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सोशल मीडिया पर मानहानिकारक पोस्ट मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने आदेश की अवहेलना पर संज्ञान लिया, पूर्व मंत्री विधायक भूपेन्द्र सिंह की याचिका पर नोटिस

 सोशल मीडिया पर मानहानिकारक पोस्ट मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने आदेश की अवहेलना पर संज्ञान लिया, पूर्व मंत्री विधायक भूपेन्द्र सिंह की याचिका पर नोटिस


तीनबत्ती न्यूज :11सितम्बर ,2026

भोपाल। पूर्व गृहमंत्री एवं वरिष्ठ विधायक श्री भूपेन्द्र सिंह द्वारा अभिषेक जैन एवं अन्य के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में दायर मामले में 10 सितंबर 2026 को महत्वपूर्ण सुनवाई में माननीय न्यायमूर्ति श्री सचिन दत्ता की पीठ ने एक बार फिर प्रतिवादियों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। न्यायालय ने संबंधित प्रतिवादियों को पूर्व में 26 मई 2026 को जारी अंतरिम आदेश का सख्ती से पालन करने तथा इस आदेश के बाद फेसबुक अथवा अन्य सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई ऐसी सभी पोस्टों को हटाने का निर्देश दिया है, जिसमें वादी श्री भूपेन्द्र सिंह के खिलाफ मानहानिकारक बयान किए गए हों। 


माननीय न्यायमूर्ति श्री सचिन दत्ता की पीठ ने सुनवाई के बाद यह भी स्पष्ट किया कि आदेश का पालन नहीं होने की स्थिति में प्रतिवादी नंबर 6 (सोशल मीडिया मेटा प्लेटफॉर्म्स) को प्रतिवादी नंबर 1 अभिषेक जैन के फेसबुक अकाउंट को हटाने अथवा निलंबित करने का निर्देश देने की स्थिति बन सकती है। उच्च न्यायालय ने प्रतिवादी नंबर 1 अभिषेक जैन को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से अथवा वर्चुअल माध्यम से न्यायालय के समक्ष उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 8 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है।


मामले में भूपेन्द्र सिंह की ओर से प्रतिवादी नंबर 1 के खिलाफ अंतरिम निषेधाज्ञा की मांग को लेकर आवेदन प्रस्तुत किया गया है। वहीं प्रतिवादी नंबर 2 रविंद्र जैन द्वारा 26 मई 2026 के आदेश की कथित जानबूझकर अवहेलना किए जाने के संबंध में आवेदन दाखिल किया गया है। न्यायालय ने दोनों आवेदनों पर नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। सुनवाई के दौरान प्रतिवादी नंबर 3, 6 और 7 की ओर से उपस्थित अधिवक्ताओं ने नोटिस स्वीकार कर लिया, जबकि शेष प्रतिवादियों को अनुमत माध्यमों, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक माध्यम भी शामिल है, से नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए।

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मानहानिकारक सोशल मीडिया पोस्ट हटाने के निर्देश

सुनवाई के दौरान प्रतिवादी नंबर 2 रविंद्र जैन की ओर से उसके अधिवक्ता ने न्यायालय को बताया कि 26 मई 2026 के अंतरिम आदेश में दिए गए निर्देशों का पालन कर दिया गया है तथा संबंधित URLs हटा दिए गए हैं। न्यायालय ने प्रतिवादी नंबर 2 को आज से चार सप्ताह के भीतर अनुपालन संबंधी शपथ-पत्र दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रतिवादी नंबर 1 अभिषेक जैन को कथित अवमाननापूर्ण अथवा न्यायालय के आदेश की अवहेलना वाले आचरण को सुधारने का अवसर देने के लिए 26 मई 2026 के अंतरिम आदेश के बाद फेसबुक अथवा अन्य सोशल मीडिया पर की गई ऐसी किसी भी पोस्ट को हटाने का निर्देश दिया है, जिसमें वादी श्री भूपेन्द्र सिंह के खिलाफ मानहानिकारक बयान किए गए हों।

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सोशल मीडिया पर अप्रमाणित , सनसनीखेज दावों से पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने पर हाईकोर्ट सख्त • मानहानिकारक पोस्ट और वीडियो हटाने के निर्देश

