13 अक्टूबर को सागर पहुंचेगी सनातन हिंदू एकता रथयात्रा: बालाजी मंदिर में लगेगा बागेश्वर धाम का दिव्य दरबार
• पुष्पवर्षा से होगा स्वागत, हनुमान चालीसा पाठ और हवन के बाद होगा दिव्य दरबार
तीनबत्ती न्यूज: 10 अक्टूबर, 2026
सागर। सनातन हिंदू एकता रथयात्रा के तहत बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री 13 अक्टूबर को सागर पहुंचेंगे। बागेश्वर धाम से पन्ना और दमोह होते हुए रथयात्रा सागर जिले के गढ़ाकोटा और रहली से होकर सागर नगर में प्रवेश करेगी। आज बालाजी मंदिर परिसर में आयोजक डॉ रजनीश विश्वकर्मा, डॉ अनिल तिवारी, भाजपा नेता लक्ष्मण सिंह, डॉ तरुण बड़ोनिया, शिवशंकर मिश्रा, अजय श्रीवास्तव, विवेक तिवारी, अंकु चौरसिया, अनिल पीपरा, संजू ठाकुर ने आज मीडिया को पूरी जानकारी दी।
रथयात्रा के सागर नगर में प्रवेश के बाद बम्हौरी चौराहा, आरटीओ, सिग्नल तिली चौराहा होते हुए श्री बालाजी मंदिर परिसर पहुंचेगी। यहां सागर जिला शिष्य मंडल एवं सुंदरकांड मंडल द्वारा रथयात्रा का भव्य स्वागत किया जाएगा। इस दौरान विभिन्न स्थानों पर पुष्पवर्षा भी की जाएगी।
बालाजी मंदिर में होगा दिव्य दरबार
प्रेस नोट के अनुसार, पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के मंच पर पहुंचने से पहले करीब 51 बटुकों द्वारा स्वस्ति वाचन किया जाएगा। इसके बाद हनुमान चालीसा की चौपाइयों का पाठ और मंत्रोच्चार के साथ हवन किया जाएगा। इसके बाद श्री बालाजी मंदिर परिसर में दिव्य दरबार आयोजित होगा।
पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री रात्रि में बालाजी परिसर में विश्राम करेंगे। अगले दिन सुबह बालाजी सरकार की पूजा, राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत और ध्वजारोहण के बाद रथयात्रा आगे रवाना होगी।
मकरोनिया होते हुए आगे बढ़ेगी यात्रा
14 अक्टूबर को रथयात्रा मोतीनगर चौराहा, ओम स्टील, रेलवे ब्रिज भगवानगंज और रजाखेड़ी चौराहा होते हुए मकरोनिया की ओर जाएगी। विभिन्न स्थानों पर रथयात्रा का स्वागत किया जाएगा। इसके बाद यात्रा आगे के लिए रवाना होगी।
आयोजन समिति द्वारा रथयात्रा के लिए आवास, संत निवास, भोजन, पेयजल, पंडाल, पार्किंग, साफ-सफाई, पुलिस कंट्रोल, चिकित्सा और प्रसादी वितरण सहित विभिन्न व्यवस्थाओं के लिए प्रभारी नियुक्त किए गए हैं।
आयोजकों ने अपील की है कि सनातन हिंदू एकता रथयात्रा और बालाजी मंदिर में होने वाले दिव्य दरबार की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं। आयोजन का उद्देश्य “जात-पात से बड़ा हमारा राष्ट्र है, राष्ट्र ही सर्वोपरि है” का संदेश जन-जन तक पहुंचाना बताया गया है।






