Editor: Vinod Arya | 94244 37885

मध्य प्रदेश UCC 2026: कैबिनेट ने समान नागरिक संहिता को दी मंजूरी, लिव-इन रजिस्ट्रेशन अनिवार्य, जानें नए नियम

मध्य प्रदेश में UCC को कैबिनेट की मंजूरी: लिव-इन रजिस्ट्रेशन अनिवार्य, तीन तलाक-हलाला पर सख्ती, जानें 7 बड़े बदलाव



तीनबत्ती न्यूज: 19 जुलाई, 2026

भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) 2026 के प्रारूप को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में जगदीशपुर में हुई कैबिनेट बैठक में इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव को स्वीकृति मिली। प्रस्तावित संहिता का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे निजी मामलों में सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है।

कैबिनेट के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यह कदम संविधान के अनुच्छेद 44 में निहित समान नागरिक संहिता के उद्देश्य, समानता, न्याय, लैंगिक समानता और धर्मनिरपेक्षता की भावना को मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा, समान अधिकार और पुराने भेदभाव को समाप्त करना इस संहिता का प्रमुख उद्देश्य है।

UCC की 7 प्रमुख बातें

1. अनुसूचित जनजातियों को छूट

संविधान के अनुच्छेद 342 के तहत सूचीबद्ध अनुसूचित जनजातियों जैसे भील, गोंड, बैगा, कोरकू, सहरिया और भारिया सहित अन्य संरक्षित समुदायों पर यह संहिता लागू नहीं होगी।

2. विवाह और तलाक में बड़े बदलाव

  • एक समय में केवल एक विवाह की अनुमति।
  • तीन तलाक और निकाह हलाला जैसी प्रथाओं पर सख्ती।
  • विवाह का पंजीयन अनिवार्य।
  • पुरुष की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और महिला की 18 वर्ष।
  • मौखिक तलाक और अनौपचारिक पंचायत के फैसलों को मान्यता नहीं।

3. बच्चों को समान अधिकार

विवाहित, अविवाहित, गोद लिए गए, सरोगेसी या ART से जन्मे सभी बच्चों को समान कानूनी दर्जा मिलेगा। कस्टडी के मामलों में बच्चे का सर्वोत्तम हित सर्वोपरि माना जाएगा।

4. उत्तराधिकार में समान अधिकार

बेटा-बेटी, विधवा-विधुर तथा माता-पिता को समान अधिकार दिए गए हैं। उत्तराधिकार का ढांचा जेंडर-न्यूट्रल बनाया गया है।

5. वसीयत की पूरी स्वतंत्रता

कोई भी वयस्क अपनी स्वयं अर्जित और पैतृक संपत्ति की 100 प्रतिशत वसीयत अपनी इच्छा से कर सकेगा।

6. लिव-इन रिलेशनशिप के लिए नए नियम

  • साथ रहने के एक महीने के भीतर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य।
  • दोनों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष।
  • पहले से विवाहित व्यक्ति लिव-इन में नहीं रह सकेगा।
  • 21 वर्ष से कम उम्र होने पर माता-पिता को सूचना दी जाएगी।
  • रजिस्ट्रार स्थानीय पुलिस को भी जानकारी भेजेगा।

7. महिला और बच्चों को कानूनी सुरक्षा

लिव-इन से जन्मे बच्चों को वैध माना जाएगा। महिला पार्टनर को कानूनी पत्नी की तरह भरण-पोषण का अधिकार मिलेगा। बिना रजिस्ट्रेशन रहने या गलत जानकारी देने पर जेल और जुर्माने का प्रावधान रखा गया है।

मुख्यमंत्री ने क्या कहा?

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रस्तावित समान नागरिक संहिता महिलाओं को समान अधिकार देने, सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने और विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों में मौजूद असमानताओं को समाप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने कहा कि धार्मिक परंपराओं और रीति-रिवाजों का सम्मान भी इस संहिता में किया गया है, बशर्ते वे सार्वजनिक नीति और नैतिकता के अनुरूप हों।


Share:

0 comments:

एक टिप्पणी भेजें

www.Teenbattinews.com

Archive