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संत श्री केशवगिरी जी महाराज के सानिध्य में विधायक शैलेंद्र जैन के निवास पर पार्थिव शिवलिंग निर्माण एवं रुद्राभिषेक

श्रावण मास में विधायक शैलेंद्र जैन के निवास पर हुआ पार्थिव शिवलिंग निर्माण एवं रुद्राभिषेक

• संत केशवगिरी महाराज के पावन सानिध्य में सपरिवार विधायक शैलेंद्र जैन ने किया पूजन-अर्चन, बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने लिया धर्मलाभ


तीनबत्ती न्यूज:19 अगस्त, 2026

सागर। पवित्र श्रावण मास के अवसर पर सागर विधायक शैलेंद्र कुमार जैन के निवास पर संत पूज्य श्री केशवगिरी महाराज के पावन सानिध्य में असंख्य पार्थिव शिवलिंग निर्माण, पूजन-अर्चन एवं रुद्राभिषेक का भव्य धार्मिक आयोजन श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ संपन्न हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार, भगवान भोलेनाथ के जयघोष और शिव आराधना से विधायक निवास का पूरा परिसर भक्तिमय हो उठा।

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इस अवसर पर विधायक शैलेंद्र कुमार जैन ने सपरिवार श्रद्धापूर्वक पार्थिव शिवलिंग का निर्माण किया और देवाधिदेव महादेव का विधि-विधान से पूजन-अर्चन एवं रुद्राभिषेक किया। आयोजन में बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने भी पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण कर भगवान भोलेनाथ की आराधना की तथा परिवार, समाज एवं समस्त विश्व के सुख, शांति, समृद्धि और कल्याण की मंगलकामना की।

संत केशवगिरी महाराज के सानिध्य में हुआ रुद्राभिषेक

संत पूज्य श्री केशवगिरी महाराज के पावन सानिध्य में विद्वान आचार्यों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान शिव का विधि-विधानपूर्वक पूजन कराया गया। श्रद्धालुओं ने पूर्ण भक्तिभाव के साथ पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण कर जल, दुग्ध एवं अन्य पूजन सामग्री से भगवान भोलेनाथ का अभिषेक किया।

श्रावण मास की पावन बेला में आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया। भगवान शिव के जयकारों और मंत्रोच्चार से विधायक निवास का संपूर्ण परिसर शिवमय हो गया। श्रद्धालुओं ने ‘हर-हर महादेव’ और ‘ॐ नमः शिवाय’ के जयघोष के साथ भगवान भोलेनाथ की आराधना कर सर्वकल्याण की प्रार्थना की।



शिव आराधना से आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार : शैलेंद्र जैन

विधायक शैलेंद्र कुमार जैन ने कहा कि श्रावण मास देवाधिदेव महादेव की आराधना, साधना और भक्ति का अत्यंत पवित्र अवसर है। पार्थिव शिवलिंग निर्माण एवं रुद्राभिषेक हमारी सनातन संस्कृति की प्राचीन और पुण्यदायी परंपरा है। ऐसे धार्मिक अनुष्ठानों से न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार होता है, बल्कि समाज में धर्म, संस्कार और सद्भाव की भावना भी मजबूत होती है।

उन्होंने कहा कि भगवान भोलेनाथ सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करें तथा सागर सहित संपूर्ण प्रदेश और राष्ट्र पर अपनी कृपा बनाए रखें। 

