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डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के 12 शिक्षक विश्व के टॉप 2% वैज्ञानिकों में शामिल

विश्व के सर्वश्रेष्ठ 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में डॉ. गौर केंद्रीय विश्ववि‌द्यालय के 12 शिक्षक 


तीनबत्ती न्यूज: 10 अक्टूबर, 2026

सागर। स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय (अमेरिका) और एल्सवियर पब्लिशर्स द्वारा विश्व के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की प्रतिष्ठित वैश्विक सूची जारी की गई है। इस सूची में सागर स्थित डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय (केंद्रीय विश्वविद्यालय) के 12 शिक्षकों एवं वैज्ञानिकों ने स्थान बनाकर विश्वविद्यालय और प्रदेश का नाम रोशन किया है। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के समस्त विश्वविद्यालयों की तुलना में यह संख्या सर्वाधिक है।

एल्सेवियर और स्टैनफोर्ड द्वारा इस अध्ययन के तहत दो सूचियां बनाई जाती है. एक सूची जिसमे सम्पूर्ण कैरियर डेटा को करियर के आरम्भ से कैलेंडर वर्ष के अंत तक संकलित किया जाता किया है और दूसरी सूची कैलेंडर वर्ष के दौरान प्राप्त उद्धरणों के आधार पर बनाई जाती है।

सम्पूर्ण कैरियर डेटा की सूची में डॉक्टर विश्ववि‌द्यालय के 6 शिक्षकों को स्थान मिला है. इसमें फार्मेसी विभाग के सेवानिवृत्त प्रो. एन. के. जैन, प्रो. एस. पी. व्यास, प्रो संजय कुमार जैन, रसायन विभाग के पूर्वअध्यक्ष प्रो. ए. पी. मिश्रा तथा कार्यरत डॉ. प्रशांत केशरवानी माइक्रोबायोलोजी विभाग के अध्यक्ष प्रो. नवीन कानगो तथा शामिल हैं.

वार्षिक सूची में फार्मेसी विभाग के सेवानिवृत्त प्रो. एन. के. जैन, प्रो. एस. पी. व्यास, प्रो संजय कुमार जैन, तथा कार्यरत डॉ. प्रशांत केशरवानी, डॉ. विकास जैन, बॉटनी विभाग से सेवानिवृत्त प्रो. एम. एल. खान, जिओलॉजी विभाग के अध्यक्ष प्रोफ. ए. के. सिंह, डॉ. वंदना सोनी, बॉटनी विभाग की डॉ. सोनल माथुर, माइक्रोबायोलोजी विभाग के अध्यक्ष प्रो. नवीन कानगो तथा क्रिमिनोलॉजी एवं फोरेंसिक साइंस विभाग की डॉ. वंदना विनायक शामिल हैं.

इस तरह कुल मिलाकर विश्वविद्यालय के 12 शिक्षक इस महत्त्वपूर्ण सूची में स्थान बनाने में सफल हुए हैं। यह मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ के समस्त विश्वविद्यालयों में सर्वाधिक है.

इस सूची को विज्ञान के 22 क्षेत्रों और 174 उपक्षेत्रों से संबंधित वैज्ञानिकों के डाटाबेस एवं एल्सिवियर प्रकाशन और स्कोपस के विश्व स्तर के साइटेशन डेटाबेस के कम्पोजिट स्कोर के आधार पर तैयार किया जाता है. इस सूची में विश्वविद्यालय के कई पूर्व शिक्षक एवं पुरा छात्र, जो देश-विदेश विभिन्न संस्थाओ में कार्यरत हैं, भी शामिल हैं. विश्वविद्यालय के शिक्षकों की इस उपलब्धि पर कुलपति प्रो. नागेश दुबे ने बधाई दी है और हर्ष व्यक्त किया है.

ये रहे वैज्ञानिक

प्रो. एन. के. जैन भैषजिक विभाग के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं. उन्हें शिक्षण और अनुसंधान में 43 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उनके शोध में नावेल ड्रग डिलीवरी सिस्टम और चिकित्सा उपकरणों के नियामक पहलू शामिल हैं। उन्होंने प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में 500 से अधिक लेख प्रकाशित किए हैं जिन्हे 20000 से अधिक बार उद्धृत किया गया है.

