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एक दिन में 1.20 लाख पौधे लगाने का संकल्प : 18 जुलाई को प्रत्येक नागरिक बने अभियान का सहभागी : पूर्व गृहमंत्री भूपेन्द्र सिंह

एक दिन में 1.20 लाख पौधे लगाने का संकल्प : 18 जुलाई को प्रत्येक नागरिक बने अभियान का सहभागी : पूर्व गृहमंत्री भूपेन्द्र सिंह                  •एक पेड़ माँ के नाम अभियान


तीनबत्ती न्यूज: 17 जुलाई, 2026

सागर। पूर्व गृहमंत्री एवं वरिष्ठ विधायक भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि खुरई विधानसभा क्षेत्र में 18 जुलाई को एक ही दिन में 1 लाख 20 हजार पौधे लगाने का संकल्प लिया गया है। यह केवल वृक्षारोपण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, जल संवर्धन और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के प्रति समाज की सामूहिक जिम्मेदारी का महाअभियान है। उन्होंने क्षेत्र के प्रत्येक नागरिक, युवा, किसान, मातृशक्ति, विद्यार्थियों, जनप्रतिनिधियों एवं सामाजिक संगठनों से इस अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति ‘‘एक पेड़ माँ के नाम‘‘ अवश्य लगाए तथा उसके संरक्षण का भी संकल्प ले। उन्होंने कहा कि लगाया हुआ पौधा तभी सार्थक है, जब वह वृक्ष बनकर समाज, प्रकृति और मानव जीवन की सेवा करे।

भारतीय संस्कृति में बसे है वृक्ष

श्री भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि भारतीय संस्कृति में वृक्षों को केवल हरियाली का प्रतीक नहीं माना गया है, बल्कि उन्हें जीवन, धर्म, प्रकृति और सृष्टि के आधार के रूप में सम्मान दिया गया है। हमारे वेद, उपनिषद, पुराण और स्मृतियां वृक्षों को देवतुल्य मानकर उनके संरक्षण और संवर्धन का संदेश देती हैं। आज जब पूरा विश्व जलवायु परिवर्तन, बढ़ते तापमान, जल संकट और प्रदूषण जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है, तब हजारों वर्ष पूर्व भारतीय ऋषियों द्वारा दिया गया प्रकृति संरक्षण का संदेश और अधिक प्रासंगिक हो गया है। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति ने प्रकृति और मानव जीवन के बीच जिस संतुलन की कल्पना की थी, वही आज पूरे विश्व के लिए मार्गदर्शक बन रहा है।

जीवनदायिनी और रोग नाशक वृक्ष

उन्होंने कहा कि अथर्ववेद में वनस्पतियों को जीवनदायिनी और रोगों का नाश करने वाली शक्ति बताया गया है, जबकि श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है - ‘‘अश्वत्थः सर्ववृक्षाणाम्‘‘, अर्थात सभी वृक्षों में मैं पीपल हूँ। यह केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति भारतीय चिंतन की गहराई का प्रमाण है। पीपल, वट, नीम, बेल, तुलसी, आंवला, अशोक और अन्य पूजनीय वृक्षों की परंपरा हमारे पूर्वजों ने इसलिए विकसित की, ताकि समाज वृक्षों की रक्षा को अपना नैतिक और धार्मिक दायित्व समझे तथा प्रकृति का संतुलन बना रहे।

शास्त्रों में वर्णन 

श्री भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि हमारे पुराणों में भी वृक्षों के महत्व का अत्यंत प्रभावी वर्णन मिलता है। शास्त्रों में कहा गया है - ‘‘दशकूपसमावापी, दशवापीसमो ह्रदः। दशह्रदसमः पुत्रो, दशपुत्रसमो द्रुमः॥‘‘ अर्थात दस कुओं के बराबर एक बावड़ी, दस बावड़ियों के बराबर एक तालाब, दस तालाबों के बराबर एक पुत्र और दस पुत्रों के समान एक वृक्ष का महत्व माना गया है। उन्होंने कहा कि हजारों वर्ष पहले हमारे ऋषियों ने यह समझ लिया था कि वृक्ष केवल फल, फूल और छाया देने वाले जीवित संसाधन नहीं हैं, बल्कि वे जल, वायु, मिट्टी, जैव विविधता और सम्पूर्ण जीवन चक्र के आधार हैं।

