सागर पुलिस ने खोला फर्जी फर्म और म्यूल बैंक खातों का बड़ा नेटवर्क, 5.50 करोड़ से अधिक के लेन-देन का खुलासा
तीनबत्ती न्यूज: 14 अगस्त ,2026
सागर। सायबर अपराध और सायबर ठगी के खिलाफ सागर पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। फर्जी फर्म बनाकर साईबर फ्रॉड और ऑनलाइन बेटिंग के मामलों का खुलासा किया है। इसमें 16 फर्जी फर्मों की जानकारी सामने आई है।मकरोनिया थाना पुलिस ने बेरोजगार और सामान्य लोगों के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर फर्जी फर्में बनाकर निजी बैंकों में करंट अकाउंट खुलवाने वाले एक संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। पुलिस की प्रारंभिक जांच में 16 से अधिक फर्जी फर्मों और 5.50 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध बैंकिंग ट्रांजेक्शन का पता चला है। मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि तीन अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।इस पूरे मामले का खुलासा सागर एसपी अनुराग सुजानिया ने पत्रकार वार्ता में किया।
बेरोजगारों को कमीशन का लालच देकर खुलवाते थे खाते
पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य बेरोजगार एवं सामान्य व्यक्तियों को कमीशन और पैसों का लालच देकर उनके आधार सहित अन्य दस्तावेज हासिल करते थे। इन दस्तावेजों के आधार पर फर्जी फर्में तैयार कर विभिन्न निजी बैंकों में करंट अकाउंट खुलवाए जाते थे। बाद में इन खातों को गिरोह अपने नियंत्रण में लेकर सायबर ठगी और अन्य संदिग्ध गतिविधियों से प्राप्त रकम के लेन-देन एवं सर्कुलेशन के लिए म्यूल अकाउंट के रूप में इस्तेमाल करता था।
शिकायत के बाद शुरू हुई जांच
13 अगस्त 2026 को मकरोनिया थाना क्षेत्र के रोहित पिता रूपराज पटेल ने पुलिस को शिकायत दी कि उसके दस्तावेजों का दुरुपयोग कर उसके नाम से फर्जी फर्म बनाई गई है और फेडरल बैंक, मकरोनिया शाखा में करंट अकाउंट खोला गया है। पुलिस ने खाते की जांच की तो सामने आया कि रोहित के नाम से ‘ग्लैमर इंटरप्राइजेस’ नामक फर्म बनाई गई थी। इस खाते में फरवरी 2026 से करीब छह माह की अवधि में लगभग 90 लाख रुपये का ट्रांजेक्शन हुआ था। इसके बाद पुलिस ने बैंक खातों, फर्मों और तकनीकी साक्ष्यों का विस्तृत विश्लेषण शुरू किया।
पूछताछ में सामने आया नेटवर्क
विवेचना के दौरान पुलिस ने धर्मेन्द्र नाहर और सोनू दांगी को गिरफ्तार किया। पूछताछ में धर्मेन्द्र नाहर ने बताया कि उसने यह काम भोपाल निवासी अमित विश्वकर्मा से मुंबई में सीखा था। अमित ने उसे बताया था कि ऑनलाइन गेमिंग और बैटिंग से प्राप्त राशि के सर्कुलेशन के लिए बैंक खातों की आवश्यकता होती है।
इसके बाद धर्मेन्द्र नाहर ने सोनू दांगी तथा भोपाल निवासी सरमन उर्फ शुभम रैकवार, विपिन गिरी और स्वर्णेन्द्र पांडे के साथ मिलकर लोगों के नाम से फर्जी फर्में बनाकर बैंक खाते खुलवाना शुरू किया।
16 से अधिक फर्जी फर्मों का खुलासा
पुलिस के अनुसार अब तक जांच में निम्न फर्मों के नाम सामने आए है : 1. ग्लैमर इंटरप्राइजेस
