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वंदे मातरम गीत आज भी पहले की तरह प्रासंगिक और जरूरी:प्रोफेसर दिवाकर शुक्ला

वंदे मातरम गीत आज भी पहले की तरह प्रासंगिक और जरूरी:प्रोफेसर दिवाकर शुक्ला

तीनबत्ती न्यूज: 20 नवंबर ,2025

सागर । वंदे मातरम् गीत के भले ही 150 वर्ष पूरे हो गए हों लेकिन यह गीत आज भी राष्ट्रीय भावना से कन्याकुमारी से कश्मीर तक देश को झंकृत करता है । इस गीत की प्रासंगिकता राष्ट्रीय आंदोलन के समय जितनी थी ,आज भी उतनी ही जरूरत और प्रासंगिकता है इस गीत की है ताकि हम इसे देशभक्ति की भावना के साथ जोड़कर देश का विकास कर सकें। इस आशा के विचार डॉ हरि सिंह गौर विश्वविद्यालय के नॉमिनी कुलपति प्रोफेसर दिवाकर शुक्ला ने पत्र सूचना कार्यालय सूचना प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा आयोजित एकदिवसीय वार्तालाप कार्यक्रम में व्यक्त किये।


अपने उद्बोधन में प्रोफेसर शुक्ला ने कहा कि बंगाल और संस्कृत में लिखे गए इस गीत में कुछ तो ऐसा जादू था कि जिसने पूरे देश को सांस्कृतिक ,सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर देश को एक कर दिया । उसे  उस समय लाखों की संख्या में युवा ,किसान, ग्रामीण ,शहरी ,अमीर और गरीब सभी वर्ग के लोग इस गीत  के माध्यम से अपनी राष्ट्रभक्ति प्रदर्शित कर रहे थे । इसको लेकर बड़े-बड़े आंदोलन भी हुए जो इतिहास में प्रसिद्ध और दर्ज हैं।


वार्तालाप कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के संयुक्त रजिस्टर प्रोफेसर संतोष साहगौरा ने कहा कि यह वंदे मातरम गीत का राष्ट्रीय आकर्षण ही था कि आजादी मिलने के बाद भी  हमारे देश में आज भी इसी गीत की गूंज सुनाई देती है। अनेक लोग आज भी आपसी उद्बोधन में वंदे मातरम और जय हिंद ही कहते हैं ।उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को इस गीत की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के बारे में जरूर जानना चाहिए ताकि इस बहाने राष्ट्रीय आंदोलन की बातों को और भावों को समझ सकें।

कार्यक्रम के पूर्व अपने स्वागत उद्बोधन और कार्यक्रम की रूपरेखा में पत्र सूचना कार्यालय भोपाल के निदेशक श्री मनीष गौतम ने बताया कि प्रधानमंत्री के आह्वान पर पूरे देश में इस तरह के कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं । इसी कड़ी में सागर में यह कार्यक्रम का आयोजन किया गया। उन्होंने बताया कि केंद्रीय संचार ब्यूरो ,सूचना और प्रसारण मंत्रालय,बात सरकार द्वारा प्रधानमंत्री के आह्वान  पर   मध्य प्रदेश के 12 कार्यालयों द्वारा भी इस प्रकार के जन जागरूकता के कार्यक्रम आयोजित किया जा रहे हैं। कार्यक्रम में माय भारत युवा केंद्र के उपनिदेशक श्री रोहित यादव ने भी अपने विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम में वंदे मातरम गीत के ऐतिहासिक प्रसंग और भारत सरकार द्वारा किए गए प्रमुख कार्यक्रम से संबंधित वीडियो भी दिखाए गए।



कार्यक्रम में कुछ पत्रकारों ने भी वंदे मातरम गीत के विषय में अपने विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम का संचालन पत्र सूचना कार्यालय भोपाल के सहायक निदेशक श्री अजय प्रकाश उपाध्याय ने किया ।कार्यक्रम का आभार केंद्रीय संचार ब्यूरो सागर के क्षेत्रीय प्रभारी श्री दिनेश गौर ने किया। कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ और स्मृति चिन्ह के माध्यम से किया गया।

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सत्संग से ही मिलता है भगवान का साक्षात्कार : श्री इंद्रेश उपाध्याय जी ▪️श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन भक्ति, त्याग और धर्म के सार की हुई व्याख्या

सत्संग से ही मिलता है भगवान का साक्षात्कार : श्री इंद्रेश उपाध्याय जी 

▪️श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन भक्ति, त्याग और धर्म के सार की हुई व्याख्या


