वित्तीय स्वावलंबन से आत्मनिर्भर होंगे स्थानीय निकाय : वित्त आयोग अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया
▪️बैठक में सांसद, विधायक व महापौर से लिया फीडबैक
तीनबत्ती न्यूज| 25अप्रैल, 2026
सागर: जिले के नगरीय निकायों और त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के वित्तीय ढांचे को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से आज सागर में छठवें राज्य वित्त आयोग की एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। आयोग के अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में जनप्रतिनिधियों के साथ सीधे संवाद के माध्यम से विकास और वित्त के नए समीकरणों पर विस्तृत मंथन हुआ।
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बता दें कि राज्य वित्त आयोग भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243-l और 243-Y के तहत गठित एक संवैधानिक निकाय है, जो हर 5 साल में पंचायतों और नगरपालिकाओं की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करता है। यह राज्य सरकार को स्थानीय निकायों (पंचायतों/नगर निगम) के बीच करों के बंटवारे, अनुदान सहायता और उनकी वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए सिफारिशें करता है।
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अध्यक्ष श्री पवैया और सदस्य के. के. सिंह, वीरेंद्र कुमार ने सांसद, विधायक, महापौर और जिला पंचायत अध्यक्ष के साथ विस्तृत चर्चा की। इसका मुख्य उद्देश्य यह था कि जनता के निर्वाचित प्रतिनिधि बिना किसी संकोच के जमीनी वित्तीय बाधाओं, राजस्व संग्रहण की समस्याओं और जनता की वास्तविक जरूरतों को आयोग के समक्ष रख सकें।
आर्थिक सशक्तिकरण पर केंद्रित रहे बैठक के मुख्य बिंदु: ग्रांट से 'रेवेन्यू जनरेशन' की ओर
बैठक को संबोधित करते हुए श्री पवैया ने कहा कि स्थानीय निकायों को अब सरकारी अनुदान के बजाय आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ना होगा। उन्होंने निकायों को स्वयं के आय के स्रोत विकसित करने के लिए प्रेरित किया ताकि वे छोटे-छोटे कार्यों के लिए शासन के भरोसे न रहें।
अध्यक्ष ने कहा कि 73वें और 74वें संवैधानिक संशोधन अधिनियमों का मूल उद्देश्य सत्ता और वित्त का विकेंद्रीकरण था। पंचायतों और निकायों को आर्थिक रूप से इतना सक्षम होना चाहिए कि वे अपने क्षेत्र के विकास का रोडमैप खुद तय कर सकें।
बैठक में जनप्रतिनिधियों से लिया गया सीधा फीडबैक
बैठक में क्षेत्र के विकास को लेकर जनप्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा किए। स्वच्छता, स्ट्रीट लाइट, पेयजल आपूर्ति जैसी बुनियादी सेवाओं, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और सीवेज निकासी की स्थिति, विकास कार्यों के लिए प्राप्त राशि और स्थापना व्यय (वेतन-भत्ते) के अनुपात का संतुलन आदि विषयों पर चर्चा की गई।
सांसद श्रीमती लता वानखेड़े ने ग्रामीण क्षेत्रों के वित्तीय सुदृढ़ीकरण पर जोर दिया। सागर विधायक शैलेंद्र जैन एवं महापौर श्रीमती संगीता तिवारी ने नगरीय विकास और राजस्व वृद्धि की चुनौतियों को रेखांकित किया। विधायक शैलेंद्र जैन ने अमृत योजना के क्रियान्वयन, पाइपलाइन के कारण क्षतिग्रस्त हुई रोड के रेस्टोरेशन, वाटर सप्लाई, नगर निगम के रेवेन्यू कलेक्शन के लिए जिस सर्वे के माध्यम से छूटे हुए घरों को जोड़ने, संपत्ति कर के भुगतान हेतु प्रोत्साहन स्कीम जैसे मुद्दों को लेकर अपने सुझाव रखे। नरयावली विधायक प्रदीप लारिया ने नरयावली विधानसभा में तेजी से बढ़ते शहरीकरण, कॉलोनी निर्माण की बात रखते हुए सुझाव रखा कि कॉलोनाइजर्स, कमर्शियल एस्टैब्लिशमेंट, दुकानों आदि के माध्यम से पंचायत के आय के स्रोत में वृद्धि हो। उन्होंने सौर ऊर्जा का उपयोग करते हुए बिजली में आत्मनिर्भरता की बात भी रखी। देवरी विधायक बृज बिहारी पटेरिया, बंडा विधायक श्री वीरेंद्र सिंह लोधी और जिला पंचायत अध्यक्ष हीरा सिंह राजपूत ने पंचायती राज संस्थाओं को सीधे फंड हस्तांतरण और आवंटन प्रक्रिया के सरलीकरण के सुझाव दिए।
बैठक के दौरान आयोग ने 15वें वित्त आयोग की अनुशंसाओं, प्राप्त राशि का शत-प्रतिशत और गुणवत्तापूर्ण उपयोग सुनिश्चित करने, राजस्व का अधिक हिस्सा ऐसी संपत्तियों के निर्माण में लगाया जाने जो भविष्य में निकाय के लिए आय का जरिया बन सकें। राजस्व संग्रहण में वृद्धि के लिए टैक्स वसूली और संपत्ति कर जैसे स्रोतों के संग्रहण में तकनीक का उपयोग कर पारदर्शिता और दक्षता लाने का भी सुझाव दिया गया।
बैठक में श्री पवैया ने आश्वस्त किया कि जनप्रतिनिधियों द्वारा दिए गए सुझावों को आयोग की आगामी रिपोर्ट में प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक स्थानीय सरकारें वित्तीय रूप से सशक्त और स्वायत्त नहीं होंगी, तब तक अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना सुगम नहीं होगा।







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