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दमोह : कलेक्टर का जिला अस्पताल और CMHO कार्यालय का निरीक्षण : दवा स्टोर में मिलीं गंभीर अनियमितताएं, दो कर्मचारी सस्पेंड • 24 घंटे में इंडेंट जारी करने के निर्देश; 8 में से 6 दवाओं के स्टॉक में मिली विसंगति ,एक्सपायरी डेट की मिली दवाएं : गैरहाजिर 21 कर्मचारियों का तीन दिन का वेतन काटने के आदेश

दमोह : कलेक्टर का जिला अस्पताल और CMHO  कार्यालय का निरीक्षण : दवा स्टोर में मिलीं गंभीर अनियमितताएं, दो कर्मचारी सस्पेंड

•  24 घंटे में इंडेंट जारी करने के निर्देश; 8 में से 6 दवाओं के स्टॉक में मिली विसंगति ,एक्सपायरी डेट की मिली दवाएं : गैरहाजिर 21 कर्मचारियों का तीन दिन का वेतन काटने के आदेश



तीनबत्ती न्यूज: 20 अगस्त, 2026

दमोह। शासन की योजनाओं के तहत अस्पतालों को उपलब्ध कराई जा रही दवाओं का लाभ मरीजों को समय पर मिले, इसे लेकर कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने गुरुवार को जिला अस्पताल के स्टोर रूम और सीएमएचओ कार्यालय का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान दवा वितरण और स्टॉक प्रबंधन में गंभीर लापरवाही सामने आई। कलेक्टर ने दवा स्टोर की जिम्मेदारी संभाल रहे दोनों कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया।


निरीक्षण में वर्ष 2025 के विभिन्न शासकीय अस्पतालों से प्राप्त 16 इंडेंट अब तक जारी नहीं किए जाने तथा जनवरी 2026 से 39 इंडेंट लंबित पाए गए। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि दवाओं की उपलब्धता होने पर इंडेंट प्राप्त होने के 24 घंटे के भीतर दवाएं संबंधित अस्पतालों को जारी की जाएं। यदि कोई दवा उपलब्ध नहीं है तो उसकी उपलब्धता के लिए तत्काल आवश्यक कार्रवाई की जाए।

8 में से 6 दवाओं के स्टॉक में मिली विसंगति

स्टोर रूम में दवाओं के स्टॉक का सत्यापन किया गया। इस दौरान 8 मदों में से 6 में स्टॉक संबंधी विसंगतियां सामने आईं। कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्टोर की जिम्मेदारी संभाल रहे दोनों कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि दवाओं को इस तरह व्यवस्थित रखा जाए कि आवश्यकता पड़ने पर उन्हें तत्काल खोजकर अस्पतालों को उपलब्ध कराया जा सके। साथ ही एक्सपायरी दवाओं को अलग रखने और पूरे स्टोर को व्यवस्थित कराने के निर्देश दिए।

छह फ्रिज मिले बंद, एक्सपायरी दवाएं भी मिलीं

निरीक्षण के दौरान एक्सपायरी डेट की दवाएं भी स्टोर में रखी मिलीं। इसके अलावा निर्धारित तापमान में रखी जाने वाली दवाओं के लिए लगे सभी छह फ्रिज बंद पाए गए। कलेक्टर ने इसे गंभीर एवं आपत्तिजनक स्थिति बताते हुए फ्रिज की मरम्मत अथवा आवश्यकतानुसार उन्हें बदलने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि निर्धारित तापमान में दवाओं का भंडारण नहीं होने से मरीजों के लिए गंभीर जोखिम पैदा हो सकता है। इसलिए तापमान व्यवस्था को तत्काल दुरुस्त कराया जाए।


ई-औषधि पोर्टल से होगी स्टॉक की निगरानी

कलेक्टर ने कहा कि शासन द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली दवाओं के लिए ई-औषधि पोर्टल लागू है, जिसमें लाइव डिमांड और ऑनलाइन इश्यू की व्यवस्था है। इससे दवाओं के स्टॉक की किसी भी समय निगरानी और सत्यापन किया जा सकता है। उन्होंने इस व्यवस्था का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।


