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एमपी में एनालॉग पनीर पर लगेगा बैन, सीएम मोहन यादव का फैसला

एमपी में एनालॉग पनीर पर लगेगा बैन, सीएम मोहन यादव ने दिए खाद्य सुरक्षा के सख्त निर्देश


तीनबत्ती न्यूज: 12 अगस्त, 2026

भोपाल। मध्य प्रदेश में एनालॉग पनीर की बिक्री और उत्पादन पर रोक लगाने की तैयारी की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खाद्य सुरक्षा और जनस्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों को इस दिशा में आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

सीएम डॉ. मोहन ने एमपी में बैन किया एनालॉग पनीर

मध्यप्रदेश में एनालॉग पनीर पर बैन लग गया है। इस तरह का पनीर बनाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो सकती है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट कर दिया है कि वे राज्य में प्राकृतिक पनीर को ही प्रोत्साहित करेंगे। एनालॉग पनीर की बिक्री जैसी गतिविधियों को हतोत्साहित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 12 अगस्त को मीडिया से कहा कि हमने ये निर्णय किया है कि मध्यप्रदेश में एनालॉग पनीर की बिक्री को हतोत्साहित करेंगे। इस पर प्रतिबंध लगाएंगे। देश के अन्य राज्यों में भी इस पर प्रतिबंध लगाया गया है। हमारे यहां प्राकृतिक दूध के उत्पाद हैं हम प्राकृतिक पनीर बनाएंगे। हम इन उत्पादों के बलबूते पर राज्य की पहचान बनाएंगे। 

बिल्कुल बढ़ावा नहीं देंगे

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हम दूध का उत्पादन बढ़ाने की दिशा में आगे चल रहे हैं। एनालॉग पनीर की बिक्री जैसी गतिविधियों को हम बढ़ावा नहीं देंगे।सरकार के अनुसार बाजार में दूध से बने पारंपरिक पनीर के स्थान पर सस्ते एनालॉग पनीर का इस्तेमाल बढ़ रहा है। एनालॉग पनीर में दूध के अलावा वनस्पति तेल, मिल्क पाउडर, प्रोटीन, स्टार्च, इमल्सीफायर और अन्य खाद्य सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है।

होटल, मिठाई दुकानों और डेयरी में होगी जांच

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग की टीमें होटल, मिठाई की दुकानों, डेयरी, रेस्टोरेंट और फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स में जांच अभियान चला सकती हैं। जांच के दौरान एनालॉग पनीर पाए जाने पर नमूने लिए जाएंगे और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में खाद्य सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।

अधिकारियों को खाद्य पदार्थों की लेबलिंग और उपभोक्ता जागरूकता पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं।


क्या होता है एनालॉग पनीर?

एनालॉग पनीर को आम तौर पर असली पनीर के विकल्प के रूप में तैयार किया जाता है। यह पारंपरिक तरीके से केवल दूध को फाड़कर तैयार किए गए पनीर से अलग होता है।

इसके निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री में वनस्पति या पाम ऑयल, स्किम्ड मिल्क पाउडर, सोया प्रोटीन, केसिन, स्टार्च, इमल्सीफायर और स्टेबलाइजर जैसी चीजें शामिल हो सकती हैं। खाद्य उद्योग में इसका इस्तेमाल कुछ फास्ट फूड, फ्रोजन फूड और अन्य तैयार खाद्य पदार्थों में किया जाता है।

असली पनीर और एनालॉग पनीर में अंतर

असली पनीर: दूध से तैयार किया जाता है और इसमें दूध से मिलने वाला प्रोटीन, वसा और कैल्शियम प्रमुख पोषक तत्व होते हैं।

एनालॉग पनीर: दूध के अलावा अन्य वसा और खाद्य सामग्री से तैयार किया जा सकता है। इसकी पोषण संरचना इस्तेमाल की गई सामग्री पर निर्भर करती है।

उपभोक्ताओं को पैकेट पर दिए गए लेबल को ध्यान से पढ़ना चाहिए। यदि किसी उत्पाद पर “Paneer Analogue”, “Imitation Paneer” या इसी तरह की जानकारी लिखी हो तो उसे पारंपरिक दूध से बने पनीर से अलग समझना चाहिए।


उपभोक्ताओं को क्या सावधानी रखनी चाहिए?


