Editor: Vinod Arya | 94244 37885
BMC Sagar लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
BMC Sagar लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

BMC Sagar में 85 वर्षीय सर्पदंश पीड़िता की बची जान, 24 घंटे में वेंटिलेटर से बाहर

बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज सागर में बड़ी चिकित्सा सफलता, 85 वर्षीय सर्पदंश पीड़िता को मिला नया जीवन

BMC Sagar doctors successfully treat 85-year-old snake bite patient

तीनबत्ती न्यूज : 10 अगस्त 2026

सागर । बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (BMC) सागर में डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की त्वरित कार्यशैली एवं बेहतर समन्वय से सर्पदंश की गंभीर स्थिति में पहुंची 85 वर्षीय वृद्धा की जान बचाई गई। छतरपुर जिले के बक्सवाहा (भीमपुरा) निवासी श्रीमती बाजरानी बसुदेव को गंभीर हालत में बीएमसी लाया गया था।

सर्पदंश के विषैले प्रभाव के चलते वृद्धा को सांस लेने में अत्यधिक परेशानी हो रही थी और उनकी हालत गंभीर बनी हुई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए इमरजेंसी विभाग की टीम ने तत्काल जीवनरक्षक उपचार शुरू किया। इसके बाद मरीज को आईसीयू में भर्ती कर वेंटिलेटर सपोर्ट, एंटी-स्नेक वेनम (ASV) और आवश्यक जीवनरक्षक दवाएं दी गईं।

महज 24 घंटे में हुआ सुधार

डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की लगातार निगरानी एवं उपचार के परिणामस्वरूप मरीज की हालत में महज 24 घंटे के भीतर उल्लेखनीय सुधार हुआ और उन्हें सफलतापूर्वक वेंटिलेटर से बाहर निकाल लिया गया। पूर्णतः स्वस्थ होने के बाद वृद्धा को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।

इस सफल उपचार में इमरजेंसी विभागाध्यक्ष डॉ. सत्येंद्र उइके, सहायक प्राध्यापक डॉ. सौरभ जैन तथा मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. रमेश पांडे के मार्गदर्शन में रेसिडेंट डॉक्टरों और नर्सिंग अधिकारियों की टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।रेसिडेंट डॉक्टरों में डॉ. मोनालिसा, डॉ. श्वेता, डॉ. विशाल, डॉ. दृष्टि, डॉ. मंजुनाथ, डॉ. अजय शर्मा, डॉ. सर्वेश गांवकर, डॉ. रुचिका अनुरागी, डॉ. शशांक जैन, डॉ. यशवंत एवं डॉ. स्वप्नजीत सिंह अरोड़ा शामिल रहे। वहीं नर्सिंग अधिकारी श्री अरुण चोरड़िया, सुश्री ऋचा, सुश्री इंद्रा विश्वकर्मा, सुश्री नीतू अहिरवार एवं सुश्री मनीषा राठौर का भी उपचार में महत्वपूर्ण योगदान रहा।


बीएमसी के डीन डॉ. पी.एस. ठाकुर ने पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि डॉक्टरों, रेजिडेंट्स और नर्सिंग स्टाफ के बीच बेहतर तालमेल तथा समर्पित प्रयासों से यह सफलता संभव हुई। डॉ. सौरभ जैन ने बताया कि गंभीर सर्पदंश के मामलों में समय पर एंटी-स्नेक वेनम और आवश्यकता पड़ने पर वेंटिलेटर सपोर्ट उपलब्ध कराना बेहद महत्वपूर्ण होता है। समय पर उपचार मिलने से मरीज की जान बचाई जा सकती है।

वृद्धा के परिजनों ने बीएमसी प्रबंधन, चिकित्सकों एवं पैरामेडिकल स्टाफ का आभार जताते हुए नि:शुल्क जीवनरक्षक चिकित्सा सुविधा और समय पर उपचार के लिए धन्यवाद दिया।


