रिश्वतखोर नायब तहसीलदार और चौकीदार को रिश्वत के मामले में अदालत ने सुनाई सजा
▪️सागर लोकायुक्त पुलिस ने 25 हजार की रिश्वत लेते पकड़ा था
पन्ना। पन्ना जिले के गुनौर में पदस्थ रहे तत्कालीन प्रभारी नायब तहसीलदार रविशंकर शुक्ला को भ्रष्टाचार के एक मामले में अदालत ने कड़ी सजा सुनाई है। विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) के न्यायाधीश सुरेंद्र मेश्राम की अदालत ने रविशंकर शुक्ला और उनके सहयोगी चौकीदार देवीदयाल दहायत को दोषी करार देते हुए 5-5 वर्ष के सश्रम कारावास और जुर्माने की सजा से दंडित किया है।
क्या है पूरा मामला?
सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी मानवेन्द्र सिंह ने बताया कि यह मामला वर्ष 2020 का है। सिली गांव के निवासी किसान ब्रजबिहारी प्रजापति अपने खेत से ईंट निर्माण के लिए मिट्टी ट्रैक्टर में भरकर ले जा रहे थे। इसी दौरान तत्कालीन नायब तहसीलदार रविशंकर शुक्ला ने उनका ट्रैक्टर जब्त कर थाने में खड़ा करवा दिया था। ट्रैक्टर छोड़ने के एवज में उन्होंने किसान से 35 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की थी।
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लोकायुक्त की जाल में फंसे आरोपी
किसान ब्रजबिहारी प्रजापति रिश्वत नहीं देना चाहते थे, इसलिए उन्होंने इसकी शिकायत सागर लोकायुक्त पुलिस से कर दी। लोकायुक्त टीम ने शिकायत के आधार पर जाल बिछाया। बातचीत के दौरान 35 हजार रुपये की डील तय हुई, जिसमें से 10 हजार रुपये पहले ही दिए जा चुके थे।
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शेष 25 हजार रुपये देने के लिए जब शिकायतकर्ता सरकारी आवास पर पहुंचा, तो रविशंकर शुक्ला ने वह रकम अपने पास खड़े चौकीदार देवीदयाल दहायत को देने के लिए कहा। जैसे ही रिश्वत की राशि चौकीदार को सौंपी गई, लोकायुक्त टीम ने मौके पर छापा मारकर दोनों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया और केमिकल टेस्ट में उनके हाथ रंगीन पाए गए।
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अदालत ने दिया सख्त संदेश
मामले की सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष ने तर्क दिया कि समाज में भ्रष्टाचार को रोकने और कड़ा संदेश देने के लिए ऐसे अपराधों पर सख्त कार्रवाई बेहद जरूरी है। अदालत ने अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर दोनों को दोषी माना और निम्नलिखित सजा सुनाई:
- पूर्व नायब तहसीलदार रविशंकर शुक्ला: भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत 3 वर्ष और 5 वर्ष के कठोर कारावास के साथ क्रमशः 10 हजार और 15 हजार रुपये का जुर्माना।
- चौकीदार देवीदयाल दहायत: रिश्वतखोरी में सहयोग करने के जुर्म में 5 वर्ष और 3 वर्ष के कठोर कारावास तथा 15 हजार और 10 हजार रुपये का जुर्माना
- अदालत के आदेशानुसार दोनों आरोपियों की ये सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
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एडिटर : विनोद आर्य
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