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सागर पुलिस ने ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क का किया पर्दाफाश, ₹2.69 करोड़ नकद और 30 लाख का सोना बरामद

सागर पुलिस ने ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क का किया पर्दाफाश, ₹2.69 करोड़ नकद और 30 लाख का सोना बरामद: ऑनलाइन गेमिंग और बेटिंग का खुलासा

• 30 से अधिक फर्जी फर्मों का खुलासा, कई फर्जी कंपनियो के एटीएम, पासबुक, चेकबुक, मोबाईल एवं महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद



तीनबत्ती न्यूज: 19 अगस्त, 2026

सागर। सायबर अपराध और ऑनलाइन सट्टेबाजी के खिलाफ सागर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए फर्जी फर्मों और म्यूल बैंक खातों के जरिए करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेन-देन करने वाले संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में अब तक 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि 2 आरोपी फरार बताए गए हैं।

सागर पुलिस ने ऑनलाइन गेमिंग और बैटिंग का नेटवर्क संचालित करने वाले मुख्य आरोपी समेत दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 2 करोड़ 69 लाख 42 हजार 700 रुपए नकद और करीब 30 लाख रुपए कीमत के सोने-चांदी के आभूषण जब्त किए गए हैं। दोनों आरोपियों को भोपाल से गिरफ्तार कर सागर लाया गया है, जहां उनसे पूछताछ की जा रही है। इससे पहले पुलिस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। एसपी अनुराग सुजानिया ने आज मीडिया के सामने पूरा खुलासा किया।पुलिस ने इनसेनोट गिनने की मशीन, मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं।




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बेरोजगार लोगों के दस्तावेज लेकर खुलवाते थे फर्जी खाते

सागर पुलिस की जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य बेरोजगार एवं सामान्य लोगों को कमीशन और पैसों का लालच देकर उनके दस्तावेज प्राप्त करते थे। इन दस्तावेजों के आधार पर फर्जी फर्में तैयार की जाती थीं और निजी बैंकों में उनके नाम से करंट अकाउंट खुलवाए जाते थे।बाद में इन बैंक खातों को गिरोह अपने नियंत्रण में लेकर ऑनलाइन सट्टेबाजी और साइबर ठगी से प्राप्त रकम के लेन-देन एवं सर्कुलेशन के लिए म्यूल अकाउंट के रूप में इस्तेमाल करता था।

यह भी पढ़ें: सीहोर में फर्जी ट्रेडिंग ऐप कॉल सेंटर का भंडाफोड़, कटनी में ₹2.10 लाख की साइबर ठगी

शिकायत से खुला करोड़ों के नेटवर्क का राज

13 अगस्त 2026 को मकरोनिया थाने में रोहित पिता रूपराज पटेल ने शिकायत की थी कि उसके दस्तावेजों का दुरुपयोग कर उसके नाम से फर्जी फर्म बनाई गई और फेडरल बैंक की मकरोनिया शाखा में करंट अकाउंट खुलवाया गया।

पुलिस ने खाते की जांच की तो सामने आया कि रोहित के नाम से 'ग्लैमर इंटरप्राइजेस' नामक फर्म बनाई गई थी। फरवरी 2026 से करीब छह महीने के दौरान इस खाते में लगभग 90 लाख रुपये का ट्रांजेक्शन हुआ था।

     (नोट गिनने कि जब्त मशीन)

मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सागर नरेंद्र सोलंकी के पर्यवेक्षण में मकरोनिया थाना प्रभारी निरीक्षक नितिन पाल के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई। टीम ने बैंक खातों, फर्मों, लेन-देन और तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण शुरू किया।

