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सागर: मर्डर या सुसाइड? डॉक्टर नहीं बता पाए, हाईकोर्ट ने पति-देवर को उम्रकैद से किया बरी

तीनबत्ती न्यूज : 02 जुलाई, 2026

तीनबत्ती न्यूज : 02 जुलाई, 2026

जबलपुर/सागर: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सागर जिले के बंडा थाना क्षेत्र के एक चर्चित हत्याकांड में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए निचली अदालत के आदेश को पलट दिया है। हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा काट रहे मृतका के पति छतर सिंह लोधी और देवर लक्खू उर्फ लखन सिंह को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है। कोर्ट ने अपने आदेश में पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर और पुलिस की जांच पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

क्या था पूरा मामला? 2021 की घटना

यह मामला 4 फरवरी 2021 का है। सागर जिले के बंडा थाना क्षेत्र में एक महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में जलकर मौत हो गई थी। मृतका के मायके वालों ने आरोप लगाया था कि पति छतर सिंह और देवर लखन सिंह ने दहेज के लिए महिला पर केरोसिन डालकर उसे जिंदा जला दिया। पुलिस ने दोनों भाइयों के खिलाफ धारा 302 हत्या और 498-ए दहेज प्रताड़ना के तहत केस दर्ज किया था।

सेशन कोर्ट सागर ने 15 दिसंबर 2022 को दोनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। कोर्ट ने इसे "दहेज हत्या का जघन्य अपराध" माना था।

हाईकोर्ट में कैसे पलटा केस?

आरोपियों ने सेशन कोर्ट के फैसले को जबलपुर हाईकोर्ट में चुनौती दी। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय की डिवीजन बेंच ने पूरे मामले की सुनवाई की। बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डॉक्टर ने कहीं भी यह नहीं लिखा कि मौत होमीसाइडल यानी हत्या से हुई है।

हाईकोर्ट ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट का गहन अध्ययन किया। रिपोर्ट में डॉक्टर ने सिर्फ "मौत जलने से हुई" लिखा था, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि आग खुद लगाई गई थी या लगाई गई थी। कोर्ट ने कहा कि जब डॉक्टर ही हत्या और आत्महत्या के बीच अंतर नहीं बता पाया तो सिर्फ शक के आधार पर उम्रकैद नहीं दी जा सकती।

कोर्ट ने अपने आदेश में क्या कहा?

हाईकोर्ट ने 42 पन्नों के फैसले में लिखा: "अभियोजन पक्ष यह साबित करने में पूरी तरह विफल रहा कि मृतका की मौत हत्या थी। मेडिकल साक्ष्य अस्पष्ट है और डॉक्टर की राय निर्णायक नहीं है। भारतीय साक्ष्य अधिनियम के अनुसार, संदेह का लाभ आरोपी को मिलना चाहिए।"

कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि पुलिस ने जांच में लापरवाही बरती। घटनास्थल से केरोसिन का डिब्बा तो मिला, लेकिन उस पर आरोपियों के फिंगरप्रिंट नहीं मिले। पड़ोसियों के बयान भी विरोधाभासी थे।

अब क्या होगा? फैसले के मायने

इस फैसले के बाद दोनों भाई जेल से रिहा हो जाएंगे। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला मेडिकल जांच और पुलिस विवेचना के लिए नजीर बनेगा। अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डॉक्टरों को स्पष्ट रूप से लिखना होगा कि मौत की प्रकृति क्या थी - हत्या, आत्महत्या या हादसा।

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