सोशल मीडिया पर अप्रमाणित , सनसनीखेज  दावों से पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने पर हाईकोर्ट सख्त

• मानहानिकारक पोस्ट और वीडियो हटाने के निर्देश



तीनबत्ती न्यूज: 12 अगस्त, 2026

सागर। दिल्ली हाईकोर्ट ने पूर्व मंत्री एवं खुरई विधायक श्री भूपेन्द्र सिंह से संबंधित सोशल मीडिया पोस्ट, वीडियो और प्रकाशनों पर सुनवाई के बाद दिए आदेश में  गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा है कि संबंधित सामग्री में से कई पोस्ट और वीडियो वादी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने तथा मामले को सनसनीखेज बनाने का प्रयास करते दिखाई देते हैं। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रस्तुत सामग्री निष्पक्ष रिपोर्टिंग अथवा तथ्यात्मक आलोचना के बजाय मामले पर समय से पहले निष्कर्ष निकालती हुई प्रतीत होती है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई तक प्रतिवादियों को श्री भूपेन्द्र सिंह के विरुद्ध इसी प्रकार के या समान मानहानिकारक आरोप वाली पोस्ट प्रकाशित करने से रोकने के साथ सूचीबद्ध आपत्तिजनक पोस्ट और वीडियो हटाने के निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार की आड़ में किसी व्यक्ति की गरिमा और सम्मान को बदनाम या अपमानित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। प्रेस को जनहित से जुड़े विषयों पर रिपोर्टिंग करने की स्वतंत्रता है, लेकिन यह स्वतंत्रता निरंकुश नहीं है और मीडिया मंचों को किसी व्यक्ति की चरित्र-हत्या से बचना चाहिए।


इस प्रकरण में प्रतिवादी ‘सबकी खबर’ न्यूज चैनल के संचालक रवीन्द्र जैन, फेसबुक यूजर अभिषेक जैन सहित अन्य पांच प्रतिवादी शामिल हैं। दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश में प्रतिवादी अभिषेक जैन के फेसबुक प्रोफाइल, ‘सबकी खबर’ यूट्यूब चैनल, ‘नई दुनिया’ के डिजिटल विंग से जुड़े पत्रकार, एक कांग्रेस कार्यकर्ता तथा ‘राजधानी तक’ न्यूज चैनल के संचालकध्मुख्य समाचार एंकर सहित सोशल मीडिया मंचों से जुड़े प्रतिवादियों का उल्लेख किया गया है। उच्च न्यायालय के समक्ष वादी श्री भूपेन्द्र सिंह  की ओर से यह आरोप रखा गया था कि इन माध्यमों से उनके विरुद्ध भ्रामक और मानहानिकारक सामग्री को लगातार प्रसारित कराया गया।


उच्च उच्च न्यायालय ने आपत्तिजनक वीडियो, लेखों और सोशल मीडिया पोस्टों को प्रथम दृष्टया देखने के बाद कहा कि इनमें से अनेक पोस्ट जानबूझकर वादी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने और मामले को सनसनीखेज बनाने का प्रयास करती प्रतीत होती हैं। उच्च न्यायालय के अनुसार, प्रतिवादी ने सोशल मीडिया पोस्टों और वीडियो श्रृंखला के माध्यम से कथित मानहानिकारक अभियान को आगे बढ़ाया। पत्रकारिता संबंधी जांच के नाम पर पूछे गए सवालों को इस प्रकार प्रस्तुत किया गया कि उनसे यह धारणा बनती है कि वादी ने सक्रिय रूप से प्रताड़ित किया, जबकि प्रसारित आरोपों और उनसे तैयार किए गए पक्षपाती कथानक के समर्थन में कोई दस्तावेजी प्रमाण सामने नहीं रखा गया है।


उच्च न्यायालय ने अपने निष्कर्ष में कहा कि विवादित वीडियो, पोस्ट और प्रकाशनों को प्रथम दृष्टया देखने पर वे निष्पक्ष रिपोर्टिंग अथवा तथ्यात्मक आलोचना प्रस्तुत करते हुए दिखाई नहीं देते। बल्कि इन सामग्रियों में मामले पर समय से पहले ही निष्कर्ष निकालते हुए वादी को बिना किसी तथ्यात्मक आधार या न्यायिक निर्धारण के तानाशाह और उत्पीड़क के रूप में प्रस्तुत किया गया है।