भोपाल और मुंबई से जुड़े तार

पुलिस पूछताछ में सामने आया कि आरोपी धर्मेंद्र नाहर ने ऑनलाइन सट्टेबाजी और बैंक खातों के नेटवर्क से जुड़ा काम अमित विश्वकर्मा से सीखा था। इसके बाद धर्मेंद्र ने सागर के स्थानीय साथी सोनू दांगी तथा सरमन उर्फ शुभम रैकवार, विपिन गिरी और स्वर्णेंद्र पांडे के साथ मिलकर फर्जी फर्में तैयार कर बैंक खाते खुलवाने का काम शुरू किया। पुलिस के मुताबिक, ऑनलाइन बेटिंग का संचालन रिषभ पटेल द्वारा किया जा रहा था। पुलिस टीम ने रिषभ पटेल को गिरफ्तार किया। उसके कब्जे से 2,69,42,700 रुपये नकद और करीब 30 लाख रुपये का सोना बरामद हुआ।



टेलीग्राम ग्रुप के जरिए ऑनलाइन सट्टेबाजी

पुलिस के अनुसार, पूछताछ में रिषभ पटेल ने बताया कि वह ऑनलाइन बेटिंग वेबसाइटों और अन्य प्लेटफॉर्म के माध्यम से सट्टा खिलाता था। फर्जी फर्मों के बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कराकर उसे नकद निकाला जाता था।

आरोपी ने कथित तौर पर टेलीग्राम के माध्यम से ग्राहकों का ग्रुप बना रखा था। इस नेटवर्क के जरिए ग्राहकों को ऑनलाइन सट्टेबाजी पैनल की लिंक और क्रेडिट कॉइन उपलब्ध कराए जाते थे।

पुलिस ने मामले में गिरफ्तार आरोपियों अमित विश्वकर्मा और रिषभ पटेल को न्यायालय से 8 दिन की पुलिस रिमांड पर लिया है। उनसे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों और वित्तीय लेन-देन के संबंध में पूछताछ की जा रही है।


30 से अधिक फर्जी फर्मों का खुलासा

पुलिस के तकनीकी और वित्तीय विश्लेषण में अब तक 30 से अधिक फर्जी फर्मों का पता चला है। इनमें से जांच में सामने आई प्रमुख फर्में हैं—

1. ग्लैमर इंटरप्राइजेस

2. भूपेन्द्र इंटरप्राइजेस

3. सूर्या इंटरप्राइजेस

4. समृद्धि टूर एंड ट्रेवल्स

5. लवली स्वीट एंड मसाला चाट सेंटर

6. कार्तिक इलेक्ट्रॉनिक्स

7. स्टार इंटरप्राइजेस

8. राजपूत इंटरप्राइजेस

9. अनुभव ट्रेडर्स

10. सागर ट्रेडर्स

11. शर्मा जी इंटरप्राइजेस

12. सौरभ इंटरप्राइजेस

13. माखन इंटरप्राइजेस

14. अंकेश इंटरप्राइजेस

15. तनविक इंटरप्राइजेस

16. यूनिक टूर एंड ट्रेवल्स

17. महाकाल ट्रेडर्स

18. मैक्स ट्रेडर्स

19. बालाजी ट्रेडर्स

20. जय महाकाल टूर एंड ट्रेवल्स

पुलिस के प्रारंभिक वित्तीय विश्लेषण में इन फर्मों से संबंधित बैंक खातों में करीब 5.50 करोड़ रुपये से अधिक का ट्रांजेक्शन पाया गया है। पुलिस द्वारा सभी खातों के लेन-देन का विस्तृत वित्तीय और तकनीकी विश्लेषण किया जा रहा है।

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फर्जी फर्म और बैंक खाते खुलवाने की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में

सागर पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि फर्जी फर्मों के पंजीयन और बैंक खातों को खुलवाने की प्रक्रिया में किन व्यक्तियों अथवा संस्थाओं की भूमिका रही।

पुलिस के अनुसार, फर्जी दस्तावेजों के आधार पर फर्म पंजीयन या बैंक खाते खोलने में किसी स्तर पर लापरवाही अथवा आपराधिक संलिप्तता पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।



ये आरोपी गिरफ्तार

पुलिस ने मामले में निम्न आरोपियों की गिरफ्तारी की है—

- धर्मेंद्र पिता हरिदास नाहर, निवासी खजुराहो, छतरपुर, हाल शिवनगर, थाना बहेरिया, सागर।