जनप्रतिनिधियों और भाजपा पदाधिकारियों ने लिया धर्मलाभ

धार्मिक आयोजन में सागर सांसद डॉ. लता वानखेड़े, पूर्व मंत्री एवं खुरई विधायक भूपेन्द्र सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष श्याम तिवारी, शहडोल संभाग प्रभारी गौरव सिरोठिया, नगर निगम अध्यक्ष वृंदावन अहिरवार, जगन्नाथ गुरैया, विक्रम सोनी, मनीष चौबे, निकेश गुप्ता, सुमित यादव, यश अग्रवाल, श्रीकांत जैन, मेघा दुबे, नीलम अहिरवार, नीरज यादव, धर्मेंद्र खटीक, पराग बजाज, कैलाश हसानी, देवेंद्र अहिरवार, नीरज गोलू कोरी, डब्बू साहू, भरत अहिरवार, नीरज गोलू जैन, नितिन सोनी, कन्हई पटेल, नरेश धानक, विशाल खटीक, राहुल वैद्य, धर्मेंद्र रजक, अमन चौरसिया, रीतेश तिवारी एवं जय सोनी सहित जिला एवं मंडल पदाधिकारी, भाजपा कार्यकर्ता तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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सागर में पूज्य श्री रावतपुरा सरकार के सानिध्य में विश्व का विराट माँ राजराजेश्वरी हरिद्रा कोटि कुमकुमार्चन सम्पन्न, 50 हजार श्रद्धालुओं ने रचा आस्था का इतिहास

सागर में रचा गया आस्था, भव्यता और दिव्यता का इतिहास

• परम पूज्य श्री रावतपुरा सरकार महाराज श्री के पावन सान्निध्य में सम्पन्न हुआ विश्व का विराट "माँ राजराजेश्वरी हरिद्रा कोटि कुमकुमार्चन" महाअनुष्ठान

• लगभग 50 हजार श्रद्धालुओं की उपस्थिति, कई किलोमीटर तक उमड़ा आस्था का सैलाब, एक माह की अथक तैयारियों ने रचा सनातन का स्वर्णिम अध्याय


तीनबत्ती न्यूज: 29 जुलाई, 2026

सागर: सागर की पावन धरा ने आज एक ऐसे ऐतिहासिक, अलौकिक और अभूतपूर्व आध्यात्मिक आयोजन का साक्षात्कार किया, जिसने सनातन संस्कृति की विराटता, वैदिक परंपरा की दिव्यता और सामूहिक आस्था की अद्भुत शक्ति को विश्व के समक्ष प्रस्तुत कर दिया। परम पूज्य श्री रावतपुरा सरकार महाराज श्री के पावन सान्निध्य एवं दिव्य मार्गदर्शन में श्री रावतपुरा सरकार आश्रम, वेदांती परिसर, धर्मश्री स्थित मंशापूर्ण बालाजी मंदिर परिसर में आयोजित "माँ राजराजेश्वरी हरिद्रा कोटि कुमकुमार्चन" महाअनुष्ठान ने भव्यता और दिव्यता का ऐसा अद्वितीय संगम प्रस्तुत किया, जिसे उपस्थित श्रद्धालु जीवनभर विस्मृत नहीं कर पाएंगे।



लगभग एक माह से चल रही सतत तैयारियों ने इस आयोजन को ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया। दिन-रात हजारों स्वयंसेवक, आचार्य, साधक और आयोजन से जुड़े कार्यकर्ता सेवा और समर्पण की भावना से जुटे रहे। विशाल यज्ञशाला का निर्माण, भव्य मंडपों की स्थापना, हजारों श्रद्धालुओं के लिए आवास, पेयजल, चिकित्सा, पार्किंग, सुरक्षा, यातायात, पूजन सामग्री और वैदिक अनुष्ठानों की सूक्ष्मतम व्यवस्थाएँ निरंतर युद्धस्तर पर की गईं। लगभग 20 एकड़ में विस्तृत परिसर को इस प्रकार सजाया गया कि प्रत्येक दिशा में आध्यात्मिक ऊर्जा और सांस्कृतिक वैभव का अद्भुत समन्वय दिखाई दे रहा था।