फार्मेसी विभाग के पूर्व आचार्य, प्रो सुरेशप्रसाद व्यास को उच्चस्तरीय शोध के लिए इस सातवीं बार सूची में स्थान मिला है. उन्होंने लाइपोसोम बायोटेक्नोलॉजी, ओरल वक्सीनशन, लक्ष्यभेदी टीबी उपचार, नावेल ड्रग डिलीवरी पर उत्कृष्ट शोध किया है जो ४०० शोध पत्रों के रूप में प्रकाशित है और 20000 से अधिक बार उल्लेखित है.

प्रो. संजय के जैन, फार्मेसी विभाग सेवानिवृत्त आचार्य को उच्चस्तरीय शोध के लिए सातवीं बार इस सूची में स्थान मिला है. उन्होंने बड़ी आंत और मस्तिष्क की बीमारियों के लिए लक्ष्यभेदी दवाओं का विकास किया है जिसके लिए उन्हें 2018 में भारत के राष्ट्रपति द्वारा विजिटर अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है. इनके 200 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित हैं जिनका 15000 बार उल्लेख हुआ है व इन्हे 03 अंतराष्ट्रीय व 01 राष्ट्रीय पेटेंट प्राप्त हैं.

प्रो. एम. एल. खान को उच्चस्तरीय शोध के लिए पांचवीं बार इस सूची में स्थान मिला है प्रो. खान विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग में प्रोफेसर हैं. इनका शोध कार्य पर्यावरण, जैव विविधता संरक्षण एवं वानिकी से संबंधित है. इनके निर्देशन में मध्य प्रदेश की जैव विविधता से जुड़ी तीन शोध परियोजनाओं पर कार्य चल रहा है। इनका शोध कार्य 180 शोध पत्रों के रूप में प्रकाशित है जिनका 11000 से अधिक बार उद्धरण किया गया है जिसके लिए उन्हें 2021 में भारत के राष्ट्रपति द्वारा विजिटर अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है

प्रो. नवीन कानगो लगातार पांचवीं बार इस सूची में शामिल किये गए हैं. वे माइक्रोबायोलोजी एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष हैं और इनका शोध कार्य सूक्ष्मजैवीय एन्जाइम्स का स्वास्थ्यवर्धक प्री-बायोटिक, बायो-एथेनोल, मुर्गी के पंखों के अपघटन एवं बहुउपयोगी नैनोपार्टिकल्स बनाने पर आधारित है. इनका शोध कार्य 86 शोध पत्रों के रूप में प्रकाशित है जिनका 3100 से अधिक बार उद्धरण किया गया है. कवक और जीवाणुओं पर इन्हे 25 वर्ष से अधिक का शोध का अनुभव है और उन्हें माइकोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ़ इंडिया द्वारा फेलोशिप और मेमोरियल अवाई प्रदान किये गए हैं.


प्रोफ़ेसर ए. के. सिंह की प्रमुख शोध रुचियों में आग्नेय शैल-विज्ञान (Igneous Petrology) और हिमालयी विवर्तनिकी (Himalayan Tectonics) शामिल हैं। उनका शोध महा‌द्वीपीय टकराव, सबडक्शन और ऑब्डक्शन के दौरान महाद्वीपीय एवं महासागरीय क्रस्ट तथा लिथोस्फेरिक मेंटल के भू-गतिकीय विकास (Geodynamic Evolution) को समझने पर केंद्रित है। इसके लिए वे होल-रॉक जियोकेमिस्ट्री, मिनरल केमिस्ट्री, आइसोटोपिक सिग्नेचर तथा U-Pb जियोक्रोनोलॉजी जैसी उन्नत वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग करते हैं। वे क्रोमाइटाइट्स एवं मेंटल पेरिडोटाइट्स में Ni-Cu-PGE की विशेषताओं तथा फेल्सिक, मैफिक और अल्ट्रामैफिक चट्टानों में महत्वपूर्ण खनिजीकरण की प्रक्रियाओं का भी अध्ययन करते हैं।

प्रो. ए. पी. मिश्रा :  विश्वविश्वविद्यालय के केमिस्ट्री विभाग के सेवानिवृत्त वरिष्ठ आचार्य हैं. इनका कार्यक्षेत्र सिंथेटिक और संरचनात्मक अकार्बनिक रसायन विज्ञान, समन्वय रसायन विज्ञान, जैव अकार्बनिक, नैनो सामग्री, अल्ट्रासोनिक्स है. इनका शोध कार्य 60 शोध पत्रों के रूप में प्रकाशित है.