Share:

IMR कम करने के लिए कलेक्टर प्रतिभा पाल की विशेष बैठक, हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी पर सख्त निर्देश

सागर: मातृ-शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए कलेक्टर प्रतिभा पाल की बड़ी पहल, जिला अस्पताल-BMC और स्वास्थ्य अमले की संयुक्त समीक्षा

कलेक्टर प्रतिभा पाल की अध्यक्षता में सागर में जिला स्वास्थ्य समिति की समीक्षा बैठक आयोजित


तीनबत्ती न्यूज: 03 अगस्त, 2026

सागर। जिले में मातृ मृत्यु दर (MMR) और शिशु मृत्यु दर (IMR) को न्यूनतम स्तर पर लाने के उद्देश्य से सोमवार को कलेक्टर प्रतिभा पाल की अध्यक्षता में जिला स्वास्थ्य समिति की विशेष समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में पहली बार जिला चिकित्सालय, बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (बीएमसी) और स्वास्थ्य विभाग के जिला एवं ब्लॉक स्तर के अधिकारियों को एक मंच पर लाकर मातृ एवं शिशु मृत्यु के कारणों की विस्तृत समीक्षा की गई।

कलेक्टर ने कहा कि बैठक का उद्देश्य केवल आंकड़ों की समीक्षा करना नहीं, बल्कि उन वास्तविक कारणों की पहचान करना है जिनके चलते मरीज प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से रेफर होकर जिला अस्पताल या बीएमसी पहुंचते हैं और बाद में मातृ अथवा शिशु मृत्यु के मामलों में बदल जाते हैं। उन्होंने कहा कि हर स्तर पर समय रहते चिकित्सकीय हस्तक्षेप (Timely Intervention) सुनिश्चित किया जाए।

गंभीर एनीमिया और हाई ब्लड प्रेशर बने प्रमुख कारण

समीक्षा में सामने आया कि अधिकांश मातृ मृत्यु के मामलों में गर्भवती महिलाओं में गंभीर एनीमिया तथा गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप (Pregnancy Induced Hypertension) की समस्या पाई गई। इसके अलावा हेपेटिक फेलियर, पोस्टपार्टम हैमरेज, एक्लेम्पसिया और प्रीक्लेम्पसिया जैसी जटिलताएं भी प्रमुख कारण रहीं।

कलेक्टर ने निर्देश दिए कि सभी गर्भवती महिलाओं की नियमित ब्लड प्रेशर (BP) और हीमोग्लोबिन (HB) जांच अनिवार्य रूप से कराई जाए तथा जोखिम वाले मामलों की लगातार निगरानी रखी जाए।

हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं की होगी बर्थ मैपिंग

बैठक में निर्णय लिया गया कि हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं की बर्थ मैपिंग की जाएगी। संभावित प्रसव तिथि से 7 से 15 दिन पहले ऐसी महिलाओं को संबंधित अस्पताल के बर्थ वेटिंग एरिया में भर्ती कराया जाएगा ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल उपचार मिल सके।

इसके साथ ही आशा, एएनएम, सीएचओ और ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर को ऐसे मामलों की नियमित निगरानी करने तथा परिवार को भी निर्धारित अस्पताल की जानकारी देने के निर्देश दिए गए।

डीन डॉ. पी.एस. ठाकुर बोले— हाई-रिस्क मां तो बच्चा भी हाई-रिस्क

बैठक में बीएमसी के डीन डॉ. पी.एस. ठाकुर ने कहा कि यदि मां हाई-रिस्क गर्भवती है तो उससे जन्म लेने वाला शिशु भी हाई-रिस्क श्रेणी में आता है। इसलिए मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर एक-दूसरे से सीधे जुड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा कि गर्भावस्था के दौरान उचित चिकित्सकीय प्रबंधन से समय पूर्व प्रसव और नवजात जटिलताओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।

