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विधानसभा :विधायक शैलेंद्र जैन ने तेंदूपत्ता उद्योग , सिटी फॉरेस्ट के मेंटेनेंस, चिड़ियाघर निर्माण,दिव्यांग पुनर्वास केन्द्र ,अनुसूचित जाति-जनजाति छात्रावासों का मुद्दा उठाया

विधानसभा :विधायक शैलेंद्र जैन ने तेंदूपत्ता उद्योग , सिटी फॉरेस्ट के मेंटेनेंस, चिड़ियाघर निर्माण,दिव्यांग पुनर्वास केन्द्र ,अनुसूचित जाति-जनजाति छात्रावासों का



मुद्दा उठाए


तीनबत्ती न्यूज: 23 फरवरी, 2026
सागर।मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में विधायक शैलेंद्र कुमार जैन ने मांग संख्या 10 के तहत वन विभाग पर बोलते हुए कहा कि किसी भी राज्य की तरक्की उसकी वन संपदा से जुड़ी होती है। मध्य प्रदेश देश का वन संपदा के मामले में अग्रणी राज्य है और हमारी जिम्मेदारी भी अधिक है।

बजट का प्रावधान जरूरी

उन्होंने कहा कि सागर और अन्य शहरों के आसपास स्थित वन क्षेत्रों को "सिटी फॉरेस्ट" के रूप में उन्नत किया गया है, और प्रदेश में 94 सिटी फॉरेस्ट बनाए गए हैं, जो देश में सबसे पहले स्थान पर हैं। इन सिटी फॉरेस्ट्स का कार्य शहरों के फेफड़ों और ऑक्सीजन बैंक के रूप में होता है, लेकिन इनके मेंटेनेंस के लिए केंद्र या राज्य स्तर से बजट का कोई प्रावधान नहीं किया गया है, जिससे इनका रखरखाव मुश्किल हो रहा है। विधायक श्री जैन ने इन सिटी फॉरेस्ट्स के मेंटेनेंस के लिए बजट आवंटन की मांग की।

विधायक श्री जैन ने बताया कि शासन द्वारा चिड़ियाघर निर्माण के लिए सागर और रायसेन के प्रस्ताव भेजे थे जिन्हें नेशनल जू अथॉरिटी ने इन परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की है, लेकिन बजट की कमी के कारण यह काम रुक गया है। उन्होंने इसके लिए कांपा (Campa) फंड का उपयोग कर जू रेस्क्यू सेंटर बनाने का सुझाव दिया उन्होंने कहा कि इसके निर्माण से न केवल पर्यटन के क्षेत्र में विकास होगा बल्कि वन्यजीवों के रेस्क्यू सेंटर के रूप में भी एक बड़ा कार्य होगा।

तेंदूपत्ता उद्योग पर कराया ध्यान आकर्षित

इसके अलावा, विधायक जैन ने तेंदू पत्ता उद्योग के मुद्दे पर भी ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश देश का 50% तेंदू पत्ता आपूर्ति करता है, लेकिन बीड़ी निर्माण में कमी आई है, जबकि पश्चिम बंगाल में बीड़ी निर्माण बड़े पैमाने पर हो रहा है, जिससे वहां बांग्लादेश से आए हुए रोहिंग्या घुसपैठियों लोग रोजगार पा रहे हैं, जबकि मध्य प्रदेश के लोग बेरोजगारी का शिकार हो रहे हैं। इसके समाधान के लिए उद्योगपतियों को इंसेंटिव के माध्यम से प्रोत्साहन देने की आवश्यकता है।

चीता प्रोजेक्ट

विधायक श्री जैन ने मध्य प्रदेश में चीता प्रोजेक्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारे सागर जिले के रानी दुर्गावती नौरादेही अभ्यारण्य में चीता के आगमन के बारे में भी बात की और कहा कि वहां टाइगर पहले से उपलब्ध हैं चीता के आगमन से सोने पर सुहागा होगा। इसके अलावा, उन्होंने वन समितियों को 15,608 की संख्या में बताया और कहा कि उन्हें एक बड़ा बजट उपलब्ध कराकर वन योजनाओं का पुनर्जीवन करना चाहिए।

विधायक ने यह भी कहा कि प्रदेश में सांस्कृतिक वन विस्थापन और नक्षत्र वन जैसे महत्वाकांक्षी परियोजनाएं चल रही हैं, जो प्रदेश की जैव विविधता और सांस्कृतिक धरोहर को बढ़ावा दे रही हैं।

अनुसूचित जाति-जनजाति छात्रावासों का मुद्दा, सीट विस्तार व सुविधाओं को लेकर मांगी जानकारी

बजट सत्र के दौरान प्रश्नकाल में सागर विधायक शैलेंद्र कुमार जैन ने जनजातीय कार्य विभाग से संबंधित प्रश्न क्रमांक 1576 के माध्यम से सागर विधानसभा सहित जिले में संचालित अनुसूचित जाति एवं जनजाति बालक-बालिका छात्रावासों की व्यवस्थाओं, सीट विस्तार, प्रतियोगी परीक्षा प्रशिक्षण एवं रिक्त पदों को लेकर महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए।

