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45 साल के भरोसे को मिला नया रूप, बुंदेलखंड में सांची की नई ब्रांड पहचान का अनावरण

45 साल के भरोसे को मिला नया रूप, बुंदेलखंड में सांची की नई ब्रांड पहचान का अनावरण

• नई पैकेजिंग में परंपरा और आधुनिकता का संगम; अप्रैल-अगस्त में दूध संग्रह 29.8% बढ़ा


तीनबत्ती न्यूज: , 9 सितंबर 2026

सागर: मध्यप्रदेश के प्रतिष्ठित सहकारी डेयरी ब्रांड ‘सांची’ ने अपनी 45 वर्षों की विश्वसनीय विरासत को आधुनिक स्वरूप देते हुए बुंदेलखंड में अपनी नई ब्रांड पहचान और री-डिजाइन की गई पैकेजिंग का अनावरण किया। सिग्नेचर हॉल, होटल दीपाली, बुंदेलखंड में आयोजित रीब्रांडिंग समारोह में नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) के रीजनल हेड, वेस्ट जोन, श्री वी. श्रीनिवास मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में एमपीसीडीएफ के प्रबंध संचालक श्री जयदेव बिस्वास, बुंदेलखंड दुग्ध संघ के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री संजय कुमार यादव तथा मध्यप्रदेश वित्त विभाग की संयुक्त संचालक सुश्री हेमलता पटेल सहित अन्य अधिकारी, वितरक एवं रिटेलर्स उपस्थित रहे।

नई ब्रांड पहचान के तहत सांची के दूध एवं अन्य दुग्ध उत्पादों की पैकेजिंग में आधुनिक रंगों, एकरूप लेआउट और आकर्षक डिजाइन को शामिल किया गया है। नई पैकेजिंग में मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक एवं ग्रामीण विरासत से प्रेरित गोंड कला के तत्वों को भी प्रमुखता दी गई है। नई पहचान का उद्देश्य सांची की 45 वर्षों से अर्जित विश्वसनीयता को बरकरार रखते हुए इसे बदलते बाजार और आधुनिक उपभोक्ताओं की अपेक्षाओं के अनुरूप नई पहचान देना है।

सांची मजबूत पहचान

मुख्य अतिथि श्री वी. श्रीनिवास, रीजनल हेड, वेस्ट जोन, NDDB ने कहा, “सांची मध्यप्रदेश की सहकारी डेयरी व्यवस्था की मजबूत पहचान है और पिछले 45 वर्षों में इसने उपभोक्ताओं का विश्वास अर्जित किया है। नई ब्रांड पहचान इस विरासत को आधुनिक बाजार की जरूरतों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। नई पैकेजिंग में आधुनिक डिजाइन के साथ मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को भी स्थान दिया गया है। इससे सांची को नई पीढ़ी के उपभोक्ताओं के बीच और मजबूत पहचान बनाने में मदद मिलेगी।”

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एमपीसीडीएफ के प्रबंध संचालक श्री जयदेव बिस्वास ने कहा, “सांची की रीब्रांडिंग केवल पैकेजिंग और डिजाइन में बदलाव नहीं है, बल्कि यह बदलते समय के साथ आगे बढ़ने की हमारी प्रतिबद्धता का प्रतीक है। 45 वर्षों से उपभोक्ताओं का विश्वास हमारी सबसे बड़ी ताकत है। हमारा प्रयास है कि इस भरोसे को बनाए रखते हुए सांची को आधुनिक उपभोक्ता की पसंद और बाजार की नई संभावनाओं के अनुरूप और मजबूत बनाया जाए। नई ब्रांड पहचान से सांची के उत्पादों की बाजार में दृश्यता और बिक्री को बढ़ावा मिलेगा।”

बुंदेलखंड दुग्ध संघ के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री संजय कुमार यादव ने कहा, “बुंदेलखंड दुग्ध संघ के लिए सांची की नई ब्रांड पहचान एक महत्वपूर्ण पहल है। नई पैकेजिंग से सांची के उत्पादों को बाजार में एकरूपता और बेहतर पहचान मिलेगी। हमारा प्रयास है कि उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण एवं विश्वसनीय दुग्ध उत्पाद उपलब्ध कराने के साथ दुग्ध उत्पादक किसानों को भी मजबूत बाजार उपलब्ध कराया जाए। नई ब्रांडिंग से सांची के प्रति उपभोक्ताओं का जुड़ाव और मजबूत होगा तथा उत्पादों की पहुंच बढ़ाने में मदद मिलेगी।”

