Editor: Vinod Arya | 94244 37885
CBI Investigation लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
CBI Investigation लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

MP: डाक विभाग में फर्जी मार्कशीट से नौकरी पाने वाले 8 अभ्यर्थी सेवा से बर्खास्त: CBI ने दर्ज किया केस : एक आरोपी सागर का

MP: डाक विभाग में फर्जी मार्कशीट से नौकरी पाने वाले 8 अभ्यर्थी सेवा से बर्खास्त: CBI ने दर्ज किया केस : एक आरोपी सागर का 


तीनबत्ती न्यूज: 30 सितम्बर, 2026

जबलपुर। ग्रामीण डाक सेवक (GDS) भर्ती में कथित फर्जी 10वीं की अंकसूची का इस्तेमाल कर नौकरी हासिल करने के मामले में सागर जिले के राजा बाबू अहिरवार भी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की जांच के घेरे में हैं। CBI ने जबलपुर डाक विभाग से जुड़े इस मामले में राजा बाबू अहिरवार समेत आठ अभ्यर्थियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि भर्ती के दौरान प्रस्तुत की गई शैक्षणिक अंकसूचियां संबंधित शिक्षा बोर्डों के सत्यापन में फर्जी पाई गईं। राजा बाबू अहिरवार सुरखी, जिला सागर के निवासी बताए गए हैं। उनकी नियुक्ति पाटन सब पोस्ट ऑफिस (जबलपुर) में ग्रामीण डाक सेवक के रूप में हुई थी। उपलब्ध जांच संबंधी जानकारी के मुताबिक उन्होंने जम्मू एंड कश्मीर स्टेट ओपन बोर्ड की अंकसूची प्रस्तुत की थी, जिसका सत्यापन संबंधित स्तर पर कराने के बाद उसे फर्जी बताया गया। 

10वीं के अंकों के आधार पर हुआ था GDS चयन

मामला ग्रामीण डाक सेवक भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है। GDS भर्ती में अभ्यर्थियों की 10वीं कक्षा के अंकों के आधार पर चयन प्रक्रिया होती है। संबंधित भर्ती चक्र में अभ्यर्थियों ने डाक विभाग के पोर्टल पर अपनी सेल्फ-अटेस्टेड 10वीं की अंकसूची अपलोड की थी। इन्हीं दस्तावेजों में दर्ज अंकों और अन्य विवरणों के आधार पर चयन के बाद अभ्यर्थियों को अलग-अलग डाकघरों में नियुक्तियां दी गईं।

बाद में डाक विभाग ने अभ्यर्थियों द्वारा प्रस्तुत शैक्षणिक दस्तावेजों का संबंधित शिक्षा बोर्डों और सक्षम प्राधिकारियों से सत्यापन कराया। इसी प्रक्रिया में आठ अभ्यर्थियों की अंकसूचियों में गड़बड़ी सामने आने की बात जांच में सामने आई है। 


राजा बाबू अहिरवार की नियुक्ति पाटन डाकघर में हुई थी

जांच में सामने आई जानकारी के अनुसार राजा बाबू अहिरवार निवासी सुरखी, सागर की नियुक्ति जुलाई 2024 के GDS भर्ती चक्र में पाटन सब पोस्ट ऑफिस, जबलपुर में डाक सेवक के पद पर हुई थी। रिकॉर्ड के अनुसार उन्होंने 6 नवंबर 2024 से 23 जुलाई 2025 तक सेवा की। बाद में उनके द्वारा प्रस्तुत शैक्षणिक दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया, जिसमें उनकी 10वीं की अंकसूची को फर्जी पाए जाने की बात सामने आई। इसके बाद उनकी सेवा समाप्त कर दी गई। 

आठ अभ्यर्थी CBI के रडार पर

इस मामले में CBI ने जिन आठ अभ्यर्थियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है, उनमें शामिल हैं—अभ्यर्थी निवासी नियुक्ति स्थल संबंधित अंकसूची

•मानवेंद्र सिंह सिकरवार मुरैना कुंडम बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड

• बद्री प्रसाद यादव , टीकमगढ़ संसारपुर, कटन मध्य प्रदेश राज्य ओपन

• देवेंद्र सिंह चौहान देवास उमरिया पान जम्मू एंड कश्मीर स्टेट ओपन

• राजा बाबू अहिरवार सुरखी, सागर पाटन, जबलपुर जम्मू एंड कश्मीर स्टेट ओपन

• रमाकांत शर्मा मुरैना मोहतरा, कटनी बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड

• प्रदीप खरे मुरैना कुड़ारी-उमरिया बरेला बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड

• सौरभ शर्मा मुरैना पाटन बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड

• नयन कुमार बिहार रामखिरिया-शहपुरा झारखंड एकेडमिक काउंसिल

इनमें पांच अभ्यर्थियों की पोस्टिंग जबलपुर और तीन की कटनी जिले में हुई थी। 

अलग-अलग राज्यों के बोर्ड की अंकसूचियों का इस्तेमाल

मामले की खास बात यह है कि कथित तौर पर फर्जी पाई गई अंकसूचियां अलग-अलग राज्यों के ओपन एवं शिक्षा बोर्डों से संबंधित थीं।

जांच में सामने आए बोर्डों में—बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड, मध्य प्रदेश राज्य ओपन स्कूल, जम्मू एंड कश्मीर स्टेट ओपन, झारखंड एकेडमिक काउंसिल के नाम सामने आए हैं।

इससे जांच एजेंसी को यह पता लगाने का आधार मिला है कि क्या इन दस्तावेजों को तैयार कराने और भर्ती में इस्तेमाल कराने के पीछे एक से अधिक लोगों का नेटवर्क था। हालांकि इस नेटवर्क की पूरी तस्वीर CBI की जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी

18 सितंबर को डाक विभाग ने की CBI से शिकायत

मामले में जबलपुर सब डिवीजन नंबर-1 के असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट ऑफ पोस्ट लवकुश पारेते की ओर से 18 सितंबर 2026 को CBI को लिखित शिकायत दिए जाने की जानकारी सामने आई है। शिकायत में आठ अभ्यर्थियों द्वारा कथित तौर पर फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति हासिल करने की जानकारी दी गई। इसके बाद CBI ने मामले की जांच शुरू करते हुए आठों अभ्यर्थियों तथा अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया। 

सरकारी कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच

मामला केवल आठ अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं रहने के संकेत हैं। शिकायत में यह आशंका भी जताई गई है कि कथित फर्जी दस्तावेज तैयार कराने, उन्हें हासिल करने या भर्ती प्रक्रिया में इस्तेमाल कराने में अन्य सरकारी कर्मचारियों की भूमिका हो सकती है।

CBI अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित फर्जी अंकसूचियां कहां तैयार हुईं? इन्हें अभ्यर्थियों तक किसने पहुंचाया? भर्ती पोर्टल पर दस्तावेज अपलोड करने में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं? दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान किसी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत हुई? क्या इस मामले से जुड़े और भी अभ्यर्थी हैं?

जांच एजेंसी दस्तावेजों और नियुक्ति रिकॉर्ड के आधार पर इन बिंदुओं की पड़ताल कर रही है। 


आठों की सेवाएं पहले ही समाप्त की जा चुकी हैं


सत्यापन के दौरान दस्तावेजों में गड़बड़ी सामने आने के बाद डाक विभाग ने संबंधित आठ अभ्यर्थियों की सेवाएं समाप्त कर दी थीं। इसके बाद मामला CBI तक पहुंचा और अब आपराधिक जांच चल रही है।  राजा बाबू अहिरवार की सेवा अवधि भी उपलब्ध रिकॉर्ड के मुताबिक करीब नौ महीने रही। उनकी नियुक्ति 6 नवंबर 2024 को हुई थी और 23 जुलाई 2025 तक सेवा में रहे। 


Share:

बंडा जहरीली शराब कांड : भगवती मानव कल्याण संगठन ने CBI जांच और 25 लाख मुआवजे की मांग, भाकपा ने सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जज से जांच कराने की उठाई मांग

बंडा जहरीली शराब कांड : भगवती मानव कल्याण  संगठन ने CBI जांच और 25 लाख मुआवजे की मांग, भाकपा ने सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जज से जांच कराने की उठाई मांग


तीनबत्ती न्यूज: 8 सितंबर 2026

सागर। सागर जिले के बंडा क्षेत्र में जहरीली शराब से हुई मौतों के मामले में अब राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने जांच और कार्रवाई को लेकर आवाज तेज कर दी है। भगवती मानव कल्याण संगठन, शाखा सागर ने कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर मामले की सीबीआई जांच, मृतकों के परिजनों को 25-25 लाख रुपये मुआवजा देने सहित आठ प्रमुख मांगें रखी हैं। वहीं भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने पूरे घटनाक्रम की जांच उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश के नेतृत्व में गठित समिति से कराने की मांग की है।