डॉ. वंदना विनायक :  क्रिमिनोलॉजी एवं फोरेंसिक साइंस विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं एवं उनका शोधकार्य डायटम्स और माइक्रोअलगी से जैव ईधन एवं पिगमेंट्स उत्पादन की नैनोटेक्नोलाजी पर केंद्रित हैं. इनका शोध कार्य 80 से अधिक शोध पत्रों के रूप में प्रकाशित है जिनका 3000 से अधिक बार उल्लेख हुआ है.

प्रोफेसर वंदना सोनी :  वर्तमान में प्रोफेसर पद पर कार्यरत हैं। उनका शोध मुख्यतः टार्गेटेड ड्रग डिलीवरी, ब्रेन ड्रग डिलीवरी तथा कॉस्मेटिक प्रोडक्ट डेवलपमेंट पर केंद्रित है। उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए उन्हें वर्ष 2021 में APTI वुमन ऑफ द ईयर अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है। हाल ही में, कंट्रोल्ड रिलीज़ सोसायटी-2025, यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में उनके शोध को सराहा गया तथा 1000 से अधिक प्रविष्टियों में से शीर्ष 55 में उन्होंने स्थान प्राप्त कर विश्ववि‌द्यालय एवं देश का गौरव बढ़ाया है।

डॉ. प्रशांत केशरवानी : फार्मेसी विभाग में सहायक प्रोफेसर हैं और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। वे पहले भारतीय वैज्ञानिक हैं जिन्हें इंटरनेशनल USERN लॉरेट्स-2023 अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। उन्हें भारत सरकार के SERB-DST रामानुजन फेलोशिप से भी सम्मानित किया गया। डॉ. केशरवानी ने 600 से अधिक अंतरराष्ट्रीय शोध-पत्र प्रकाशित किए हैं और 30 से अधिक पुस्तकों का संपादन किया है। उनका प्रमुख शोध क्षेत्र कैंसर उपचार हेतु नैनो-टेक्नोलॉजी आधारित औषधि वितरण प्रणाली है। डॉ. केशरवानी को अमेरिका, मलेशिया और भारत में शिक्षण, शोध एवं औद्योगिक क्षेत्र में 12 से अधिक वर्षों का अनुभव है।

वनस्पति विज्ञान विभाग में सहायक प्राध्यापक डॉ. सोनल माथुर को विश्व के शीर्ष 2% वैज्ञानिकों (2025) में लगातार दूसरी शामिल किया गया है। उनका शोध जलवायु परिवर्तन, पौधों, विशेषकर फसलों में अजैविक तनाव प्रतिक्रियाओं और तनाव न्यूनीकरण हेतु पादप-सूक्ष्मजीव अंतःक्रियाओं पर केंद्रित है। उनके 3,600 से अधिक उद्धरण हैं, जिनमें ह-इंडेक्स 19 और 10-इंडेक्स 23 है।

डॉ. विकास जैन के शोध का क्षेत्र स्तन कैंसर (एडवांस्ड ब्रेस्ट कैंसर) और मेलेनोमा के खिलाफ लक्षित नैनो-चिकित्सा (टार्गेटेड नैनो थेरेप्यूटिक्स) का विकास करना है। उन्होंने ट्रिपल-नेगेटिव स्तन कैंसर (टीएनबीसी) में बेहतर चिकित्सीय परिणामों के लिए दवाओं, जैविक पदार्थों (बायोलॉजिकल्स) और फाइटोकॉन्स्टिट्यूएंट्स (पादप घटकों) को पुनरुद्दे‌शित (रिपर्पज) भी किया है। उनके 77 प्रकाशन (पब्लिकेशंस), 2250 साइटेशन (सिटेशंस) हैं।



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सांसद रजनीश अग्रवाल ने डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर में स्थायी कुलपति की नियुक्ति की मांग उठाई : केंद्रीय शिक्षा मंत्री को लिखा पत्र

सांसद रजनीश अग्रवाल ने डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर में स्थायी कुलपति की नियुक्ति की मांग उठाई : केंद्रीय शिक्षा मंत्री को लिखा पत्र


तीनबत्ती न्यूज: 05 अक्टूबर, 2026

सागर। राज्यसभा सांसद रजनीश अग्रवाल ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री प्रह्लाद जोशी से पत्र भेजकर डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर में स्थायी कुलपति की नियुक्ति प्रक्रिया शीघ्र प्रारंभ कराने का आग्रह किया है। 