पनीर खरीदते समय पैकेट पर उत्पाद की सामग्री, लेबल और निर्माता की जानकारी जरूर देखें। खुले में बिकने वाले पनीर की गुणवत्ता को लेकर भी उपभोक्ताओं को सावधानी बरतनी चाहिए।

सरकार का उद्देश्य उपभोक्ताओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराना तथा खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना है।



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BMC सागर में बड़ी चिकित्सा सफलता: 70 वर्षीय महिला के पेट से 1 किलो की विशाल गांठ निकाली, हाई-रिस्क सर्जरी रही सफल

BMC सागर में बड़ी चिकित्सा सफलता: 70 वर्षीय महिला के पेट से 1 किलो की विशाल गांठ निकाली, हाई-रिस्क सर्जरी रही सफल



तीनबत्ती न्यूज:  30 जुलाई 2026

सागर: बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (बीएमसी), सागर ने एक बार फिर जटिल शल्य चिकित्सा में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। बीएमसी के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की विशेषज्ञ टीम ने 70 वर्षीय महिला के पेट से लगभग 1 किलोग्राम वजनी और 15×20 सेंटीमीटर आकार की विशाल एडनेक्सल (ओवेरियन) सिस्ट को सफलतापूर्वक निकालकर मरीज को नई जिंदगी दी।

बड़ा बाजार निवासी श्रीमती मुन्नी बाई लंबे समय से पेट दर्द और सूजन से परेशान थीं। जांच में उनके पेट एवं श्रोणि क्षेत्र में बड़ी गांठ पाई गई। अल्ट्रासाउंड और सीईसीटी जांच के बाद इसे एडनेक्सल सिस्ट के रूप में चिन्हित किया गया।

मरीज पिछले चार वर्षों से क्रॉनिक डायरिया की समस्या से भी पीड़ित थीं, जिससे ऑपरेशन का जोखिम काफी बढ़ गया था। विशेषज्ञ चिकित्सकों ने सभी आवश्यक जांच और हाई-रिस्क कंसेंट के बाद सर्जरी का निर्णय लिया।

18 जुलाई 2026 को विभागाध्यक्ष डॉ. शीला जैन के नेतृत्व में सहायक प्राध्यापक डॉ. प्रियंका पटेल, डॉ. सिफ्टी बंगा, स्नातकोत्तर छात्रा डॉ. रिंशु सुजोरिया, स्क्रब नर्स राखी गौतम एवं आकांक्षा वर्मा की टीम ने एक्सप्लोरेटरी लैपरोटॉमी कर दाहिनी ओर स्थित विशाल सिस्ट को सुरक्षित रूप से निकाल दिया।

सर्जरी की सफलता में एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. सर्वेश जैन एवं उनकी टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके कुशल एनेस्थीसिया प्रबंधन और सतत मॉनिटरिंग से ऑपरेशन सुरक्षित एवं सफलतापूर्वक पूरा हुआ।

ऑपरेशन के बाद मरीज की रिकवरी सामान्य रही और उन्हें स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। हालिया फॉलो-अप में मरीज पूरी तरह स्वस्थ और दर्दमुक्त पाई गईं।

बीएमसी के अधिष्ठाता डॉ. पी. एस. ठाकुर ने सफल ऑपरेशन पर पूरी चिकित्सकीय टीम को बधाई देते हुए कहा कि संस्थान में आधुनिक सुविधाओं और अनुभवी विशेषज्ञों की बदौलत अब जटिल एवं हाई-रिस्क सर्जरी भी सफलतापूर्वक की जा रही हैं। उन्होंने इसे बुंदेलखंड क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।


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BMC Sagar में VIA प्रशिक्षण सम्पन्न, 35 CHO हुए प्रशिक्षित, सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग को मिलेगी मजबूती

 BMC सागर में तीन दिवसीय VIA प्रशिक्षण सम्पन्न, 35 सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी हुए प्रशिक्षित

सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग को मिलेगी मजबूती, महिला स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने की पहल



तीनबत्ती न्यूज: 29 जुलाई 2026

सागर। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) मध्यप्रदेश के निर्देशानुसार कॉम्प्रिहेन्सिव प्राइमरी हेल्थ केयर कार्यक्रम के अंतर्गत बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (BMC), सागर में 27 से 29 जुलाई 2026 तक तीन दिवसीय VIA (Visual Inspection with Acetic Acid) प्रशिक्षण सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में सागर, दमोह एवं पन्ना जिले के 35 सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO) ने भाग लिया।