नवजात मृत्यु के कारणों की भी हुई समीक्षा

आईएमआर की समीक्षा में पाया गया कि अधिकांश शिशु मृत्यु जन्म के बाद पहले 28 दिनों (नियोनेटल पीरियड) में हो रही हैं। इसके प्रमुख कारण समय से पहले जन्म (Prematurity) और जन्म के समय ऑक्सीजन की कमी (Birth Asphyxia) पाए गए।

बैठक में निर्देश दिए गए कि सभी गर्भवती महिलाओं की चारों एएनसी जांच समय पर कराई जाए, पौष्टिक आहार एवं आवश्यक दवाओं का नियमित सेवन सुनिश्चित कराया जाए तथा समय से पहले प्रसव रोकने के लिए हाई-रिस्क मामलों का बेहतर प्रबंधन किया जाए।

डेथ ऑडिट केवल औपचारिकता नहीं बने

कलेक्टर प्रतिभा पाल ने स्पष्ट निर्देश दिए कि मैटरनल डेथ रिव्यू (MDR) और चाइल्ड डेथ रिव्यू (CDR) पूरी गंभीरता के साथ किए जाएं। फॉर्म-1 से फॉर्म-6 तक की सभी जानकारी पारदर्शिता के साथ भरी जाए तथा बीएमसी, जिला अस्पताल और सीएमएचओ कार्यालय की संयुक्त टीम नियमित ऑडिट कर कमियों को दूर करे।

बीएमओ को मैदानी अमले की नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश

बैठक में ब्लॉक मेडिकल ऑफिसरों को निर्देशित किया गया कि वे अपने क्षेत्र की आशा, एएनएम, आशा सुपरवाइजर और सीएचओ के कार्यों की नियमित समीक्षा करें। डेटा एंट्री की गुणवत्ता, समयबद्धता और चिन्हांकन की शुद्धता सुनिश्चित की जाए।

प्रसव के बाद भी होगी विशेष निगरानी

कलेक्टर ने कहा कि प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा की देखभाल उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी गर्भावस्था के दौरान जांच। आशा और एएनएम प्रसूता के घर जाकर नियमित स्वास्थ्य परीक्षण करें, आवश्यक परामर्श दें और उनकी स्वास्थ्य स्थिति का रिकॉर्ड अपडेट रखें।

उन्होंने अनमोल 2.0 पोर्टल पर वास्तविक समय में डेटा अपडेट करने, असुरक्षित डिलीवरी पर नजर रखने तथा नियमित टीकाकरण अभियान को पूरी गंभीरता से लागू करने के निर्देश भी दिए।

"समन्वय से बचाई जा सकती है हर जान"

बैठक के अंत में कलेक्टर प्रतिभा पाल ने कहा कि यदि मैदानी स्वास्थ्य अमला और विशेषज्ञ डॉक्टर मिलकर काम करें तो मातृ एवं शिशु मृत्यु के अधिकांश मामलों को रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग पूरी संवेदनशीलता के साथ कार्य करे ताकि जिले में एक भी मां या नवजात की असमय मृत्यु न हो।

बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विवेक केवी, बीएमसी डीन डॉ. पी.एस. ठाकुर, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. देवेश पटेरिया, सिविल सर्जन डॉ. आर.एस. जयंत सहित बीएमसी, जिला चिकित्सालय एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और चिकित्सक उपस्थित रहे।

Share:

BMC सागर में बड़ी चिकित्सा सफलता: 70 वर्षीय महिला के पेट से 1 किलो की विशाल गांठ निकाली, हाई-रिस्क सर्जरी रही सफल

BMC सागर में बड़ी चिकित्सा सफलता: 70 वर्षीय महिला के पेट से 1 किलो की विशाल गांठ निकाली, हाई-रिस्क सर्जरी रही सफल



