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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समय की मांग परंतु उपयोग में विवेक की जरूरत: प्रो. वी.के. दीक्षित

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समय की मांग परंतु उपयोग में विवेक की जरूरत: प्रो. वी.के. दीक्षित


तीनबत्ती न्यूज: 28 फरवरी, 2026

सागर: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस उद्योग, कृषि, स्वास्थ्य सेवाओं में बहुत से तकनीकी विकास हो रहे हैं प्रत्येक देश इसके माध्यम से विकास और उन्नति की राह बना रहे हैं। भारत भी अपनी आर्थिक व्यवस्था को सुदृढ करने के लिए इस क्षेत्र में भारी निवेश की योजना बना रहा है परंतु आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग में डाटा संबंधी बहुत सारी सावधानियां रखने की जरूरत है।तथा विवेक से सामाजिक नैतिक आर्थिक व्यवस्थाओं को बनाए रखने की जरूरत है।  उपरोक्त विचार सागर विश्वविद्यालय के फार्मेसी विभाग के पूर्व डीन और विभागाध्यक्ष प्रो. वी. के. दीक्षित ने बीटीआई पीएस में आयोजित औषधि पादप जैव प्रौद्योगिकी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किये । संगोष्ठी का शुभारंभ पारंपरिक दीय प्रचलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। संगोष्ठी में पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर के प्रोफेसर डॉक्टर दीपेंद्र सिंह, राजीव गांधी विश्वविद्यालय की प्रोफेसर दीप्ति जैन विशिष्ट अतिथि रहे।


बीटीआईपीएस के निदेशक (अनुसंधान एवं विकास) डॉक्टर संजय कुमार जैन ने संगोष्ठी की थीम का परिचय एवं उद्देश्य देते हुए औषधि पादप जैव प्रौद्योगिकी में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए निहित संभावनाओं पर प्रकाश डाला। संस्था के चेयरमैन श्री संतोष जैन घड़ी ने शिक्षकों एवं विद्यार्थियों से आवाहन किया है कि वह समय की जरूरत के अनुसार नई तकनीक सीखते हुए स्वास्थ्य सेवाओं में अपना महत्वपूर्ण योगदान दें ।

प्रथम तकनीकी सत्र में रायपुर से पधारे प्रो. दीपेंद्र सिंह ने भविष्य के फार्मिसिस्टो को दवा उद्योग और स्वास्थ्य सेवाओं में एआई के आने पर आने वाले परिवर्तनों के लिए तैयार रहने को कहा भारत की फार्मेसी विश्व में अग्रणी है और आगे भी अग्रणी बनाए रखने के लिए भारत के वैज्ञानिकों, शिक्षकों उद्योगों से कमर कसने को कहा है। उन्होंने कहा फार्मेसी शिक्षा में शीघ्र ही इस आशय के परिवर्तन किया जा रहे हैं। राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की प्रोफेसर दीप्ति जैन ने दवाओं के शोध में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से सटीकता और समय बचत की बात करते हुए कहा कि इस प्रक्रिया से शोध खर्च में बहुत हद तक बचत हो जाएगी तथा लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी। सत्र का संचालन डॉक्टर हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय के बायोटेक्नोलॉजी विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. सुबोध जैन ने किया।


संगोष्ठी के द्वितीय सत्र में गुरु घसीदास विश्वविद्यालय बिलासपुर के प्रोफेसर डॉक्टर सुनील जैन ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से स्वास्थ्य सेवाओं में आने वाले परिवर्तनों की चर्चा करते हुए कहा कि रोगों की जांच तथा अन्य सुविधाओं में सुधार होने से पूरे मानव समाज को लाभ होगा उन्होंने कहा कि अब व्यक्ति विशेष के अनुसार सटीक उपचार हो सकेगा तथा दवाओं के दुष्प्रभावों से बचा जा सकेगा। सागर विश्वविद्यालय के फार्मेसी विभाग अध्यक्ष प्रोफेसर उमेश पाटिल ने प्राचीन हर्बल एवं आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों के शोध में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से उनकी उत्पादकता, गुणवत्ता, एवं खेती में सुधार होगा तथा उनके मानकीकरण में सुविधा होगी जिससे भारत की पारंपरिक चिकित्सा विधियों को विश्व में पुनः साख प्राप्त होगी तथा देश की आर्थिक अवदान में योगदान बढ़ेगा ।


संगोष्ठी में प्रदेश भर से तकरीबन तीस शोध पोस्टर प्रस्तुत हुऐ जिनका मूल्यांकन सागर विश्वविद्यालय के डॉक्टर प्रशांत केशरवानी, डॉ. आदर्श साहू एवं लवली यूनिवर्सिटी पंजाब के डॉक्टर सजीव साहू ने किया जिसमें पीजी केटेगरी पोस्टर प्रथम योगेंद्र रैकवार, द्वितीय लोकेंद्र सोनी, तृतीय शालनी कुमारी यूजी केटेगरी प्रथम माही जैन, द्वितीय रश्मि लोधी, तृतीय त्रिशला रहे उनको पुरस्कृत किया गया संगोष्ठी के आरंभ में अतिथियों का स्वागत किया गया संगोष्ठी के समन्वयक डॉक्टर अशोक जैन प्राचार्य ने अतिथियों का स्वागत किया।


समापन सत्र में विद्यार्थियों द्वारा मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गई। संगोष्ठी में प्रदेशभर से साढ़े तीन सौ प्रतिभागी सम्मिलित हुए। समापन सत्र में संस्था सचिव डॉ. सत्येंद्र जैन ने संस्था की उपलब्धियों की चर्चा करते हुए विद्यार्थियों की प्रगति में अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की। आभार आयोजन सचिव डॉक्टर रूपशी जैन ने माना। संगोष्ठी में डॉक्टर धर्मेंद्र जैन, डॉक्टर अविरल जैन, डॉक्टर सुरेंद्र लालवानी, डॉक्टर शैलेंद्र पाटिल, डॉ कुलदीप राजपूत, डॉ. रितेश विनोदे, डॉ. शिवानी सराफ डॉ. ऋचा त्रिपाठी, डॉ. लक्ष्मीकांत गौतम, दीक्षा जैन हर्षित, जैन दुर्गेश नंदिनी नेमा, आजाद चौहान, आशीष कुमार जैन, शिवाली राजपूत खुशी ठाकुर, प्रिया जैन, निशांत कुमार बर्दिया, दिव्या पाल सिंह, नीलेश रैकवार अन्य सभी स्टाफ की संगोष्ठी में सक्रिय भूमिका रही।


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