देशभर से आए श्रद्धालु

29 जुलाई की प्रातः बेला से ही सागर की ओर आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ पड़ा कि आयोजन स्थल तक पहुँचने वाले मार्गों पर कई किलोमीटर लंबी वाहनों और श्रद्धालुओं की कतारें दिखाई देने लगीं। मध्यप्रदेश सहित उत्तरप्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, दिल्ली, हरियाणा तथा देश के अनेक राज्यों से श्रद्धालु अपने परिवारों सहित इस दिव्य महाअनुष्ठान में सम्मिलित होने पहुँचे। अनुमानतः लगभग 50 हजार श्रद्धालुओं ने इस ऐतिहासिक आयोजन में सहभागिता कर माँ राजराजेश्वरी के श्रीचरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित की।

आस्था की भव्यता और दिव्यता का संगम

यज्ञभूमि में प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं का स्वागत भव्य वैदिक वातावरण, सुव्यवस्थित व्यवस्थाओं, विशाल मंडपों, अलंकृत वेदियों, दिव्य श्री यंत्र, पुष्पों की सुगंध, दीपों की पंक्तियों और वैदिक मंत्रों की अनुगूँज ने किया। 1100 वैदिक आचार्यों द्वारा एक साथ उच्चारित वेदमंत्रों ने सम्पूर्ण वातावरण को आध्यात्मिक चेतना से स्पंदित कर दिया। शंखनाद, घंटानाद, डमरुओं का प्रचंड निनाद और "जय माँ राजराजेश्वरी" के गगनभेदी उद्घोष ने सम्पूर्ण परिसर को देवमय बना दिया।


इस महाअनुष्ठान की सबसे विशिष्ट विशेषता रही माँ राजराजेश्वरी हरिद्रा कोटि कुमकुमार्चन, जिसमें माँ को अतिप्रिय हरिद्रा (हल्दी) और आदिशक्ति के चैतन्य का प्रतीक कुमकुम करोड़ों अर्चनों के माध्यम से अर्पित किया गया। यह केवल पूजन नहीं, बल्कि लोकमंगल, विश्वशांति, सुख-समृद्धि और समस्त मानवता के कल्याण का सामूहिक वैदिक संकल्प था।



इस ऐतिहासिक आयोजन के लिए देश के विभिन्न भागों से पूजन सामग्री विशेष रूप से मंगाई गई। देवास से 100 क्विंटल पवित्र हरिद्रा, नेपाल से रुद्राक्ष, दिल्ली से फल, पुष्प एवं 11 हजार कमल पुष्प, सूरत से 11 हजार साड़ियाँ एवं माँ के श्रृंगार के वस्त्र, कानपुर से सरसों का तेल, उड़ीसा से 31 हजार नारियल, वाराणसी से कुश, पवित्री, सुपारी, हवन सामग्री, कलावा, शहद एवं श्रृंगार सामग्री, हरिद्वार से गंगाजल, बरमान से माँ नर्मदा का पावन जल, इंदौर से शक्कर, नागपुर से किशमिश, छत्तीसगढ़ से चावल, बेंगलुरु से रजत मुद्राएँ, नौगाँव से हजारों कलश एवं एक लाख दीप, तथा देशभर से लगभग दो करोड़ बिल्वपत्र इस महाअनुष्ठान के लिए एकत्र किए गए। इसके अतिरिक्त सवा लाख बूंदी के लड्डू, 11 टन आम, 11 टन केले, 11 क्विंटल बताशे, 5 क्विंटल पेठा, एक लाख बीड़ा पान, एक लाख खुले पान, 15 हजार नारियल, 11 क्विंटल किशमिश सहित असंख्य पूजन सामग्री माँ के श्रीचरणों में समर्पित की गई। यह दृश्य ऐसा प्रतीत करा रहा था मानो सम्पूर्ण भारत की श्रद्धा एक ही यज्ञभूमि पर एकत्रित हो गई हो।



महाअनुष्ठान के शुभारंभ से पूर्व परम पूज्य श्री रावतपुरा सरकार महाराज श्री का दिव्य आगमन हजारों डमरुओं, शंखों, पुष्पवर्षा और जयघोष के मध्य हुआ। श्रद्धालुओं ने करबद्ध होकर अपने आराध्य का स्वागत किया। जैसे ही महाराज श्री यज्ञमंडप में पहुँचे, सम्पूर्ण वातावरण "जय माँ राजराजेश्वरी" के उद्घोष से गूँज उठा और वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य महाअनुष्ठान का शुभारंभ हुआ।


