शनिवार, 28 नवंबर 2020

कोरोना योद्धा डॉ शुभम उपाध्याय की मौत पर सवाल उठाए जूनियर डाक्टर/ मेडिकल आफीसर ने, कमिश्नर को दिया ज्ञापन

कोरोना योद्धा डॉ शुभम उपाध्याय की मौत पर सवाल उठाए जूनियर डाक्टर/ मेडिकल आफीसर ने, कमिश्नर को दिया ज्ञापन



सागर। बुंदेलखंड मेडिकल कालेज सागर के कोरोना योद्धा डॉ शुभम उपाध्याय की दुखद मौत ने अब कई सवाल खड़े किये। डॉ की मौत ने चिकित्सा जगत को झकझोर दिया है। मेडिकल कालेज के जूनियर डाक्टर और मेडिकल आफीसरों ने डॉ शुभम की मौत में लापरवाहियों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित सम्बंधित अफसरों को एक ज्ञापन दिया है। जिसमे  उचित कार्यवाही की मांग के साथ ही डीन के इस्तीफे की बात की गई है। इसके साथ ही स्वास्थ्य कर्मियों के बेहतर इलाज की बात भी की गई है। इसमे डॉ शुभम के परिजनों को अनुकम्पा नियुक्ति की मांग भी शामिल है। 

जूनियर डॉक्टरों और मेडिकल आफीसरों ने कमिश्नर मुकेश शुक्ला को दिए ज्ञापन में लिखा कि मेडिकल ऑफिसर डॉ शुभम उपाध्याय की मृत्यु में गैर जिम्मेदाराना व असंवेदनशील
बर्ताव को हुआ है।
ज्ञापन के मूताबिक  जैसा कि आपको ज्ञात है, कि बुण्देलखण्ड मेडिकल कॉलेज, सागर में पदस्थ मेडिकल ऑफीसर डॉ. शुभम उपाध्याय कोरोना महामारी में अपनी सेवायें प्रदान करते हुए दिनांक 28.10.2020 को स्वयं संक्रमित हो गये। दिनांक 28.10.2020 से दिनांक 10.11.2020 तक उनका ईलाज बुण्देलखण्ड मेडिकल कॉलेज में हुआ। ईलाज के दौरान उनकी स्थिति में कोई सुधार नहीं आया, स्थिति बिगड़ती चली गई, जिसके उपरांत बुण्देलखण्ड मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ चिकित्सकों द्वारा परिजनों को यह सलाह दी गई कि इनको अब चिरायु अस्पताल, भोपाल में इलाज के लिए ले जाया जाये। दिनांक 10.11.2020 को डॉ शुभम को चिरायु अस्पताल ले जाया गया। जहां पर उनके ईलाज के दौरान उनकी स्थिति ओर बिगड़ती चली गई। ईलाज के दौरान डॉ. शुभम
ने 19.11.2020 को स्वयं के मोबाईल से अपने साथी चिकित्सकों एवं सीनियर एवं अन्य वरिष्ठ
चिकित्सकों को वाट्एप संदेश के माध्यम से अपनी बद से बदल होती स्थिति के संबंध में अवगत कराया। उसके उपरांत साथी चिकित्सकों के प्रयास से इस मामले को विभिन्न सोशल मीडिया एवंप्रिन्ट मीडिया के माध्यम से सरकार एवं वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारियों के समक्ष लाया गया। लेकिन बुण्लेदलखण्ड चिकित्सा महाविद्यालय के प्रशासन की तंदा तब तक भंग नहीं हुईथी। इनके उपरांत कही से भी कोई मदद नहीं मिलते देख कर साथी चिकित्सकों द्वाराजन-सहयोग के माध्यम से डॉ. शुभम के इलाज के लिए कुछ धन राशि एकत्रित की गई।तदोपरांत 24.11.2020 की सुबह को  मुख्य मंत्री, मध्यप्रदेश शासन द्वारा डॉ. शुभम का
ईलाज सरकारी खर्च से कराने की घोषणा की गई। कतिपय परिस्थितियों के कारण डॉ. शुभम
को तत्काल एयरलिफ्ट करके वांछनियअस्पताल में नहीं ले जाया जा सका। जैसा आप सभी को
ज्ञात है कि दिनांक 25.11.2020 को शाम 05:05 मिनट पर हृदय की गति रूकने से
शुभम वीरगति को प्राप्त हुए।

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इन बिंदुओं पर जांच की मांग

★ 28.10.2020 से 10.11.2020 की अवधि मे जब डॉ. शुभम की स्थित में सुधार नहीं हो रहा था तो उनको चिरायु अस्पताल के जगह किसी उच्च चिकित्सा संस्थान(एम्स) में क्यों नहीं भेजा गया।
★ बुण्लेदलखण्ड चिकित्सा महाविद्यालय, सागर, जो खुद में एक Tertiary Care
Centre है। इसके बावजूद डॉ. शुभम को चिरायु रैफर करने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
और अगर आवश्यकता थी, तो रैफर करने मे विलम्ब क्यों किया गया?

★गत नो माह से डॉ. शुभम कोरोना वार्ड में इयूटी कर रहे थे। इसके बावजूद उनके ईलाज के लिए कॉलेज प्रशासन की तरफ से कोई भी आर्थिक मदद प्रदान क्यों नहीं की।
★ एक माह पूर्व डॉ. शुभम को कोरोना वारियर की उपाधि से सम्मानित किया गया था, लेकिन जब वे इस महामारी से संक्रमति हो गये, और ये जिंदगी और मौत से संघर्ष कररहे थे, तबसरकार एवं प्रशासन द्वारा आर्थिक मदद उपलब्ध कराये जाने में इतना विलंब क्यो हुआ।
★ दिनांक 25.11.2020 को दोपहर के समय उनकी स्थिति गंभीर हो गई थी, तब उन्हें E.C.M.O सपोर्ट की आवश्यकता थी अस्पताल में E.C.M.O, सपोर्ट की सुविधा होने के बावजूद भी सुविधा उपलब्ध क्यों नहीं कराई गई ?

★ चिरायु अस्पताल में इलाज के दौरान परिजनों की प्रार्थना के उपरांत भी डॉ. शुभम
की R.T.P.C.R. जाँच नहीं कराई गई। जब साथी चिकित्सकों ने अपने स्तर पर चिरायु प्रशासन पर दबाव बनाया ।उसके उपरांत दिनांक 21.11.2020 R.T.P.C.R. जाँच हो सकी।
उन्होंने मांग की है कि उक्त प्रकरण में अनियमितताओं के आधार पर डीन को मानवीयता के आधार पर अपने पद से इस्तीफा स्वयं प्रस्तुत करना चाहिए एवं डॉ. शुभम
के उपचार में की गई लापरवाहियों कीजबावदेही जल्द से जल्द तय की जाए एवं उचित वैधानिक
कार्यवाही की जाए।
एक अन्य ज्ञापन में डॉ शुभम के परिजनों को अनुकम्पा नियुक्ति देने के साथ ही स्वास्थ्यकर्मियों को बीमा सुविधा और  उच्च इलाज की सुविधा आदि मुहैया कराने की मांग की है। 

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