उल्लेखनीय है डॉ गौर केंद्रीय विवि सागर में पिछले एक साल से अधिक समय से स्थायी कुलपति की नियुक्ति नहीं हुई है। पिछले हफ्ते प्रो नागेश दुबे को प्रभारी कुलपति बनाया गया है। 

सांसद श्री अग्रवाल ने अपने पत्र में कहा कि विश्वविद्यालय में लंबे समय से स्थायी कुलपति का पद रिक्त होने के कारण विश्वविद्यालय की प्रशासनिक एवं अकादमिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं तथा भविष्य की दृष्टि से बनाई जाने वाली योजनाओं में भी शिथिलता आ रही है।

उन्होंने कहा कि डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय मध्य भारत एवं बुंदेलखंड क्षेत्र के उच्च शिक्षा जगत का एक प्रतिष्ठित केंद्रीय विश्वविद्यालय है। यह संस्थान क्षेत्र के हजारों विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा, शोध एवं नवाचार के अवसर प्रदान करने के साथ-साथ क्षेत्र के शैक्षणिक एवं सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


राज्यसभा सांसद ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री से आग्रह किया कि विश्वविद्यालय में कुलपति चयन की आवश्यक प्रक्रिया शीघ्र प्रारंभ कराने की कृपा की जाए, ताकि विश्वविद्यालय के प्रशासनिक एवं शैक्षणिक कार्य सुचारू रूप से संचालित हो सकें और विद्यार्थियों को इसका समुचित लाभ प्राप्त हो।

श्री अग्रवाल ने कहा कि विश्वविद्यालय जैसे महत्वपूर्ण उच्च शिक्षा संस्थान के दीर्घकालिक विकास, अकादमिक उत्कृष्टता और विद्यार्थियों के हित में स्थायी नेतृत्व का होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय इस विषय पर शीघ्र सकारात्मक पहल करेगा।

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प्रो नागेश दुबे बने डॉ गौर विवि सागर के प्रभारी कुलपति

प्रो नागेश दुबे बने डॉ गौर विवि सागर के प्रभारी कुलपति 

तीनबत्ती न्यूज: 30 सितम्बर, 2026

सागर। डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर में बुधवार शाम प्रशासनिक भवन में प्रो. नागेश दुबे को कुलपति का प्रभार सौंपा गया। विश्वविद्यालय के विजिटर के अनुमोदन के बाद भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा प्रेषित पत्र के अनुपालन में निवर्तमान प्रभारी कुलपति प्रो. वाय. एस. ठाकुर ने प्रो. नागेश दुबे को कुलपति का प्रभार सौंपा।

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प्रो. नागेश दुबे विश्वविद्यालय के प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्त्व विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष हैं। इसके साथ ही वे सामाजिक विज्ञान अध्ययनशाला के अधिष्ठाता का दायित्व भी संभाल रहे हैं। प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्त्व के विशेषज्ञ के रूप में प्रो. दुबे का अकादमिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनके अनेक शोध-पत्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में प्रकाशित हो चुके हैं। उन्होंने विभिन्न विषयों पर पुस्तकों का भी लेखन किया है।


पुष्पगुच्छ भेंटकर किया स्वागत

कुलपति का प्रभार ग्रहण करने के अवसर पर विश्वविद्यालय परिवार के शिक्षकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने प्रो. नागेश दुबे का पुष्पगुच्छ भेंटकर स्वागत एवं अभिनंदन किया तथा उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं।


इस अवसर पर कुलसचिव डॉ. एस. पी. उपाध्याय, संयुक्त कुलसचिव संतोष सोहगौरा, छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. डी. के. नेमा, प्रो. अशोक अहिरवार, प्रो. बी. के. श्रीवास्तव, प्रो. रतनेश दास, प्रो. राजेंद्र यादव, प्रो. आर. के. गंगेले, प्रो. मनविंदर सिंह पाहवा, प्रो. अजीत जायसवाल, उपकुलसचिव सतीश कुमार, डॉ. अनिल तिवारी, डॉ. पंकज तिवारी, डॉ. राकेश सोनी, डॉ. अभिषेक जैन, डॉ. सी.पी. उपाध्याय, डॉ. विवेक जायसवाल, डॉ. नवीन सिंह, डॉ. विवेक तिवारी, डॉ. अनुराग श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।