लगभग ढाई घंटे तक चले इस विराट अर्चन में हजारों श्रद्धालुओं ने पूर्ण श्रद्धा और समर्पण के साथ सहभागिता की। प्रत्येक अर्चन के साथ केवल हरिद्रा और कुमकुम ही नहीं, बल्कि प्रत्येक श्रद्धालु की कामना, विश्वास, परिवार का मंगल, राष्ट्र की समृद्धि और विश्वकल्याण का संकल्प भी माँ राजराजेश्वरी के श्रीचरणों में समर्पित होता रहा।


सायंकाल सम्पन्न हुई भव्य महाआरती इस आयोजन का चरम क्षण सिद्ध हुई। एक लाख दीपों की ज्योति से आलोकित सम्पूर्ण यज्ञभूमि, वैदिक ऋचाओं की अनुगूँज, शंखों का महाघोष, डमरुओं का प्रचंड निनाद और हजारों श्रद्धालुओं द्वारा एक स्वर में गाए जा रहे आरती के स्वर ने ऐसा अलौकिक वातावरण निर्मित किया कि उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति भावविभोर हो उठा। अनेक श्रद्धालुओं की आँखें नम थीं और उनके मुख पर आत्मिक शांति एवं आनंद स्पष्ट दिखाई दे रहा था।


इस अवसर पर परम पूज्य श्री रावतपुरा सरकार महाराज श्री ने अपने मंगल संदेश में कहा कि माँ राजराजेश्वरी की उपासना केवल व्यक्तिगत समृद्धि का माध्यम नहीं, बल्कि सम्पूर्ण विश्व के कल्याण, धर्म की प्रतिष्ठा, मानवता की उन्नति और लोकमंगल का दिव्य संकल्प है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से सेवा, संस्कार, सदाचार और सनातन मूल्यों को अपने जीवन का आधार बनाने का आह्वान किया।


आज सागर की इस पुण्यभूमि पर सम्पन्न हुआ "माँ राजराजेश्वरी हरिद्रा कोटि कुमकुमार्चन" केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि सनातन संस्कृति के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में स्थापित हो गया। भव्यता, दिव्यता, अनुशासन, वैदिक परम्परा और जनसहभागिता का यह अद्वितीय संगम आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा तथा यह संदेश देता रहेगा कि जब आस्था, सेवा और संकल्प एक साथ खड़े होते हैं, तब इतिहास केवल लिखा नहीं जाता—रचा जाता है।

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सागर में 29 जुलाई को होगा विश्व का सबसे बड़ा माँ राजराजेश्वरी कुमकुमार्चन

विश्व के सबसे बड़े माँ राजराजेश्वरी हरिद्रा कोटि कुमकुमार्चन के लिए मंशापूर्ण बालाजी मंदिर परिसर अपने पूर्ण वैभव में तैयार

• 31 हजार कलश, 15 हजार पूजन थालियों से सजा दिव्य परिसर, 50 हजार श्रद्धालुओं के स्वागत की सभी तैयारियाँ पूर्ण


• 29 जुलाई को सागर में रचा जाएगा इतिहास, परम पूज्य श्री रावतपुरा सरकार के सान्निध्य में होगा कलियुग का सबसे प्रभावी माँ राजराजेश्वरी हरिद्रा कोटि कुमकुमार्चन


