Editor: Vinod Arya | 94244 37885
District Hospital Sagar लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
District Hospital Sagar लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

IMR कम करने के लिए कलेक्टर प्रतिभा पाल की विशेष बैठक, हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी पर सख्त निर्देश

सागर: मातृ-शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए कलेक्टर प्रतिभा पाल की बड़ी पहल, जिला अस्पताल-BMC और स्वास्थ्य अमले की संयुक्त समीक्षा

कलेक्टर प्रतिभा पाल की अध्यक्षता में सागर में जिला स्वास्थ्य समिति की समीक्षा बैठक आयोजित


तीनबत्ती न्यूज: 03 अगस्त, 2026

सागर। जिले में मातृ मृत्यु दर (MMR) और शिशु मृत्यु दर (IMR) को न्यूनतम स्तर पर लाने के उद्देश्य से सोमवार को कलेक्टर प्रतिभा पाल की अध्यक्षता में जिला स्वास्थ्य समिति की विशेष समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में पहली बार जिला चिकित्सालय, बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (बीएमसी) और स्वास्थ्य विभाग के जिला एवं ब्लॉक स्तर के अधिकारियों को एक मंच पर लाकर मातृ एवं शिशु मृत्यु के कारणों की विस्तृत समीक्षा की गई।

कलेक्टर ने कहा कि बैठक का उद्देश्य केवल आंकड़ों की समीक्षा करना नहीं, बल्कि उन वास्तविक कारणों की पहचान करना है जिनके चलते मरीज प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से रेफर होकर जिला अस्पताल या बीएमसी पहुंचते हैं और बाद में मातृ अथवा शिशु मृत्यु के मामलों में बदल जाते हैं। उन्होंने कहा कि हर स्तर पर समय रहते चिकित्सकीय हस्तक्षेप (Timely Intervention) सुनिश्चित किया जाए।

गंभीर एनीमिया और हाई ब्लड प्रेशर बने प्रमुख कारण

समीक्षा में सामने आया कि अधिकांश मातृ मृत्यु के मामलों में गर्भवती महिलाओं में गंभीर एनीमिया तथा गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप (Pregnancy Induced Hypertension) की समस्या पाई गई। इसके अलावा हेपेटिक फेलियर, पोस्टपार्टम हैमरेज, एक्लेम्पसिया और प्रीक्लेम्पसिया जैसी जटिलताएं भी प्रमुख कारण रहीं।

कलेक्टर ने निर्देश दिए कि सभी गर्भवती महिलाओं की नियमित ब्लड प्रेशर (BP) और हीमोग्लोबिन (HB) जांच अनिवार्य रूप से कराई जाए तथा जोखिम वाले मामलों की लगातार निगरानी रखी जाए।

हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं की होगी बर्थ मैपिंग

बैठक में निर्णय लिया गया कि हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं की बर्थ मैपिंग की जाएगी। संभावित प्रसव तिथि से 7 से 15 दिन पहले ऐसी महिलाओं को संबंधित अस्पताल के बर्थ वेटिंग एरिया में भर्ती कराया जाएगा ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल उपचार मिल सके।

इसके साथ ही आशा, एएनएम, सीएचओ और ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर को ऐसे मामलों की नियमित निगरानी करने तथा परिवार को भी निर्धारित अस्पताल की जानकारी देने के निर्देश दिए गए।

डीन डॉ. पी.एस. ठाकुर बोले— हाई-रिस्क मां तो बच्चा भी हाई-रिस्क

बैठक में बीएमसी के डीन डॉ. पी.एस. ठाकुर ने कहा कि यदि मां हाई-रिस्क गर्भवती है तो उससे जन्म लेने वाला शिशु भी हाई-रिस्क श्रेणी में आता है। इसलिए मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर एक-दूसरे से सीधे जुड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा कि गर्भावस्था के दौरान उचित चिकित्सकीय प्रबंधन से समय पूर्व प्रसव और नवजात जटिलताओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।

नवजात मृत्यु के कारणों की भी हुई समीक्षा

आईएमआर की समीक्षा में पाया गया कि अधिकांश शिशु मृत्यु जन्म के बाद पहले 28 दिनों (नियोनेटल पीरियड) में हो रही हैं। इसके प्रमुख कारण समय से पहले जन्म (Prematurity) और जन्म के समय ऑक्सीजन की कमी (Birth Asphyxia) पाए गए।

बैठक में निर्देश दिए गए कि सभी गर्भवती महिलाओं की चारों एएनसी जांच समय पर कराई जाए, पौष्टिक आहार एवं आवश्यक दवाओं का नियमित सेवन सुनिश्चित कराया जाए तथा समय से पहले प्रसव रोकने के लिए हाई-रिस्क मामलों का बेहतर प्रबंधन किया जाए।

डेथ ऑडिट केवल औपचारिकता नहीं बने

कलेक्टर प्रतिभा पाल ने स्पष्ट निर्देश दिए कि मैटरनल डेथ रिव्यू (MDR) और चाइल्ड डेथ रिव्यू (CDR) पूरी गंभीरता के साथ किए जाएं। फॉर्म-1 से फॉर्म-6 तक की सभी जानकारी पारदर्शिता के साथ भरी जाए तथा बीएमसी, जिला अस्पताल और सीएमएचओ कार्यालय की संयुक्त टीम नियमित ऑडिट कर कमियों को दूर करे।