प्रो. वाय. एस. ठाकुर ने साझा किए कार्यकाल के अनुभव

प्रभार सौंपे जाने के अवसर पर निवर्तमान प्रभारी कुलपति प्रो. वाय. एस. ठाकुर ने अपने कार्यकाल के अनुभव साझा किए। उन्होंने विश्वविद्यालय के शिक्षकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा मिले सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के प्रशासनिक एवं अकादमिक कार्यों में सभी के सहयोग से विभिन्न जिम्मेदारियों का निर्वहन संभव हुआ। उन्होंने विश्वविद्यालय परिवार के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।

प्रो. नागेश दुबे ने कहा- सभी के सहयोग से विश्वविद्यालय के विकास के लिए करेंगे प्रयास


कुलपति का प्रभार मिलने के बाद प्रो. नागेश दुबे ने कहा कि डॉ. हरीसिंह गौर के आशीर्वाद से उन्हें विश्वविद्यालय की सेवा करने का नए दायित्व के रूप में अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की प्रगति और उत्तरोत्तर विकास के लिए वे सभी के सहयोग से हर संभव प्रयास करेंगे। उन्होंने विश्वविद्यालय के शिक्षकों, अधिकारियों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों के सहयोग की अपेक्षा व्यक्त की।

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प्रो. दुबे के कुलपति का प्रभार संभालने के साथ ही विश्वविद्यालय प्रशासन में नई जिम्मेदारी का औपचारिक हस्तांतरण हुआ। विश्वविद्यालय परिवार ने उनके कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं व्यक्त कीं।

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MPPSC: डॉ गौर विवि के वाणिज्य विभाग के 5 शोधार्थियों का सहायक प्राध्यापक पद पर चयन

MPPSC: डॉ गौर विवि के वाणिज्य विभाग के 5 शोधार्थियों का सहायक प्राध्यापक पद पर चयन


तीनबत्ती न्यूज: 23 सितम्बर, 2026

सागर। डॉक्टर हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर के वाणिज्य विभाग के पांच शोधार्थियों का मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सहायक प्राध्यापक (वाणिज्य) परीक्षा-2025 में चयन हुआ है। चयनित शोधार्थियों में गरिमा दोहर, अभिलाषा पटेल, लोकेन्द्र पटेल, पूजा साहू एवं अंगद सिंह मारावी शामिल हैं।

शोधार्थियों के चयन पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. यशवंत सिंह ठाकुर एवं कुलसचिव डॉ. सत्य प्रकाश उपाध्याय ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए सभी चयनित अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं दीं।

इस उपलब्धि के उपलक्ष्य में वाणिज्य विभाग में चयनित शोधार्थियों का सम्मान समारोह आयोजित किया गया। विभागाध्यक्ष प्रो. डी. के. नेमा सहित विभाग के शिक्षकों ने चयनित शोधार्थियों का पुष्पगुच्छ एवं फूलमाला पहनाकर अभिनंदन किया और मिठाई खिलाकर खुशी साझा की।

इस अवसर पर प्रो. मनविन्दर सिंह पाहवा (अधिष्ठाता), डॉ. रूपाली सैनी, डॉ. सुषमा यादव, डॉ. अनिता कुमारी, डॉ. शालिनी चौईथरानी, डॉ. पुष्पा सूर्यवंशी, डॉ. भावना रेवाडीकर एवं डॉ. गौतम प्रसाद उपस्थित रहे।

विभागाध्यक्ष प्रो. डी. के. नेमा ने सभी चयनित शोधार्थियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

SEO Title: सागर विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभाग के 5 शोधार्थियों का सहायक प्राध्यापक पद पर चयन

Search Description: डॉक्टर हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर के वाणिज्य विभाग के पांच शोधार्थियों का MPPSC सहायक प्राध्यापक वाणिज्य परीक्षा-2025 में चयन हुआ।

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सागर विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभाग के लिए गौरव का क्षण! 🎓

