
मुहल्ला शनीचरी' एक संस्मरणात्मक उपन्यास है, जिसे वरेण्य साहित्यकार सुरेश आचार्य ने लिखा है। इस उपन्यास में बुन्देली समाज, विशेष रूप से सागर शहर की विडंबनाओं और बदलते सामाजिक परिवेश का यथार्थपूर्ण चित्रण किया गया है। बालकपन के मित्रों से लेकर राजनीतिक, सामाजिक और मुहल्ले के अनाम लोगों को जीवंतता के साथ प्रस्तुत किया गया है। आम आदमी की पीड़ा, पारिवारिक संघर्ष, राजनीतिक विसंगतियाँ और नैतिक मूल्यों को सरल किन्तु प्रभावशाली भाषा में अभिव्यक्त किया गया है। सागर के अतीत और वर्तमान की यह अनूठी गाथा हिन्दी साहित्य प्रेमियों के लिए एक अमूल्य कृति है। सुरेश आचार्य हिन्दी साहित्य में पीएच.डी. एवं डी.लिट. की उपाधि से विभूषित हैं और अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित हैं। यह पुस्तक शतरंग प्रकाशन, लखनऊ द्वारा प्रकाशित की गई है।
प्रो. सुरेश आचार्य का संस्मरणात्मक उपन्यास 'शनीचरी मोहल्ला' ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म Amazon पर भी उपलब्ध है। साहित्य प्रेमी इस पुस्तक को ऑनलाइन खरीदकर सागर की साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े संस्मरणों को पढ़ सकते हैं।