उन्होंने कहा कि आधुनिक विज्ञान भी आज उसी सत्य की पुष्टि कर रहा है, जिसे भारतीय संस्कृति हजारों वर्षों से स्वीकार करती आई है। वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि वृक्ष वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर जीवनदायिनी ऑक्सीजन प्रदान करते हैं, प्रदूषण कम करते हैं, तापमान नियंत्रित रखते हैं, वर्षा चक्र को संतुलित बनाए रखने में सहायता करते हैं तथा मिट्टी के कटाव को रोकते हैं। यही कारण है कि आज वृक्षारोपण केवल पर्यावरणीय कार्यक्रम नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व से जुड़ा राष्ट्रीय दायित्व बन चुका है।


श्री भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि विशेषज्ञों के अनुसार एक परिपक्व वृक्ष प्रतिवर्ष बड़ी मात्रा में कार्बन अवशोषित करता है और अनेक लोगों के लिए स्वच्छ वायु उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शहरों में बढ़ते तापमान को नियंत्रित करने में वृक्ष प्राकृतिक शीतलता प्रदान करते हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों की नमी बनाए रखने, पशुओं को आश्रय देने और जैविक संतुलन को सुरक्षित रखने में उनका महत्वपूर्ण योगदान होता है। इसलिए वृक्षों की संख्या बढ़ाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गई है।

गिरते भूजल को बचाने का संकल्प

उन्होंने कहा कि देश के अनेक हिस्सों में लगातार गिरता भूजल स्तर और अनियमित वर्षा प्रकृति के असंतुलन का संकेत है। वृक्ष वर्षा के जल को धरती के भीतर पहुंचाने, भूजल का पुनर्भरण करने तथा जल स्रोतों को जीवित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि जल संरक्षण को सफल बनाना है, तो बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण के साथ-साथ वृक्षों का संरक्षण भी सुनिश्चित करना होगा। उन्होंने कहा कि जल और वृक्ष एक-दूसरे के पूरक हैं तथा दोनों के बिना मानव जीवन की कल्पना संभव नहीं है।


उन्होंने कहा कि आज प्रदूषण और बदलती जीवनशैली के कारण अनेक प्रकार की बीमारियाँ तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे समय में वृक्ष मानव जीवन के सबसे बड़े प्राकृतिक संरक्षक बनकर सामने आते हैं। वृक्ष वायु को शुद्ध करते हैं, धूल और धुएँ के कणों को रोकते हैं, वातावरण में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाते हैं तथा मानसिक तनाव को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आयुर्वेद में नीम, आंवला, बेल, अशोक, अर्जुन और पीपल जैसे वृक्षों को औषधीय गुणों से भरपूर बताया गया है। इन वृक्षों का उपयोग हजारों वर्षों से भारतीय चिकित्सा पद्धति में किया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि यदि हम स्वस्थ समाज का निर्माण करना चाहते हैं तो वृक्षों की संख्या बढ़ाना भी उतना ही आवश्यक है, जितना बेहतर चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध कराना।

संरक्षण जरूरी 

श्री भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका संरक्षण करना उससे भी अधिक आवश्यक है। अक्सर बड़े उत्साह के साथ पौधारोपण अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन कुछ समय बाद पौधों की देखरेख नहीं हो पाती, जिससे उनका उद्देश्य अधूरा रह जाता है। एक छोटा-सा पौधा वर्षों की देखभाल के बाद विशाल वृक्ष बनता है और तब जाकर वह समाज, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के लिए उपयोगी सिद्ध होता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को यह संकल्प लेना चाहिए कि वह जितने पौधे लगाए, उनकी सुरक्षा और देखभाल की जिम्मेदारी भी पूरी निष्ठा से निभाए।