प्रशिक्षण का आयोजन महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. पी.एस. ठाकुर के संरक्षण एवं मार्गदर्शन तथा अधीक्षक डॉ. राजेश जैन के सहयोग से प्रसूति एवं स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डॉ. शीला जैन के नेतृत्व में किया गया। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य प्राथमिक स्तर पर गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर की समय पर पहचान, स्क्रीनिंग और शीघ्र उपचार की क्षमता विकसित करना था, ताकि महिलाओं को गंभीर बीमारी से बचाया जा सके।



प्रशिक्षण में सैद्धांतिक और व्यावहारिक जानकारी

तीन दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान डॉ. जागृति नगर, डॉ. प्रियंका तिवारी, डॉ. प्रियंका पटेल, डॉ. रुचि जायसवाल, डॉ. सिफ्ती बंगा, डॉ. रिंशु सुजोरिया, डॉ. रिया एवं डॉ. पूजा सिंह ने प्रतिभागियों को VIA स्क्रीनिंग की सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक जानकारी दी। प्रशिक्षण में स्क्रीनिंग तकनीक, संक्रमण नियंत्रण, रिपोर्टिंग, केस चयन और हैंड्स-ऑन प्रैक्टिकल सत्र आयोजित किए गए। प्रशिक्षण के अंत में प्रतिभागियों का पोस्ट-टेस्ट एवं कौशल मूल्यांकन भी किया गया।

राष्ट्रीय कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर

प्रशिक्षण का पर्यवेक्षण डॉ. संदीप गौतम, नोडल अधिकारी (एनसीडी), जिला सागर द्वारा किया गया। उन्होंने प्रशिक्षण की गुणवत्ता का अवलोकन करते हुए प्रतिभागियों को राष्ट्रीय सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया।

प्रशिक्षण समन्वयक डॉ. सौरभ जैन ने बताया कि प्रशिक्षण प्राप्त 35 सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी अब अपने-अपने आयुष्मान आरोग्य मंदिरों एवं स्वास्थ्य संस्थानों में महिलाओं की नियमित सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग कर सकेंगे। इससे रोग की प्रारंभिक अवस्था में पहचान, समय पर उपचार तथा सर्वाइकल कैंसर से होने वाली जटिलताओं और मृत्यु दर में कमी लाने में मदद मिलेगी।

डीन ने NHM का जताया आभार

महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. पी.एस. ठाकुर ने प्रशिक्षण के सफल आयोजन पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन मध्यप्रदेश के मिशन संचालक डॉ. प्रभाकर तिवारी एवं NHM का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम प्राथमिक स्तर पर सर्वाइकल कैंसर की शीघ्र पहचान एवं रोकथाम को मजबूत करने के साथ महिला स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने प्रशिक्षण में सहयोग देने वाले सभी प्रशिक्षकों, अधिकारियों, प्रतिभागियों एवं आयोजन से जुड़े सभी सदस्यों को सफल आयोजन के लिए बधाई एवं शुभकामनाएँ भी दीं।

प्रशिक्षण रहा उपयोगी

कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी, व्यवहारिक और ज्ञानवर्धक बताया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल राष्ट्रीय सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग कार्यक्रम को प्रभावी बनाने तथा महिला स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण साबित होगी।



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सुरखी को 16 करोड़ की स्वास्थ्य सौगात: जैसीनगर में बनेगा 50 बिस्तरीय सिविल अस्पताल, मंत्री गोविंद राजपूत के प्रयासों से मिली सौगात

सुरखी को 16 करोड़ की ऐतिहासिक स्वास्थ्य सौगात, जैसीनगर में बनेगा 50 बिस्तरीय सिविल अस्पताल

मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के प्रयासों से मिली स्वीकृति, क्षेत्र को मिलेंगी आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं


तीनबत्ती न्यूज: 23 जुलाई, 2026

सागर। सुरखी विधानसभा क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं को बड़ी मजबूती मिलने जा रही है। राज्य शासन ने जैसीनगर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का उन्नयन 50 बिस्तरीय सिविल अस्पताल के रूप में करने की मंजूरी देते हुए लगभग 16 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है। यह स्वीकृति खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के लगातार प्रयासों और शासन स्तर पर किए गए फॉलोअप का परिणाम बताई जा रही है।

मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों तक भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि जैसीनगर अस्पताल का उन्नयन सुरखी विधानसभा क्षेत्र की लंबे समय से चली आ रही महत्वपूर्ण मांग थी, जिसे अब मंजूरी मिल गई है।