बीएमओ को मैदानी अमले की नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश

बैठक में ब्लॉक मेडिकल ऑफिसरों को निर्देशित किया गया कि वे अपने क्षेत्र की आशा, एएनएम, आशा सुपरवाइजर और सीएचओ के कार्यों की नियमित समीक्षा करें। डेटा एंट्री की गुणवत्ता, समयबद्धता और चिन्हांकन की शुद्धता सुनिश्चित की जाए।

प्रसव के बाद भी होगी विशेष निगरानी

कलेक्टर ने कहा कि प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा की देखभाल उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी गर्भावस्था के दौरान जांच। आशा और एएनएम प्रसूता के घर जाकर नियमित स्वास्थ्य परीक्षण करें, आवश्यक परामर्श दें और उनकी स्वास्थ्य स्थिति का रिकॉर्ड अपडेट रखें।

उन्होंने अनमोल 2.0 पोर्टल पर वास्तविक समय में डेटा अपडेट करने, असुरक्षित डिलीवरी पर नजर रखने तथा नियमित टीकाकरण अभियान को पूरी गंभीरता से लागू करने के निर्देश भी दिए।

"समन्वय से बचाई जा सकती है हर जान"

बैठक के अंत में कलेक्टर प्रतिभा पाल ने कहा कि यदि मैदानी स्वास्थ्य अमला और विशेषज्ञ डॉक्टर मिलकर काम करें तो मातृ एवं शिशु मृत्यु के अधिकांश मामलों को रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग पूरी संवेदनशीलता के साथ कार्य करे ताकि जिले में एक भी मां या नवजात की असमय मृत्यु न हो।

बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विवेक केवी, बीएमसी डीन डॉ. पी.एस. ठाकुर, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. देवेश पटेरिया, सिविल सर्जन डॉ. आर.एस. जयंत सहित बीएमसी, जिला चिकित्सालय एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और चिकित्सक उपस्थित रहे।

Share:

सागर जिला अस्पताल के SNCU ने रचा जीवन का चमत्कार, 915 ग्राम के नवजात को मिला नया जीवन

सागर जिला अस्पताल के SNCU ने रचा जीवन का चमत्कार, 915 ग्राम के नवजात को मिला नया जीवन


तीनबत्ती न्यूज: 16 जुलाई 2026

सागर: । मध्यप्रदेश शासन की मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का सकारात्मक परिणाम सागर जिला चिकित्सालय में देखने को मिला। जिला अस्पताल की विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (SNCU) में चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ की सतत निगरानी, विशेषज्ञ उपचार एवं समर्पित देखभाल से महज 915 ग्राम वजन वाले गंभीर नवजात को नया जीवन मिला। स्वस्थ होने के बाद नवजात को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।



जानकारी के अनुसार, रहली विकासखंड के ग्राम पीराहार निवासी लीला बाई आदिवासी ने 1 जून 2026 की रात करीब 11:30 बजे शिशु को जन्म दिया। जन्म के तुरंत बाद नवजात की हालत अत्यंत गंभीर थी। उसे सांस लेने में कठिनाई हो रही थी और हृदय गति भी सामान्य से कम थी। गंभीर स्थिति को देखते हुए नवजात को तत्काल जिला चिकित्सालय के SNCU में भर्ती किया गया।

तत्काल उपचार से बची जान

SNCU प्रभारी डॉ. सौरभ जोशी ने बिना समय गंवाए बैग एंड मास्क वेंटिलेशन देकर शिशु की जान बचाई। इसके बाद नवजात को सी-पैप (CPAP) मशीन के माध्यम से श्वसन सहायता प्रदान की गई। भर्ती के समय बच्चे का वजन मात्र 915 ग्राम था, जो सामान्य नवजात की तुलना में काफी कम था।



20 दिन तक ट्यूब फीडिंग, कंगारू मदर केयर से मिला लाभ

चिकित्सकीय टीम ने लगातार निगरानी रखते हुए संक्रमण से बचाव के लिए आवश्यक दवाएं दीं। उपचार के दौरान खून की कमी होने पर नवजात को रक्त भी चढ़ाया गया। लगभग 20 दिनों तक ट्यूब फीडिंग के माध्यम से पोषण दिया गया, जिसके बाद कटोरी-चम्मच से दूध पिलाना शुरू किया गया।

साथ ही कंगारू मदर केयर (KMC) के जरिए मां और शिशु के बीच त्वचा से त्वचा का संपर्क कराया गया, जिससे बच्चे के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हुआ।

915 ग्राम से बढ़कर 1.415 किलोग्राम हुआ वजन

चिकित्सकों ने शिशु के वजन, श्वसन, हृदय गति और अन्य महत्वपूर्ण स्वास्थ्य मानकों की नियमित निगरानी की। उपचार के सकारात्मक परिणामस्वरूप 15 जुलाई 2026 तक नवजात का वजन बढ़कर 1.415 किलोग्राम हो गया। सभी आवश्यक जांचें सामान्य आने के बाद चिकित्सकों ने शिशु को स्वस्थ अवस्था में डिस्चार्ज कर दिया।

नवजात के माता-पिता ने सफल उपचार के लिए डॉ. सौरभ जोशी, चिकित्सकीय टीम और पूरे नर्सिंग स्टाफ का आभार व्यक्त किया।


Share:

www.Teenbattinews.com

Archive