Editor: Vinod Arya | 94244 37885

सागर में रावतपुरा सरकार के चातुर्मास का समापन, सवा लाख पार्थिव शिवलिंगों का महाभिषेक

ब्रह्म मुहूर्त में सवा लाख पार्थिव शिवलिंगों का महाभिषेक, श्री हनुमत लक्ष्यार्चन के साथ चातुर्मास का समापन


• वेदांती परिसर में भक्ति, साधना, सेवा और विश्व कल्याण की प्रार्थना के बीच संपन्न हुआ रावतपुरा सरकार का चातुर्मास समापन अनुष्ठान


तीनबत्ती न्यूज, 22 सितंबर 2026।

सागर: सागर के वेदांती परिसर में मंगलवार को रावतपुरा सरकार के चातुर्मास समापन अनुष्ठान का भव्य आयोजन हुआ। ब्रह्म मुहूर्त की पावन बेला में सुबह 3:30 बजे सवा लाख पार्थिव शिवलिंगों का महाभिषेक प्रारंभ हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार, शिव आराधना और श्रद्धालुओं के भक्तिभाव से पूरा परिसर आध्यात्मिक वातावरण से भर उठा।


महाभिषेक के दौरान भगवान शिव की विधिवत आराधना की गई। सवा लाख पार्थिव शिवलिंगों के माध्यम से हुई सामूहिक शिव उपासना में श्रद्धालुओं ने श्रद्धा और समर्पण के साथ सहभागिता की। इस अनुष्ठान का भाव केवल व्यक्तिगत आराधना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विश्व कल्याण, शांति, सद्भाव और मंगल की सामूहिक कामना से जुड़ा रहा।

सामूहिक प्रार्थना में विश्व कल्याण की कामना

महाभिषेक के पश्चात प्रार्थना सभा आयोजित की गई। इसमें समाज, राष्ट्र और संपूर्ण विश्व के कल्याण की सामूहिक प्रार्थना की गई। व्यक्तिगत मनोकामनाओं से ऊपर उठकर सामूहिक मंगल की भावना इस प्रार्थना सभा का प्रमुख केंद्र रही। इसके बाद श्री हनुमत लक्ष्यार्चना का आयोजन हुआ। भगवान श्री हनुमान की आराधना और लक्ष्यार्चना के माध्यम से श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से अपनी श्रद्धा अर्पित की। इस दौरान भक्ति, सेवा, समर्पण और शक्ति के भाव को स्मरण किया गया।

केवल समापन नहीं, साधना यात्रा का पावन पड़ाव

रावतपुरा सरकार का यह आयोजन केवल चातुर्मास की औपचारिक समाप्ति नहीं, बल्कि 29 जुलाई को देवशयनी एकादशी से शुरू हुई साधना यात्रा के महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में सामने आया।

सनातन परंपरा में चातुर्मास को साधना, संयम, स्वाध्याय, भक्ति और आत्मचिंतन का विशेष काल माना जाता है। इसी भावना के साथ सागर में चातुर्मास के दौरान अनेक धार्मिक एवं आध्यात्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए।

धार्मिक आयोजनों के साथ सेवा और सामाजिक संवेदना से जुड़े प्रयास भी इस अवधि में जारी रहे। भक्ति को सेवा से जोड़ने का भाव चातुर्मास की गतिविधियों में प्रमुखता से दिखाई दिया।

हर शनिवार घर-घर पहुंचा ‘एक रोटी गौ माता के लिए’ का संदेश

चातुर्मास के दौरान ‘एक रोटी गौ माता के लिए’ अभियान ने सेवा और संवेदना के संदेश को घर-घर तक पहुंचाया।


हर शनिवार रावतपुरा सरकार लोगों के बीच पहुंचे और गौ माता के लिए एक रोटी देने का आग्रह किया। अभियान का उद्देश्य यह संदेश देना रहा कि सेवा के लिए हमेशा बड़े संसाधनों की आवश्यकता नहीं होती। घर की रसोई से निकली एक रोटी भी गौ सेवा का माध्यम बन सकती है।


सागर के अनेक परिवार इस अभियान से जुड़े और गौ माता के लिए रोटी निकालने का संकल्प लिया। रावतपुरा सरकार का स्वयं लोगों के बीच पहुंचकर यह आग्रह करना चातुर्मास की साधना के साथ सेवा और जीवमात्र के प्रति संवेदना के भाव को सामने लाता रहा।

धार्मिक अनुष्ठानों से बना आध्यात्मिक वातावरण

29 जुलाई से शुरू हुई चातुर्मास यात्रा के दौरान सागर में विभिन्न धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। पूजन, जप, साधना, कथा और अन्य धार्मिक आयोजनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को सनातन परंपरा और आध्यात्मिक संस्कारों से जोड़ने का प्रयास किया गया।


इन आयोजनों के दौरान कहीं मंत्रों की गूंज रही, कहीं कथा और भक्ति का वातावरण बना तो कहीं सेवा और लोककल्याण की भावना के साथ श्रद्धालु एकत्रित हुए।

देवशयनी एकादशी से चातुर्मास समापन तक

29 जुलाई को देवशयनी एकादशी से शुरू हुई यह यात्रा 22 सितंबर को चातुर्मास समापन अनुष्ठान तक पहुंची। इस अवधि में सागर ने धार्मिक अनुष्ठानों, सामूहिक आस्था और सेवा गतिविधियों के अनेक दृश्य देखे।हर शनिवार गौ माता के लिए एक रोटी का संदेश लेकर लोगों के बीच पहुंचना हो या आज ब्रह्म मुहूर्त में सवा लाख पार्थिव शिवलिंगों का महाभिषेक—चातुर्मास की इस यात्रा में साधना और सेवा के विभिन्न रूप देखने को मिले।


साधना से सेवा और सेवा से लोककल्याण


रावतपुरा सरकार के चातुर्मास के दौरान ईश्वर आराधना के साथ लोककल्याण की भावना को भी प्रमुखता दी गई। सवा लाख पार्थिव शिवलिंगों का महाभिषेक, सामूहिक प्रार्थना, श्री हनुमत लक्ष्यार्चना और ‘एक रोटी गौ माता के लिए’ अभियान इसी भाव के विभिन्न स्वरूप रहे।


वेदांती परिसर में आज हुए समापन अनुष्ठान में भी यही भाव दिखाई दिया। ब्रह्म मुहूर्त में शिव आराधना, सामूहिक प्रार्थना और श्री हनुमत लक्ष्यार्चना के साथ चातुर्मास की साधना यात्रा का समापन हुआ।

एक यात्रा, अनेक संकल्प

देवशयनी एकादशी से शुरू हुई यात्रा ब्रह्म मुहूर्त की साधना से लेकर सामूहिक आराधना तक पहुंची। गौ सेवा के लिए ‘एक रोटी’ के संकल्प से लेकर विश्व कल्याण की प्रार्थना तक और सवा लाख पार्थिव शिवलिंगों के महाभिषेक से श्री हनुमत लक्ष्यार्चना तक—चातुर्मास का यह आयोजन भक्ति, साधना, सेवा और सनातन संस्कारों से जुड़ा रहा।

वेदांती परिसर में संपन्न हुआ यह चातुर्मास समापन अनुष्ठान इसी साधना यात्रा का पावन पड़ाव रहा, जहां धार्मिक अनुष्ठानों के साथ विश्व कल्याण और लोकमंगल की प्रार्थना की गई।

Share:

0 comments:

एक टिप्पणी भेजें

www.Teenbattinews.com

Archive