सोमवार, 9 दिसंबर 2019

किसी और को पति बताकर राशि हडपने वाली महिला एवं एक अन्य को तीन-तीन साल की सजा

किसी और को पति बताकर राशि हडपने वाली महिला एवं एक अन्य को तीन-तीन साल की सजा
सागर। किसी और को अपना पति बताकर राष्ट्रीय परिवार सहायता राशि हडप करने के मामले में एक महिला सहित एक अन्य आरोपी को सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश नवनीत कुमार वालिया सागर की अदालत ने दोषी करार देते हुए तीन-तीन वर्ष के सश्रम कारावास और अर्थदण्ड की सजा से दंडित किया है।
 जिला लोक अभियोजन के मीडिया प्रभारी ब्रजेश दीक्षित ने बताया कि आरोपी सुहागरानी पत्नि धनीराम सौंर उम्र 60 वर्ष निवासी ग्राम निपनिया थाना सानौधा ने अपने आप को चैदे सौंर का पति बताते हुए ग्राम पंचायत शाहपुर से उसका मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करवा लिया। इसके बाद आरोपी सुहागरानी ने नगर पंचायत शाहपुर में राष्ट्रीय परिवार सहायता योजना के अंतर्गत मिलने वाली दस हजार रूपए की राशि के लिए फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत कर राशि प्राप्त करने के लि आवेदन किया। जिसके बाद यूनियन बैंक शाहपुर में आरोपी ने सुहागरानी पत्नि चैदे के नाम से बैंक एकाउंट खुलवाया और पंचायत निधिी से 10 हजार रूपए का चैक प्राप्त कर राशि आहरित कर ली। मामले में एक अन्य आरोपी शैलेन्द्र सिह पिता शंभू ंिसह गौड उम्र 45 वर्ष निवासी शाहपुर थाना सानौधा ने आरोपी सुहागरानी का पहचानकर्ता बताते हुए बैंक में उसका खाता खुलवाने में मदद की। दिनांक 13.06.2008 को मुख्य नगर पालिका अधिकारी जेपी सेन ने इस मामले की शिकायत चैकी शाहपुर में दर्ज कराई थी। जिस पर पुलिस ने आरोपियों के विरूध मामला दर्ज करते हुए चालान न्यायालय में पेश किया। जहां विचारण उपरांत सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश नवनीत कुमार वालिया सागर की अदालत ने आरोपी सुहागरानी को भादवि की धारा 419 में एक वर्ष का सश्रम कारावास, 2 हजार अर्थदण्ड, धारा 420 एवं 468 में तीन-तीन वर्ष का सश्रम कारावास व 4-4 हजार अर्थदण्ड वहीं आरोपी शैलेन्द्र ंिसह को धारा 420/34 एवं 468/120बी तीन-तीन वर्ष का सश्रम कारावास और चार-चार हजार रूपए अर्थदण्ड की सजा से दंडित किया है। मामले की पैरवी अभियोजन की ओर से अतिरिक्त डीपीओ शिवसंजय ने की।
नाबालिग को बहला फुसलाकर भगाने वाले को 10 वर्ष का कठोर कारावास
सागर। नाबालिग को बहला-फुसलाकर भगाकर ले जाने और उसके साथ बलात्संग करने वाले एक आरोपी को अपर सत्र न्यायाधीश रघुबीर प्रसाद पटेल देवरी जिला सागर की अदालत ने दोषी करार देते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास और अर्थदण्ड की सजा से दंडित किया है।
जिला लोक अभियेाजन के मीडिया प्रभारी ब्रजेश दीक्षित ने बताया कि दिनांक 02.01.2017 को अभियोक्त्री जो कि कक्षा सातवीं की छात्रा थी। अपनी सहेली के साथ स्कूल गई। शाम को 5 बजे जब अभियोक्त्री की सहेली वापिस लौट आई तो अभियोक्त्री के माता-पिता ने अभियोक्त्री के बारे में पूछा। सहेली ने बताया कि आरोपी हरिशंकर पिता बद्री प्रसाद गौड उम्र 23 वर्ष निवासी थाना तेंदूखेडा उसे अपनी मोटरसाईकिल से स्कूल छोडने के बहाने कही ले गया है। जिसके बाद थाना महाराजपुर में आरोपी के विरूध मामला दर्ज कर तलाश शुरू की गई। अभियोक्त्री के दस्तयाब होने के बाद आरोपी के विरूध अलग-अलग धाराओं में चालान न्यायालय में पेश किया गया। जहां विचारण उपरांत अपर सत्र न्यायाधीश रघुबीर प्रसाद पटेल देवरी जिला सागर की अदालत ने आरोपी हरिशंकर को दोषी करार देते हुए भादवि की धारा 376(2) में दस वर्ष के कठोर कारावास, एक हजार रूपए अर्थदण्ड, धारा 363 में तीन वर्ष के सश्रम कारावास, पांच सौ रूपए अर्थदण्ड, एवं धारा 366 ए में दोषी करार देेते हुए तीन वर्ष के सश्रम कारावास और पांच सौ रूपए अर्थदण्ड की सजा से दंडित किया है। मामले की पैरवी अभियोजन की ओर विशेष लोक अभियोजक कपिल पांडेय ने की।

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