तीनबत्ती न्यूज:  30 जुलाई 2026

सागर: बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (बीएमसी), सागर ने एक बार फिर जटिल शल्य चिकित्सा में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। बीएमसी के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की विशेषज्ञ टीम ने 70 वर्षीय महिला के पेट से लगभग 1 किलोग्राम वजनी और 15×20 सेंटीमीटर आकार की विशाल एडनेक्सल (ओवेरियन) सिस्ट को सफलतापूर्वक निकालकर मरीज को नई जिंदगी दी।

बड़ा बाजार निवासी श्रीमती मुन्नी बाई लंबे समय से पेट दर्द और सूजन से परेशान थीं। जांच में उनके पेट एवं श्रोणि क्षेत्र में बड़ी गांठ पाई गई। अल्ट्रासाउंड और सीईसीटी जांच के बाद इसे एडनेक्सल सिस्ट के रूप में चिन्हित किया गया।

मरीज पिछले चार वर्षों से क्रॉनिक डायरिया की समस्या से भी पीड़ित थीं, जिससे ऑपरेशन का जोखिम काफी बढ़ गया था। विशेषज्ञ चिकित्सकों ने सभी आवश्यक जांच और हाई-रिस्क कंसेंट के बाद सर्जरी का निर्णय लिया।

18 जुलाई 2026 को विभागाध्यक्ष डॉ. शीला जैन के नेतृत्व में सहायक प्राध्यापक डॉ. प्रियंका पटेल, डॉ. सिफ्टी बंगा, स्नातकोत्तर छात्रा डॉ. रिंशु सुजोरिया, स्क्रब नर्स राखी गौतम एवं आकांक्षा वर्मा की टीम ने एक्सप्लोरेटरी लैपरोटॉमी कर दाहिनी ओर स्थित विशाल सिस्ट को सुरक्षित रूप से निकाल दिया।

सर्जरी की सफलता में एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. सर्वेश जैन एवं उनकी टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके कुशल एनेस्थीसिया प्रबंधन और सतत मॉनिटरिंग से ऑपरेशन सुरक्षित एवं सफलतापूर्वक पूरा हुआ।

ऑपरेशन के बाद मरीज की रिकवरी सामान्य रही और उन्हें स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। हालिया फॉलो-अप में मरीज पूरी तरह स्वस्थ और दर्दमुक्त पाई गईं।

बीएमसी के अधिष्ठाता डॉ. पी. एस. ठाकुर ने सफल ऑपरेशन पर पूरी चिकित्सकीय टीम को बधाई देते हुए कहा कि संस्थान में आधुनिक सुविधाओं और अनुभवी विशेषज्ञों की बदौलत अब जटिल एवं हाई-रिस्क सर्जरी भी सफलतापूर्वक की जा रही हैं। उन्होंने इसे बुंदेलखंड क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।


Share:

BMC Sagar में VIA प्रशिक्षण सम्पन्न, 35 CHO हुए प्रशिक्षित, सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग को मिलेगी मजबूती

 BMC सागर में तीन दिवसीय VIA प्रशिक्षण सम्पन्न, 35 सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी हुए प्रशिक्षित

सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग को मिलेगी मजबूती, महिला स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने की पहल



तीनबत्ती न्यूज: 29 जुलाई 2026

सागर। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) मध्यप्रदेश के निर्देशानुसार कॉम्प्रिहेन्सिव प्राइमरी हेल्थ केयर कार्यक्रम के अंतर्गत बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (BMC), सागर में 27 से 29 जुलाई 2026 तक तीन दिवसीय VIA (Visual Inspection with Acetic Acid) प्रशिक्षण सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में सागर, दमोह एवं पन्ना जिले के 35 सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO) ने भाग लिया।

प्रशिक्षण का आयोजन महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. पी.एस. ठाकुर के संरक्षण एवं मार्गदर्शन तथा अधीक्षक डॉ. राजेश जैन के सहयोग से प्रसूति एवं स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डॉ. शीला जैन के नेतृत्व में किया गया। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य प्राथमिक स्तर पर गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर की समय पर पहचान, स्क्रीनिंग और शीघ्र उपचार की क्षमता विकसित करना था, ताकि महिलाओं को गंभीर बीमारी से बचाया जा सके।