उन्होंने कहा कि इस परियोजना के पूरा होने के बाद क्षेत्र के लोगों को सामान्य और विशेषज्ञ उपचार के लिए सागर, भोपाल या अन्य शहरों की ओर कम जाना पड़ेगा। इससे समय, धन और परेशानी की बचत होगी तथा बड़े अस्पतालों पर भी दबाव कम होगा।

विशेषज्ञ डॉक्टरों की मिलेगी सुविधा

50 बिस्तरीय सिविल अस्पताल में चिकित्सा विशेषज्ञ, सर्जरी विशेषज्ञ, हड्डी रोग विशेषज्ञ, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ, शिशु रोग विशेषज्ञ, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ, नेत्र रोग विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट, पैथोलॉजिस्ट, ईएनटी विशेषज्ञ, दंत चिकित्सक, फिजियोथेरेपिस्ट, ओटी तकनीशियन और अन्य आवश्यक स्वास्थ्यकर्मी उपलब्ध रहेंगे।

मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं होंगी मजबूत

अस्पताल में सुरक्षित प्रसव, हाई-रिस्क गर्भावस्था का उपचार, नवजात शिशु देखभाल, नियमित टीकाकरण, परिवार कल्याण सेवाएं तथा अन्य आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं पहले से अधिक बेहतर तरीके से उपलब्ध होंगी। इससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम करने में भी मदद मिलेगी।

विकास की दिशा में बड़ा कदम

मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि सुरखी विधानसभा क्षेत्र में सड़क, शिक्षा, पेयजल, सिंचाई, बिजली और स्वास्थ्य सहित सभी क्षेत्रों में लगातार विकास कार्य किए जा रहे हैं। जैसीनगर का 50 बिस्तरीय सिविल अस्पताल इस विकास यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होगा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लाखों लोगों को इसका लाभ मिलेगा।


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सागर बीएमसी को सीताराम रसोई परिवार ने दी HFNC मशीन, गंभीर नवजातों को मिलेगा आधुनिक उपचार

सीताराम रसोई परिवार ने बीएमसी को भेंट की अत्याधुनिक HFNC मशीन, गंभीर नवजातों को मिलेगा बेहतर उपचार


तीनबत्ती न्यूज: 18 जुलाई, 2026

सागर। बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (बीएमसी) के शिशु रोग विभाग में नवजात शिशुओं की चिकित्सा सेवाओं को और मजबूत बनाने के लिए सीताराम रसोई परिवार ने अत्याधुनिक एचएफएनसी (High Flow Nasal Cannula-HFNC) मशीन दान स्वरूप भेंट की। इस आधुनिक जीवनरक्षक उपकरण के मिलने से गंभीर रूप से बीमार नवजातों को बेहतर ऑक्सीजन सपोर्ट मिलेगा और कई मामलों में वेंटिलेटर की आवश्यकता भी कम हो सकेगी।

बीएमसी में आयोजित कार्यक्रम में मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. पी.एस. ठाकुर ने मशीन का लोकार्पण करते हुए संस्था के सेवा कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि समाज और चिकित्सा संस्थानों के समन्वय से स्वास्थ्य सेवाएं अधिक प्रभावी बनती हैं तथा आधुनिक उपकरणों से नवजातों को बेहतर उपचार उपलब्ध होगा।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. मनीष जैन ने किया। इस अवसर पर सीताराम रसोई परिवार के संरक्षक प्रकाश चौबे सहित हिमांशु मिश्रा, मनोज वर्मा, प्रभात चौबे, प्रभात जैन, दिलीप मुखारिया, राजीव चौरसिया, संजीव चौरसिया और राजेश गुप्ता उपस्थित रहे।

पहले भी दे चुके हैं चिकित्सा उपकरण

संस्था ने इससे पहले भी शिशु रोग विभाग को फोटोथेरेपी मशीन सहित कई आवश्यक चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराए हैं। संस्था के संरक्षक प्रकाश चौबे ने कहा कि बच्चों की मुस्कान और उनकी जिंदगी की रक्षा से बड़ा कोई सामाजिक दायित्व नहीं है। संस्था समाज के सहयोग को जरूरतमंद मरीजों तक पहुंचाने का कार्य निरंतर करती रहेगी।

वेंटिलेटर की जरूरत कम करेगी HFNC तकनीक

शिशु रोग विशेषज्ञों के अनुसार, एचएफएनसी मशीन गंभीर रूप से बीमार नवजातों को उच्च प्रवाह वाली ऑक्सीजन उपलब्ध कराती है। इससे कई मामलों में वेंटिलेटर जैसी जटिल और आक्रामक प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं पड़ती तथा नवजातों के फेफड़ों को सुरक्षित रखते हुए उनकी रिकवरी तेजी से होती है।

