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मध्यप्रदेश UCC विधेयक 2026 विधानसभा में पारित, राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद होगा लागू

मध्यप्रदेश विधानसभा में UCC विधेयक पारित, राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद होगा लागू


तीनबत्ती न्यूज: 21जुलाई, 2026

भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा ने सोमवार को 'मध्यप्रदेश समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक, 2026' ध्वनि मत से पारित कर दिया। अब यह विधेयक राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बाद यह प्रदेश में कानून के रूप में लागू होगा।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे मध्यप्रदेश के इतिहास का महत्वपूर्ण दिन बताते हुए कहा कि यह कानून समानता, सामाजिक न्याय और महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व के मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार संवैधानिक मूल्यों और समान अधिकारों के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है।

महिलाओं को समान अधिकार देने पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून लागू होने के बाद विवाह, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण सहित विभिन्न नागरिक मामलों में समान प्रावधान लागू होंगे। उन्होंने कहा कि महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार सुनिश्चित करने की दिशा में यह महत्वपूर्ण पहल है।

लिव-इन संबंधों पर भी होंगे प्रावधान

मुख्यमंत्री ने कहा कि विधेयक में लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े प्रावधान भी शामिल किए गए हैं। उनके अनुसार निर्धारित आयु से संबंधित नियमों के उल्लंघन अथवा कानून के दुरुपयोग की स्थिति में दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है।

राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद लागू होगा कानून

विधानसभा से पारित होने के बाद अब विधेयक राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद इसे अधिसूचित कर पूरे मध्यप्रदेश में लागू किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर दी प्रतिक्रिया

डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा कि मध्यप्रदेश के इतिहास में आज एक स्वर्णिम अध्याय जुड़ा है। उन्होंने कहा कि यह कानून समान न्याय, समान अधिकार, नारी सशक्तिकरण और संवैधानिक मूल्यों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को और मजबूत करेगा।


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तीनबत्ती न्यूज: 19 जुलाई, 2026

भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) 2026 के प्रारूप को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में जगदीशपुर में हुई कैबिनेट बैठक में इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव को स्वीकृति मिली। प्रस्तावित संहिता का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे निजी मामलों में सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है।

कैबिनेट के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यह कदम संविधान के अनुच्छेद 44 में निहित समान नागरिक संहिता के उद्देश्य, समानता, न्याय, लैंगिक समानता और धर्मनिरपेक्षता की भावना को मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा, समान अधिकार और पुराने भेदभाव को समाप्त करना इस संहिता का प्रमुख उद्देश्य है।

UCC की 7 प्रमुख बातें

1. अनुसूचित जनजातियों को छूट

संविधान के अनुच्छेद 342 के तहत सूचीबद्ध अनुसूचित जनजातियों जैसे भील, गोंड, बैगा, कोरकू, सहरिया और भारिया सहित अन्य संरक्षित समुदायों पर यह संहिता लागू नहीं होगी।

2. विवाह और तलाक में बड़े बदलाव

  • एक समय में केवल एक विवाह की अनुमति।
  • तीन तलाक और निकाह हलाला जैसी प्रथाओं पर सख्ती।
  • विवाह का पंजीयन अनिवार्य।
  • पुरुष की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और महिला की 18 वर्ष।
  • मौखिक तलाक और अनौपचारिक पंचायत के फैसलों को मान्यता नहीं।

3. बच्चों को समान अधिकार

विवाहित, अविवाहित, गोद लिए गए, सरोगेसी या ART से जन्मे सभी बच्चों को समान कानूनी दर्जा मिलेगा। कस्टडी के मामलों में बच्चे का सर्वोत्तम हित सर्वोपरि माना जाएगा।

4. उत्तराधिकार में समान अधिकार

बेटा-बेटी, विधवा-विधुर तथा माता-पिता को समान अधिकार दिए गए हैं। उत्तराधिकार का ढांचा जेंडर-न्यूट्रल बनाया गया है।

5. वसीयत की पूरी स्वतंत्रता

कोई भी वयस्क अपनी स्वयं अर्जित और पैतृक संपत्ति की 100 प्रतिशत वसीयत अपनी इच्छा से कर सकेगा।

6. लिव-इन रिलेशनशिप के लिए नए नियम

  • साथ रहने के एक महीने के भीतर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य।
  • दोनों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष।
  • पहले से विवाहित व्यक्ति लिव-इन में नहीं रह सकेगा।
  • 21 वर्ष से कम उम्र होने पर माता-पिता को सूचना दी जाएगी।
  • रजिस्ट्रार स्थानीय पुलिस को भी जानकारी भेजेगा।

7. महिला और बच्चों को कानूनी सुरक्षा

लिव-इन से जन्मे बच्चों को वैध माना जाएगा। महिला पार्टनर को कानूनी पत्नी की तरह भरण-पोषण का अधिकार मिलेगा। बिना रजिस्ट्रेशन रहने या गलत जानकारी देने पर जेल और जुर्माने का प्रावधान रखा गया है।

मुख्यमंत्री ने क्या कहा?

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रस्तावित समान नागरिक संहिता महिलाओं को समान अधिकार देने, सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने और विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों में मौजूद असमानताओं को समाप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने कहा कि धार्मिक परंपराओं और रीति-रिवाजों का सम्मान भी इस संहिता में किया गया है, बशर्ते वे सार्वजनिक नीति और नैतिकता के अनुरूप हों।


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