उच्च न्यायालय ने आदेश में स्पष्ट किया कि किसी सार्वजनिक व्यक्ति की सार्वजनिक आलोचना की सीमा सामान्य व्यक्ति की तुलना में अधिक व्यापक होती है, लेकिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार के नाम पर किसी व्यक्ति की गरिमा और सम्मान को बदनाम या अपमानित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। न्यायालय ने कहा कि मानहानि और सार्वजनिक आलोचना के बीच बहुत महीन अंतर है और इस संतुलन को बनाए रखना न्यायालयों का महत्वपूर्ण दायित्व है। आदेश में लक्ष्मी मुर्देश्वर पुरी बनाम साकेत गोखले मामले की टिप्पणी का उल्लेख करते हुए कहा गया कि सोशल मीडिया के दौर में किसी सार्वजनिक व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना बेहद आसान हो गया है तथा वर्षों की निस्वार्थ सेवा से अर्जित प्रतिष्ठा को एक विचारहीन टिप्पणी भी गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। उच्च न्यायालय ने कहा कि मीडिया की स्वतंत्र अभिव्यक्ति के अधिकार तथा संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत व्यक्ति के जीवन, गरिमा और निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार के बीच नाजुक संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। प्रेस को जनहित के विषयों पर रिपोर्टिंग करने की स्वतंत्रता है, लेकिन यह स्वतंत्रता निरंकुश नहीं है और इसका प्रयोग सावधानी एवं जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए। मीडिया मंचों को किसी व्यक्ति की चरित्र-हत्या से बचना चाहिए, क्योंकि इससे जनता के मन में पूर्वाग्रह पैदा होने के साथ उसकी प्रतिष्ठा को अपूरणीय क्षति पहुंच सकती है।


उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में यह भी कहा कि जब समाचार रिपोर्टिंग समय से पहले किसी निष्कर्ष को व्यक्त करने लगे और प्रभावी रूप से उस न्यायिक प्रक्रिया का स्थान लेने लगे, जो केवल न्यायालयों के अधिकार क्षेत्र में है, तो ऐसी स्थिति ‘मीडिया ट्रायल’ का रूप ले लेती है। उच्च न्यायालय के अनुसार, मीडिया द्वारा इस प्रकार समानांतर जांच और अन्वेषण किया जाना न्याय के मूल सिद्धांतों को कमजोर करता है। इसलिए अप्रमाणित आरोपों के गंभीर परिणामों से नागरिकों की रक्षा के लिए ऐसी प्रवृत्ति पर उचित नियंत्रण आवश्यक है, विशेषकर तब जब आरोपों को सनसनीखेज रूप देकर प्रस्तुत किया जा रहा हो।


उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में स्पष्ट रूप से कहा कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री का अवलोकन करने के बाद उच्च न्यायालय प्रथम दृष्टया इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि प्रतिवादियों द्वारा प्रसारित और प्रकाशित पोस्ट तथा वीडियो अप्रमाणित दावों को सनसनीखेज बनाते हैं और वादी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का प्रयास करते हैं। उच्च न्यायालय ने इन परिस्थितियों में प्रतिवादियों को अगली सुनवाई तक वादी के खिलाफ इस तरह के अथवा इसी प्रकार के मानहानिकारक आरोप वाली कोई पोस्ट प्रकाशित करने से रोकने का आदेश दिया है। साथ ही प्रतिवादी रविन्द्र जैन, अभिषेक जैन तथा आशुतोष शर्मा को तालिका में सूचीबद्ध यूट्यूब पर प्रसारित मानहानिकारक पोस्ट और वीडियो तत्काल हटाने तथा अगली सुनवाई तक उस स्थिति को बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। उच्च न्यायालय ने सभी प्रतिवादियों को दो हफ्ते में अपना जवाब दाखिल करने का आदेश देते हुए सुनवाई के लिये 5 नवम्बर 2026 की तारीख नीयत की है।



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