यह भी पढ़ें: Sagar Poisonous Liquor Case: जीतू पटवारी ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप, आबकारी मंत्री के इस्तीफे की मांग : • प्रभावित गांवों में पहुंचे कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष, मृतकों के परिजनों से की मुलाकात;

भगवती मानव कल्याण संगठन ने उठाए सवाल

संगठन ने अपने ज्ञापन में दावा किया कि बंडा विधानसभा क्षेत्र में अवैध शराब के सेवन से अब तक 30 से 35 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 150 से अधिक लोग अस्पतालों में भर्ती हैं। संगठन ने आरोप लगाया कि लाइसेंसी दुकानों से गांवों तक पहुंचाई गई कथित अवैध शराब के सेवन से यह घटना हुई।


संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि आबकारी विभाग ने 5 सितंबर को बिना फोरेंसिक जांच के संबंधित शराब को पीने योग्य बताते हुए क्लीनचिट दे दी थी। संगठन के पदाधिकारियों के अनुसार, 7 सितंबर को सानौधा थाना क्षेत्र में कार्यकर्ताओं ने एक पेटी कथित जहरीली शराब पकड़कर आबकारी विभाग को सूचना दी थी। संगठन का कहना है कि नौराज गांव, जहां चार मौतें हुई हैं, वहीं से शराब बरामद हुई।

यह भी पढ़ें: Sagar Poisonous Liquor Case: जहरीली शराब मामले में डिप्टी CM राजेंद्र शुक्ल का दौरा, मजिस्ट्रियल जांच के आदेश

ज्ञापन में संगठन ने सागर पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए और पूर्व में मुरैना में उनके कार्यकाल के दौरान हुई शराब से मौतों का उल्लेख करते हुए जांच की मांग की।

यह भी पढ़ें: सागर : बंडा शराबकांड में 11 मौतें, डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने BMC पहुंचकर मरीजों का जाना हाल; बोले- दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। • सभी शराब दुकानों की जांच, उनके स्टॉक की निगरानी और अवैध कारोबार की गहन जांच • शराब कांड में 20 पर FIR: 10 आरोपी पुलिस हिरासत में

संगठन की आठ प्रमुख मांगें


मृतक परिवारों को 25-25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए।

पीड़ित परिवारों का एक वर्ष तक निःशुल्क इलाज कराया जाए।

क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका की जांच की जाए।

दोषी अधिकारियों को निलंबित करने के बजाय बर्खास्त किया जाए।

निलंबित पुलिस एवं आबकारी अधिकारियों को बर्खास्त किया जाए।

सागर कलेक्टर और एसपी को तत्काल हटाया जाए।

जिले की सभी लाइसेंसी शराब दुकानों को स्थायी रूप से बंद किया जाए।

मामले की सीबीआई जांच के साथ पांच आईएएस अधिकारियों और पांच समाजसेवियों की टीम से भी जांच कराई जाए।


संगठन ने चेतावनी दी कि 15 दिनों के भीतर कार्रवाई नहीं होने पर पीड़ित परिवारों और आमजन के साथ चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा।


भाकपा ने सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जज से जांच की मांग की

इधर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की जिला परिषद के नेतृत्व में भी मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर कार्यालय में ज्ञापन सौंपा गया। पार्टी ने कहा कि नकली शराब से मौतों का सिलसिला थम नहीं रहा है और मामले की जांच की दिशा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पार्टी ने आशंका जताई कि यदि पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति हो सकती है।

भाकपा ने मांग की कि पूरे घटनाक्रम की जांच उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश के नेतृत्व में गठित समिति से कराई जाए तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो।


पार्टी ने अवैध शराब के उत्पादन और बिक्री में संलिप्त लोगों की चल-अचल संपत्तियां राजसात करने, आबकारी अधिकारियों और कर्मचारियों से उनके पद के अनुरूप कार्यों की समयबद्ध रिपोर्ट लेने, आबकारी विभाग के खुफिया तंत्र को मजबूत करने और अवैध व नकली शराब के उत्पादन-विक्रय के नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने की मांग की।


इसके अलावा पीड़ित परिवारों को समुचित इलाज और मानवीय सहायता तत्काल उपलब्ध कराने की मांग भी ज्ञापन में की गई।


भाकपा के प्रतिनिधिमंडल में जिला सचिव कामरेड चन्द्रकुमार, अधिवक्ता देवेंद्र सिंघई, गोवर्धन पटेल और आशीष भायजी सहित अन्य लोग शामिल रहे।



Share:

www.Teenbattinews.com

Archive