तीनबत्ती न्यूज: 20 नवंबर, 2025

सागर। सिद्ध क्षेत्र बालाजी मंदिर प्रांगण, धर्म श्री अंबेडकर वार्ड में अंतरराष्ट्रीय कथा व्यास परम पूज्य इंद्रेश उपाध्याय जी के मुखारविंद से चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन आरती में मुख्य यजमान के रूप में श्रीमती अनुश्री जैन एवं विधायक शैलेंद्र कुमार जैन सम्मिलित हुए। इस अवसर पर पूर्व मंत्री जयंत मलैया, एडीजी अन्वेष मंगलम और सुनीलजी देव भी उपस्थित रहे।

कथा वाचन के दौरान पूज्य महाराज श्री ने कहा कि जीवन में सत्संग का बहुत महत्व है। गौ, ब्राह्मण और अग्नि — इन तीनों का एक ही गोत्र होता है, इसलिए इन्हें जो भी अर्पित किया जाता है वह सीधे ठाकुर जी को प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि भगवत मिलन में जो बाधा बने, चाहे वह परिवार या कोई भी संबंध हो, उसका त्याग कर देना चाहिए क्योंकि वही संबंध सार्थक हैं जो हमें हरि से मिला दें।

विधायक वही जो हरि से मिला दे

महाराजजी ने कहा  “विधायक वही सही, जो आपको हरि से मिला दे।”उन्होंने यह भी बताया कि सनातन एकता कथा के समय बागेश्वर धाम के प्रमुख पं. धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने सागर के प्रति अपनी आत्मीयता व्यक्त करते हुए छह माह के भीतर ही पुनः कथा का अवसर प्राप्त होना सौभाग्य की बात कही है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि और भक्तों का ऐसा समर्पण यदि सभी स्थानों पर हो जाए तो संपूर्ण वातावरण राधाकृष्णमय हो जाए।


उन्होंने ओरछा के राजा मधुकरशाह और उनकी रामभक्त धर्मपत्नी की अनूठी भक्ति का वर्णन करते हुए बताया कि उनके त्याग और श्रद्धा से ही श्रीराजाराम का अवतरण हुआ। धर्म वही है जो सबके कल्याण का मार्ग प्रशस्त करे।

यह भी पढ़ेंविधायक जी और धर्मपत्नी का ठाकुरजी, मुझे और मेरे परिवार से ऐसा लगाव हो गया है कि अब मुझे भी ये अपने परिवार के सदस्य लगने लगे : पूज्य इंद्रेश जी महाराज ▪️ श्रीमद्भागवत कथा का भव्य शुभारंभ : विधायक शैलेंद्र जैन सपत्नीक भागवतजी सिर पर रखकर कथा स्थल पर पहुंचे


इंद्रेश जी महाराज ने कहा कि भागवत मात्र हिंदुओं के लिए नहीं, बल्कि मुस्लिम, ईसाई, सिख — सभी के कल्याण का ग्रंथ है। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि व्यक्ति का स्वभाव, विचार और आचरण शुद्ध हो, तो उसका धर्म और मजहब नहीं पूछा जाता।

उन्होंने कहा कि सत्य ऐसा बोलना चाहिए जो सबको प्रिय लगे। भूख लगे तो भोजन, नींद आए तो सोना, जीविकापार्जन — यह सब धर्म है लेकिन शरीर की चिंता छोड़कर आत्मा के कल्याण का चिंतन परम धर्म है। प्रसाद महिमा का वर्णन करते हुए उन्होंने एक राजा की कथा सुनाई और कहा कि कथा में देह नहीं लाती, आपकी आत्मा आपको यहाँ लाती है।

उन्होंने जबलपुर के भोलानाथ जी की कथा संदर्भित करते हुए कहा कि ठाकुर जी उसी के अधिकारी हैं जिसके हृदय में ईर्ष्या नहीं होती। उन्होंने सभी से प्रतिदिन कुछ नया पढ़ने, सीखने और भक्तों के चरित्रों का अध्ययन करने का आग्रह किया जिससे दुखों में कमी आती है और संसार को समझने की दृष्टि मिलती है।