प्रशिक्षण में सैद्धांतिक और व्यावहारिक जानकारी

तीन दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान डॉ. जागृति नगर, डॉ. प्रियंका तिवारी, डॉ. प्रियंका पटेल, डॉ. रुचि जायसवाल, डॉ. सिफ्ती बंगा, डॉ. रिंशु सुजोरिया, डॉ. रिया एवं डॉ. पूजा सिंह ने प्रतिभागियों को VIA स्क्रीनिंग की सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक जानकारी दी। प्रशिक्षण में स्क्रीनिंग तकनीक, संक्रमण नियंत्रण, रिपोर्टिंग, केस चयन और हैंड्स-ऑन प्रैक्टिकल सत्र आयोजित किए गए। प्रशिक्षण के अंत में प्रतिभागियों का पोस्ट-टेस्ट एवं कौशल मूल्यांकन भी किया गया।

राष्ट्रीय कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर

प्रशिक्षण का पर्यवेक्षण डॉ. संदीप गौतम, नोडल अधिकारी (एनसीडी), जिला सागर द्वारा किया गया। उन्होंने प्रशिक्षण की गुणवत्ता का अवलोकन करते हुए प्रतिभागियों को राष्ट्रीय सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया।

प्रशिक्षण समन्वयक डॉ. सौरभ जैन ने बताया कि प्रशिक्षण प्राप्त 35 सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी अब अपने-अपने आयुष्मान आरोग्य मंदिरों एवं स्वास्थ्य संस्थानों में महिलाओं की नियमित सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग कर सकेंगे। इससे रोग की प्रारंभिक अवस्था में पहचान, समय पर उपचार तथा सर्वाइकल कैंसर से होने वाली जटिलताओं और मृत्यु दर में कमी लाने में मदद मिलेगी।

डीन ने NHM का जताया आभार

महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. पी.एस. ठाकुर ने प्रशिक्षण के सफल आयोजन पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन मध्यप्रदेश के मिशन संचालक डॉ. प्रभाकर तिवारी एवं NHM का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम प्राथमिक स्तर पर सर्वाइकल कैंसर की शीघ्र पहचान एवं रोकथाम को मजबूत करने के साथ महिला स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने प्रशिक्षण में सहयोग देने वाले सभी प्रशिक्षकों, अधिकारियों, प्रतिभागियों एवं आयोजन से जुड़े सभी सदस्यों को सफल आयोजन के लिए बधाई एवं शुभकामनाएँ भी दीं।

प्रशिक्षण रहा उपयोगी

कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी, व्यवहारिक और ज्ञानवर्धक बताया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल राष्ट्रीय सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग कार्यक्रम को प्रभावी बनाने तथा महिला स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण साबित होगी।



Share:

सागर BMC में सनसनी: अस्थि रोग वार्ड के स्टोर रूम में मिला अज्ञात व्यक्ति का शव, जांच शुरू

सागर: बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (BMC) के स्टोर रूम में मिला अज्ञात व्यक्ति का शव, मचा हड़कंप



तीनबत्ती न्यूज: 20 जुलाई, 2026

सागर। सागर स्थित बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (BMC) के अस्थि रोग विभाग (अस्थि रोग वार्ड नंबर 14) में सोमवार को उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब वार्ड के अंदर बने स्टोर रूम से एक अज्ञात पुरुष का शव बरामद हुआ। शव करीब दो दिन से अधिक पुराना बताया जा रहा है, जिससे वार्ड में तेज दुर्गंध फैल गई थी। इस घटना ने मेडिकल कालेज की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए है। 


