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रविवार, 6 दिसंबर 2020

बच्चों की मौत का मामला, कमिश्नर ने दवाओं, चिकित्सकों, उपकरणों का पर्याप्त इंतजाम के दिए निर्देश

बच्चों की मौत का मामला, कमिश्नर ने  दवाओं, चिकित्सकों, उपकरणों का पर्याप्त इंतजाम के दिए निर्देश 

★ संभागायुक्त  मुकेष शुक्ला ने बुंदेलखण्ड मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों के साथ समीक्षा की


सागर। सागर संभाग के कमिष्नर श्री मुकेश शुक्ला ने बुंदेलखण्ड मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों के साथ नवजात शिशुओं की पिछले तीन माह में अधिक संख्या में हुई मृत्यु की गहन समीक्षा की। कमिष्नर श्री शुक्ला ने कहा कि नवजात षिषुओं की मृत्यु दर में कमी लाने की दिषा में हर संभव प्रयास किये जायें। मेडिकल कॉलेज से संबद्व अस्पताल में नवजात षिषओं के इलाज के लिए चिकित्सकों, दवाओं और उपकरणों की कमी नही होने दी जाये। इसके लिए उन्होंने डीन डा. आर.एस. वर्मा को षिषुओं के इलाज के लिए चिकित्सकों की पर्याप्त व्यवस्था बनाये रखने के निर्देष दिये। उन्होंने अस्पताल के षिषु गहन चिकित्सा इकाई (एसएनसीयू) और बाल गहन चिकित्सा ईकाई (पीआईसीयू) में उपलब्ध उपकरणों एक्सरे, सीटी स्केन और सोनोग्राफी मषीन की जानकारी ली। कमिष्नर ने दोनों षिषु रोग वार्डो में उपकरणों की माकूल व्यवस्था बनाए रखने तथा आवष्यकता होने पर उपकरणों को क्रय करने के निर्देष भी दिये।
श्री मुकेष शुक्ला ने कहा अगले तीन माह के लिये सभी आवष्यक दवाओं का इंतजाम भी अस्पताल में होना चाहिये। उन्होंने चिकित्सकों को सख्त हिदायत दी कि किसी भी नवजात षिषु की मृत्यु चिकित्सक, दवा और उपकरणों की कमी के कारण नही होना चाहिए। 

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चिकित्सकों और नर्सिंग स्टॉफ को चाहिए कि वे नवजात षिषुओ के हो रहे उपचार पर सतत निगरानी रखें। इसमें नर्सिंग स्टॉफ की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए उन्हें अन्य स्टाफ के साथ इस कार्य में लगाया जाए। पिछले 3 महिने में जिस तेजी से षिषु मृत्यु दर का ग्राफ बढ़ा है, वह चिंता का विषय है। उसमें कमी लाने की दिषा में तेजी से प्रयास किये जाए। षिषु मृत्यु दर को लेकर अन्य किसी जिले या मेडिकल कॉलेज से तुलना नही की जाए। बल्कि सभी एकजुट होकर समन्वय के साथ मृत्यु दर में कमी लाएं।
श्री मुकेष शुक्ला ने चिकित्सकों से कहा कि वे अपना पूरा ध्यान इस बात पर फोकस करे कि षिषु मृत्यु दर को कैसे रोका जाए। षिषु मृत्यु के कारणों का पता लगाकर उन्हें दूर करने का प्रयास हों। शासन के पास धनराषि और संसाधनों की कमी नहीं है, बावजूद इसके नवाजात षिषुओं की मृत्यु होना सभी के लिये चिंता का विषय है। श्री शुक्ला ने टेक्नीकल स्टॉफ को प्रषिक्षित करवाने के निर्देष भी दिये। उन्होंने नर्सिंग स्टॉफ की संख्या में वृद्वि के लिये भी निर्देषित किया। चिकित्सक षिषु मृत्यु दर में कमी लाने के लिये नियमित मानीटरिंग करें। उन्होंने षिषुओ के उपचार में जुटे चिकित्सकों को पूरी जवाबदेही से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने के लिय कहा।      

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शिशु वार्डों का निरीक्षण
कमिष्नर श्री मुकेष शुक्ला ने बीएमसी के अस्पताल के षिषु गहन चिकित्सा इकाई (एसएनसीयू) और बाल गहन चिकित्सा इकाई (पीआईसीयू) का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने षिषु वार्डों में भर्ती नवजात बच्चों के उपचार के संबंध में चिकित्सकों से चर्चा की।

समिति का गठन

कमिष्नर श्री मुकेष शुक्ला के निर्देष पर बुंदेलखण्ड मेडिकल कॉलेज के डीन डा. आर.एस. वर्मा ने दोनों षिषु चिकित्सा इकाईयों (एसएन सीयू एवं पीआईसीयू) में नवम्बर माह में नवजात षिषुओं की हुई मृत्यु के संबंध में समिति गठित की है। समिति नवजात षिषुओ की मृत्यु के संबंध में डेथ ऑडिट रिर्पोट तैयार कर दो दिवस में डीन को सौपेंगी। समिति में मेडिसिन विभाग के प्राध्यापक डा. अभय एस.तिर्कां को अध्यक्ष तथा एनेस्थिषिया के सह प्राध्यापक डा. सत्येन्द्र उइके, षिषु रोग विभाग के सह प्राध्यापक डा. आषीष जैन व महिला प्रसूति विभाग की सहायक प्राध्यापक डा. प्रियंका तिवारी को सदस्य मनोनीत किया गया है।          

 

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