उन्होंने कहा कि आज बढ़ती आबादी, तेजी से हो रहे शहरीकरण और अंधाधुंध वृक्षों की कटाई ने प्रकृति के संतुलन को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। भीषण गर्मी, अनियमित वर्षा, सूखा, बाढ़ और बढ़ता प्रदूषण हमें लगातार यह चेतावनी दे रहे हैं कि यदि समय रहते प्रकृति के संरक्षण की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर संकटों का सामना करना पड़ेगा। इसलिए वृक्षारोपण को केवल सरकारी कार्यक्रम मानने की बजाय जनभागीदारी का व्यापक अभियान बनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। समाज का प्रत्येक नागरिक, प्रत्येक परिवार और प्रत्येक युवा इस अभियान का सहभागी बने, तभी इसके वास्तविक और स्थायी परिणाम सामने आएँगे।

शामिल हो अभियान में 

श्री भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि 18 जुलाई को खुरई विधानसभा क्षेत्र में एक ही दिन में 1 लाख 20 हजार पौधे लगाने का लक्ष्य केवल एक संख्या प्राप्त करना नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनचेतना विकसित करना इसका प्रमुख उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि इस महाअभियान में जनप्रतिनिधियों, पंचायतों, नगरीय निकायों, शासकीय विभागों, विद्यालयों, महाविद्यालयों, सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं, किसानों, युवाओं और मातृशक्ति की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। यदि समाज एकजुट होकर इस अभियान को सफल बनाएगा तो खुरई विधानसभा क्षेत्र पूरे प्रदेश के लिए पर्यावरण संरक्षण का प्रेरणादायी उदाहरण बनकर उभरेगा।


उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रारंभ किए गए ष्एक पेड़ माँ के नामष् अभियान ने वृक्षारोपण को जनआंदोलन का स्वरूप दिया है। इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए खुरई विधानसभा क्षेत्र में भी प्रत्येक नागरिक से आग्रह किया गया है कि वह अपनी माता के सम्मान में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाए तथा उसे वृक्ष बनने तक सुरक्षित रखने का संकल्प ले। उन्होंने कहा कि माँ जीवन देती है और वृक्ष जीवन को सुरक्षित रखते हैं, इसलिए यह अभियान भारतीय संस्कृति, मातृभक्ति और प्रकृति संरक्षण का अद्भुत संगम है।


श्री भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को यदि स्वच्छ हवा, शुद्ध जल, संतुलित जलवायु और सुरक्षित भविष्य देना है तो वृक्षारोपण को केवल एक दिवस का कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनजीवन का स्थायी संस्कार बनाना होगा। प्रत्येक पौधा भविष्य का प्रहरी है और प्रत्येक वृक्ष मानव सभ्यता की सुरक्षा का आधार है। उन्होंने कहा कि प्रकृति ने हमें जो अमूल्य धरोहर प्रदान की है, उसकी रक्षा करना हम सभी का नैतिक और सामाजिक दायित्व है।


उन्होंने कहा कि वे खुरई विधानसभा क्षेत्र के प्रत्येक नागरिक, युवा, किसान, महिला, विद्यार्थी, सामाजिक संगठन, स्वयंसेवी संस्था तथा जनप्रतिनिधि से आत्मीय आग्रह करते हैं कि वे 18 जुलाई के इस महाअभियान में पूरे उत्साह के साथ सहभागी बनें। प्रत्येक व्यक्ति ष्एक पेड़ माँ के नामष् अवश्य लगाए और उसके संरक्षण का भी संकल्प ले। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जनसहभागिता के बल पर खुरई विधानसभा क्षेत्र न केवल एक ही दिन में 1 लाख 20 हजार पौधारोपण का लक्ष्य प्राप्त करेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में पूरे प्रदेश के लिए एक नई मिसाल भी स्थापित करेगा। उन्होंने कहा कि हरित, समृद्ध, स्वच्छ और संतुलित पर्यावरण ही आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की सबसे बड़ी गारंटी है और यही अभियान का मूल उद्देश्य भी है।



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