सीएमएचओ कार्यालय में 21 कर्मचारी अनुपस्थित

कलेक्टर ने सीएमएचओ कार्यालय का भी निरीक्षण किया। सुबह 10:20 बजे 21 कर्मचारी अनुपस्थित मिले। कलेक्टर ने सभी संबंधित कर्मचारियों के तीन दिन का वेतन रोकने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि शासकीय कार्यालयों में अधिकारी-कर्मचारियों की समय पर उपस्थिति और कार्यों का समयबद्ध निष्पादन सुशासन की महत्वपूर्ण कड़ी है। लापरवाही पाए जाने पर जवाबदेही तय की जाएगी।

कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने कहा कि शासन की योजनाओं के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही दवाओं का पूरा लाभ आमजन और मरीजों को समय पर मिले, यही प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

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IMR कम करने के लिए कलेक्टर प्रतिभा पाल की विशेष बैठक, हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी पर सख्त निर्देश

सागर: मातृ-शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए कलेक्टर प्रतिभा पाल की बड़ी पहल, जिला अस्पताल-BMC और स्वास्थ्य अमले की संयुक्त समीक्षा

कलेक्टर प्रतिभा पाल की अध्यक्षता में सागर में जिला स्वास्थ्य समिति की समीक्षा बैठक आयोजित


तीनबत्ती न्यूज: 03 अगस्त, 2026

सागर। जिले में मातृ मृत्यु दर (MMR) और शिशु मृत्यु दर (IMR) को न्यूनतम स्तर पर लाने के उद्देश्य से सोमवार को कलेक्टर प्रतिभा पाल की अध्यक्षता में जिला स्वास्थ्य समिति की विशेष समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में पहली बार जिला चिकित्सालय, बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (बीएमसी) और स्वास्थ्य विभाग के जिला एवं ब्लॉक स्तर के अधिकारियों को एक मंच पर लाकर मातृ एवं शिशु मृत्यु के कारणों की विस्तृत समीक्षा की गई।

कलेक्टर ने कहा कि बैठक का उद्देश्य केवल आंकड़ों की समीक्षा करना नहीं, बल्कि उन वास्तविक कारणों की पहचान करना है जिनके चलते मरीज प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से रेफर होकर जिला अस्पताल या बीएमसी पहुंचते हैं और बाद में मातृ अथवा शिशु मृत्यु के मामलों में बदल जाते हैं। उन्होंने कहा कि हर स्तर पर समय रहते चिकित्सकीय हस्तक्षेप (Timely Intervention) सुनिश्चित किया जाए।

गंभीर एनीमिया और हाई ब्लड प्रेशर बने प्रमुख कारण

समीक्षा में सामने आया कि अधिकांश मातृ मृत्यु के मामलों में गर्भवती महिलाओं में गंभीर एनीमिया तथा गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप (Pregnancy Induced Hypertension) की समस्या पाई गई। इसके अलावा हेपेटिक फेलियर, पोस्टपार्टम हैमरेज, एक्लेम्पसिया और प्रीक्लेम्पसिया जैसी जटिलताएं भी प्रमुख कारण रहीं।

कलेक्टर ने निर्देश दिए कि सभी गर्भवती महिलाओं की नियमित ब्लड प्रेशर (BP) और हीमोग्लोबिन (HB) जांच अनिवार्य रूप से कराई जाए तथा जोखिम वाले मामलों की लगातार निगरानी रखी जाए।

हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं की होगी बर्थ मैपिंग

बैठक में निर्णय लिया गया कि हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं की बर्थ मैपिंग की जाएगी। संभावित प्रसव तिथि से 7 से 15 दिन पहले ऐसी महिलाओं को संबंधित अस्पताल के बर्थ वेटिंग एरिया में भर्ती कराया जाएगा ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल उपचार मिल सके।

