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गवेषणासंवाद:मृत्यु के बाद के विधिक अधिकार: देहदान और अंगदान करने के नियमों के सरलीकरण कराए जाने पर विमर्श

गवेषणासंवाद:मृत्यु के बाद के विधिक अधिकार: देहदान और अंगदान करने के नियमों के सरलीकरण कराए जाने पर विमर्श


तीनबत्ती न्यूज|26 अप्रैल, 2026

सागर: मानव गरिमा और भेदभाव रहित वैज्ञानिक दृष्टिकोण के लिए समर्पित संस्था ‘गवेषणा’ के 24 वें नियमित संवाद क्रम का आयोजन, नगर के तिली वार्ड स्थित जिज्ञासा वाचनालय में हुआ। संवाद आयोजन में विमर्श का विषय मानव जीवन उपरांत विधिक अधिकारों को प्रकाशित करना रहा ।  माननीय उच्च न्यायालय मध्य प्रदेश  की ग्वालियर खंडपीठ  के द्वारा कृषि विभाग के एक कर्मचारी  की मृत्यु के बाद उनकी पदोन्नति और पेंशन  प्रकरण में पारित फैसले को केन्द्र में रख कर विषय के मुख्य वक्ता वरिष्ठ अधिवक्ता और विधि विषेशज्ञ श्री रामदास जी ने भारत में मृत्यु के बाद के अधिकारों पर विस्तृत व्याख्यान दिया । 

व्यख्यान में गरिमा पूर्ण अंतिम संस्कार,प्रतिष्ठा और निजता के अधिकार, संपत्ति के अधिकार,शव का सम्मान, वसीयत, उत्तराधिकार जैसे विषयों पर प्रकाश  डाला । ‘गवेषणा’अध्यक्ष डॉ.मनोहर चौरसिया जो कि स्वयं देहदानी हैं, ने देहदान और अंगदान मामलों में आ रही विधिक और नियमों की समस्याओं पर अपनी बात रखी । देहदान और अंगदान के मामलों में दुरूपयोग की आशंकाओं को निर्मूल करने के कठोर विधिक प्रावधानों के कारण आ रही व्यवहारिक समस्याओं और नैतिकता से जुड़े हुए विषयों के समाधान कराए जाने की आवश्यकता व्यक्त की । 

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नेशनल  ऑर्गन एण्ड टिश्यु  ट्रांसप्लान्ट   ऑर्गनाइजेशन (नोटो) के अधिकार क्षेत्र को प्रदेश और देश  के अधिक मेडिकल कालेजों को  जोड़े जाने की आवश्यकता  पर बल दिया । वर्तमान में राज्य में  नोटो, गांधी मेडिकल कालेज, भोपाल में ही सक्रिय बताया जा रहा है ।  देहदान और अंगदान  वसीयत के बाद  उत्तराधिकारियों की सहमति की विधिक अनिवार्यता को सरलीकृत कराए जाने की आवश्यकता व्यक्त की । 

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गवेषणा की हमेशा से चली आ रही परंपराओं के अनुसार विषयों  में आए तर्कों के विरुद्ध असहमति के वक्तव्यों का आदर पूर्वक स्वागत किया गया । विधि शास्त्र पर केन्द्रित संवाद क्रम में मुख्य वक्ता विधि विशेषज्ञ,विश्विद्यालय शिक्षक और  एड्व्होकेट रामदास जी के संबोधन पर जिज्ञासाओं से जुड़े हुए प्रश्न-उत्तर हुए । 


ये रहे शामिल

आयोजन में डॉ.शिवकुमार चैरसिया, अमिय साक्षी, इंजी. सारांश गौतम, डॉ.चन्दन कुमार, डॉ.तरूण, डॉ.अमरमणि त्रिपाठी,शिवकुमार यादव, बाबूलाल रजक, स्वाति विश्वास, डॉ.अजय कुमार, बृजेश  मिश्रा, सोनू, लकी, और ओम आदि सहभागी रहे ।  प्रो.राजेश  गौतम ने सम्वाद के निष्कर्ष पर बात रखते हुए सहभागी सुधि जनों का आभार व्यक्त किया । 

 

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