विश्व के सबसे बड़े माँ राजराजेश्वरी हरिद्रा कोटि कुमकुमार्चन के लिए मंशापूर्ण बालाजी मंदिर परिसर अपने पूर्ण वैभव में तैयार
• 31 हजार कलश, 15 हजार पूजन थालियों से सजा दिव्य परिसर, 50 हजार श्रद्धालुओं के स्वागत की सभी तैयारियाँ पूर्ण
• 29 जुलाई को सागर में रचा जाएगा इतिहास, परम पूज्य श्री रावतपुरा सरकार के सान्निध्य में होगा कलियुग का सबसे प्रभावी माँ राजराजेश्वरी हरिद्रा कोटि कुमकुमार्चन
तीनबत्ती न्यूज: 28 जुलाई, 2026
सागर। धर्मनगरी सागर कल एक ऐसे ऐतिहासिक आध्यात्मिक महाआयोजन की साक्षी बनने जा रही है, जिसकी भव्यता और दिव्यता देश ही नहीं, विश्वभर के श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही है। 29 जुलाई को मंशापूर्ण बालाजी मंदिर परिसर में परम पूज्य श्री रावतपुरा सरकार के पावन सान्निध्य में विश्व का सबसे बड़ा "माँ राजराजेश्वरी हरिद्रा कोटि कुमकुमार्चन" आयोजित होगा। इस महाअनुष्ठान की सभी तैयारियाँ अंतिम रूप ले चुकी हैं और पूरा परिसर अपने दिव्य एवं भव्य स्वरूप में श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए सजकर तैयार है।
पूरे आयोजन स्थल को 31 हजार पवित्र कलशों एवं 15 हजार पूजन थालियों से अलंकृत किया गया है। विशाल परिसर में लगभग 50 हजार श्रद्धालुओं के बैठने, पूजन करने एवं दर्शन करने की समुचित व्यवस्थाएँ की गई हैं। भव्य प्रवेश द्वार, आकर्षक सजावट, विशाल यज्ञ एवं अर्चन स्थल, सुव्यवस्थित मार्ग, पेयजल, प्रसाद वितरण, चिकित्सा, सुरक्षा और पार्किंग सहित प्रत्येक व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जा चुका है।
मंगलवार को परम पूज्य श्री रावतपुरा सरकार ने स्वयं आयोजन स्थल का विस्तृत निरीक्षण किया। उन्होंने संपूर्ण परिसर का भ्रमण कर विभिन्न व्यवस्थाओं का जायजा लिया तथा आयोजन समितियों, वेदाचार्यों एवं सेवकों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए, ताकि देशभर से आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को सहज, सुरक्षित एवं दिव्य वातावरण में माँ राजराजेश्वरी की आराधना का पुण्य लाभ प्राप्त हो सके।
यह माँ राजराजेश्वरी हरिद्रा कोटि कुमकुमार्चन केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि कलियुग का सबसे प्रभावी लक्ष्मी-प्राप्ति महाअनुष्ठान माना जाता है। शास्त्रों में माँ राजराजेश्वरी को आदिशक्ति एवं समस्त सिद्धियों की अधिष्ठात्री देवी बताया गया है। माँ की कृपा से साधक के जीवन में सुख, समृद्धि, ऐश्वर्य, वैभव और लक्ष्मी का वास होता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिव्य अर्चन में श्रद्धापूर्वक सहभागिता करने से व्यक्ति के जीवन के अनेक कष्ट, विघ्न एवं बाधाएँ दूर होती हैं तथा आध्यात्मिक और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह महाअनुष्ठान कालसर्प दोष सहित विभिन्न प्रकार के ग्रहदोषों के शमन, जीवन की अनेक बाधाओं के निवारण, नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति तथा परिवार में सुख-शांति और समृद्धि की कामना के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। श्रद्धा एवं विश्वास के साथ माँ राजराजेश्वरी की आराधना करने वाले भक्तों पर माँ की विशेष कृपा बरसती है और उनके जीवन में मंगलमय परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त होता है।
आयोजन समिति ने बताया कि यह विराट महाअनुष्ठान पूर्णतः निःशुल्क है। इसमें सम्मिलित होने के लिए किसी प्रकार का शुल्क या पंजीयन आवश्यक नहीं है। समाज के हर वर्ग, हर आयु एवं प्रत्येक श्रद्धालु को इस ऐतिहासिक आयोजन में सपरिवार सम्मिलित होने का आमंत्रण दिया गया है।
आयोजन समिति ने समस्त श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि वे अधिक से अधिक संख्या में मंशापूर्ण बालाजी मंदिर परिसर, सागर पहुँचकर माँ राजराजेश्वरी के इस विश्वविख्यात महाअनुष्ठान का पुण्य लाभ प्राप्त करें तथा इतिहास के साक्षी बनें।









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