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लापरवाही पड़ सकती है भारी: नींद में गले में फंसा नकली दांत, BMC के डॉक्टरों ने तत्परता से बचाई मरीज की जान

लापरवाही पड़ सकती है भारी: नींद में गले में फंसा नकली दांत, BMC के डॉक्टरों ने तत्परता से बचाई मरीज की जान


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  • एक्स-रे में भी नहीं दिख रहे थे प्लास्टिक के कृत्रिम दांत, श्वास नली के पास फंसने से लगातार गिर रहा था ऑक्सीजन लेवल

  • सागर के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (BMC) के ईएनटी और एनेस्थीसिया विभाग की संयुक्त टीम ने जटिल प्रक्रिया के बाद दांत को निकाला सुरक्षित बाहर

  • चिकित्सकों की अपील: डेंट्योर (नकली दांत) का उपयोग करने वाले लोग रात को सोने से पहले इसे निकालना कभी न भूलें
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तीनबत्ती न्यूज:10 जून 2026

सागर: अक्सर छोटी सी लापरवाही भी कितनी जानलेवा साबित हो सकती है, इसका एक प्रत्यक्ष उदाहरण मध्य प्रदेश के सागर स्थित बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (बीएमसी) में देखने को मिला। यहाँ के चिकित्सकों ने अपनी त्वरित निर्णय क्षमता, आपसी तालमेल और उच्च स्तरीय विशेषज्ञता का परिचय देते हुए एक 56 वर्षीय मरीज को मौत के मुंह से सुरक्षित बाहर निकाल लिया। सोते समय गले में नकली दांत फंसने के इस बेहद जटिल मामले में डॉक्टरों की मुस्तैदी से एक बड़ा हादसा टल गया।

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आधी रात को अचानक थमीं सांसें

​प्राप्त जानकारी के अनुसार, दमोह जिले के निवासी 56 वर्षीय रामदास अपने आगे के तीन कृत्रिम (नकली) दांतों का उपयोग करते हैं। बीती रात वे सोने से पहले इन दांतों को निकालना भूल गए। आधी रात के बाद अचानक दांत उनके गले में सरक गए, जिससे उन्हें सांस लेने में गंभीर कठिनाई होने लगी और दम घुटने लगा। स्थिति बिगड़ती देख घबराए परिजन उन्हें लेकर तत्काल आधी रात को ही बीएमसी के नाक, कान एवं गला (ईएनटी) विभाग पहुंचे।

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एक्स-रे में भी नहीं दिखा 'अदृश्य दुश्मन'

​मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए बीएमसी के मीडिया प्रभारी डॉ. सौरभ जैन ने बताया कि यह केस डॉक्टरों के लिए एक बड़ी चुनौती था। चूंकि मरीज के कृत्रिम दांत प्लास्टिक सामग्री (एक्रिलिक/फाइबर) के बने हुए थे, इसलिए शुरुआती एक्स-रे जांच में वे दिखाई नहीं दे रहे थे। ऐसे में डॉक्टरों के सामने स्थिति को भांपना कठिन था, लेकिन डॉक्टरों ने बिना वक्त गंवाए मरीज द्वारा दी गई जानकारी और उसके त्वरित चिकित्सकीय आकलन (Clinical Assessment) के आधार पर तुरंत इलाज का फैसला किया।

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​"चूंकि फॉरेन बॉडी (बाहरी तत्व) आहार नली और श्वास नली के ठीक मुहाने पर फंसी हुई थी, इसलिए मरीज का ऑक्सीजन सैचुरेशन बार-बार तेजी से गिर रहा था। यदि कुछ मिनटों की भी देरी होती, तो श्वास मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो जाता और मरीज की जान जा सकती थी।"

- डॉ. सर्वेश जैन, एनेस्थीसिया विभाग

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जटिल तकनीक से मिली नई जिंदगी

​ईएनटी विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. नीतू बजाज ने बिना समय गंवाए आपातकालीन स्थिति में 'एसोफगोस्कोप' (Esophagoscope) तकनीक का उपयोग किया। उन्होंने बेहद सटीकता के साथ तीन कृत्रिम दांतों के जुड़े हुए पूरे सेट को उसकी धातु की शीथ (तार/क्लिप) सहित गले से सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया।

​इस बेहद जटिल और जोखिम भरी प्रक्रिया के दौरान एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. सर्वेश जैन एवं डॉ. दीपक गुप्ता ने मोर्चा संभाला। उन्होंने मरीज को जनरल एनेस्थीसिया प्रदान कर प्रक्रिया को सुगम बनाया, जिससे मरीज को बिना किसी आंतरिक चोट के ठीक किया जा सका।

चिकित्सकों की गंभीर अपील: रात को जरूर निकालें नकली दांत

​इस सफल ऑपरेशन के बाद डॉ. नीतू बजाज ने आम जनता के लिए एक बेहद जरूरी स्वास्थ्य परामर्श जारी किया है। उन्होंने कहा:

  • ​जो लोग भी डेंट्योर (नकली दांत), डेंटल इम्प्लांट या किसी भी प्रकार की अस्थायी डेंटल डिवाइस का उपयोग करते हैं, वे रात में सोने से पहले उसे अनिवार्य रूप से निकाल दें
  • ​सोते समय शरीर की मांसपेशियां शिथिल हो जाती हैं, जिससे ऐसी चीजों के श्वास या आहार नली में सरकने का खतरा 100 गुना बढ़ जाता है।
  • ​थोड़ी सी भी लापरवाही या आलस किसी भी समय प्राणघातक साबित हो सकता है।

डीन ने थपथपाई टीम की पीठ

​बीएमसी के डीन डॉ. पी. एस. ठाकुर ने इस सफल जीवन रक्षक प्रक्रिया के लिए पूरी चिकित्सकीय टीम को बधाई दी है। उन्होंने कहा, "बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में आपातकालीन एवं विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं चौबीसों घंटे पूरी मुस्तैदी से उपलब्ध हैं। यह सफल मामला हमारे डॉक्टरों की तत्परता, आपसी समन्वय और उत्कृष्ट विशेषज्ञता का प्रमाण है।" उन्होंने आमजन से भी अपील की है कि किसी भी आपात स्थिति में घरेलू नुस्खों में वक्त बर्बाद करने के बजाय सीधे अस्पताल पहुंचें।

वर्तमान स्थिति: डॉक्टरों की इस तत्परता के बाद मरीज रामदास अब पूरी तरह स्वस्थ हैं। उन्हें अस्पताल से छुट्टी (डिस्चार्ज) दे दी गई है और परिजनों ने बीएमसी के डॉक्टरों का सहृदय आभार व्यक्त किया है।

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