मध्यप्रदेश वित्त विभाग की संयुक्त संचालक सुश्री हेमलता पटेल ने कहा, “सांची मध्यप्रदेश की सहकारी भावना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से गहराई से जुड़ा ब्रांड है। इसकी नई पहचान परंपरा और आधुनिकता के बीच बेहतर संतुलन प्रस्तुत करती है। मुझे विश्वास है कि नया स्वरूप सांची को बदलते बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के साथ उपभोक्ताओं और दुग्ध उत्पादक किसानों के बीच इसके जुड़ाव को और मजबूत करेगा।”

पांच महीनों में दूध संग्रह में करीब 30 प्रतिशत वृद्धि

बुंदेलखंड दुग्ध संघ के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से अगस्त 2026 के दौरान दूध संग्रह में पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 29.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। अप्रैल-अगस्त 2025 के दौरान जहां इन पांच महीनों का कुल दैनिक औसत संग्रह 2,66,270 किलोग्राम रहा, वहीं अप्रैल-अगस्त 2026 में यह बढ़कर 3,45,623 किलोग्राम हो गया।

आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2025 में दूध संग्रह 56,613 किलोग्राम प्रतिदिन था, जो अप्रैल 2026 में बढ़कर 77,077 किलोग्राम हो गया। इसी तरह मई में यह 43,468 किलोग्राम से बढ़कर 63,120 किलोग्राम, जून में 43,092 से बढ़कर 58,944 किलोग्राम, जुलाई में 56,322 से बढ़कर 63,751 किलोग्राम तथा अगस्त में 66,775 से बढ़कर 82,731 किलोग्राम प्रतिदिन हो गया।

दूध संग्रह में लगातार हो रही वृद्धि क्षेत्र में सहकारी डेयरी व्यवस्था के विस्तार तथा दुग्ध उत्पादकों के बढ़ते जुड़ाव का संकेत है। यह वृद्धि सांची के लिए बढ़ते कच्चे माल के आधार और बाजार में अपनी उपस्थिति को और मजबूत करने की संभावनाओं को भी दर्शाती है।

सांची की नई ब्रांड पहचान के तहत दूध की विभिन्न श्रेणियों के साथ दही, पनीर, छाछ, मठ्ठा, चाय तथा अन्य दुग्ध उत्पादों को भी एकरूप और आधुनिक पैकेजिंग प्रदान की गई है। इसका उद्देश्य सांची के विभिन्न उत्पादों को बाजार में आसानी से पहचान योग्य बनाना तथा उपभोक्ताओं के बीच ब्रांड की दृश्यता और आकर्षण को बढ़ाना है।

नई पैकेजिंग में मध्यप्रदेश की कला और ग्रामीण जीवन से जुड़े तत्वों को शामिल किया गया है। गोंड कला से प्रेरित डिजाइन सांची की स्थानीय जड़ों को आधुनिक ब्रांडिंग के साथ जोड़ता है। इस तरह नई पहचान में परंपरा, आधुनिकता, गुणवत्ता और सहकारिता का समन्वय दिखाई देता है।

रीब्रांडिंग का उद्देश्य केवल उत्पादों का स्वरूप बदलना नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं के साथ सांची के जुड़ाव को और मजबूत करना तथा आधुनिक बाजार में इसकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाना है। एकरूप पैकेजिंग से उपभोक्ताओं को सांची के विभिन्न उत्पादों की पहचान करने में आसानी होगी और पूरे उत्पाद पोर्टफोलियो के लिए एक मजबूत एवं सुसंगत ब्रांड पहचान विकसित होगी।

सहकारी डेयरी व्यवस्था के केंद्र में दुग्ध उत्पादक किसान हैं। किसानों से दूध का संग्रह, उचित मूल्य और समय पर भुगतान, पशु चिकित्सा सुविधाएं, संतुलित पशु आहार की जानकारी तथा वैज्ञानिक डेयरी प्रबंधन संबंधी प्रशिक्षण जैसी गतिविधियों के माध्यम से दुग्ध उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के प्रयास किए जाते हैं।

सांची के दूध एवं दुग्ध उत्पाद निर्धारित खाद्य सुरक्षा एवं गुणवत्ता मानकों के अनुरूप तैयार कर उपभोक्ताओं तक पहुंचाए जाते हैं। नई ब्रांड पहचान के साथ सांची अपनी 45 वर्ष पुरानी विश्वसनीयता को आधुनिक उपभोक्ता अनुभव से जोड़ते हुए नए बाजारों और नई पीढ़ी के उपभोक्ताओं तक पहुंचने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

‘स्वाद, सेहत, सांची’ के मूल संदेश के साथ नई ब्रांड पहचान सांची की समृद्ध विरासत को आधुनिक स्वरूप देने और इसे भविष्य की जरूरतों के अनुरूप मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।


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बुंदेलखंड मेडिकल कालेज के शासकीय कॉलेज ऑफ नर्सिंग को मिली 60 सीटों की मंजूरी, बुंदेलखंड के विद्यार्थियों को मिलेगा बड़ा लाभ