ये हुए शामिल

कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा, पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव, पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा, राज्य मंत्री दिलीप जायसवाल, भाजपा जिलाध्यक्ष श्याम तिवारी, पूर्व सांसद राजबहादुर सिंह, नगर निगम अध्यक्ष वृंदावन अहिरवार, पूर्व निगम अध्यक्ष प्रदीप पाठक, नगर निगम आयुक्त राजकुमार खत्री, संतोष पांडे, गौरी यादव, दिलीप मलैया, अनिल तिवारी, मनोज जैन, मनीष चौबे, विक्रम सोनी, अमित बैसाखिया, नीरज यादव, प्रासुख जैन, अविनाश जैन, श्रीकांत जैन, मेघा दुबे, प्रीति शर्मा, ऋतु राजपूत, राहुल वैद्य, नितिन बंटी शर्मा, पराग बजाज, रीतेश तिवारी, मनोज रैकवार, निखिल अहिरवार सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुगण मौजूद रहे।

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पुण्र्याजक परिवार को सेठ और श्रावक शिरोमणि की उपाधि से विभूषित किया : मंत्रीगण, पूर्वमंत्री आदि हुए शामिल ▪️सिरोंजा शांतिधाम पंचकल्याणक जिनबिंब प्रतिष्ठा महोत्सव में मनाया गया ज्ञान कल्याणक

पुण्र्याजक परिवार को सेठ और श्रावक शिरोमणि की उपाधि से विभूषित किया : मंत्रीगण, पूर्वमंत्री आदि हुए शामिल

▪️सिरोंजा शांतिधाम पंचकल्याणक जिनबिंब प्रतिष्ठा महोत्सव में मनाया गया ज्ञान कल्याणक


तीनबत्ती न्यूज: 20 नवंबर, 2025

सागर । पट्टाचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज के ससंघ सानिध्य में सिरोंजा शांतिधाम स्थित शांतिनाथ जिनालय के पंचकल्याणक जिनबिंब प्रतिष्ठा महोत्सव में आज ज्ञान कल्याणक मनाया गया. कल महोत्सव के समापन  मोक्ष कल्याणक पर फेरी और विज्ञान रथ निकाला जायेगा.


सिरोंजा शांतिधाम में आयोजित महोत्सव में आज पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव, पूर्व मंत्री जयंत मलैया, खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण, उद्यानिकी तथा खाद्य प्रसंस्करण विभाग मंत्री नारायण सिंह कुशवाह, मंत्री लखन पटैल, पूर्व विधायक श्रीमती सुधा जैन, भाजपा जिलाध्यक्ष श्याम तिवारी, डॉ अनिल तिवारी ने पहुंचकर आचार्य श्री को श्रीफल भेंट कर आर्शीवाद प्राप्त किया. 



इस अवसर पर अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन शास्त्री परिषद द्वारा पुण्र्याजक परिवार के आयोजक एवं मुख्य जजमान संतोष जैन घड़ी को श्रावक शिरोमणि और सकल दिगंबर जैन समाज की ओर से सीट की उपाधि से विभूषित किया गया. तो वहीं गुरुकुल दिगंबर जैन उदासीन आश्रम द्रोणगिरी के द्वारा सम्मान पत्र प्रदान किया गया. सकल दिगंबर समाज की ओर से राकेश जैन चच्चा जी ने अभिनंदन पत्र का वाचन किया. इस अवसर पर प्रतिष्ठाचार्य ब्रं. जयकुमार निशांत, हुकुमचंद जैन, दिलीप रांधेलिया, अशोक पिड़रुआ, कैलाश सिंघई, श्रेयांश जैन, मनोज बंगेला, ऋषभ चंदेरिया, प्रेमचंद बरेठी, अजय सराफ, परमेष्ठी जैन, महेंद्र बलेह, सौरभ जैन घड़ी, उमेश जैन बंडा उपस्थित रहे.


मंचासीन पूर्व मंत्री श्री भार्गव ने भगवान शांतिनाध के समवशरण का उद्घाटन किया. श्री भार्गव ने कहा कि महोत्सव स्थल पर अलोकिक दृश्य और आनंद की अनुभूति हुई. यह स्थान भी महातीर्थ से कम नहीं है. धर्म की प्रभावना व वातावरण नजर आया. पुण्र्याजक परिवार को तो श्रीमंत सेठ की उपाधि दी जाना चाहिए. जिनके द्वारा धन का धर्म में व्यय कर धन्य हो गए, इस अवसर पर सौधर्म इंद्र डॉ सतेेंद्र जैन, संदीप जैन, देवेंद्र जैन लुहारी, सुरेंद्र खुरदेलिया, अंकुर जैन, श्रेणिक जैन, अमित चौधरी, नैवी जैन, देवेंद्र फुसकेले आदि उपस्थित रहे. इस अवसर पर खाद मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने सिरोंजा स्थित बीटीआईआरटी परिसर मे बाबूलाल ताराबाई जैन की मूर्ति का अनावरण किया गया।

