अभियोजन अधिकारियों की साग़र संभाग की एक दिवसीय कार्यशाला सम्पन्न

शुक्रवार, 31 जनवरी 2020

जमीनी विवाद पर हत्या की एक महिला सहित चारो आरोपियो को आजीवन कारावास

जमीनी विवाद पर हत्या की एक महिला सहित चारो आरोपियो को आजीवन कारावास
सागर। जघन्य सनसनीखेज मामले में  न्यायालय- श्रीमति आरती ए शुक्ला तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश खुरई जिला सागर की अदालत ने आरोपीगण राजकुमार उर्फ रामकुमार, हल्के उर्फ भवानी, भागीरथ, दिप्पो उर्फ द्रोपदी  सभी निवासी बरोदिया नौनागिर थाना खुरई जिला सागर को धारा 302/34 भादवि में आजीवन कारावास एवं 1000-1000 रूपये के अर्थदण्ड से दंडित किया। म.प्र. शासन की ओर से पैरवी अपर लोक अभियोजक/वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी त्रिलोक राज शास्त्री  ने की।
अभियोजन के मीडिया प्रभारी ए.डी.पी.ओ. सौरभ डिम्हा ने बताया कि मृतक (ब्रजेश) फरियादी (दिलीप) का भाई है जिसका जमीनी विवाद आरोपीगण राजकुमार उर्फ रामकुमार, हल्के उर्फ भवानी, भागीरथ, दिप्पों उर्फ द्रोपदी से था। इसी जमीनी विवाद पर से दिनांक 24.07.2018 के करीब 9ः30 बजे रात में जब मृतक ब्रजेश की माॅ बस स्टेण्ड पर अपने पति को बुलाने पहुची और बताया कि आरोपी राजकुमार और हल्के उसके घर के सामने ब्रजेश को धार के बल कुल्हाडी से मारपीट कर रहे है तथा भागीरथ और दिप्पो उर्फ द्रोपदी उसे आडा डाल के दवोचें है। आरोपीगण के द्वारा मारपीट करने से मृतक ब्रजेश के सिर,सीना एवं बदन पर कई गंभीर चोटें आयी है। सूचना पाकर दिलीप, जयराम मौके पर पहुचें और घायल ब्रजेश को डायल 100 से इलाज हेतु अस्पताल ले जाया गया। इलाज के दौरान ब्रजेश की मृत्यू हो जाती गयी।  प्रार्थी दिलीप के द्वारा दी गयी सूचना पर मर्ग कायम कर मामला विवचना में लिया गया। थाना खुरई ग्रामीण में प्रथम सूचना लेखबद्ध करायी। थाना खुरई ग्रामीण ने मामले की पूरी जाॅच होने के उपरांत साक्ष्य संग्रहित कर आरोपीगण राजकुमार उर्फ रामकुमार, हल्के उर्फ भवानी, भागीरथ, दिप्पो उर्फ द्रोपदी के विरूद्ध अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। जहां अभियोजन ने महत्वपूर्ण साक्ष्य व तर्क प्रस्तुत किये एवं मामला संदेह से परे साबित किया। प्रकरण में अभियोजन अधिकारी द्वारा प्रभारी लिखित तर्क प्रस्तुत किये थे न्यायालय -श्रीमति आरती ए शुक्ला तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश खुरई जिला सागर की अदालत ने आरोपीगण राजकुमार उर्फ रामकुमार, हल्के उर्फ भवानी, भागीरथ, दिप्पों उर्फ द्रोपदी को धारा 302/34 भादवि में दोषी पाते हुए आजीवन कारावास एवं 1000-1000 रूपये के अर्थदण्ड से दंडित किया।

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