बीएमसी के शासकीय कॉलेज ऑफ नर्सिंग को मिली 60 सीटों की सौगात : बुंदेलखंड के विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ

• डीन डॉ. पी.एस. ठाकुर के निरंतर प्रयासों से मिली बड़ी उपलब्धि




तीनबत्ती न्यूज: 22 अगस्त 2026

सागर। बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (बीएमसी), सागर के शासकीय कॉलेज ऑफ नर्सिंग को 60 नर्सिंग सीटों की मंजूरी मिल गई है। यह उपलब्धि संस्थान के डीन डॉ. पी.एस. ठाकुर के पिछले दो वर्षों से किए जा रहे निरंतर प्रयासों, प्रशासनिक पहल और दूरदर्शी कार्यप्रणाली का परिणाम मानी जा रही है। नर्सिंग कॉलेज को मिली इस मंजूरी से सागर सहित पूरे बुंदेलखंड अंचल में नर्सिंग शिक्षा के विस्तार का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

वर्ष 2024 में नर्सिंग कॉलेज में प्रवेश पर रोक लग गई थी। इसके बाद संस्थान की व्यवस्थाओं को व्यवस्थित करने, आवश्यक मानकों को पूरा करने तथा पुनः मान्यता और नर्सिंग सीटें प्राप्त करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे थे। लंबे प्रयासों के बाद अब कॉलेज को 60 सीटों की मंजूरी मिलना बीएमसी के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

इस उपलब्धि पर डीन डॉ. पी.एस. ठाकुर ने प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उप मुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद प्रेषित किया है।


क्षेत्रीय विद्यार्थियों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का रास्ता खुला


बीएमसी सागर बुंदेलखंड क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमुख केंद्र है। नर्सिंग कॉलेज में 60 सीटों की उपलब्धता से चिकित्सा एवं नर्सिंग शिक्षा के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होने की उम्मीद है।

इसका लाभ सागर के अलावा दमोह, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी सहित आसपास के जिलों के विद्यार्थियों को मिलेगा। क्षेत्र के छात्र-छात्राओं को अब नर्सिंग शिक्षा के लिए बड़े शहरों का रुख करने की आवश्यकता कम होगी और उन्हें अपने ही क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।


प्रशिक्षित नर्सिंग अमले की उपलब्धता से स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती


नर्सिंग की 60 सीटों की मंजूरी से भविष्य में प्रशिक्षित और कुशल नर्सिंग स्टाफ तैयार करने में मदद मिलेगी। इसका सीधा लाभ बीएमसी के साथ-साथ आसपास के शासकीय अस्पतालों को भी मिल सकता है।

कुशल नर्सिंग कर्मियों की उपलब्धता से मरीजों की देखभाल, उपचार व्यवस्था और अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन को और बेहतर बनाने में सहायता मिलेगी। इस तरह नर्सिंग शिक्षा का विस्तार आने वाले समय में पूरे बुंदेलखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।


डीन के प्रयासों को मिली सफलता


बीएमसी के मीडिया प्रभारी डॉ. सौरभ जैन ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि डीन डॉ. पी.एस. ठाकुर के कुशल नेतृत्व और सतत प्रयासों से संस्थान को यह महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त हुई है।

उन्होंने कहा कि 60 नर्सिंग सीटों का मिलना बीएमसी के शैक्षणिक एवं चिकित्सीय विस्तार की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। इससे अंचल के छात्र-छात्राओं को अपने घर के नजदीक गुणवत्तापूर्ण नर्सिंग शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। साथ ही भविष्य में अस्पतालों को दक्ष एवं प्रशिक्षित नर्सिंग अमला उपलब्ध होगा, जो जन-स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

बीएमसी के शासकीय कॉलेज ऑफ नर्सिंग को मिली 60 सीटों की मंजूरी को क्षेत्र में नर्सिंग शिक्षा के विस्तार की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। इससे न केवल विद्यार्थियों के लिए नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि आने वाले वर्षों में बुंदेलखंड की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन भी तैयार होगा।

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जतारा में 1000 एकड़ में बनेगा नया औद्योगिक क्षेत्र, 35 निवेशकों ने जताई निवेश की सहमति

जतारा में 1000 एकड़ भूमि पर विकसित होगा नया औद्योगिक क्षेत्र, झांसी-मऊरानीपुर के 35 निवेशकों ने जताई निवेश की सहमति


तीनबत्ती न्यूज: 19 अगस्त, 2026

टीकमगढ़। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की क्षेत्रीय औद्योगिक विकास नीति के तहत टीकमगढ़ जिले में औद्योगिक विकास को गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल शुरू हुई है। जिले की जतारा और पलेरा तहसीलों में औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। इससे क्षेत्र में निवेश बढ़ने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होने की उम्मीद है।