इसके साथ ही आशा, एएनएम, सीएचओ और ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर को ऐसे मामलों की नियमित निगरानी करने तथा परिवार को भी निर्धारित अस्पताल की जानकारी देने के निर्देश दिए गए।

डीन डॉ. पी.एस. ठाकुर बोले— हाई-रिस्क मां तो बच्चा भी हाई-रिस्क

बैठक में बीएमसी के डीन डॉ. पी.एस. ठाकुर ने कहा कि यदि मां हाई-रिस्क गर्भवती है तो उससे जन्म लेने वाला शिशु भी हाई-रिस्क श्रेणी में आता है। इसलिए मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर एक-दूसरे से सीधे जुड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा कि गर्भावस्था के दौरान उचित चिकित्सकीय प्रबंधन से समय पूर्व प्रसव और नवजात जटिलताओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।

नवजात मृत्यु के कारणों की भी हुई समीक्षा

आईएमआर की समीक्षा में पाया गया कि अधिकांश शिशु मृत्यु जन्म के बाद पहले 28 दिनों (नियोनेटल पीरियड) में हो रही हैं। इसके प्रमुख कारण समय से पहले जन्म (Prematurity) और जन्म के समय ऑक्सीजन की कमी (Birth Asphyxia) पाए गए।

बैठक में निर्देश दिए गए कि सभी गर्भवती महिलाओं की चारों एएनसी जांच समय पर कराई जाए, पौष्टिक आहार एवं आवश्यक दवाओं का नियमित सेवन सुनिश्चित कराया जाए तथा समय से पहले प्रसव रोकने के लिए हाई-रिस्क मामलों का बेहतर प्रबंधन किया जाए।

डेथ ऑडिट केवल औपचारिकता नहीं बने

कलेक्टर प्रतिभा पाल ने स्पष्ट निर्देश दिए कि मैटरनल डेथ रिव्यू (MDR) और चाइल्ड डेथ रिव्यू (CDR) पूरी गंभीरता के साथ किए जाएं। फॉर्म-1 से फॉर्म-6 तक की सभी जानकारी पारदर्शिता के साथ भरी जाए तथा बीएमसी, जिला अस्पताल और सीएमएचओ कार्यालय की संयुक्त टीम नियमित ऑडिट कर कमियों को दूर करे।

बीएमओ को मैदानी अमले की नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश

बैठक में ब्लॉक मेडिकल ऑफिसरों को निर्देशित किया गया कि वे अपने क्षेत्र की आशा, एएनएम, आशा सुपरवाइजर और सीएचओ के कार्यों की नियमित समीक्षा करें। डेटा एंट्री की गुणवत्ता, समयबद्धता और चिन्हांकन की शुद्धता सुनिश्चित की जाए।

प्रसव के बाद भी होगी विशेष निगरानी

कलेक्टर ने कहा कि प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा की देखभाल उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी गर्भावस्था के दौरान जांच। आशा और एएनएम प्रसूता के घर जाकर नियमित स्वास्थ्य परीक्षण करें, आवश्यक परामर्श दें और उनकी स्वास्थ्य स्थिति का रिकॉर्ड अपडेट रखें।

उन्होंने अनमोल 2.0 पोर्टल पर वास्तविक समय में डेटा अपडेट करने, असुरक्षित डिलीवरी पर नजर रखने तथा नियमित टीकाकरण अभियान को पूरी गंभीरता से लागू करने के निर्देश भी दिए।

"समन्वय से बचाई जा सकती है हर जान"

बैठक के अंत में कलेक्टर प्रतिभा पाल ने कहा कि यदि मैदानी स्वास्थ्य अमला और विशेषज्ञ डॉक्टर मिलकर काम करें तो मातृ एवं शिशु मृत्यु के अधिकांश मामलों को रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग पूरी संवेदनशीलता के साथ कार्य करे ताकि जिले में एक भी मां या नवजात की असमय मृत्यु न हो।

बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विवेक केवी, बीएमसी डीन डॉ. पी.एस. ठाकुर, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. देवेश पटेरिया, सिविल सर्जन डॉ. आर.एस. जयंत सहित बीएमसी, जिला चिकित्सालय एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और चिकित्सक उपस्थित रहे।

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सागर: कलेक्टर प्रतिभा पाल का सख्त एक्शन, गलत डेटा फीड करने वाली ANM होंगी निलंबित

सागर: स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही पर कलेक्टर प्रतिभा पाल सख्त, गलत डेटा फीड करने वाली एएनएम को निलंबित करने के निर्देश


तीनबत्ती न्यूज: 6 जुलाई 2026

सागर: जिले की स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कलेक्टर प्रतिभा पाल ने जिला स्वास्थ्य समिति की समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि जनता के स्वास्थ्य से जुड़े सभी कार्य सर्वोच्च प्राथमिकता पर किए जाएं।

बैठक के दौरान स्वास्थ्य पोर्टल पर गलत और फर्जी डेटा फीड किए जाने का मामला सामने आने पर कलेक्टर ने नाराजगी जताई। उन्होंने निर्देश दिए कि जो भी एएनएम गलत अथवा फर्जी जानकारी पोर्टल पर दर्ज कर रही हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए। उन्होंने कहा कि गलत आंकड़ों के कारण हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की सही पहचान नहीं हो पाती, जिससे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होती हैं।

सागर: जुआ प्रकरण और अनुशासनहीनता पर स्वास्थ्य विभाग की बड़ी कार्रवाई, वार्डबॉय सस्पेंड

शत-प्रतिशत एएनसी पंजीयन सुनिश्चित करने के निर्देश

कलेक्टर ने सभी ब्लॉक मेडिकल अधिकारियों (बीएमओ) को निर्देश दिए कि जिले में एक भी गर्भवती महिला का एएनसी (ANC) पंजीयन और स्वास्थ्य परीक्षण नहीं छूटना चाहिए। प्रथम, द्वितीय, तृतीय और चतुर्थ एएनसी जांच का पूरा और सही रिकॉर्ड पोर्टल पर दर्ज किया जाए।

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हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की पहले से हो पहचान

बैठक में उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की समय रहते पहचान करने और उनकी डिलीवरी चिन्हित अस्पतालों में सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही गंभीर एनीमिया से पीड़ित महिलाओं के समुचित उपचार और नवविवाहित महिलाओं की समग्र आईडी आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से अनिवार्य रूप से बनवाने पर भी जोर दिया गया।

हर शनिवार होगी सेक्टर स्तर की समीक्षा

कलेक्टर ने ब्लॉक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी मजबूत करने के लिए प्रत्येक शनिवार सेक्टर स्तर की बैठक आयोजित करने और उसके बाद बीएमओ द्वारा विस्तृत समीक्षा करने के निर्देश दिए। जिन सेक्टरों में एएनएम के पद रिक्त हैं, वहां अन्य उपलब्ध एएनएम को प्रभार देकर कार्य सुचारू रूप से संचालित करने को कहा गया।

टीकाकरण, एनआरसी और राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों की समीक्षा

बैठक में शिशु मृत्यु समीक्षा, मातृ मृत्यु समीक्षा, टीकाकरण, खसरा एवं पल्स पोलियो अभियान की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि टीकाकरण संबंधी सभी आंकड़े समय पर एचएमआईएस से यू-विन पोर्टल पर दर्ज किए जाएं।

इसके अलावा जिले के सभी 9 पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) की कार्यप्रणाली की समीक्षा करते हुए कुपोषित बच्चों के उपचार में तेजी लाने के निर्देश दिए गए। टीबी, मलेरिया और कुष्ठ नियंत्रण कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा करते हुए तय लक्ष्यों को समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश भी दिए गए।

बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विवेक के. वी., प्रभारी सीएमएचओ डॉ. देवेश पटेरिया, जिला कार्यक्रम अधिकारी भरत सिंह राजपूत सहित स्वास्थ्य एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।

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