वरिष्ठ चिकित्सक रहे मौजूद

कार्यक्रम में शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. आशीष जैन, डॉ. शालिनी हजेला, डॉ. रूपा अग्रवाल, डॉ. अजीत असाटी, डॉ. महेंद्र सिंह चौहान सहित अनेक वरिष्ठ चिकित्सक उपस्थित रहे। डॉ. अंकित जैन ने संस्था का आभार व्यक्त किया। इस दौरान डॉ. रविकांत अरजरिया, डॉ. अमर गंगवानी, डॉ. अंजलि पटेल, डॉ. संजय प्रसाद, डॉ. शीला जैन, डॉ. राघवेंद्र चौबे सहित मेडिकल कॉलेज का स्टाफ मौजूद रहा।

मीडिया प्रभारी डॉ. सौरभ जैन ने बताया कि समाज के सहयोग से सरकारी अस्पतालों में आधुनिक तकनीकों का विस्तार हो रहा है। सीताराम रसोई परिवार द्वारा उपलब्ध कराई गई HFNC मशीन से गंभीर रूप से बीमार नवजातों को समय पर बेहतर उपचार मिलेगा और बाल रोग विभाग की आपातकालीन सेवाएं और अधिक सुदृढ़ होंगी।

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सागर के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में सीताराम रसोई परिवार ने शिशु रोग विभाग को अत्याधुनिक HFNC मशीन भेंट की। इससे गंभीर नवजातों को बेहतर ऑक्सीजन सपोर्ट और आधुनिक उपचार मिलेगा।

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सागर जिला अस्पताल के SNCU ने रचा जीवन का चमत्कार, 915 ग्राम के नवजात को मिला नया जीवन

सागर जिला अस्पताल के SNCU ने रचा जीवन का चमत्कार, 915 ग्राम के नवजात को मिला नया जीवन


तीनबत्ती न्यूज: 16 जुलाई 2026

सागर: । मध्यप्रदेश शासन की मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का सकारात्मक परिणाम सागर जिला चिकित्सालय में देखने को मिला। जिला अस्पताल की विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (SNCU) में चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ की सतत निगरानी, विशेषज्ञ उपचार एवं समर्पित देखभाल से महज 915 ग्राम वजन वाले गंभीर नवजात को नया जीवन मिला। स्वस्थ होने के बाद नवजात को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।



जानकारी के अनुसार, रहली विकासखंड के ग्राम पीराहार निवासी लीला बाई आदिवासी ने 1 जून 2026 की रात करीब 11:30 बजे शिशु को जन्म दिया। जन्म के तुरंत बाद नवजात की हालत अत्यंत गंभीर थी। उसे सांस लेने में कठिनाई हो रही थी और हृदय गति भी सामान्य से कम थी। गंभीर स्थिति को देखते हुए नवजात को तत्काल जिला चिकित्सालय के SNCU में भर्ती किया गया।

तत्काल उपचार से बची जान

SNCU प्रभारी डॉ. सौरभ जोशी ने बिना समय गंवाए बैग एंड मास्क वेंटिलेशन देकर शिशु की जान बचाई। इसके बाद नवजात को सी-पैप (CPAP) मशीन के माध्यम से श्वसन सहायता प्रदान की गई। भर्ती के समय बच्चे का वजन मात्र 915 ग्राम था, जो सामान्य नवजात की तुलना में काफी कम था।



20 दिन तक ट्यूब फीडिंग, कंगारू मदर केयर से मिला लाभ

चिकित्सकीय टीम ने लगातार निगरानी रखते हुए संक्रमण से बचाव के लिए आवश्यक दवाएं दीं। उपचार के दौरान खून की कमी होने पर नवजात को रक्त भी चढ़ाया गया। लगभग 20 दिनों तक ट्यूब फीडिंग के माध्यम से पोषण दिया गया, जिसके बाद कटोरी-चम्मच से दूध पिलाना शुरू किया गया।

साथ ही कंगारू मदर केयर (KMC) के जरिए मां और शिशु के बीच त्वचा से त्वचा का संपर्क कराया गया, जिससे बच्चे के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हुआ।