- सोनू दांगी पिता रामेश्वर दांगी, निवासी ग्राम बमोरी घाट, थाना जैसीनगर, सागर।

- अमित विश्वकर्मा पिता जगदीश प्रसाद विश्वकर्मा, निवासी इंदौर, हाल रोहित नगर, भोपाल।

- विपिन गिरी पिता अशोक गिरी, निवासी नीरजा नगर, जेके रोड, भोपाल।

- स्वर्णेंद्र पांडे पिता चंद्रभान पांडे, निवासी पीताम्बरा होम्स, खजूरी कला, भोपाल।

- रिषभ पटेल पिता स्वर्गीय रवि पटेल, निवासी मंडला, वर्तमान पता भोपाल।

दो आरोपी फरार

पुलिस के अनुसार सरमन उर्फ शुभम रैकवार निवासी खजुराहो, छतरपुर, वर्तमान पता भोपाल तथा ऋषि केशव सिंह निवासी सीधी, वर्तमान पता भोपाल फरार हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें लगातार प्रयास कर रही हैं।

पुलिस की नागरिकों से अपील

सागर पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि कमीशन या आसान कमाई के लालच में अपना बैंक खाता, एटीएम, चेकबुक, पासबुक, मोबाइल नंबर, ओटीपी अथवा अन्य बैंकिंग जानकारी किसी दूसरे व्यक्ति को उपलब्ध न कराएं। पुलिस ने यह भी चेताया है कि किसी अन्य व्यक्ति के कहने पर अपने नाम से बैंक खाता या फर्म खुलवाकर उसका संचालन दूसरे व्यक्ति को देना गंभीर कानूनी जोखिम पैदा कर सकता है। यदि ऐसे खाते का इस्तेमाल साइबर ठगी अथवा अन्य अवैध गतिविधियों की रकम के लेन-देन में होता है तो खाताधारक भी जांच के दायरे में आ सकता है।

इन पुलिसकर्मियों की रही महत्वपूर्ण भूमिका

कार्रवाई में थाना मकरोनिया प्रभारी निरीक्षक नितिन पाल, थाना प्रभारी बहेरिया उपनिरीक्षक शशिकांत गुर्जर, बिलहेरा चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक रामअवतार धाकड़, सउनि काशीराम ठाकुर, साइबर सेल सागर के प्रआर सौरभ रैकवार, आरक्षक हेमेन्द्र ठाकुर सहित थाना मकरोनिया, साइबर सेल और थाना शाहपुरा की पुलिस टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।



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सीहोर में फर्जी ट्रेडिंग ऐप कॉल सेंटर का भंडाफोड़, कटनी में ₹2.10 लाख की साइबर ठगी

सीहोर में फर्जी ट्रेडिंग ऐप का कॉल सेंटर पकड़ा, कटनी में चोरी के मोबाइल से ₹2.10 लाख की साइबर ठगी


तीनबत्ती न्यूज: 18 अगस्त ,2026

भोपाल। मध्यप्रदेश पुलिस ने साइबर ठगी के अंतरराज्यीय नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए सीहोर और कटनी में दो अलग-अलग मामलों का खुलासा किया है। पुलिस ने दोनों मामलों में कुल छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

सीहोर में पुलिस ने ‘FX Trade’ नाम के फर्जी ट्रेडिंग ऐप के जरिए निवेश पर भारी मुनाफे का लालच देकर ठगी करने वाले कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। वहीं कटनी में चोरी किए गए मोबाइल फोन के जरिए बैंक खातों से 2 लाख 10 हजार रुपये निकालने वाले झारखंड निवासी तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

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सीहोर में छह महीने से चल रहा था फर्जी कॉल सेंटर

सीहोर कोतवाली पुलिस ने शिकायत के बाद तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की। पुलिस के अनुसार मुख्य आरोपी सतीश मेवाड़ा शीतल बिहार कॉलोनी, सीहोर में पिछले करीब छह महीने से फर्जी कॉल सेंटर चला रहा था।

