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रविवार, 11 जुलाई 2021

लाखा बंजारा झील में सीवर लाइन डालने का मामला राष्ट्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) पहुंचा

लाखा बंजारा झील में सीवर लाइन डालने का मामला राष्ट्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) पहुंचा  

 ★ डॉ धरणेन्द्र जैन ने लगायी याचिका।
झील के अंदर सीवर लाइन ,चैम्बर सहित किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य पर रोक की मांग।

सागर। आरटीआई एक्टिविस्ट  डॉ धरणेन्द्र जैन ने सागर स्थित ऐतिहासिक लाखा बंजारा झील के अंदर सीवर लाइन डालने तथा समस्त निर्माण कार्य पर स्थायी रोक लगाने हेतु एक याचिका मध्यप्रदेश शासन , आयुक्त नगर पालिका निगम सागर सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड,पॉल्युशन कंट्रोल बोर्ड एवं लक्ष्मी सिविल इंजीनियरिंग सर्विस के विरुद्ध  राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (NGT) में अपने एडव्होकेट निकिता दिलौरी के माध्यम से प्रस्तुत की है।
याचिकाकर्ता डॉ धरणेन्द्र जैन ने बताया है कि सागर स्थित झील के अंदर से सीवर लाइन डाली जा रही है एवं तालाब के अंदर ही चैम्बर बनाये जा रहे है जिस कारण भविष्य में तालाब के पानी को प्रदूषित होने से कोई भी नहीं रोक सकता क्योंकि उक्त सीवर लाइन कभी भी लीक हो सकती है साथ मे चैम्बर भी ओवर फ्लो होकर तालाब के अंदर मल मूत्र छोड़ सकते है जो झील को प्रदूषित करेंगे।
उन्होंने बताया कि याचिका के माध्यम से न्याधिकरण के समक्ष यह तथ्य रखे गए है कि उक्त लाइन डालने से निश्चित रूप से झील प्रदूषित होगी और झील के क्षेत्रफल में कमी आएगी।झील में डाली जाने बाली सीवर लाइन से मलमूत्र की निकासी होनी है और वह कभी भी लीक हो सकती है लाइन लीक होने पर लाइन से जाने बाला मलमूत्र तालाब के पानी मे मिल जाएगा और तालाब को प्रदूषित करेगा।
उन्होंने यह भी बताया कि सीवर लाइन नीचे है जो पतली एवं प्लास्टिक  जैसे केमिकल से निर्मित है उसके ऊपर कही कही सीमेंट से निर्मित भारी पाइप लाइन जो नाले ट्रैप करने हेतु डाली गई हर एक दूसरे को क्रॉस करती है जिससे उक्त बजन के कारण सीवर लाइन या तो चोक होगी या फूटेगी दोनों स्थिति में झील को प्रदूषित करेगी।उन्होंने बताया कि याचिका के माध्यम से माननीय न्याधिकरण के समक्ष प्रार्थना की गयी है कि तालाब के अंदर सीवर लाइन सहित तमाम निर्माण कार्य पर  रोक लगायी जाय।

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डॉ जैन ने नगर निगम एवं स्मार्ट सिटी प्रशासन पर आरोप लगाया है कि नियम विरुद्ध तरीके से झील के अंदर और झील के भराव  क्षेत्र में जो निर्माण कार्य संबंधी गतिविधिया संचालित की वह निगम और स्मार्टसिटी प्रशासन की जानकारी ठेकेदारों द्वारा संचालित की जा रही है सीवर और नाले ट्रैपिंग के नाम पर तालाब की कृतिम चौहद्दी तय की जा रही है जिस कारण तालाब का क्षेत्रफल एवं भराव क्षेत्र कम होगा तथा किनारे छोड़ी गयी जमीनों पर भविष्य में भू-माफिया या राजनैतिक आतंकवाद के माध्यम से कब्जा होगा जो ऐतिहासिक झील के अस्तित्व के लिये खतरा होगा।
अधिवक्ता निकिता दिलौरी ने बताया कि याचिका बिभिन्न आधारों पर राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण के समक्ष प्रस्तुत की गयी है जिसमें सागर की ऐतिहासिक झील में अनेक प्रकार के निर्माण कार्य, झील में सीवर लाइन डाले जाने,झील का घटता क्षेत्रफल एवं झील से संबंधित अन्य विषयों को माननीय प्राधिकरण के संज्ञान में लाया गया है।

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