डॉक्टर हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभाग के 5 शोधार्थियों—गरिमा दोहर, अभिलाषा पटेल, लोकेन्द्र पटेल, पूजा साहू एवं अंगद सिंह मारावी का चयन मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की सहायक प्राध्यापक (वाणिज्य) परीक्षा-2025 में हुआ है।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. यशवंत सिंह ठाकुर एवं कुलसचिव डॉ. सत्य प्रकाश उपाध्याय ने चयनित शोधार्थियों को शुभकामनाएं दीं। विभाग में शिक्षकों ने पुष्पगुच्छ, फूलमाला एवं मिठाई खिलाकर उनका अभिनंदन किया।

चयनित शोधार्थियों को हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं।

पूरी खबर पढ़ें — तीनबत्ती न्यूज.कॉम

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सीएसआईआर-यूजीसी नेट जून 2026 में डॉ. हरिसिंह गौर विवि के 17 विद्यार्थियों का चयन

सीएसआईआर-यूजीसी नेट जून-2026 में डॉ गौर विवि सागर के अनुप्रयुक्त भूविज्ञान विभाग के 17 विद्यार्थियों की शानदार सफलता

तीनबत्ती न्यूज: 15 सितम्बर, 2026

सागर। डॉक्टर हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर के अनुप्रयुक्त भूविज्ञान विभाग के विद्यार्थियों ने संयुक्त सीएसआईआर-यूजीसी नेट जून-2026 परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए विश्वविद्यालय एवं विभाग का नाम रोशन किया है। परीक्षा परिणाम में विभाग के कुल 17 विद्यार्थियों का विभिन्न श्रेणियों में चयन हुआ है।

जेआरएफ श्रेणी में तीन विद्यार्थियों ने हासिल की सफलता

जेआरएफ श्रेणी में सूर्यांचल सिंह, चांदनी चंदा एवं साक्षी पंजवानी ने सफलता प्राप्त की है। वहीं नेट-एलएस श्रेणी में उत्कर्ष चौबे, उज्जवल शुक्ला, राकेश काले एवं खुशी गुप्ता चयनित हुए हैं।

इसके अलावा नेट-पीएचडी पात्रता श्रेणी में विभाग के नीरज दुबे, प्रियांशु कुशवाहा, विवेकराज पटेल, करुणा राय, धृति मिश्रा, एलन जोसेफ, सोनम दीक्षित, निशांत सिन्हा, हर्ष लोधी एवं यशकुमार रजक ने सफलता हासिल की है।

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कुलपति ने दी बधाई

विद्यार्थियों की इस उपलब्धि पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वाई. एस. ठाकुर ने सभी सफल विद्यार्थियों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि यह सफलता विद्यार्थियों की मेहनत, लगन और शिक्षकों के मार्गदर्शन का परिणाम है।

विभागाध्यक्ष प्रो. ए. के. सिंह ने भी चयनित विद्यार्थियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित सीएसआईआर-यूजीसी नेट परीक्षा में विभाग के विद्यार्थियों का उत्कृष्ट प्रदर्शन विभाग की शैक्षणिक एवं शोधपरक गुणवत्ता को दर्शाता है।

उन्होंने विद्यार्थियों को भविष्य में भी इसी प्रकार उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए विश्वविद्यालय एवं विभाग का नाम रोशन करने के लिए प्रेरित किया। विभाग के समस्त शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने सफल अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल अकादमिक एवं शोध भविष्य की कामना की।।

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डॉ. गौर विश्वविद्यालय और जीवाजी विश्वविद्यालय के बीच होगा शैक्षणिक समझौता • जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलगुरु पद का कार्यभार संभालने के बाद पहली बार सागर पहुंचे प्रो. दिवाकर सिंह राजपूत, डॉ. गौर को किया नमन

डॉ. गौर विश्वविद्यालय और जीवाजी विश्वविद्यालय के बीच होगा शैक्षणिक समझौता

• जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलगुरु पद का कार्यभार संभालने के बाद पहली बार सागर पहुंचे प्रो. दिवाकर सिंह राजपूत, डॉ. गौर को किया नमन


तीनबत्ती न्यूज: 14 सितम्बर, 2026

सागर। डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर के समाजशास्त्र एवं समाजकार्य विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष, डीन एवं अकादमिक अफेयर्स के निदेशक रहे प्रो. दिवाकर सिंह राजपूत ने जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर के कुलगुरु पद का कार्यभार ग्रहण करने के बाद पहली बार सागर आगमन किया। इस दौरान उन्होंने गौर समाधि पहुंचकर डॉ. हरिसिंह गौर को श्रद्धासुमन अर्पित किए। उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर स्थित डॉ. गौर की प्रतिमा पर भी माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया।