दुर्गंध आने पर मरीजों ने की शिकायत

जानकारी के मुताबिक, वार्ड नंबर 14 में भर्ती मरीजों को लगातार आ रही बदबू के बाद उन्होंने इसकी शिकायत अस्पताल प्रबंधन से की। जब अस्पताल स्टाफ ने मौके पर पहुंचकर जांच की, तो पता चला कि दुर्गंध अंदर बने स्टोर रूम से आ रही है। संदेह होने पर तुरंत गोपालगंज थाना पुलिस को सूचना दी गई। जानकार लोगों का कहना है कि मृतक की शिनाख्ती से मेडिकल प्रबंधन की व्यवस्थाओं का खुलासा होगा। स्टोर रूम से लाश मिलना बेहद गंभीर घटना है। 

सागर BMC के वार्ड नंबर 14 के स्टोर रूम में अज्ञात व्यक्ति का शव मिलने के बाद जांच करती पुलिस

अंदर से बंद था दरवाजा

सूचना मिलने पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची और स्टोर रूम का दरवाजा खुलवाया। अंदर का नजारा देखकर सब हैरान रह गए—स्टोर रूम के अंदर एक पुरुष का शव पड़ा हुआ था। पुलिस के अनुसार, स्टोर रूम का दरवाजा अंदर से बंद था। पुलिस ने शव का पंचनामा बनाकर पोस्टमार्टम/मोर्चरी के लिए भेज दिया है।

पुलिस व प्रबंधन का क्या कहना है?

  • गोपालगंज थाना प्रभारी घनश्याम शर्मा  के अनुसार "शव की शिनाख्त फिलहाल नहीं हो पाई है। इस बात की भी जांच की जा रही है कि मृतक अस्पताल में भर्ती कोई मरीज था या किसी मरीज का परिजन। मामला दर्ज कर घटना के सभी बिंदुओं पर बारीक जांच की जा रही है।"
  • BMC अधीक्षक राजेश जैन के अनुसार "घटना बेहद गंभीर है। मामले के हर पहलू की गहन जांच कराई जा रही है। यदि जांच में अस्पताल प्रबंधन या किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आती है, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सुरक्षा के सवाल पर कहा कि सभी पहलुओं की जांच हो रही है। मृतक की शिनाख्ती से बहुत कुछ पता चलेगा। इसके अलावा सुरक्षा के  लिएजो भी बेहतर होगा उसे किया जायेगा"
Share:

सागर बीएमसी को सीताराम रसोई परिवार ने दी HFNC मशीन, गंभीर नवजातों को मिलेगा आधुनिक उपचार

सीताराम रसोई परिवार ने बीएमसी को भेंट की अत्याधुनिक HFNC मशीन, गंभीर नवजातों को मिलेगा बेहतर उपचार


तीनबत्ती न्यूज: 18 जुलाई, 2026

सागर। बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (बीएमसी) के शिशु रोग विभाग में नवजात शिशुओं की चिकित्सा सेवाओं को और मजबूत बनाने के लिए सीताराम रसोई परिवार ने अत्याधुनिक एचएफएनसी (High Flow Nasal Cannula-HFNC) मशीन दान स्वरूप भेंट की। इस आधुनिक जीवनरक्षक उपकरण के मिलने से गंभीर रूप से बीमार नवजातों को बेहतर ऑक्सीजन सपोर्ट मिलेगा और कई मामलों में वेंटिलेटर की आवश्यकता भी कम हो सकेगी।

बीएमसी में आयोजित कार्यक्रम में मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. पी.एस. ठाकुर ने मशीन का लोकार्पण करते हुए संस्था के सेवा कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि समाज और चिकित्सा संस्थानों के समन्वय से स्वास्थ्य सेवाएं अधिक प्रभावी बनती हैं तथा आधुनिक उपकरणों से नवजातों को बेहतर उपचार उपलब्ध होगा।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. मनीष जैन ने किया। इस अवसर पर सीताराम रसोई परिवार के संरक्षक प्रकाश चौबे सहित हिमांशु मिश्रा, मनोज वर्मा, प्रभात चौबे, प्रभात जैन, दिलीप मुखारिया, राजीव चौरसिया, संजीव चौरसिया और राजेश गुप्ता उपस्थित रहे।

