जंय श्री गणेशाय नमः

मंगलवार, 30 जून 2020

राष्ट्रीय विदुषी सेमिनार का हुआ सफल आयोजन

राष्ट्रीय विदुषी सेमिनार का हुआ सफल  आयोजन

★नियमित स्वाध्याय से ही शास्त्र सुरक्षित रहेंगे -डॉ. मुन्नीपुष्पा जैन

नई दिल्ली। "स्वाध्याय का महत्त्व और आवश्यकता" इस विषय पर ऑनलाइन राष्ट्रीय सेमिनार  का आयोजन विदुषी महासभा द्वारा किया गया। इस सम्पूर्ण कार्यक्रम का संयोजन दिल्ली की डॉ. इन्दु जैन राष्ट्र गौरव द्वारा किया गया।
स्वाध्याय का मूल आत्मसाधना है। स्वाध्याय ऐसा तप है जो मोक्षमार्ग का सर्वश्रेष्ठ साधन है। उत्तम शास्त्रों को पढ़ना, वाचना, पूछना,सुनना, सुनाना, चिन्तनमनन करना,अभ्यास करना स्वाध्याय है।स्वाध्याय परम तप है | देव-शास्त्र-गुरु ही इस पंचम काल में हमारे सच्चे हितैषी हैं |इस पंचम काल में हमारे समक्ष जिनेन्द्र भगवान नहीं हैं, परन्तु उनकी अमृतमयी वाणी रुपी जिनवाणी माँ के रूप में हमें आचार्य प्रणीत शास्त्र उपलब्ध हैं इसलिए हम सभी का कर्त्तव्य है कि स्वाध्याय करके जिनेन्द्र भगवान द्वारा प्ररूपित सम्यक् मार्ग का श्रद्धान करें और उसका सम्यक् अनुसरण करके अपना मानव जीवन सार्थक करें | अपनी आत्मा का अध्ययन, चिंतन-मनन ,ध्यान,स्वाध्याय है । 

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ज्ञान की आराधना करना स्वाध्याय है।अपनी आत्मा का हित करने वाला अध्ययन स्वाध्याय है।आर्ष वचन तीर्थंकर केवली भगवान के मुख से प्रस्फुटित हुए, जिसको गणधर परमेष्ठी ने ग्रहण किया | तदुपरांत उस ग्रहण किये हुए ज्ञान से भव्य जीवों को  उद्बोधित किया तथा पूर्वाचार्यों ने जिनवाणी के रूप में लिपिबद्ध किया | इस देश का इतिहास इस बात का गवाह है  कि अनेक महान पुरुषों ने कई विपत्तियों और संघर्षों से शास्त्र रूपी जिनवाणी माँ को सुरक्षित रखा जो हमें आज उपलब्ध है। अत: तीर्थंकर परमेष्ठी से लेकर सभी पूर्वाचार्यों के महान उपकारों के फलस्वरूप हमें यह जिनवाणी माँ प्राप्त हुई हैं | उन सभी का उपकार हम एकमात्र जिनवाणी माँ का स्वाध्याय करके ही चुका सकते हैं । स्वाध्याय विषय पर ये विचार पूरे भारतवर्ष से प्रतिभागिता करने वाली विदुषियों ने प्राकृत दिवस पर आयोजित ऑनलाइन राष्ट्रीय सेमिनार में अभिव्यक्त किए।


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श्रुतदेवी को नमन करते हुए इस संगोष्ठी का शुभारम्भ डॉ. संगीता विनायका इंदौर ने किया । इस ऑनलाइन सेमिनार में  डॉ.विभा जैन,दिल्ली,डॉ. राका जैन लखनऊ,लता एस. सिंघई, अमरावती,डॉ.संगीता मेहता, इंदौर,प्रो.कल्पना जैन,दिल्ली ,ऊषा गंगवाल, रायपुर,डॉ.पूनम टांक जैन, जयपुर,डॉ.मनीषा जैन , छिन्दवाड़ा,डॉ.अंजु जैन , इंदौर,डॉ.संध्या जैन श्रुति ,जबलपुर,डॉ.आशु जैन गजरौला,उ.प्र,डॉ. पत्रिका जैन लखनऊ, डॉ.मनोरमा जैन ,जबलपुर,श्रीमती विनीता प्रवीण जैन इंदौर,डॉ. प्रगति जैन, इंदौर ,भारती जैन ,दिल्ली,अनुपमा जैन, कोलकाता,डॉ. रिचा जैन , नागपुर,डॉ. रश्मि कोठारी ,जयपुर,बरखा विवेक बड़जात्या , बाकानेर ,म.प्र.,डॉ. संगीता विनायका ,इंदौर आदि सभी ने स्वाध्याय का महत्त्व और आवश्यकता को विस्तृत रूप से प्रस्तुत किया।आदर्श महिला के सम्मान से सम्मानित , ब्राह्मी लिपि विशेषज्ञ , जैन विदुषी डॉ. मुन्नीपुष्पा जैन,वाराणसी ने संगोष्ठी की अध्यक्षता की ।

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आपने प्रतिभागियों के वक्तव्य की समीक्षा एवं प्रशंसा की तथा अपने ओजस्वीपूर्ण अध्यक्षीय उद्बोधन से सभी को प्रेरित किया । आपने कहा कि स्वाध्याय जन्म-जरा-मृत्यु को दूर करने की औषधि है।नियमित और सामूहिक स्वाध्याय से ही शास्त्र सुरक्षित रहेंग अत: हम सभी को निरंतर स्वाध्याय करते हुए ज्ञान प्राप्त करना चाहिए और जीवन में प्रतिक्षण आत्मचिंतन करना चाहिए। इस अवसर पर सारस्वत अतिथि के रूप में श्री भारतवर्षीय दिगम्बर जैन महिला महासभा की अध्यक्षा, प्रसिद्ध समाजसेवी श्रीमती सरिता महेन्द्र जैन,चैन्नई की शुभकामनाएं भी सभी को प्राप्त हुईं। 
विदुषी महासभा द्वारा आयोजित इस संगोष्ठी के अंत में राष्ट्रीय सेमिनार संयोजिका डॉ. इन्दु जैन राष्ट्र गौरव ने सभी का आभार व्यक्त किया। सेमिनार से जुड़े दर्शक श्रोताओं ने राष्ट्रीय सेमिनार की प्रशंसा की तथा सभी विदुषियों को बधाई दी।

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