कॉल सेंटर में छह कर्मचारी लोगों को शेयर बाजार और ट्रेडिंग में कम समय में भारी मुनाफे का लालच देकर ‘FX Trade’ ऐप के माध्यम से निवेश करवाते थे। जांच में अब तक 20 लाख रुपये से अधिक के फर्जी निवेश की जानकारी सामने आई है।

ठगी की रकम को ठिकाने लगाने के लिए आरोपियों द्वारा म्यूल बैंक खातों का इस्तेमाल किया जाता था। लोन दिलाने के नाम पर लोगों से बैंक खाते, ATM कार्ड, पासबुक और लिंक सिम हासिल कर उनमें ठगी की रकम मंगाई जाती थी। इसके बाद ATM से रकम निकाल ली जाती थी।

NCRP पर जांच के दौरान इन बैंक खातों से देश के अलग-अलग राज्यों में साइबर धोखाधड़ी की शिकायतें जुड़ी मिलीं, जिससे नेटवर्क के अंतरराज्यीय स्तर पर सक्रिय होने की जानकारी सामने आई।


पुलिस ने कार्रवाई के दौरान 5 कंप्यूटर सिस्टम, 1 लैपटॉप, 5 कीपैड मोबाइल, 5 स्मार्टफोन, पासबुक, चेकबुक, FX Trade आईडी कार्ड और सिम कार्ड जब्त किए हैं।


कटनी में चोरी के मोबाइल से बैंक खातों पर निशाना

दूसरी कार्रवाई कटनी जिले के बाकल थाना क्षेत्र में हुई। पुलिस ने मोबाइल चोरी कर बैंक खातों से रकम निकालने वाले गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है।

पुलिस के मुताबिक फरियादी का मोबाइल बाकल बाजार से चोरी होने के बाद उसके बचत खाते और KCC खाते से अलग-अलग तारीखों में कुल 2 लाख 10 हजार रुपये निकाल लिए गए।

जांच में सामने आया कि आरोपी ऐसे मोबाइल फोन चोरी करते थे जिनमें स्क्रीन लॉक नहीं होता था या जिन्हें आसानी से खोला जा सकता था। इसके बाद मोबाइल में UPI PIN सेट कर बैंक खातों से रकम दूसरे खातों में ट्रांसफर की जाती थी।

पूछताछ में आरोपियों ने 14 मोबाइल फोन चोरी करना स्वीकार किया है। गिरोह द्वारा कटनी के अलावा जबलपुर, सिहोरा, उत्तर प्रदेश के गोरखपुर सहित अन्य क्षेत्रों में भी वारदात किए जाने की जानकारी सामने आई है।

पुलिस की आमजन से अपील

मध्यप्रदेश पुलिस ने लोगों से अपील की है कि कमीशन, नौकरी, लोन या आसान कमाई के लालच में अपना बैंक खाता, ATM कार्ड, पासबुक, चेकबुक या बैंक से लिंक मोबाइल सिम किसी अन्य व्यक्ति को न दें।

साथ ही WhatsApp या Telegram से मिले अनजान लिंक के जरिए ट्रेडिंग ऐप डाउनलोड न करें और असामान्य मुनाफे का लालच देने वाले निवेश प्रस्तावों से सावधान रहें।साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें और cybercrime.gov.in

पर शिकायत दर्ज करें।


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सागर पुलिस ने खोला फर्जी फर्म और म्यूल बैंक खातों का नेटवर्क, 5.50 करोड़ के ट्रांजेक्शन का खुलासा

सागर पुलिस ने खोला फर्जी फर्म और म्यूल बैंक खातों का बड़ा नेटवर्क, 5.50 करोड़ से अधिक के लेन-देन का खुलासा