पहले भी दे चुके हैं चिकित्सा उपकरण

संस्था ने इससे पहले भी शिशु रोग विभाग को फोटोथेरेपी मशीन सहित कई आवश्यक चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराए हैं। संस्था के संरक्षक प्रकाश चौबे ने कहा कि बच्चों की मुस्कान और उनकी जिंदगी की रक्षा से बड़ा कोई सामाजिक दायित्व नहीं है। संस्था समाज के सहयोग को जरूरतमंद मरीजों तक पहुंचाने का कार्य निरंतर करती रहेगी।

वेंटिलेटर की जरूरत कम करेगी HFNC तकनीक

शिशु रोग विशेषज्ञों के अनुसार, एचएफएनसी मशीन गंभीर रूप से बीमार नवजातों को उच्च प्रवाह वाली ऑक्सीजन उपलब्ध कराती है। इससे कई मामलों में वेंटिलेटर जैसी जटिल और आक्रामक प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं पड़ती तथा नवजातों के फेफड़ों को सुरक्षित रखते हुए उनकी रिकवरी तेजी से होती है।

वरिष्ठ चिकित्सक रहे मौजूद

कार्यक्रम में शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. आशीष जैन, डॉ. शालिनी हजेला, डॉ. रूपा अग्रवाल, डॉ. अजीत असाटी, डॉ. महेंद्र सिंह चौहान सहित अनेक वरिष्ठ चिकित्सक उपस्थित रहे। डॉ. अंकित जैन ने संस्था का आभार व्यक्त किया। इस दौरान डॉ. रविकांत अरजरिया, डॉ. अमर गंगवानी, डॉ. अंजलि पटेल, डॉ. संजय प्रसाद, डॉ. शीला जैन, डॉ. राघवेंद्र चौबे सहित मेडिकल कॉलेज का स्टाफ मौजूद रहा।

मीडिया प्रभारी डॉ. सौरभ जैन ने बताया कि समाज के सहयोग से सरकारी अस्पतालों में आधुनिक तकनीकों का विस्तार हो रहा है। सीताराम रसोई परिवार द्वारा उपलब्ध कराई गई HFNC मशीन से गंभीर रूप से बीमार नवजातों को समय पर बेहतर उपचार मिलेगा और बाल रोग विभाग की आपातकालीन सेवाएं और अधिक सुदृढ़ होंगी।

SEO Title:

Slug:
bmc-sagar-hfnc-machine-donation-sitaram-rasoi-parivar

Search Description:
सागर के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में सीताराम रसोई परिवार ने शिशु रोग विभाग को अत्याधुनिक HFNC मशीन भेंट की। इससे गंभीर नवजातों को बेहतर ऑक्सीजन सपोर्ट और आधुनिक उपचार मिलेगा।

Labels:
BMC Sagar, HFNC Machine, Sitaram Rasoi Parivar, Health News, Sagar News, Medical College, Neonatal Care, MP News

Share:

सागर: मां की अंतिम इच्छा पूरी कर बेटियों ने कराया मरणोपरांत नेत्रदान, दो लोगों की जिंदगी में लौटेगा उजाला


सागर: मां की अंतिम इच्छा पूरी कर बेटियों ने कराया मरणोपरांत नेत्रदान, दो लोगों की जिंदगी में लौटेगा उजाला


तीनबत्ती न्यूज: 06 जुलाई, 2026

सागर। सागर में सड़क दुर्घटना में 52 वर्षीय श्रीमती भारती जैन के आकस्मिक निधन के बाद उनकी बेटियों ने मां की अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए मरणोपरांत नेत्रदान कराकर मानवता की मिसाल पेश की। इस प्रेरणादायी निर्णय से दो दृष्टिहीन लोगों के जीवन में नई रोशनी लौटने की उम्मीद जगी है।

