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सागर में डॉ. अंकुर भट्ट की पुस्तक ‘Bharata’s Model of Ethical Leadership’ का भव्य विमोचन

सागर में डॉ. अंकुर भट्ट की पुस्तक ‘Bharata’s Model of Ethical Leadership’ का भव्य विमोचन

• भरत का चरित्र त्याग, मर्यादा और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक : शैलेन्द्र जैन


तीनबत्ती न्यूज: 24 अगस्त, 2026

सागर। साहित्यिक संस्था श्यामलम् के तत्वावधान में आयोजित भाषा विमर्श कार्यक्रम में रविवार को होटल रॉयल पैलेस में डॉ. अंकुर भट्ट की अंग्रेजी पुस्तक “Bharata’s Model of Ethical Leadership: Dharma and Values for Modern Management” का भव्य विमोचन किया गया। पुस्तक विमोचन के साथ ही भारतीय ज्ञान परंपरा, नैतिक नेतृत्व और आधुनिक प्रबंधन के संदर्भ में विचार-विमर्श भी हुआ।

कार्यक्रम में शिक्षा, साहित्य, प्रबंधन और आध्यात्मिक क्षेत्र से जुड़े अनेक गणमान्य अतिथियों ने सहभागिता की। समारोह की अध्यक्षता डॉ. वाई.एस. ठाकुर, कुलपति, डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय, सागर ने की, जबकि मुख्य अतिथि सागर विधायक शैलेन्द्र जैन रहे । कार्यक्रम में आध्यात्मिक वक्ता एवं कथा वाचक पलक किशोरी जी, रीवा, महंत श्री केशव गिरी जी महाराज, प्रो. डॉ. योगेश कुमार उपाध्याय, डॉ. प्रकाश शुक्ला तथा डॉ. मनविंदर सिंह पाहवा, डीन एवं प्रोफेसर, वाणिज्य एवं प्रबंधन विभाग, डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

सरस्वती वंदना से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ

समारोह का शुभारंभ श्रीमती अंशुल खरे द्वारा प्रस्तुत मनोहारी सरस्वती वंदना से हुआ। कार्यक्रम का प्रभावी एवं गरिमामय संचालन माधव सिंह, प्रोड्यूसर, EMMRC सागर ने किया। श्यामलम् के अध्यक्ष उमाकांत मिश्र एवं पुस्तक के लेखक डॉ. अंकुर भट्ट ने अतिथियों का पुष्पहार, शाल एवं श्रीफल भेंट कर स्वागत किया।

भरत के आदर्शों से आधुनिक नेतृत्व को जोड़ने की पहल

मुख्य अतिथि विधायक शैलेन्द्र जैन ने कहा कि “भरत का चरित्र त्याग, मर्यादा और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक है। आज के समय में भरत के आदर्शों को आधुनिक नेतृत्व से जोड़ना निश्चित रूप से समाज और युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक है।”

उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और रामायण में ऐसे अनेक आदर्श चरित्र हैं, जिनसे वर्तमान पीढ़ी नेतृत्व, कर्तव्य और सामाजिक उत्तरदायित्व की प्रेरणा ले सकती है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कुलपति प्रो. डॉ. वाई.एस. ठाकुर ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में नेतृत्व और प्रबंधन के अनेक महत्वपूर्ण सूत्र निहित हैं। डॉ. अंकुर भट्ट ने भरत के चरित्र के माध्यम से इन मूल्यों को आधुनिक प्रबंधन के संदर्भ में प्रस्तुत करने का सराहनीय प्रयास किया है।

त्याग और निःस्वार्थ सेवा से मिलता है नेतृत्व का वास्तविक अर्थ

महंत श्री केशव गिरी जी महाराज ने अपने आशीर्वचन में कहा कि भरत का जीवन त्याग, धर्म और निःस्वार्थ सेवा का अनुपम उदाहरण है। यदि नेतृत्व में इन मूल्यों को अपनाया जाए तो समाज और राष्ट्र दोनों को नई दिशा मिल सकती है।