तीनबत्ती न्यूज: 14 अगस्त ,2026

सागर। सायबर अपराध और सायबर ठगी के खिलाफ सागर पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। फर्जी फर्म बनाकर साईबर फ्रॉड और ऑनलाइन बेटिंग के मामलों का खुलासा किया है। इसमें 16 फर्जी फर्मों की जानकारी सामने आई है।मकरोनिया थाना पुलिस ने बेरोजगार और सामान्य लोगों के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर फर्जी फर्में बनाकर निजी बैंकों में करंट अकाउंट खुलवाने वाले एक संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। पुलिस की प्रारंभिक जांच में 16 से अधिक फर्जी फर्मों और 5.50 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध बैंकिंग ट्रांजेक्शन का पता चला है। मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि तीन अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।इस पूरे मामले का खुलासा सागर एसपी अनुराग सुजानिया ने पत्रकार वार्ता में किया।

बेरोजगारों को कमीशन का लालच देकर खुलवाते थे खाते

पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य बेरोजगार एवं सामान्य व्यक्तियों को कमीशन और पैसों का लालच देकर उनके आधार सहित अन्य दस्तावेज हासिल करते थे। इन दस्तावेजों के आधार पर फर्जी फर्में तैयार कर विभिन्न निजी बैंकों में करंट अकाउंट खुलवाए जाते थे। बाद में इन खातों को गिरोह अपने नियंत्रण में लेकर सायबर ठगी और अन्य संदिग्ध गतिविधियों से प्राप्त रकम के लेन-देन एवं सर्कुलेशन के लिए म्यूल अकाउंट के रूप में इस्तेमाल करता था।

शिकायत के बाद शुरू हुई जांच

13 अगस्त 2026 को मकरोनिया थाना क्षेत्र के रोहित पिता रूपराज पटेल ने पुलिस को शिकायत दी कि उसके दस्तावेजों का दुरुपयोग कर उसके नाम से फर्जी फर्म बनाई गई है और फेडरल बैंक, मकरोनिया शाखा में करंट अकाउंट खोला गया है। पुलिस ने खाते की जांच की तो सामने आया कि रोहित के नाम से ‘ग्लैमर इंटरप्राइजेस’ नामक फर्म बनाई गई थी। इस खाते में फरवरी 2026 से करीब छह माह की अवधि में लगभग 90 लाख रुपये का ट्रांजेक्शन हुआ था। इसके बाद पुलिस ने बैंक खातों, फर्मों और तकनीकी साक्ष्यों का विस्तृत विश्लेषण शुरू किया।

पूछताछ में सामने आया नेटवर्क

विवेचना के दौरान पुलिस ने धर्मेन्द्र नाहर और सोनू दांगी को गिरफ्तार किया। पूछताछ में धर्मेन्द्र नाहर ने बताया कि उसने यह काम भोपाल निवासी अमित विश्वकर्मा से मुंबई में सीखा था। अमित ने उसे बताया था कि ऑनलाइन गेमिंग और बैटिंग से प्राप्त राशि के सर्कुलेशन के लिए बैंक खातों की आवश्यकता होती है।

इसके बाद धर्मेन्द्र नाहर ने सोनू दांगी तथा भोपाल निवासी सरमन उर्फ शुभम रैकवार, विपिन गिरी और स्वर्णेन्द्र पांडे के साथ मिलकर लोगों के नाम से फर्जी फर्में बनाकर बैंक खाते खुलवाना शुरू किया।

16 से अधिक फर्जी फर्मों का खुलासा

पुलिस के अनुसार अब तक जांच में निम्न फर्मों के नाम सामने आए है : 1. ग्लैमर इंटरप्राइजेस

