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रविवार, 26 दिसंबर 2021

रमेश दत्त दुबे जी की कविताओं में मन‌ की पीड़ा झलकती है , वे समाजवादी साहित्यकार थे- रघु ठाकुर

रमेश दत्त दुबे जी की कविताओं में मन‌ की पीड़ा झलकती है , वे समाजवादी साहित्यकार थे- रघु ठाकुर
★ दुबे जी की रचनाएं देशकाल से ऊपर गरीबों पर केंद्रित रहती थीं - जवाहर अग्निहोत्री
★ दुबे जी के अप्रकाशित साहित्य को प्रकाशित किया जाना चाहिए - महेंद्र सिंह

सागर।  देश के साहित्य जगत में अपनी प्रखर‌ लेखनी ‌के लिए ख्यात ‌रहे कवि, साहित्यकार,पत्रकार स्व. रमेश दत्त दुबे का आठवां स्मृति आयोजन रविवार को आदर्श संगीत महाविद्यालय में संपन्न हुआ। इस अवसर पर सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी, साहित्यकार महेंद्र सिंह, भोपाल को शाल,श्रीफल, पुष्पमाला, सम्मान - पत्र भेंट कर "रमेश दत्त दुबे स्मृति साहित्य सम्मान 2021" से सम्मानित किया गया। रमाकांत शास्त्री ने महेंद्र सिंह के जीवन- परिचय और कपिल बैसाखिया ने सम्मान - पत्र का वाचन किया।
इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ एडवोकेट जवाहर‌ अग्निहोत्री ने समाजवादी आंदोलन में स्व.दुबे की भूमिका का‌ उल्लेख करते हुए कहा कि वे फकीर टाइप लोहिया वादी थे। उनकी रचना देशकाल से ऊपर गरीबों पर केंद्रित रहती थी। दुबे जी यथार्थ के रचनाकार थे और सच्चे समाजवादी। उन जैसे सादा जीवन बिताने वालों को देश और समाज में वह स्थान नहीं मिला जिसके वे अधिकारी थे। "कहनात" और "टोला" शीर्षक उनकी किताबों ने बहुत ख्याति अर्जित की। जनसत्ता में वे निरंतर लिखते रहते थे और उनके विषय हमेशा आम आदमी से जुड़े रहते थे।
कार्यक्रम के अध्यक्ष रघु ठाकुर ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि रमेश दत्त दुबे समाजवादी साहित्यकार थे। समाजवादी साहित्यकार होने से तात्पर्य यह है कि जो व्यक्ति समाज की चुनौतियां और उनकी  पीड़ा व अनुभूतियों के साथ जीकर लेखन कार्य कर सकें वही समाजवादी साहित्यकार हो सकता है ।उन्होंने कहा कि दुबे जी में साहित्य के प्रति समर्पण था और गरीब की, कमजोर की और जरूरतमंद की आवाज को अपने साहित्य में उन्होंने समाहित किया ।उन्होंने कहा कि वही सच्चा साहित्य लिख सकता है जिसके अंदर समाज को देने की लालसा हो न कि लेने की। दुबे जी के साहित्य में समानता और बराबरी का समाज बनाने की प्रेरणा रही है। 
उन्होंने कहा कि आज पूंजीवाद का हमला समूचे समाज पर हो रहा है ।यह एक बहुत बड़ी चुनौती है ।इससे हमें निपटना होगा उन्होंने भारतीय संसद की हाल ही की एक रपट का जिक्र करते हुए कहा कि एक आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार एक आम आदमी को ₹4500 महीने में पूरे परिवार का गुजारा करना होता है और दूसरी तरफ एक पूंजीवाद का ऐसा महल खड़ा हो रहा है जिसमें दुनिया के 10% लोगों के पास  86% दुनिया की सम्पत्ति  है ।ऐसे विषमता के समाज का  निर्माण  पूंजीवादी कार्पोरेट कर रहे हैं। हम सबको इस पर सोचना होगा। 
