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BMC Sagar में 85 वर्षीय सर्पदंश पीड़िता की बची जान, 24 घंटे में वेंटिलेटर से बाहर

बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज सागर में बड़ी चिकित्सा सफलता, 85 वर्षीय सर्पदंश पीड़िता को मिला नया जीवन

BMC Sagar doctors successfully treat 85-year-old snake bite patient

तीनबत्ती न्यूज : 10 अगस्त 2026

सागर । बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (BMC) सागर में डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की त्वरित कार्यशैली एवं बेहतर समन्वय से सर्पदंश की गंभीर स्थिति में पहुंची 85 वर्षीय वृद्धा की जान बचाई गई। छतरपुर जिले के बक्सवाहा (भीमपुरा) निवासी श्रीमती बाजरानी बसुदेव को गंभीर हालत में बीएमसी लाया गया था।

सर्पदंश के विषैले प्रभाव के चलते वृद्धा को सांस लेने में अत्यधिक परेशानी हो रही थी और उनकी हालत गंभीर बनी हुई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए इमरजेंसी विभाग की टीम ने तत्काल जीवनरक्षक उपचार शुरू किया। इसके बाद मरीज को आईसीयू में भर्ती कर वेंटिलेटर सपोर्ट, एंटी-स्नेक वेनम (ASV) और आवश्यक जीवनरक्षक दवाएं दी गईं।

महज 24 घंटे में हुआ सुधार

डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की लगातार निगरानी एवं उपचार के परिणामस्वरूप मरीज की हालत में महज 24 घंटे के भीतर उल्लेखनीय सुधार हुआ और उन्हें सफलतापूर्वक वेंटिलेटर से बाहर निकाल लिया गया। पूर्णतः स्वस्थ होने के बाद वृद्धा को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।

इस सफल उपचार में इमरजेंसी विभागाध्यक्ष डॉ. सत्येंद्र उइके, सहायक प्राध्यापक डॉ. सौरभ जैन तथा मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. रमेश पांडे के मार्गदर्शन में रेसिडेंट डॉक्टरों और नर्सिंग अधिकारियों की टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।रेसिडेंट डॉक्टरों में डॉ. मोनालिसा, डॉ. श्वेता, डॉ. विशाल, डॉ. दृष्टि, डॉ. मंजुनाथ, डॉ. अजय शर्मा, डॉ. सर्वेश गांवकर, डॉ. रुचिका अनुरागी, डॉ. शशांक जैन, डॉ. यशवंत एवं डॉ. स्वप्नजीत सिंह अरोड़ा शामिल रहे। वहीं नर्सिंग अधिकारी श्री अरुण चोरड़िया, सुश्री ऋचा, सुश्री इंद्रा विश्वकर्मा, सुश्री नीतू अहिरवार एवं सुश्री मनीषा राठौर का भी उपचार में महत्वपूर्ण योगदान रहा।


बीएमसी के डीन डॉ. पी.एस. ठाकुर ने पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि डॉक्टरों, रेजिडेंट्स और नर्सिंग स्टाफ के बीच बेहतर तालमेल तथा समर्पित प्रयासों से यह सफलता संभव हुई। डॉ. सौरभ जैन ने बताया कि गंभीर सर्पदंश के मामलों में समय पर एंटी-स्नेक वेनम और आवश्यकता पड़ने पर वेंटिलेटर सपोर्ट उपलब्ध कराना बेहद महत्वपूर्ण होता है। समय पर उपचार मिलने से मरीज की जान बचाई जा सकती है।

वृद्धा के परिजनों ने बीएमसी प्रबंधन, चिकित्सकों एवं पैरामेडिकल स्टाफ का आभार जताते हुए नि:शुल्क जीवनरक्षक चिकित्सा सुविधा और समय पर उपचार के लिए धन्यवाद दिया।


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