2. भूपेन्द्र इंटरप्राइजेस

3. सूर्या इंटरप्राइजेस

4. समृद्धि टूर एंड ट्रेवल्स

5. लवली स्वीट एंड मसाला चाट सेंटर

6. कार्तिक इलेक्ट्रॉनिक्स

7. स्टार इंटरप्राइजेस

8. राजपूत इंटरप्राइजेस

9. अनुभव ट्रेडर्स

10. सागर ट्रेडर्स

11. शर्मा जी इंटरप्राइजेस

12. सौरभ इंटरप्राइजेस

13. माखन इंटरप्राइजेस

14. अंकेश इंटरप्राइजेस

15. तनविक इंटरप्राइजेस

16. यूनिक टूर एंड ट्रेवल्स

इन फर्मों से जुड़े बैंक खातों के प्रारंभिक वित्तीय विश्लेषण में 5.50 करोड़ रुपये से अधिक के ट्रांजेक्शन का पता चला है। पुलिस द्वारा सभी खातों के लेन-देन का तकनीकी और वित्तीय विश्लेषण जारी है।

फर्म और बैंक खाते खुलवाने की प्रक्रिया भी जांच के घेरे में

पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि फर्जी फर्मों के पंजीयन और संबंधित बैंक खातों को खुलवाने की प्रक्रिया में किन व्यक्तियों अथवा संस्थाओं की भूमिका रही। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर फर्म पंजीयन या बैंक खाते खोलने में किसी स्तर पर लापरवाही अथवा आपराधिक संलिप्तता सामने आने पर संबंधितों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

दो आरोपी गिरफ्तार, तीन की तलाश

गिरफ्तार आरोपी में धर्मेन्द्र पिता हरिदास नाहर, उम्र 38 वर्ष, निवासी सिविल लाइन के पीछे, खजुराहो, छतरपुर; हाल निवासी शिवनगर, थाना बहेरिया, सागर और  सोनू दांगी पिता रामेश्वर दांगी, उम्र 28 वर्ष, निवासी ग्राम बमोरी घाट, थाना जैसीनगर, सागर। है 

अन्य आरोपियो में अमित विश्वकर्मा पिता जगदीश प्रसाद विश्वकर्मा, निवासी भोपाल, विपिन गिरी पिता अशोक गिरी, निवासी भोपाल और  स्वर्णेन्द्र पांडे पिता चंद्रभान पांडे, निवासी भोपाल है।  पुलिस के अनुसार अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है और उनकी गिरफ्तारी के लिए टीमें लगातार प्रयास कर रही हैं।

एसपी ने नागरिकों से की अपील

एसपी अनुराग सुजानिया ने नागरिकों से अपील की है कि कमीशन या आसान कमाई के लालच में अपना बैंक खाता, एटीएम, चेकबुक, पासबुक, मोबाइल नंबर, ओटीपी अथवा अन्य बैंकिंग जानकारी किसी दूसरे व्यक्ति को उपलब्ध न कराएं। किसी अन्य के कहने पर अपने नाम से बैंक खाता या फर्म खुलवाकर उसका संचालन दूसरे व्यक्ति को देना गंभीर कानूनी जोखिम पैदा कर सकता है। ऐसे खातों का इस्तेमाल सायबर ठगी की रकम के लेन-देन में होने पर खाताधारक भी जांच के दायरे में आ सकता है।

इनकी रही महत्वपूर्ण भूमिका

कार्रवाई में निरीक्षक नितिन पाल, थाना प्रभारी मकरोनिया, उपनिरीक्षक शशिकांत गुर्जर, थाना प्रभारी बहेरिया, उपनिरीक्षक रामअवतार धाकड़, उपनिरीक्षक राकेश राजपूत, उपनिरीक्षक मनीषा तिवारी, प्रधान आरक्षक सौरभ रैकवार, आरक्षक आशीष गौतम, प्रदीप शर्मा, मनीष तिवारी, आशीष यादव, भानूप्रताप, सृजन तिवारी, देवेन्द्र रावत, नरेंद्र रावत, शुभम, अरविंद एवं अजय की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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सागर पुलिस ने 112 गुम मोबाइल किए रिकवर, ₹16.50 लाख के फोन लौटाए असली मालिकों को

सागर पुलिस की बड़ी उपलब्धि: 112 गुम मोबाइल रिकवर: ₹16.50 लाख के फोन वास्तविक मालिकों को लौटाए