यह भी पढ़ें: बुंदेलखंड चिकित्सा महाविद्यालय में सफल नेत्र प्रत्यारोपण:8 नेत्रदान से तीन मरीजों की जिंदगी में लौटी रोशनी : अब तक 25 को मिला उजाला

स्थानीय चकराघाट स्थित लक्ष्मीनारायण मंदिर के पास रहने वाली श्रीमती भारती जैन का सड़क हादसे में निधन हो गया। शोक की इस घड़ी में उनकी बेटियों प्रियांशी, गुंजन और मिनी ने बताया कि उनकी मां जीवनभर नेत्रदान करने की इच्छा व्यक्त करती थीं। उनके निधन के तुरंत बाद परिजनों और दामाद प्रखर जैन ने बिना विलंब किए मोहन फाउंडेशन को सूचना दी।

यह भी पढ़ेंसिंघई परिवार ने पेश की नेत्रदान- देहदान की मिसाल: श्रीमती किरण सिंघई का नेत्रदान और देहदान : तीन साल पहले पति प्रकाश चंद सिंघई का भी हुआ था देहदान

सूचना मिलते ही मोहन फाउंडेशन ने बुंदेलखंड चिकित्सा महाविद्यालय (बीएमसी), सागर के आई बैंक की प्रभारी डॉ. सारिका चौहान को अवगत कराया। इसके बाद आई बैंक की टीम तत्काल बीएमसी की मोर्चरी पहुंची और परिजनों की लिखित सहमति तथा सभी चिकित्सीय मानकों का पालन करते हुए कॉर्निया सुरक्षित निकालकर आई बैंक में संरक्षित किया गया।

यह भी बढ़ेपुनीत कार्य: निधन के बाद परिजनों ने कराया कामता प्रसाद का नेत्रदान : बीएमसी आई बैंक की टीम ने सुरक्षित किया कॉर्निया

परिवार का निर्णय समाज के लिए प्रेरणा

बीएमसी के अधिष्ठाता डॉ. पी. एस. ठाकुर ने शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि अपार दुख के समय भी जैन परिवार ने जिस संवेदनशीलता का परिचय दिया, वह समाज के लिए अनुकरणीय है। उन्होंने कहा कि मां की अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए बेटियों द्वारा लिया गया यह निर्णय दो दृष्टिहीन व्यक्तियों के जीवन में उजाला लाने का माध्यम बनेगा।

वहीं नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. प्रवीण खरे ने भी परिवार के इस निर्णय की सराहना करते हुए इसे सामाजिक जागरूकता और मानव सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।

यह भी पढ़ेंमानवता की सर्वोच्च सेवा: सुगंधी बाई जैन ने मरणोपरांत किया नेत्रदान और देहदान : गार्ड ऑफ ऑनर देकर किया सम्मानित

इनकी रही महत्वपूर्ण भूमिका

पूरी प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न कराने में आई बैंक की टीम के डॉ. अंजलि वीरानी पटेल, डॉ. पुरवा, डॉ. मोदी, डॉ. अजय, डॉ. हर्षिता सहित नर्सिंग स्टाफ राम लखन मीणा, ओमप्रकाश कुमावत एवं अन्य पैरामेडिकल कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

क्या है नेत्रदान?

चिकित्सकों के अनुसार नेत्रदान वास्तव में कॉर्निया दान होता है। यह पूरी तरह स्वैच्छिक प्रक्रिया है और मृत्यु के 4 से 6 घंटे के भीतर इसे पूरा करना आवश्यक होता है। बीएमसी सागर के आई बैंक में यह सुविधा 24 घंटे उपलब्ध है।

नेत्रदान से संबंधित जानकारी या आकस्मिक सूचना के लिए आई बैंक हेल्पलाइन: 7697271108 पर संपर्क किया जा सकता है।


Share:

www.Teenbattinews.com

Archive