तीनबत्ती न्यूज: 28 जुलाई, 2026

सागर। धर्मनगरी सागर कल एक ऐसे ऐतिहासिक आध्यात्मिक महाआयोजन की साक्षी बनने जा रही है, जिसकी भव्यता और दिव्यता देश ही नहीं, विश्वभर के श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही है। 29 जुलाई को मंशापूर्ण बालाजी मंदिर परिसर में परम पूज्य श्री रावतपुरा सरकार के पावन सान्निध्य में विश्व का सबसे बड़ा "माँ राजराजेश्वरी हरिद्रा कोटि कुमकुमार्चन" आयोजित होगा। इस महाअनुष्ठान की सभी तैयारियाँ अंतिम रूप ले चुकी हैं और पूरा परिसर अपने दिव्य एवं भव्य स्वरूप में श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए सजकर तैयार है।



पूरे आयोजन स्थल को 31 हजार पवित्र कलशों एवं 15 हजार पूजन थालियों से अलंकृत किया गया है। विशाल परिसर में लगभग 50 हजार श्रद्धालुओं के बैठने, पूजन करने एवं दर्शन करने की समुचित व्यवस्थाएँ की गई हैं। भव्य प्रवेश द्वार, आकर्षक सजावट, विशाल यज्ञ एवं अर्चन स्थल, सुव्यवस्थित मार्ग, पेयजल, प्रसाद वितरण, चिकित्सा, सुरक्षा और पार्किंग सहित प्रत्येक व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जा चुका है।


मंगलवार को परम पूज्य श्री रावतपुरा सरकार ने स्वयं आयोजन स्थल का विस्तृत निरीक्षण किया। उन्होंने संपूर्ण परिसर का भ्रमण कर विभिन्न व्यवस्थाओं का जायजा लिया तथा आयोजन समितियों, वेदाचार्यों एवं सेवकों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए, ताकि देशभर से आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को सहज, सुरक्षित एवं दिव्य वातावरण में माँ राजराजेश्वरी की आराधना का पुण्य लाभ प्राप्त हो सके।


यह माँ राजराजेश्वरी हरिद्रा कोटि कुमकुमार्चन केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि कलियुग का सबसे प्रभावी लक्ष्मी-प्राप्ति महाअनुष्ठान माना जाता है। शास्त्रों में माँ राजराजेश्वरी को आदिशक्ति एवं समस्त सिद्धियों की अधिष्ठात्री देवी बताया गया है। माँ की कृपा से साधक के जीवन में सुख, समृद्धि, ऐश्वर्य, वैभव और लक्ष्मी का वास होता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिव्य अर्चन में श्रद्धापूर्वक सहभागिता करने से व्यक्ति के जीवन के अनेक कष्ट, विघ्न एवं बाधाएँ दूर होती हैं तथा आध्यात्मिक और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है।



धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह महाअनुष्ठान कालसर्प दोष सहित विभिन्न प्रकार के ग्रहदोषों के शमन, जीवन की अनेक बाधाओं के निवारण, नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति तथा परिवार में सुख-शांति और समृद्धि की कामना के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। श्रद्धा एवं विश्वास के साथ माँ राजराजेश्वरी की आराधना करने वाले भक्तों पर माँ की विशेष कृपा बरसती है और उनके जीवन में मंगलमय परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त होता है।


आयोजन समिति ने बताया कि यह विराट महाअनुष्ठान पूर्णतः निःशुल्क है। इसमें सम्मिलित होने के लिए किसी प्रकार का शुल्क या पंजीयन आवश्यक नहीं है। समाज के हर वर्ग, हर आयु एवं प्रत्येक श्रद्धालु को इस ऐतिहासिक आयोजन में सपरिवार सम्मिलित होने का आमंत्रण दिया गया है।


आयोजन समिति ने समस्त श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि वे अधिक से अधिक संख्या में मंशापूर्ण बालाजी मंदिर परिसर, सागर पहुँचकर माँ राजराजेश्वरी के इस विश्वविख्यात महाअनुष्ठान का पुण्य लाभ प्राप्त करें तथा इतिहास के साक्षी बनें।

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सागर में गुरुपूजन महोत्सव की तैयारियां तेज: 23 जुलाई को संत राजेंद्रदास देवाचार्य का भव्य स्वागत, शहरभर में सजेंगे मंगल द्वार