तीनबत्ती न्यूज: 13 अगस्त ,2026

सागर। सागर पुलिस ने साइबर तकनीक और लगातार किए गए तकनीकी एवं मैदानी प्रयासों के जरिए गुम हुए 112 मोबाइल फोन रिकवर कर उनके वास्तविक मालिकों को वापस सौंपे हैं। बरामद मोबाइल फोन की कुल अनुमानित कीमत करीब ₹16 लाख 50 हजार है। इनमें विभिन्न कंपनियों के स्मार्टफोन के साथ महंगे iPhone भी शामिल हैं।

यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक सागर  अनुराग सुजानिया, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बीना श्री जयवीर सिंह भदौरिया एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सागर  नरेंद्र सोलंकी के निर्देशन और मार्गदर्शन में साइबर टीम द्वारा की गई।


सागर के साथ अन्य जिलों और राज्यों तक पहुंची साइबर टीम


सागर पुलिस की साइबर टीम ने आधुनिक तकनीक और उपलब्ध तकनीकी संसाधनों का प्रभावी उपयोग करते हुए ऐसे मोबाइल फोन भी ट्रेस किए, जो सागर जिले के अलावा मध्यप्रदेश के अन्य जिलों तथा प्रदेश के बाहर के राज्यों में उपयोग किए जा रहे थे। मोबाइल फोन की तकनीकी जानकारी, IMEI नंबर और अन्य उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण कर लगातार ट्रेसिंग की गई। संबंधित स्थानों पर पुलिस टीमों के साथ समन्वय स्थापित कर मोबाइल फोन बरामद किए गए।

साइबर टीम की अहम भूमिका

मोबाइल रिकवरी की इस कार्रवाई में साइबर टीम के प्रधान आरक्षक सौरभ रैकवार, प्रधान आरक्षक विजय शुक्ला एवं आरक्षक हेमेंद्र सिंह सहित सागर जिले के विभिन्न थानों के पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।


साइबर टीम ने तकनीकी विश्लेषण के साथ फील्ड स्तर पर पुलिस टीमों से समन्वय कर गुम मोबाइलों को ट्रेस किया और उन्हें सुरक्षित रूप से बरामद कर वास्तविक धारकों तक पहुंचाया।

₹16.50 लाख कीमत के मोबाइल बरामद

सागर पुलिस द्वारा रिकवर किए गए 112 मोबाइल फोन की अनुमानित कुल कीमत करीब ₹16,50,000 है। इनमें विभिन्न कंपनियों के स्मार्टफोन के अलावा महंगे iPhone भी शामिल हैं।

बड़ी संख्या में मोबाइल फोन की बरामदगी सागर पुलिस की तकनीकी दक्षता और साइबर टीम की लगातार मेहनत को दर्शाती है।



मोबाइल वापस मिलने पर खिले लोगों के चेहरे

गुम हुए मोबाइल फोन वापस मिलने पर उनके वास्तविक मालिकों के चेहरे पर खुशी देखने को मिली। नागरिकों ने सागर पुलिस और पुलिस अधीक्षक श्री अनुराग सुजानिया का आभार व्यक्त करते हुए साइबर टीम के प्रयासों की सराहना की।

पुलिस के मुताबिक, मोबाइल फोन में केवल आर्थिक मूल्य ही नहीं होता, बल्कि उसमें लोगों के व्यक्तिगत फोटो, संपर्क, दस्तावेज और अन्य महत्वपूर्ण डिजिटल जानकारी भी सुरक्षित रहती है। ऐसे में मोबाइल की वापसी नागरिकों के लिए बड़ी राहत साबित हुई।


सागर पुलिस की नागरिकों से अपील

सागर पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि मोबाइल फोन गुम होने की स्थिति में तत्काल पुलिस को सूचना दें और अपने मोबाइल का IMEI नंबर सुरक्षित रखें। किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें तथा मोबाइल में मौजूद महत्वपूर्ण डिजिटल जानकारी, बैंकिंग और सोशल मीडिया खातों की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहें।


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