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सरकार की जनविरोधी नीतियों और प्रशासनिक विफलताओं के खिलाफ कांग्रेस का शंखनाद 11 जनवरी को

सरकार की जनविरोधी नीतियों और प्रशासनिक विफलताओं के खिलाफ कांग्रेस का शंखनाद 11 जनवरी को


तीनबत्ती न्यूज: 09 जनवरी, 2026

सागर/ केंद्र और प्रदेश में बैठी भाजपा की सरकारों द्वारा जनता पर चौतरफा प्रहार किया जा रहा है। ये सरकारें जनता को बुनियादी सुविधाएं देने में पूरी तरह विफल रही है और अब संविधान व लोकतंत्र की जड़ों पर प्रहार कर रही है। आम गरीब, मजदूर और युवाओं के हकों को छीना जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ इंदौर में जनता को जहरीला पानी पिलाकर और मतदाता सूची से नाम काटकर अपनी विफलताओं को छिपा रही है। सरकार की इन जनविरोधी नीतियों और प्रशासनिक विफलताओं से प्रदेश और देश की जनता कराह रही है।

ये आरोप जिला शहर कांग्रेस अध्यक्ष महेश जाटव ने शुक्रवार को यहां आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा की केंद्र सरकार तथा डॉ मोहन यादव के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार पर लगाए हैं।पत्रकारवार्ता का संचालन मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रवक्ता डॉ संदीप सबलोक ने किया।

प्रदेश कांग्रेस के पूर्व उपाध्यक्ष अमित रामजी दुबे, पूर्व विधायक सुनील जैन, नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष बाबू सिंह बब्बू यादव, वरिष्ठ नेता सुरेंद्र सुहाने, मुकुल पुरोहित, रामकुमार पचौरी, चैतन्य पाण्डे, राहुल चौबे, आनंद हेला, कमलेश तिवारी आदि की उपस्थिति में जिला शहर कांग्रेस अध्यक्ष महेश जाटव ने कहा कि कांग्रेस की राष्ट्रीय नेता आदरणीय सोनिया गांधी जी के मार्गदर्शन में यूपीए की डॉ मनमोहन सिंह सरकार ने देश में ग्रामीण बेरोजगारी, भुखमरी और पलायन को खत्म करने के लिए "काम को संवैधानिक अधिकार"  के रूप में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कानून (मनरेगा) इस देश के वंचित वर्ग को समर्पित किया था। लेकिन देश के मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी इस कानून में परिर्वतन लाकर न केवल महात्मा गांधी के नाम से व्यक्तिगत दुर्भावना रखते हुए उनके नाम को मिटा देना चाहते हैं बल्कि देश के वंचित वर्ग का भी हक को छीन रहे हैं। उनका यह बदलाव  "मज़दूरों की मौत का वारंट" साबित हो रहा है।

उन्होंने बताया कि कांग्रेस ने भाजपा सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस नीति के खिलाफ 'आर-पार' की लड़ाई का ऐलान किया। भाजपा एक तरफ मनरेगा जैसे क्रांतिकारी कानून को खत्म कर मज़दूरों को गुलाम बनाना चाहती है।प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता डॉ संदीप सबलोक ने आरोप लगाया कि इस नए कानून में ठेकेदारी प्रथा की वापसी करते हुए ग्राम पंचायतों की शक्तियां छीनकर अब फैसले दिल्ली से 'रिमोट कंट्रोल' द्वारा लिए जाएंगे। स्थानीय मज़दूरों की जगह ठेकेदारों को लाकर लेबर सप्लाई का खेल शुरू किया जा रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की मोदी सरकार इस नए कानून के माध्यम से गांव के गरीब के हाथ से काम और मज़दूरी छीनने की साजिश कर रही है। पहले केंद्र सरकार मज़दूरी का 100% भुगतान करती थी, लेकिन अब राज्यों पर 40% का बोझ डालकर योजना को ठप्प किया जा रहा है। केंद्रीय बजट में पिछले तीन वर्षों से मनरेगा के बजट में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है, जबकि महंगाई चरम पर है।NMMS ऐप और आधार-आधारित भुगतान प्रणाली की अनिवार्यता के कारण 2 करोड़ मज़दूरों से काम का हक छीन लिया गया है।पिछले 11 वर्षों में मोदी सरकार ने मज़दूरी में नाममात्र की बढ़ोतरी की है।

कांग्रेस ने सवाल पूछा कि अगर आज हजारों नाम "फर्जी" बताकर काटे जा रहे हैं, तो ये नाम पहले किसके संरक्षण में और कैसे जोड़े गए थे? यह स्पष्ट है कि भाजपा ने पिछले चुनावों में लाभ लेने के लिए अवैध रूप से नाम जुड़वाए थे और अब अपनी सुविधा के अनुसार नाम कटवा रही है। वरिष्ठ नेता अमित रामजी दुबे ने कहा कि भाजपा का असली चेहरा अब बेनकाब हो चुका है। एक तरफ मज़दूरों को काम नहीं मिल रहा, दूसरी तरफ शहरों में पीने का पानी साफ नहीं है, और जब जनता वोट देने जाती है तो सूची से नाम गायब मिलते हैं। जीतू पटवारी जी के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर भाजपा के इस 'त्रिकोणीय भ्रष्टाचार' की पोल खोलेंगे। जिसका शंखनाद रविवार 11 जनवरी को इंदौर में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी जी के नेतृत्व में होगा। इस विरोध प्रदर्शन में प्रदेश भर से कांग्रेस पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, कार्यकर्ता व आम जनता हिस्सा ले रहे हैं।

नेता प्रतिपक्ष बाबू सिंह बब्बू यादव ने बताया कि शहर में पाइप लाइन के लीकेज व दूषित पानी को लेकर कांग्रेस पार्षद दल कई बार निगम प्रशासन को चेता चुका है लेकिन इंदौर की घटना से सबक नहीं लिया जा रहा है। इस संबंध में निगम प्रशासन के खिलाफ बड़े स्तर पर आंदोलन की तैयारी की जा रही है।



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