बुधवार, 23 दिसंबर 2020

नगर निगम के पार्षद से लेकर संसद तक पहुंचे तीन नेता, वही नपा अध्यक्ष से शुरुआत की फिर सांसद बने #नगरनिगम_चुनाव_सागर

नगर निगम के पार्षद से लेकर संसद तक पहुंचे तीन नेता, वही नपा अध्यक्ष से शुरुआत की फिर सांसद बने 

#नगरनिगम_चुनाव_सागर


@राहुल सिलाकारी

सागर । राजनैतिक क्षेत्र में आए लोगों के लिए विधायक और सांसद जैसे पद अहम मुकाम रखते है. राजनीति की पाठशाला का ककहरा स्थानीय चुनाव माने जाते है, चाहे वह निकाय के हों या पंचायत. प्रदेश में जल्द ही निकाय चुनाव होने की संभावना हैं. ऐसे में यह दिलचस्प है कि नगर निगम सागर के तीन पार्षद निगम से लेकर  संसद तक का सफर तय कर चुके है. इनमें से दो तो ऐसे है जो एक ही कार्यकाल में पार्षद रहे और फिर चुनाव में भी आमने सामने.नगर निगम सागर अपने इस इतिहास पर गर्व कर सकती है। उसने चार सांसद दिए। 

राजनैतिक क्षेत्र में उतरे लोगों के लिए विधायक या संसद पद पाने की ख्वाहिश होती है. स्थानीय चुनाव राजनीति की पहली सीढ़ी कहे जाते है. बुंदेलखंड अंचल के सागर में यह दिलचस्प है कि नगर निगम में रहे तीन पार्षद बाद में संसद तक पहुंचे.
 उल्लेखनीय है कि वर्तमान सांसद राजबहादुर सिंह पार्षद/ निगमाध्यक्ष रहते हुए ही डेढ़ वर्ष पूर्व सांसद का चुनाव जीते थे।  लेकिन पार्षद रहते हुए सांसद चुने जाने की शुरूआत करीब 3 दशक पूर्व ही हो चुकी थी. 1984 में सागर सांसद के रूप में निर्वाचित हुए कांग्रेस प्रत्याशी नंदलाल चौधरी चुनाव के एक वर्ष पूर्व ही हुए निकाय चुनाव में भगवानगंज वार्ड से पार्षद निर्वाचित हुए थे. पार्षद का यह उनका दूसरा कार्यकाल था, पहली बार वह 1957 में हुए निकाय चुनाव में पार्षद बनकर ही राजनीति में सक्रिय हुए थे, जिसके बाद वह खुरई सुरक्षित विस सीट से विधायक भी रहे.

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ऐसे ही 1983 के निकाय चुनाव में चकराघाट वार्ड से पार्षद चुने गए और बाद में उपमहापौर बने शंकरलाल खटीक 1989 में सांसद निर्वाचित हुए. जिन्होने अपने ही पार्षद साथी और सांसद नंदलाल चौधरी को चुनाव हराया था. तो 2019 के चुनाव में भी एक बार फिर इतिहास दोहराया गया और वृंदावनबाग वार्ड से पार्षद और निगमाध्यक्ष राजबहादुर सिंह को भाजपा ने प्रत्याशी बनाया जो वर्तमान सांसद है.  

नपाध्यक्ष रहे डालचंद जैन भी बने सांसद

स्थानीय निकायों में राजनीति करने वाले पार्षद ही नहीं बल्कि निगम बनने के पूर्व नपा में अध्यक्ष रहे नेता भी सांसद चुने जा चुके है. 1962 में नपाध्यक्ष के लिए हुए सीधे चुनावों में स्व. डालचंद जैन अध्यक्ष निर्वाचित हुए थे, जो बाद में 1984 में दमोह लोकसभा क्षेत्र से सांसद निर्वाचित हुए थे.

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