आजादी के आंदोलन के विषय में उन्होंने कहा कि पहले के साहित्यकार,पत्रकार और समाजसेवी राजनेता अपना योगदान देश की आजादी के लिए लिए दे रहे थे तभी देश  आजाद हो पाया।और आज हर वर्ग समाज से और देश से लेने की अपेक्षा कर रहा है इसलिए हम आज अघोषित गुलामी की ओर बढ़ रहे
 हैं।हमारे इस नजरिए को भी हमें बदलने की आवश्यकता है। दुबे जी के साहित्य की और स्मृतियों को बनाए रखना तभी सार्थक होगा जब हम समाज को बराबरी का समाज बनाने की दिशा में सोचें।
अपने सम्मान पर‌ धन्यवाद वक्तव्य देते हुए साहित्यकार महेंद्र सिंह ने कहा कि स्व. दुबे पर केंद्रित एक बड़ा कार्यक्रम प्रतिवर्ष किया जाना चाहिए साथ ही उनकी अप्रकाशित पुस्तकों को भी प्रकाशित किए जाने की आवश्यकता है जिसके लिए उन्होंने अपने ‌पूर्ण सहयोग
देने की बात कही।  दुबे जी के साहित्य पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए उनकी‌ कुछ कविताओं का उन्होंने
वाचन किया। अशोक गोपीचंद रायकवार और शिक्षक राजेंद्र सेन ने उन्हें काव्य‌ रचना के माध्यम से स्मृत किया। अतिथियों तथा स्व.दुबे के परिजनों द्वारा मां सरस्वती एवं स्व.दुबे के चित्र पर माल्यार्पण पश्चात् बुंदेली लोक गायक शिवरतन यादव ने लोक कवि ‌ईसुरी की रचनाओं ‌का मधुर गायन किया। असीम दत्त,अभिनव दत्त एवं डॉ.गायत्री यादव ने अतिथि स्वागत किया। दुबे जी की धर्मपत्नी श्रीमती सीमा ‌दुबे ने ‌स्वागत भाषण‌ दिया। 
आशीष ज्योतिषी ने कार्यक्रम का सुंदर और प्रभावी संचालन किया। श्यामलम् अध्यक्ष उमा कान्त मिश्र ने आभार व्यक्त किया। श्री रमेश दत्त दुबे पर केंद्रित इस कार्यक्रम में वक्ताओं और श्रोताओं के बीच चलने वाले सवाल जवाबों ने लोगों को ठहाके मारने को विवश कर दिया।
   ‌‌ कार्यक्रम में पूर्व सांसद लक्ष्मी नारायण यादव, डॉ. सुरेश आचार्य, हेमचंद जैन, हंसराज नामदेव, सुधीर यादव, राम कुमार पचौरी, मुन्ना चौबे, डॉ सुश्री शरद सिंह, डॉ. चंचला दवे, डॉ. कविता शुक्ला, डॉ. वंदना मिश्र,ट्विंकल राय,हरगोविंद विश्व,गजाधर सागर,मुन्ना शुक्ला, राजेश शास्त्री, हरीसिंह ठाकुर, अरुण मिश्र गोटू, डॉ विनोद तिवारी, आर के तिवारी, डॉ जी एल दुबे, डॉ राजेंद्र यादव, डॉ अशोक कुमार तिवारी, डॉ. अवधेश कुमार,डॉ. आर आर पांडे, डॉ नलिन जैन,करामत खान, सुल्तान कुरैशी,असरार अहमद, एम शरीफ, मुकेश तिवारी, हरी शुक्ला, डॉ बी पी उपाध्याय, वीरेंद्र प्रधान, अरविंद मिश्र,अरुण दुबे, विश्वनाथ चौबे, अरुण सोनी, जगदीश गौर, रवीन्द्र दुबे कक्का, देवीसिंह राजपूत,कोमल यादव, प्रभात कटारे,राजू प्रजापति एडवोकेट, संतोष पाठक, पूरनसिंह राजपूत, जगदीश लारिया, अमित आठिया, डॉ ऋषभ भारद्वाज, मनोज श्रीवास्तव, सोमेंद्र शुक्ल, अखिलेश शर्मा, अश्विनी सागर,के एल तिवारी, मुस्तरी बेगम खान, प्रदीप वर्मा सहित बहुत बड़ी संख्या में लोगों ‌की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।

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