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विश्वविद्यालय की प्रभारी कुलपति प्रो. वर्षा शर्मा ने भी डॉ. गौर की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए। इसके बाद विश्वविद्यालय में प्रभारी कुलपति की अध्यक्षता में आयोजित संवाद कार्यक्रम में प्रो. दिवाकर सिंह राजपूत का शाल, श्रीफल एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया।

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डॉ. गौर की प्रेरणा से मिली उपलब्धियां

इस अवसर पर प्रभारी कुलपति प्रो. वर्षा शर्मा ने प्रो. राजपूत को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं देते हुए उनके सफल कार्यकाल की कामना की। उन्होंने कहा कि प्रो. राजपूत का जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलगुरु पद पर पहुंचना डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय के लिए गौरव और प्रसन्नता की बात है।

उन्होंने प्रो. राजपूत के मिलनसार एवं सहज व्यक्तित्व की सराहना करते हुए कहा कि उनकी यह उपलब्धि डॉ. गौर की प्रेरणा और आशीर्वाद का परिणाम है। उन्होंने दोनों विश्वविद्यालयों के बीच परस्पर संवाद, सहयोग और अकादमिक संबंधों को मजबूत करने की बात कही।



"मैं आज जो कुछ हूं, डॉ. गौर के कारण हूं"

प्रो. दिवाकर सिंह राजपूत ने विश्वविद्यालय की प्रभारी कुलपति सहित सभी अधिकारियों एवं शिक्षकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वे आज जो कुछ भी हैं, उसमें डॉ. हरिसिंह गौर का महत्वपूर्ण योगदान है। डॉ. गौर की प्रेरणा से उन्होंने जीवन में अपने लक्ष्यों को हासिल किया है।उन्होंने कहा कि डॉ. गौर को स्मरण करने से कठिन से कठिन रास्ता भी आसान हो जाता है। डॉ. गौर एक प्रेरक पुंज के रूप में हमेशा हमारे सामने विद्यमान हैं। इसी भावना के साथ उन्होंने जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलगुरु के रूप में पदभार ग्रहण करने के बाद सबसे पहले अपने कुलगुरु कक्ष में डॉ. गौर की प्रतिमा स्थापित करवाई। प्रो. राजपूत ने कहा कि जीवाजी विश्वविद्यालय में भी डॉ. हरिसिंह गौर को श्रद्धा के साथ याद किया जाता है। उनके द्वारा किए गए महान कार्य पूरी दुनिया के लिए प्रेरणादायी हैं।


दोनों विश्वविद्यालयों के बीच होगा शैक्षणिक समझौता

प्रो. राजपूत ने कहा कि उनकी उपलब्धियों की यात्रा में डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय के सभी सहयोगियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है, जिसके लिए वे सदैव आभारी रहेंगे। उन्होंने कहा कि कुलगुरु के रूप में नई जिम्मेदारी संभालने के बाद भी डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय से उनका संवाद, संपर्क और सहयोग निरंतर बना रहेगा।

उन्होंने बताया कि शीघ्र ही डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय और जीवाजी विश्वविद्यालय के बीच शैक्षणिक समझौता (एमओयू) किया जाएगा। इससे दोनों विश्वविद्यालयों के बीच अकादमिक गतिविधियों के साथ-साथ प्रशासनिक स्तर पर भी सहयोग और संवाद को बढ़ावा मिलेगा। दोनों संस्थानों के शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी इससे लाभान्वित हो सकेंगे।



गौर अध्ययन केंद्र और तीनबत्ती पहुंचकर भी किया नमन

सागर प्रवास के दौरान प्रो. राजपूत ने शहर के तीनबत्ती स्थित डॉ. हरिसिंह गौर की प्रतिमा पर भी पुष्पांजलि अर्पित की। इसके अलावा उन्होंने गौर अध्ययन केंद्र पहुंचकर भी डॉ. गौर को श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस दौरान प्रभारी कुलपति प्रो. वर्षा शर्मा, प्रो. आशीष वर्मा और प्रो. राजेंद्र यादव ने भी पुष्प अर्पित किए।