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विधायक जी और धर्मपत्नी का ठाकुरजी, मुझे और मेरे परिवार से ऐसा लगाव हो गया है कि अब मुझे भी ये अपने परिवार के सदस्य लगने लगे : पूज्य इंद्रेश जी महाराज ▪️ श्रीमद्भागवत कथा का भव्य शुभारंभ : विधायक शैलेंद्र जैन सपत्नीक भागवतजी सिर पर रखकर कथा स्थल पर पहुंचे

विधायक जी और धर्मपत्नी का ठाकुरजी, मुझे और मेरे परिवार से ऐसा लगाव हो गया है कि अब मुझे भी ये अपने परिवार के सदस्य लगने लगे : पूज्य इंद्रेश जी महाराज

▪️ श्रीमद्भागवत कथा का भव्य शुभारंभ : विधायक शैलेंद्र जैन सपत्नीक भागवतजी सिर पर रखकर कथा स्थल पर पहुंचे



तीनबत्ती न्यूज: 19 नवंबर, 2025
सागर।सागर हो रही इस भव्य ठाकुरजी की कथा के जो मुख्य यज मान विधायक श्री शैलेंद्र जैन और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती अनु श्री जैन हैं, उनका ठाकुरजी, मुझे और मेरे परिवार से ऐसा लगाव हो गया है कि अब मुझे भी ये अपने परिवार के सदस्य लगने लगे हैं। इसी भाव से मैं यहां कथा सुनाने आया हूं। वैसे जब यजमान श्री शैलेंद्र जैन और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती अनु श्री जैन ने कहा कि महाराजजी सागर में कथा फिर करना है, तो मैं निवेदन किया कि अभी थोड़ा रुक जाइए, अभी तो कथा करके आए हैं।
 बाद में मन बड़ा व्याकुल हुआ, लेकिन देखिए ठाकुर जी की कृपा से आज इस भव्य कथा का शुभारंभ हो रहा है। यह बात कथा व्यासपीठ से परम श्रद्धेय अंतरराष्ट्रीय कथा व्यास परम पूज्य इंद्रेश उपाध्याय जी महाराज ने कही।
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वीडियो देखने क्लिक करे


सिद्ध क्षेत्र धर्मश्री बालाजी मंदिर प्रांगण में बुधवार को श्रीमद्भागवत कथा का भव्य शुभारंभ हुआ। इसके पहले विधायक निवास पर पहुंचे परम पूज्य अंतर्राष्ट्रीय कथावाचक पूज्य इंद्रेश उपाध्याय जी महाराज की भव्य अगवानी की गई। कथा आरंभ के पूर्व विधायक जैन ने बालाजी मंदिर पहुंचकर पूज्य बालाजी सरकार का पूजन-अर्चन किया तथा श्रीमद्भागवत का पूजन सम्पन्न कराया। इसके पश्चात वे भागवत जी को अपने सिर पर धारण कर भव्य शोभायात्रा के साथ कथा स्थल तक पहुंचे।


पूज्य इंद्रेश उपाध्याय जी महाराज ने कहा कि भागवत में चार शब्द होते हैं जिनका अर्थ है, भ से भक्ति, ग से ज्ञान, व से वैराग्य और त से त्याग। यही भागवत के मूल तत्व हैं जो मनुष्य को मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर करते हैं।

अपने आशीर्वचन में पूज्य महाराज श्री ने कहा कि आधुनिकता से देश विकास के पथ पर अग्रसर है लेकिन संस्कारों में कमी होती जा रही है। उन्होंने कहा कि “हमारे बुंदेलखंड के लोग अत्यंत सरल स्वभाव के होते हैं।” इस दौरान उन्होंने ग्रामीण कथा प्रसंग का संस्मरण सुनाते हुए स्पष्ट किया कि धर्म का पालन कठिन नियमों से नहीं बल्कि श्रद्धा और सरलता से होता है।