2. भूपेन्द्र इंटरप्राइजेस
3. सूर्या इंटरप्राइजेस
4. समृद्धि टूर एंड ट्रेवल्स
5. लवली स्वीट एंड मसाला चाट सेंटर
6. कार्तिक इलेक्ट्रॉनिक्स
7. स्टार इंटरप्राइजेस
8. राजपूत इंटरप्राइजेस
9. अनुभव ट्रेडर्स
10. सागर ट्रेडर्स
11. शर्मा जी इंटरप्राइजेस
12. सौरभ इंटरप्राइजेस
13. माखन इंटरप्राइजेस
14. अंकेश इंटरप्राइजेस
15. तनविक इंटरप्राइजेस
16. यूनिक टूर एंड ट्रेवल्स
इन फर्मों से जुड़े बैंक खातों के प्रारंभिक वित्तीय विश्लेषण में 5.50 करोड़ रुपये से अधिक के ट्रांजेक्शन का पता चला है। पुलिस द्वारा सभी खातों के लेन-देन का तकनीकी और वित्तीय विश्लेषण जारी है।
फर्म और बैंक खाते खुलवाने की प्रक्रिया भी जांच के घेरे में
पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि फर्जी फर्मों के पंजीयन और संबंधित बैंक खातों को खुलवाने की प्रक्रिया में किन व्यक्तियों अथवा संस्थाओं की भूमिका रही। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर फर्म पंजीयन या बैंक खाते खोलने में किसी स्तर पर लापरवाही अथवा आपराधिक संलिप्तता सामने आने पर संबंधितों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
दो आरोपी गिरफ्तार, तीन की तलाश
गिरफ्तार आरोपी में धर्मेन्द्र पिता हरिदास नाहर, उम्र 38 वर्ष, निवासी सिविल लाइन के पीछे, खजुराहो, छतरपुर; हाल निवासी शिवनगर, थाना बहेरिया, सागर और सोनू दांगी पिता रामेश्वर दांगी, उम्र 28 वर्ष, निवासी ग्राम बमोरी घाट, थाना जैसीनगर, सागर। है
अन्य आरोपियो में अमित विश्वकर्मा पिता जगदीश प्रसाद विश्वकर्मा, निवासी भोपाल, विपिन गिरी पिता अशोक गिरी, निवासी भोपाल और स्वर्णेन्द्र पांडे पिता चंद्रभान पांडे, निवासी भोपाल है। पुलिस के अनुसार अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है और उनकी गिरफ्तारी के लिए टीमें लगातार प्रयास कर रही हैं।
एसपी ने नागरिकों से की अपील
एसपी अनुराग सुजानिया ने नागरिकों से अपील की है कि कमीशन या आसान कमाई के लालच में अपना बैंक खाता, एटीएम, चेकबुक, पासबुक, मोबाइल नंबर, ओटीपी अथवा अन्य बैंकिंग जानकारी किसी दूसरे व्यक्ति को उपलब्ध न कराएं। किसी अन्य के कहने पर अपने नाम से बैंक खाता या फर्म खुलवाकर उसका संचालन दूसरे व्यक्ति को देना गंभीर कानूनी जोखिम पैदा कर सकता है। ऐसे खातों का इस्तेमाल सायबर ठगी की रकम के लेन-देन में होने पर खाताधारक भी जांच के दायरे में आ सकता है।
इनकी रही महत्वपूर्ण भूमिका
कार्रवाई में निरीक्षक नितिन पाल, थाना प्रभारी मकरोनिया, उपनिरीक्षक शशिकांत गुर्जर, थाना प्रभारी बहेरिया, उपनिरीक्षक रामअवतार धाकड़, उपनिरीक्षक राकेश राजपूत, उपनिरीक्षक मनीषा तिवारी, प्रधान आरक्षक सौरभ रैकवार, आरक्षक आशीष गौतम, प्रदीप शर्मा, मनीष तिवारी, आशीष यादव, भानूप्रताप, सृजन तिवारी, देवेन्द्र रावत, नरेंद्र रावत, शुभम, अरविंद एवं अजय की महत्वपूर्ण भूमिका रही।







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