915 ग्राम से बढ़कर 1.415 किलोग्राम हुआ वजन

चिकित्सकों ने शिशु के वजन, श्वसन, हृदय गति और अन्य महत्वपूर्ण स्वास्थ्य मानकों की नियमित निगरानी की। उपचार के सकारात्मक परिणामस्वरूप 15 जुलाई 2026 तक नवजात का वजन बढ़कर 1.415 किलोग्राम हो गया। सभी आवश्यक जांचें सामान्य आने के बाद चिकित्सकों ने शिशु को स्वस्थ अवस्था में डिस्चार्ज कर दिया।

नवजात के माता-पिता ने सफल उपचार के लिए डॉ. सौरभ जोशी, चिकित्सकीय टीम और पूरे नर्सिंग स्टाफ का आभार व्यक्त किया।


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सागर: कलेक्टर प्रतिभा पाल का सख्त एक्शन, गलत डेटा फीड करने वाली ANM होंगी निलंबित

सागर: स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही पर कलेक्टर प्रतिभा पाल सख्त, गलत डेटा फीड करने वाली एएनएम को निलंबित करने के निर्देश


तीनबत्ती न्यूज: 6 जुलाई 2026

सागर: जिले की स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कलेक्टर प्रतिभा पाल ने जिला स्वास्थ्य समिति की समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि जनता के स्वास्थ्य से जुड़े सभी कार्य सर्वोच्च प्राथमिकता पर किए जाएं।

बैठक के दौरान स्वास्थ्य पोर्टल पर गलत और फर्जी डेटा फीड किए जाने का मामला सामने आने पर कलेक्टर ने नाराजगी जताई। उन्होंने निर्देश दिए कि जो भी एएनएम गलत अथवा फर्जी जानकारी पोर्टल पर दर्ज कर रही हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए। उन्होंने कहा कि गलत आंकड़ों के कारण हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की सही पहचान नहीं हो पाती, जिससे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होती हैं।

सागर: जुआ प्रकरण और अनुशासनहीनता पर स्वास्थ्य विभाग की बड़ी कार्रवाई, वार्डबॉय सस्पेंड

शत-प्रतिशत एएनसी पंजीयन सुनिश्चित करने के निर्देश

कलेक्टर ने सभी ब्लॉक मेडिकल अधिकारियों (बीएमओ) को निर्देश दिए कि जिले में एक भी गर्भवती महिला का एएनसी (ANC) पंजीयन और स्वास्थ्य परीक्षण नहीं छूटना चाहिए। प्रथम, द्वितीय, तृतीय और चतुर्थ एएनसी जांच का पूरा और सही रिकॉर्ड पोर्टल पर दर्ज किया जाए।

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हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की पहले से हो पहचान

बैठक में उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की समय रहते पहचान करने और उनकी डिलीवरी चिन्हित अस्पतालों में सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही गंभीर एनीमिया से पीड़ित महिलाओं के समुचित उपचार और नवविवाहित महिलाओं की समग्र आईडी आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से अनिवार्य रूप से बनवाने पर भी जोर दिया गया।

हर शनिवार होगी सेक्टर स्तर की समीक्षा

कलेक्टर ने ब्लॉक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी मजबूत करने के लिए प्रत्येक शनिवार सेक्टर स्तर की बैठक आयोजित करने और उसके बाद बीएमओ द्वारा विस्तृत समीक्षा करने के निर्देश दिए। जिन सेक्टरों में एएनएम के पद रिक्त हैं, वहां अन्य उपलब्ध एएनएम को प्रभार देकर कार्य सुचारू रूप से संचालित करने को कहा गया।

टीकाकरण, एनआरसी और राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों की समीक्षा

बैठक में शिशु मृत्यु समीक्षा, मातृ मृत्यु समीक्षा, टीकाकरण, खसरा एवं पल्स पोलियो अभियान की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि टीकाकरण संबंधी सभी आंकड़े समय पर एचएमआईएस से यू-विन पोर्टल पर दर्ज किए जाएं।

इसके अलावा जिले के सभी 9 पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) की कार्यप्रणाली की समीक्षा करते हुए कुपोषित बच्चों के उपचार में तेजी लाने के निर्देश दिए गए। टीबी, मलेरिया और कुष्ठ नियंत्रण कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा करते हुए तय लक्ष्यों को समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश भी दिए गए।

बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विवेक के. वी., प्रभारी सीएमएचओ डॉ. देवेश पटेरिया, जिला कार्यक्रम अधिकारी भरत सिंह राजपूत सहित स्वास्थ्य एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।

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