Editor: Vinod Arya | 94244 37885

पांचवें दिन हुई समाधि मुनि श्री निर्दोष सागर महाराज की : डोला में पहुंचे हजारों श्रद्धालु

पांचवें दिन हुई समाधि मुनि श्री निर्दोष सागर महाराज की : डोला में पहुंचे हजारों श्रद्धालु


तीनबत्ती न्यूज: 16 अप्रैल, 2026

सागर : आचार्य श्री समय सागर महाराज के आशीर्वाद से मुनिश्री महासागर महाराज के सानिध्य में भाग्योदय तीर्थ में आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज (दक्षिण) के शिष्य मुनि श्री निर्दोष सागर महाराज (63 वर्ष) की संलेखना 12 अप्रैल से प्रारंभ हुई थी । 5 वें दिन मुनि श्री की सुबह 8:28 बजे णमोकार मंत्र के सुनते हुए समाधि हो गई। मुनिश्री कई दिनों से अस्वस्थ चल रहे है वे मूलतः गृहस्थ अवस्था में सागर नगर के रामपुरा वार्ड के निवासी हैं।


मुकेश जैन ढाना ने बताया कि महासागर महाराज के सानिध्य में प्रारंभ हुई संलेखना के पहले दिन निर्जल उपवास किया दूसरे दिन लौकी का जूस और जल लिया तीसरे दिन पुनः उपवास किया चौथे दिन जल और लौकी का जूस लिया 16 अप्रैल को आचार्य श्री के आशीर्वाद के बाद उन्होंने यम संलेखना का नियम ले लिया था। मुनि श्री की सुबह समाधि हो गई। मुनि श्री महासागर महाराज करेली की ओर विहार कर रहे थे। आचार्य श्री समय सागर महाराज के द्वारा मुनि श्री की संलेखना समाधि का आशीर्वाद और संकेत मिलने के बाद 50 किमी से चतुर्भटा ग्राम से वापस विहार कर भाग्योदय तीर्थ सागर पहुंचे।

----------------

खबर का वीडियो देखने क्लिक करे

सागर: कलेक्टर प्रतिभा पाल पहुंची जिला अस्पताल: #गैरहाजिर डॉक्टर्स को नोटिस, कबाड़ा हटाने के निर्देश: स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सख्ती

-------------------

परिवार त्यागा ली मुनि दीक्षा

63 वर्षीय मुनि श्री निर्दोष सागर महाराज के गृहस्थ अवस्था का नाम संतोष जैन था कक्षा नवमी तक शिक्षित 5 भाई बहनों में सबसे बड़े थे और बर्तन का व्यवसाय करते थे 1998 में आचार्य श्री विद्यासागर महाराज से दो प्रतिमा के व्रत लिए थे और हमेशा गुरु चरणों में परिवार सहित रहकर मुनि और आर्यिका संघो को चौका लगाकर आहार कराया करते थे 7 जुलाई 2006 से उन्होंने व्यापार का त्याग कर दिया जनवरी 2008 में उनकी दोनों किडनी खराब हो गई डॉक्टर ने जवाब दे दिया तो आचार्य श्री ने उन्हें कुछ नियम देकर आशीर्वाद दिया और सात प्रतिमा के व्रत ले लिए, 12 फरवरी 2021 को उन्होंने परिवार का त्याग कर गुना में आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज (दक्षिण) से मुनि दीक्षा ग्रहण की। पहले चातुर्मास में ही लकवा ग्रस्त होने से अस्वस्थ रहने लगे और उसके पश्चात आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के शिष्य मुनि श्री प्रबुद्ध सागर महाराज के साथ उन्होंने दो चातुर्मास व्यतीत किये। फरवरी 2026 से सागर में विराजमान थे।प्रतिदिन सैकड़ो लोग उनके दर्शन करने के लिए भाग्योदय तीर्थ पहुंचे। पूर्व में सागर में मुनि श्री क्षमा सागर महाराज और मुनि श्री भव्य सागर महाराज की समाधि हो चुकी है। 

सुबह जैसे ही समाधि की सूचना सोशल मीडिया के माध्यम से जन-जन तक पहुंची कुछ ही देर में हजारों लोग भाग्योदय तीर्थ स्थित संत भवन अंतिम दर्शनों के लिए श्रीफल लेकर के पहुंचे  10 बजे संत भवन से डोला उठाया गया। हर व्यक्ति ने डोला में कंधा दिया। 25 एकड़ विद्योदय तीर्थ में मुनि संघ के सानिध्य में संस्कार क्रियाएं भक्ति पढ़कर की गई। हजारों सूखे नारियल अंत्येष्टि संस्कार में श्रद्धालुओं के द्वारा समर्पित किए गए अंतिम क्रियाएं होने के बाद भी सैकड़ो की संख्या में लोग वहां पर पहुंचते रहे जिले भर से लोग अल्प सूचना पर पहुंचे।

मुनि श्री निर्दोष सागर महाराज की समाधि के उपरांत अस्थि संचय का कार्यक्रम 17 अप्रैल को सुबह 8:30 बजे से 25 एकड़ भूमि में होगा।

विनयांजलि सभा 18 अप्रैल को

समाधिस्थ मुनिश्री निर्दोष सागर महाराज की समाधि पर विनयांजलि सभा 18 अप्रैल को सुबह 8 बजे से भाग्योदय तीर्थ के मुख्य पंडाल में मुनि श्री महासागर महाराज, मुनि श्री अभेद सागर महाराज, मुनि श्री अगर्भ सागर महाराज, क्षुल्लक श्री सुधर्मसागर और क्षुल्लक श्री श्वेत सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में संपन्न होगी।

यम संलेखना का नियम 15 अप्रैल को शाम 4:30 बजे लिया 

मुनि संघ ने आचार्य श्री समय सागर महाराज और आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज दक्षिण से संकेत प्राप्त कर यम संलेखना 15 अप्रैल को दोपहर 4:30 बजे नौ बार णमोकार मंत्र पढ़कर नियम लिया। यम संलेखना में एक स्थान सुनिश्चित होता है उसके बाहर जाने पर प्रतिबंध लग जाता है। उन्होंने चारों प्रकार के आहारो का त्याग हमेशा के लिए कर दिया था।



Share:

0 comments:

एक टिप्पणी भेजें

www.Teenbattinews.com

Archive