जतारा में लगभग 1000 एकड़ भूमि पर नवीन औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जा रहा है। इसके विकास को लेकर एमपीआईडीसी, क्षेत्रीय कार्यालय सागर के कार्यकारी संचालक श्री प्रतुल चंद्र सिन्हा ने टीकमगढ़ कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ संयुक्त चर्चा की। कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को विद्युत, जल और औद्योगिक क्षेत्र के विकास के लिए आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।



झांसी और मऊरानीपुर के उद्योगपतियों से निवेश को लेकर चर्चा


टीकमगढ़ और पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एमपीआईडीसी के कार्यकारी संचालक ने उत्तर प्रदेश के झांसी और मऊरानीपुर में उद्योगपतियों, चेंबर ऑफ कॉमर्स, उत्तर प्रदेश व्यापार मंडल और विभिन्न औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की।

बैठकों में निवेशकों को मध्यप्रदेश शासन की उद्योग अनुकूल नीतियों, निवेश प्रोत्साहन योजनाओं, सुविधाओं और सिंगल विंडो सिस्टम की जानकारी दी गई। साथ ही उद्योगपतियों से बुंदेलखंड क्षेत्र में निवेश के लिए आवश्यक मूलभूत सुविधाओं और उनकी अपेक्षाओं को लेकर सुझाव भी लिए गए।

औद्योगिक क्षेत्र में मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं

बैठक में निवेशकों को जतारा में प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र के लिए उपलब्ध भूमि, अधोसंरचना और मूलभूत सुविधाओं की जानकारी दी गई। प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र में ईटीपी, एसटीपी, स्कूल, पार्क, बैंक, एटीएम, पुलिस थाना, फायर स्टेशन, चौड़ी सड़कें, नालियां, स्ट्रीट लाइट और पानी जैसी सुविधाएं विकसित किए जाने की योजना है।

इसके अलावा उद्योगों की स्थापना और निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार की विभिन्न प्रोत्साहन योजनाओं की भी जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि निवेशक अनुकूल नीतियां, शीघ्र अनुमतियां, प्रतिस्पर्धी भूमि दरें और मजबूत औद्योगिक इकोसिस्टम मध्यप्रदेश में निवेश के प्रमुख आकर्षण हैं।


रणनीतिक स्थान पर स्थित है जतारा

जतारा में प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति भी निवेश के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह क्षेत्र जतारा तहसील के साथ-साथ पलेरा और लिधौरा तहसीलों के नजदीक है तथा टीकमगढ़ जिले के आसपास के क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है।

इसके अलावा जतारा क्षेत्र की कनेक्टिविटी उत्तर प्रदेश के झांसी जिले के मऊरानीपुर क्षेत्र और छतरपुर जिले से भी बेहतर है। ऐसे में बुंदेलखंड के विभिन्न महत्वपूर्ण क्षेत्रों के बीच स्थित होने के कारण जतारा में उद्योगों के लिए व्यापक संभावनाएं देखी जा रही हैं।

35 निवेशकों ने जताई निवेश की सहमति

झांसी और मऊरानीपुर में आयोजित बैठकों के दौरान निवेशकों ने जतारा के प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र में निवेश को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया।

झांसी में आयोजित बैठक में 15 निवेशकों ने तथा मऊरानीपुर में आयोजित बैठक में 20 निवेशकों ने जतारा औद्योगिक क्षेत्र में निवेश करने की सहमति जताई। इस तरह दोनों बैठकों में कुल 35 निवेशकों ने जतारा में निवेश की इच्छा व्यक्त की है।

निवेशकों ने मध्यप्रदेश शासन की विभिन्न योजनाओं और सिंगल विंडो सिस्टम से संबंधित जानकारी भी चाही। एमपीआईडीसी के कार्यकारी संचालक द्वारा निवेशकों के सवालों के जवाब देते हुए आवश्यक जानकारी और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया गया।



उद्योग जगत के प्रतिनिधि रहे मौजूद


झांसी और मऊरानीपुर में आयोजित बैठकों में विधान परिषद सदस्य श्री रामतीर्थ सिंघल, बुंदेलखंड चेंबर्स ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष श्री धीरज खुल्लर, लघु उद्योग भारती जिला अध्यक्ष श्री राजीव वब्बर, आईसीएआई झांसी चेयरमैन श्री जयतमनी जैन, उत्तर प्रदेश व्यापार मंडल अध्यक्ष श्री संजय पटवारी सहित विभिन्न उद्योगपति और औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

जतारा में प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र के विकसित होने से टीकमगढ़ और आसपास के बुंदेलखंड क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है।

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