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बेतवा नदी पुनरुद्धार परियोजनाओं की डीपीआर तैयार करने हेतु प्रशिक्षण : जैव विविधता एवं नेचर बेस्ड सॉल्यूशन पर विशेषज्ञों ने किया मार्गदर्शन

बेतवा नदी पुनरुद्धार परियोजनाओं की डीपीआर तैयार करने हेतु प्रशिक्षण : जैव विविधता एवं नेचर बेस्ड सॉल्यूशन पर विशेषज्ञों ने किया मार्गदर्शन


तीनबत्ती न्यूज: 01जुलाई, 2026

भोपाल: नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा नमामि गंगे मिशन के अंतर्गत बेतवा नदी के पुनरुद्धार से संबंधित परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार करने हेतु आयोजित प्रशिक्षण कार्यशाला के दूसरे दिन प्रतिभागियों को प्रदूषण नियंत्रण, जैव विविधता संरक्षण तथा नेचर बेस्ड सॉल्यूशन  विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तार से जानकारी दी।

कार्यशाला के दूसरे दिन की शुरुआत पहले दिन के सत्रों के पुनरावलोकन से हुई। इसके उपरांत "शोधित जल एवं स्लज का पुनः उपयोग एवं  विषय पर सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) के श्री ज्योति प्रसाद ने व्याख्यान देते हुए उपचारित जल एवं स्लज के प्रभावी उपयोग, संसाधनों के संरक्षण तथा सतत शहरी मलजल प्रबंधन की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।



जैव विविधता विषयक तकनीकी सत्र में आईआईटी इंदौर के प्रो. मनीष कुमार गोयल ने संरक्षण, पुनर्जीवन एवं विकेन्द्रीकृत नियोजन के लिए नवाचार आधारित उपकरणों की जानकारी दी। इसके बाद डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया के वरिष्ठ निदेशक श्री सुरेश बाबू ने पौधारोपण के माध्यम से जैव विविधता संरक्षण एवं संवर्धन पर अपने विचार साझा किए। वहीं, दिल्ली विश्वविद्यालय स्थित यमुना बायोडायवर्सिटी पार्क के वैज्ञानिक प्रभारी डॉ. फैयाज ए. खुदसर ने फ्लडप्लेन पुनर्स्थापन के एकीकृत दृष्टिकोण पर विस्तृत प्रस्तुति देते हुए नदी पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण में इसकी उपयोगिता बताई।

दोपहर बाद आयोजित नेचर बेस्ड सॉल्यूशन (एनबीएस) विषयक तकनीकी सत्र में बीबीएयू, लखनऊ के प्रो. वेंकटेश दत्ता ने एनबीएस के माध्यम से छोटी नदियों के पुनर्जीवन की रणनीतियों पर प्रकाश डाला। इसके बाद वेटलैंड इंटरनेशनल के डॉ. असगर नवाब ने आर्द्रभूमि (वेटलैंड) पुनर्स्थापन एवं पारिस्थितिक संरक्षण पर जानकारी दी। द नेचर कंजरवेंसी के डॉ. सुदीप्तो चटर्जी ने नेचर बेस्ड सॉल्यूशन के माध्यम से नदी पुनर्जीवन पहल के विभिन्न सफल उदाहरणों को साझा किया।

दिन के अंतिम तकनीकी सत्र में एबीएस, महाराष्ट्र की सुश्री स्वाति राजेश धोतकर ने जलकुंभी के उपयोग एवं प्रबंधन पर व्याख्यान देते हुए इसके वैज्ञानिक प्रबंधन तथा उपयोग आधारित संभावनाओं से प्रतिभागियों को अवगत कराया। इसके पश्चात प्रतिभागियों के लिए वैलिडेटरी सत्र आयोजित किया गया, जिसमें दिनभर के तकनीकी विषयों की समीक्षा एवं चर्चा की गई। कार्यशाला का समन्वय  प्रोग्राम मैनेजर नमामि नर्मदा  डॉक्टर सीताराम टैगोर ने किया.

कार्यशाला में विशेषज्ञों ने कहा कि बेतवा नदी के पुनरुद्धार की प्रभावी डीपीआर तैयार करने के लिए प्रदूषण नियंत्रण, जैव विविधता संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों का सतत प्रबंधन तथा नेचर बेस्ड सॉल्यूशन का समावेश अत्यंत आवश्यक है। प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों को व्यवहारिक एवं तकनीकी दृष्टिकोण से समृद्ध करते हुए नदी पुनर्जीवन की योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने पर विशेष बल दिया गया।


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एडिटर : विनोद आर्य

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