पलक किशोरी जी ने कहा कि रामायण केवल कथा नहीं, बल्कि जीवन और नेतृत्व की शिक्षा देने वाला महान ग्रंथ है। भरत का चरित्र यह सिखाता है कि सच्चा नेतृत्व पद से नहीं, बल्कि त्याग, सेवा और धर्म से निर्मित होता है।

आधुनिक प्रबंधन में भारतीय चिंतन की आवश्यकता

डॉ. प्रकाश शुक्ला ने कहा कि आधुनिक प्रबंधन शिक्षा में भारतीय चिंतन और नैतिक मूल्यों का समावेश समय की आवश्यकता है। यह पुस्तक विद्यार्थियों और प्रबंधन के अध्येताओं को नेतृत्व का एक भारतीय दृष्टिकोण प्रदान करती है।

डॉ. मनविंदर सिंह पाहवा ने कहा कि आज के कॉर्पोरेट और संस्थागत वातावरण में नैतिक नेतृत्व की आवश्यकता अत्यंत महत्वपूर्ण है। भरत के चरित्र को आधुनिक प्रबंधन से जोड़ना इस पुस्तक की विशिष्टता है।

वक्ताओं ने पुस्तक को भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक प्रबंधन के बीच एक सार्थक सेतु बताया। पुस्तक में रामायण के भरत के चरित्र के माध्यम से धर्म, त्याग, निःस्वार्थ भाव, नैतिकता, नेतृत्व, उत्तरदायित्व एवं मूल्य-आधारित प्रबंधन जैसे विषयों को आधुनिक नेतृत्व के संदर्भ में प्रस्तुत किया गया है।

भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक प्रबंधन से जोड़ना उद्देश्य : डॉ. अंकुर भट्ट

पुस्तक के लेखक डॉ. अंकुर भट्ट ने कहा कि भरत का चरित्र सत्ता प्राप्ति का नहीं, बल्कि कर्तव्य, त्याग, मर्यादा और नैतिक नेतृत्व का अद्वितीय उदाहरण है। उनका प्रयास है कि भारतीय ग्रंथों एवं ज्ञान परंपरा में निहित जीवन-मूल्यों को आधुनिक प्रबंधन और नेतृत्व के लिए उपयोगी बनाया जाए। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में संस्थानों और संगठनों के सामने केवल बेहतर परिणाम देने की चुनौती नहीं है, बल्कि निर्णय प्रक्रिया में नैतिकता, उत्तरदायित्व और मानवीय मूल्यों को बनाए रखना भी आवश्यक है। ऐसे में भारतीय ज्ञान परंपरा से नेतृत्व के मूल सिद्धांतों को समझना महत्वपूर्ण हो जाता है।

बड़ी संख्या में प्रबुद्धजनों की रही उपस्थिति

समारोह में शिक्षाविदों, विद्यार्थियों, साहित्यप्रेमियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं शहर के गणमान्य नागरिकों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। आयोजन की गरिमा अतिथियों के विचारों और आशीर्वचनों से और बढ़ गई।

इस अवसर पर डॉ. गजाधर सागर, पी.एन. मिश्रा, टी.आर. त्रिपाठी, डॉ. मनीष झा, शिवरतन यादव, आर.के. तिवारी, हरिसिंह ठाकुर, कुंदन पाराशर, हरी शुक्ला, डॉ. नरेंद्र प्यासी, मुकेश तिवारी, श्रीमती कविता शुक्ला, श्रीमती सुनीला सराफ, डॉ. सुश्री शरद सिंह, नीलिमा पिंपलापुरे, श्रीमती अर्चना प्यासी, अंबर चतुर्वेदी, नवनीत धगट, डॉ. अभय सिंह, वी.एन. मिश्रा, अपूर्व मिश्र, दामोदर चक्रवर्ती, आनंद मिश्रा, संजू पाण्डेय सहित बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।

समारोह के अंत में श्यामलम् के कार्यकारिणी सदस्य रमाकांत शास्त्री ने सभी अतिथियों एवं उपस्थितजनों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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