उन्होंने कहा कि कर्म ऐसे करो कि आचार्य स्वयं बुलाकर आपको स्पर्श करें, उनकी दृष्टि स्वयं आप पर ठहर जाए और अपनी वाणी से आपको कृतार्थ करें।
महाराज श्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि पक्षी स्पर्श से, कछुआ मन से और गुरु वाणी, दृष्टि, मन तथा स्पर्श से शिष्य का पोषण करते है। यही गुरु सेवा की सर्वोच्च उपलब्धि है।
कथा प्रसंग में उन्होंने कुआं जी महाराज की परीक्षा का प्रेरक प्रसंग सुनाया और बताया कि ठाकुर जी अपने भक्तों की परीक्षा उन्हीं की भलाई और उत्थान के लिए लेते हैं। उन्होंने कहा कि ठाकुर जी सत्य हैं, चैतन्य हैं और सृष्टि के कण-कण में विराजमान हैं।

ये हुए शामिल 

मीडिया प्रमुख श्रीकांत जैन ने बताया कि वरिष्ठ विधायक अजय विश्नोई, भाजपा जिलाध्यक्ष श्याम तिवारी, रानी अवंती बाई लोधी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. विनोद मिश्रा, पूर्व विधायक सुनील जैन, पूर्व जिलाध्यक्ष गौरव सिरोठिया, नगर निगम अध्यक्ष वृंदावन अहिरवार, मनोज जैन, सुरेंद्र जैन सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुगण प्रथम दिवस श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण करने पहुंचे ।
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शांतिधाम पंचकल्याणक जिनबिंब प्रतिष्ठा महोत्सव में तप कल्याणक मनाया गया ▪️राग भी हो तो ऐसा हो कि वैराग्य में बदल जाए: पट्टाचार्य विशुद्ध सागर महाराज

शांतिधाम पंचकल्याणक जिनबिंब प्रतिष्ठा महोत्सव में तप कल्याणक मनाया गया

▪️राग भी हो तो ऐसा हो कि वैराग्य में बदल जाए: पट्टाचार्य विशुद्ध सागर महाराज






तीनबत्ती न्यूज: 19 नवंबर, 2025

सागर :  पट्टाचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज ने कहा कि राग भी हो तो ऐसा हो कि वैराग्य में बदल जाए. आचार्य श्री सिरोंजा शांतिधाम के शांतिनाथ जिनालय पंचकल्याणक जिनबिंब प्रतिष्ठा महोत्सव के तीसरे दिन तपकल्याणक पर धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे.

उन्होने कहा कि लक्ष्मण का राग देखें तो राम के साथ वन को निकल गए थे. दिगंबर मुनि वैराग्य सुरक्षित रहे इसलिए निर्मल विहार करते हैं. निग्रंथ मुनि घूमने फिरने के लिए नहीं बना जाता है. उन्होने कहा कि दिगंबर मुनि के लिए सारी संपत्ति गौड़ है. उनकी तो रत्नत्रय संपत्ति है. उन्होने  संयम, शांति और धर्म की राह पर चलने की प्रेरणा दी. आज महोत्सव में प्रभु ने विहार प्रारंभ कर दिया.बुधवार को मंगल प्रभात गीत के साथ दिव्य शुभारंभ हुआ. 






उपरांत शांति मंत्राराधना एवं जापकिय अनुष्ठान ने वातावरण को पूर्णत: भक्तिमय बना दिया. शांतिधारा, अभिषेक, जन्मकल्याणक पूजन एवं हवन जैसे दिव्य अनुष्ठान संपन्न हुए. विनायक यंत्र पूजन तथा महाराजा विश्वसेन दरबार का आकर्षक आयोजन हुआ, जिसमें विवाह संस्कार, राजाभिषेक, राजतिलक और 32 हजार राजाओं द्वारा भेंट समर्पण जैसे दिव्य दृश्य सभी के आकर्षण का केंद्र रहे. इसके बाद चौदह रत्न एवं नवनिधियों का वैभवशाली दर्शन और दिग्विजय यात्रा निकाली गई.  


दोपहर में जन्मोत्सव का आयोजन, जातिस्मरण, वैराग्योत्पत्ति, लौकान्तिक देवों का आगमन, दीक्षाभिषेक तथा दीक्षा पालकी का प्रस्थान हुआ. सांयकालीन सांस्कृतिक कार्यक्रमों के पूर्व मंगल आरती, भक्ति, प्रवचन हुए. महोत्सव के मुख्य जजमान संतोष जैन घड़ी परिवार है. महोत्सव में सौधर्म बनने का सौभाग्य डॉ सतेंद्र श्रीमती रिचा जैन को प्राप्त हुआ है. भगवान के माता-पिता बनने का सौभाग्य सुरेंद्र कुमार श्रीमती शीला जैन को मिला है. तपकल्याणक के दिन महोत्सव स्थल पर श्रद्धालुओं की संख्या अपेक्षाकृत अधिक रही है.


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