एम्स भोपाल में कैंसर पीड़ित 3 साल के मासूम को दवा की जगह लगा दिया 'शवों को सुरक्षित रखने वाला' इंजेक्शन
▪️ बीना के बालक की मौत
तीनबत्ती न्यूज: 13 जून ,2026
भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) भोपाल से चिकित्सा जगत को झकझोर देने वाला एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। अस्पताल स्टाफ की घोर लापरवाही के चलते ब्लड कैंसर से पीड़ित एक 3 साल के मासूम बच्चे की जान चली गई। जांच में खुलासा हुआ है कि बच्चे को दवा देने के बजाय गलती से 'फॉर्मेलिन' रसायन इंजेक्ट कर दिया गया था। फॉर्मेलिन वही खतरनाक केमिकल है, जिसका उपयोग मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में बायोप्सी सैंपल या शवों (Dead Bodies) को सड़ने से बचाने के लिए किया जाता है।
इस मामले में बागसेवनिया थाना पुलिस ने एम्स की आंतरिक जांच रिपोर्ट के आधार पर दो नर्सिंग ऑफिसर्स के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर लिया है।
पिता तीन बार चिल्लाते रहे, लेकिन नर्स ने अनसुनी कर दी चेतावनी
मृतक बच्चे की पहचान सागर जिले की बीना तहसील के ग्राम कौरजा निवासी सार्थक यादव (3 वर्ष) के रूप में हुई है। सार्थक ब्लड कैंसर से पीड़ित था और उसे 15 दिसंबर 2025 को गंभीर हालत में एम्स भोपाल के पीडियाट्रिक वार्ड में भर्ती कराया गया था।
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घटना के वक्त मासूम के पिता ने सिरिंज को देखकर ड्यूटी पर मौजूद नर्स को तीन बार टोकते हुए चेतावनी दी थी कि इसमें सही दवा नहीं है। इसके बावजूद उनकी बात को पूरी तरह अनसुनी कर दिया गया और बच्चे की नस में वह घातक रसायन इंजेक्ट कर दिया गया।
बेड के पास ही छोड़ दिया था खतरनाक केमिकल
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, बायोप्सी के सैंपल को सुरक्षित रखने के लिए एक सिरिंज में फॉर्मेलिन भरकर वार्ड में रखा गया था। ड्यूटी पर तैनात नर्सिंग ऑफिसर अनुका गुजराती ने अस्पताल के कड़े प्रोटोकॉल का उल्लंघन करते हुए इस खतरनाक केमिकल को सुरक्षित स्थान पर रखने के बजाय मरीज के बेड के पास ही छोड़ दिया था।
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एम्स की आंतरिक जांच समिति की रिपोर्ट में यह स्पष्ट तौर पर प्रमाणित हुआ है कि बच्चे की मौत का सीधा और मुख्य कारण नस (Intravenous) के जरिए शरीर में फॉर्मेलिन का पहुंचना था।
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दो नर्सिंग ऑफिसर्स पर एफआईआर (FIR) दर्ज
बागसेवनिया थाना पुलिस ने 11 जून को एम्स की जांच रिपोर्ट मिलने के बाद दोनों दोषी नर्सों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की है:
- नर्स मधुबाला शर्मा: घोर लापरवाही बरतते हुए बच्चे की मौत का कारण बनने के आरोप में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106(1) (लापरवाही से मौत) के तहत केस दर्ज किया गया है।
- नर्स अनुका गुजराती: खतरनाक और जानलेवा रसायन को असुरक्षित तरीके से मरीज के बेड के पास छोड़ने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है।








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