विधायक श्री जैन ने शासन से पूछा कि क्या सागर जिले में संचालित अनुसूचित जाति एवं जनजाति छात्रावासों की सीट क्षमता बढ़ाने की कोई योजना है तथा यदि नहीं, तो क्या इस दिशा में विचार किया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने छात्रावासों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की जानकारी भी मांगी।

उन्होंने यह भी जानना चाहा कि जिले के किन छात्रावासों में पुस्तकालय एवं खेल-कूद मैदान जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं तथा जिन छात्रावासों में यह व्यवस्थाएं नहीं हैं, वहां उनकी पूर्ति के लिए शासन क्या कदम उठा रहा है। इसके अतिरिक्त छात्रावासों में स्वीकृत पदों के विरुद्ध रिक्त पदों एवं उनकी पूर्ति की कार्यवाही संबंधी जानकारी भी सदन के माध्यम से मांगी।

प्रश्न के उत्तर में जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने बताया कि छात्रावासों में सीट वृद्धि का निर्णय आवश्यकता एवं औचित्य स्थापित होने पर लिया जाता है। उन्होंने कहा कि जनजातीय कार्य विभाग द्वारा विद्यार्थियों को JEE, NEET एवं CLAT जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु ‘आकांक्षा योजना’ संचालित की जा रही है।

मंत्री ने यह भी बताया कि छात्रावासों में पुस्तकालय, खेल मैदान एवं अन्य सुविधाओं का विस्तार आवश्यकता एवं उपलब्ध बजट के अनुसार समय-समय पर किया जाता है। वहीं छात्रावास अधीक्षक के पद प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संवर्ग के अंतर्गत आते हैं, जिनकी भर्ती कर्मचारी चयन मंडल द्वारा आयोजित पात्रता परीक्षा के माध्यम से की जाती है।

दिव्यांग पुनर्वास केन्द्र :का मुद्दा : 3 वर्षों में 1270 दिव्यांगों को मिला लाभ

बजट सत्र के दौरान प्रश्नकाल में सागर विधायक शैलेंद्र कुमार जैन ने सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण विभाग से सागर स्थित दिव्यांग पुनर्वास केन्द्र में दिव्यांगजनों को प्रदान की जा रही सुविधाओं, संसाधनों एवं रिक्त पदों की स्थिति को लेकर महत्वपूर्ण प्रश्न उठाया।

विधायक श्री जैन ने जानकारी चाही कि क्या सागर स्थित दिव्यांग पुनर्वास केन्द्र में दिव्यांगजनों के लिए कृत्रिम अंग निर्माण एवं उनके मरम्मत/सुधार का कार्य किया जा रहा है तथा विगत तीन वर्षों में सागर विधानसभा क्षेत्र के कितने दिव्यांगों को इसका लाभ मिला है। साथ ही उन्होंने फिजियोथेरेपी, मानसिक दिव्यांगजनों की थैरेपी, स्पीच थैरेपी एवं बौद्धिक दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष शिक्षा संबंधी व्यवस्थाओं की जानकारी भी मांगी।

सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने अपने उत्तर में बताया कि सागर स्थित दिव्यांग पुनर्वास केन्द्र में कृत्रिम अंगों की मरम्मत एवं सुधार का कार्य नियमित रूप से किया जा रहा है। विगत तीन वर्षों में सागर विधानसभा क्षेत्र के 630 दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग सुधार कार्य से लाभान्वित किया गया, जबकि कुल 1270 दिव्यांगजन विभिन्न सेवाओं से लाभान्वित हुए हैं।

मंत्री ने बताया कि प्रदेश के सभी जिला दिव्यांग पुनर्वास केन्द्रों (DDRC) में कृत्रिम अंगों की मरम्मत हेतु पर्याप्त कच्चा माल एवं संसाधन उपलब्ध कराने के लिए विभाग द्वारा प्रतिवर्ष 2 लाख रुपये का वित्तीय प्रावधान किया गया है। आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त राशि के प्रस्ताव संचालनालय को भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं। साथ ही संसाधनों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए भारत सरकार को अनुदान प्रस्ताव भी प्रेषित किया गया है।

उन्होंने यह भी जानकारी दी कि सागर स्थित दिव्यांग पुनर्वास केन्द्र में वर्तमान में कुल 6 पद रिक्त हैं। इन पदों की पूर्ति जिला प्रबंधन दल (DMT) द्वारा जिला स्तर पर विज्ञप्ति जारी कर निर्धारित योग्यता के आधार पर की जाती है, जो एक सतत प्रक्रिया है।

विधानसभा में उठाए गए इस प्रश्न के माध्यम से दिव्यांगजनों को उपलब्ध सेवाओं की स्थिति तथा सुविधाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है।

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