सागर में गुरुपूजन महोत्सव की तैयारियां तेज, 23 जुलाई को संत राजेंद्रदास देवाचार्य का होगा भव्य स्वागत


तीनबत्ती न्यूज: 17 जुलाई, 2026

सागर। गुरु भक्ति, सेवा और आध्यात्मिक चेतना के महापर्व गुरुपूजन महोत्सव को लेकर सागर में तैयारियां तेज हो गई हैं। मलूकपीठाधीश्वर स्वामी डॉ. राजेंद्रदास देवाचार्य के आगमन को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है। शहर और आसपास के क्षेत्रों में संतों के स्वागत की तैयारियां युद्धस्तर पर चल रही हैं, जबकि शिष्य मंडल पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ सेवा कार्यों में जुटा हुआ है।

गुरुपूजन महोत्सव का आयोजन 23 जुलाई को प्रातः 10 बजे से शाम 4 बजे तक तिली रोड स्थित होटल रॉयल पैलेस, किला कोठी में किया जाएगा। आयोजन के दौरान दोपहर 12 बजे से विशाल भंडारा भी शुरू होगा।

यह आयोजन अजब श्री सेवा समिति, अजब धाम एवं मलूक पीठ परिवार, जिला दमोह एवं सागर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है।

आयोजन समिति प्रमुख प्रमोद उपाध्याय ने बताया कि महोत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। कार्यक्रम में गुरु पूजन, आध्यात्मिक प्रवचन, भजन-कीर्तन तथा गुरु दीक्षा जैसे विशेष धार्मिक आयोजन होंगे। इस अवसर पर संत राजेंद्रदास देवाचार्य एवं महंत श्री राम अनुग्रह दास (छोटे सरकार) सहित अनेक संतों का गुरु परंपरा के अनुसार भव्य स्वागत किया जाएगा।

सानोंधा से निकलेगा स्वागत कारवां

आयोजकों के अनुसार संत श्री का स्वागत ग्राम सानोंधा से प्रारंभ होगा। वहां से स्वागत यात्रा बहेरिया, मकरोनिया, सिविल लाइन, तहसीली सहित विभिन्न मार्गों से होती हुई आयोजन स्थल पहुंचेगी। मार्ग में विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालु पुष्पवर्षा, आरती और जयघोष के साथ संतों का अभिनंदन करेंगे। हरिनाम संकीर्तन और भक्ति गीतों से पूरा वातावरण भक्तिमय रहेगा।

शहरभर में सजेंगे मंगल द्वार

गुरुपूजन महोत्सव को लेकर शहर के प्रमुख मार्गों और प्रवेश स्थलों पर आकर्षक मंगल द्वार, स्वागत बैनर, धार्मिक ध्वज और पुष्प सज्जा की जाएगी। आयोजन स्थल को भी भव्य एवं आध्यात्मिक स्वरूप दिया जा रहा है, जिससे श्रद्धालुओं को दिव्य वातावरण का अनुभव हो सके।

गुरु सेवा में जुटे श्रद्धालु

गुरु सेवा को भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। इसी भावना के साथ शिष्य मंडल स्वागत, भंडारा, जल सेवा और अन्य व्यवस्थाओं में पूरे समर्पण के साथ जुटा हुआ है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु सेवा कार्यों में अपनी भागीदारी निभा रहे हैं।

इच्छुक श्रद्धालुओं को मिलेगी गुरु दीक्षा

आयोजन समिति प्रमुख प्रमोद उपाध्याय ने बताया कि गुरु महाराज की आज्ञा के अनुसार इच्छुक श्रद्धालुओं को गुरु दीक्षा प्रदान की जाएगी। सनातन परंपरा में गुरु दीक्षा को आत्मिक जागरण और साधना के मार्ग का प्रथम चरण माना जाता है। इसके माध्यम से साधक को आध्यात्मिक जीवन की दिशा तथा गुरु कृपा का संरक्षण प्राप्त होता है।

-  डेस्क तीनबत्ती न्यूज

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