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वेंटिलेटर: मौत की आहट नहीं, जीवन की नई उम्मीद भी : BMC में वेंटिलेटर से बचाई महिला की जान

वेंटिलेटर: मौत की आहट नहीं, जीवन की नई उम्मीद भी : BMC में वेंटिलेटर से बचाई महिला की जान


तीनबत्ती न्यूज: 28 अप्रैल 2026

सागर : अक्सर जब हम सुनते हैं कि कोई मरीज वेंटिलेटर पर है, तो मन में एक डर बैठ जाता है कि शायद अब सब खत्म होने वाला है। कई बार इसे 'जाते हुए को आखिरी सलाम' जैसे मुहावरे से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में वेंटिलेटर वही संजीवनी बूटी साबित हो रहा है, जिसने रामायण काल में लक्ष्मण जी के प्राण बचाए थे।

बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज  में हाल ही में एक ऐसा ही चमत्कारिक मामला सामने आया, जहाँ वेंटिलेटर और चिकित्सकों की तत्परता ने एक महिला को मौत के मुँह से बाहर निकाल लिया।

गर्भवती महिला थी पीड़ित गम्भीर बीमारी से

मीडिया प्रभारी डॉ सौरभ जैन ने बताया कि स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में भर्ती एक गर्भवती महिला (9वां महीना) को 'एक्यूट पलमोनरी एडिमा' की गंभीर शिकायत थी। इस स्थिति में मरीज के फेफड़ों में पानी भर जाता है, जिससे सांस लेना लगभग असंभव हो जाता है। भर्ती के समय महिला का ऑक्सीजन लेवल गिरकर महज 30-35% रह गया था, जबकि सामान्यतः इसे 98% होना चाहिए। स्थिति अत्यंत नाजुक थी और जीवन की डोर कमजोर पड़ रही थी।

सटीक इलाज और वेंटिलेटर का साथ

मरीज को तुरंत 'एनेस्थीसिया आईसीयू' में शिफ्ट किया गया। यहाँ चिकित्सकों ने दोतरफा रणनीति अपनाई। मरीज को लगातार एक दिन और एक रात वेंटिलेटर पर रखा गया ताकि शरीर को जरूरी ऑक्सीजन मिलती रहे। भारी मात्रा में डाईयूरेटिक्स दवाएं दी गईं, जिससे शरीर में जमा अतिरिक्त पानी यूरिन के जरिए बाहर निकल सके।

सही समय पर वेंटिलेटर सपोर्ट और गहन चिकित्सा का ही परिणाम रहा कि महज दो दिनों के भीतर वह महिला आज पूरी तरह स्वस्थ है।

इस सफल उपचार में स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की यूनिट प्रभारी डॉ. जागृति किरण नागर एवं डॉ. रुचि जायसवाल ने प्रसव पूर्व और प्रसव उपरांत देखभाल की कमान संभाली। वहीं, एनेस्थीसिया आईसीयू में विभागाध्यक्ष डॉ सर्वेश जैन की टीम ने गहन चिकित्सा प्रबंधन कर मरीज की जान बचाई।

बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के अधिष्ठाता डॉ. पी. एस. ठाकुर ने इस सफल उपचार पर पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह मामला हमारे संस्थान की विशेषज्ञता और संसाधनों की उपलब्धता का उत्कृष्ट उदाहरण है। आम जनमानस में यह गलत धारणा है कि वेंटिलेटर इलाज9 का अंतिम चरण है, जबकि सच यह है कि यह जीवन रक्षक तकनीक है जो गंभीर स्थिति में मरीज के अंगों को आराम देकर उन्हें रिकवर होने का समय देती है। बीएमसी में हमारे पास उच्च स्तरीय आईसीयू सुविधाएं और कुशल विशेषज्ञों की टीम है, जो चौबीसों घंटे जटिल से जटिल मामलों को संभालने के लिए तत्पर है। 

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