संवाद कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. एस.पी. उपाध्याय, संकाय मामलों के निदेशक प्रो. अजीत जायसवाल, प्रो. अनिल जैन, प्रो. यू.के. पाटिल, प्रो. नागेश दुबे, प्रो. रश्मि सिंह, प्रो. अष्मिता गजभिये, प्रो. राजेंद्र यादव, प्रो. एम.एस. पाहवा, उपकुलसचिव सतीश कुमार, दीपक शाक्य, डॉ. पंकज तिवारी, राहुल गिरी गोस्वामी, डॉ. मोहन टी.ए., डॉ. विवेक जायसवाल, डॉ. रूपेंद्र चौरसिया, सचिन सिंह गौतम सहित विश्वविद्यालय के अनेक शिक्षक एवं अधिकारी उपस्थित रहे। उपस्थित शिक्षकों एवं अधिकारियों ने प्रो. राजपूत को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं देते हुए उनके सफल कार्यकाल की कामना की।

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सागर में 13 से 18 नवंबर तक अंतर विश्वविद्यालय कबड्डी प्रतियोगिता, 150 से अधिक विश्वविद्यालय होंगे शामिल

सागर में 13 से 18 नवंबर तक होगा पश्चिम क्षेत्रीय अंतर विश्वविद्यालय कबड्डी आयोजन

• 150 से अधिक विश्वविद्यालयों की टीमें लेंगी हिस्सा: करीब 2000 खिलाड़ी और खेल अधिकारी पहुंचेंगे सागर


तीनबत्ती न्यूज: 11 सितम्बर, 2026

सागर। डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर को भारतीय विश्वविद्यालय संघ (AIU), नई दिल्ली की पश्चिम क्षेत्रीय अंतर विश्वविद्यालय कबड्डी (पुरुष) प्रतियोगिता 2026-27 के आयोजन की जिम्मेदारी मिली है। प्रतियोगिता का आयोजन 13 से 18 नवंबर 2026 तक विश्वविद्यालय से संबद्ध बी.टी.आई.आर.टी. महाविद्यालय के सिरोंजा स्थित परिसर में किया जाएगा।


प्रतियोगिता की तैयारियों और आयोजन की रूपरेखा को लेकर विश्वविद्यालय में प्रेस वार्ता आयोजित की गई। इसमें कुलपति प्रो. वाय.एस. ठाकुर, शारीरिक शिक्षा निदेशक डॉ. विवेक साठे, बी.टी.ई. समूह के मार्गदर्शक प्रो. सुबोध जैन, डीसीडीसी प्रो. नेत्रपाल सिंह, बी.टी.आई.आर.टी. के निदेशक डॉ. सत्येन्द्र जैन, बी.टी.आई.ई. के निदेशक डॉ. संदीप जैन, महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. राजू टंडन एवं विश्वविद्यालय जनसंपर्क अधिकारी डॉ. विवेक जायसवाल मौजूद रहे।

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देशज खेलों को बढ़ावा देना जरूरी : कुलपति

मीडिया को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. वाय.एस. ठाकुर ने कहा कि विश्वविद्यालय में लगातार अंतर विश्वविद्यालयी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है। इससे पहले हैंडबॉल (पुरुष) प्रतियोगिता आयोजित की गई थी और हाल ही में युवा महोत्सव का भी आयोजन हुआ।

उन्होंने कहा कि इस वर्ष भारतीय विश्वविद्यालय संघ, नई दिल्ली ने विश्वविद्यालय को कबड्डी (पुरुष) प्रतियोगिता आयोजित करने की जिम्मेदारी सौंपी है। शारीरिक शिक्षा विभाग के माध्यम से यह आयोजन बी.टी.आई.आर.टी. महाविद्यालय के सिरोंजा परिसर में किया जाएगा। कुलपति ने कहा कि खेल से मन और तन दोनों स्वस्थ रहते हैं। युवाओं में खेल भावना को प्रोत्साहित करना और देशज खेलों के प्रति रुचि बढ़ाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि इसी अंचल से क्रांति गौड़ जैसी खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का परिचय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दे रही हैं। ऐसे आयोजनों से युवाओं को अपनी प्रतिभा और कौशल विकसित करने का अवसर मिलेगा।


पांच राज्यों के 150 से अधिक विश्वविद्यालयों की भागीदारी

शारीरिक शिक्षा निदेशक डॉ. विवेक साठे ने बताया कि पश्चिम क्षेत्रीय अंतर विश्वविद्यालय कबड्डी (पुरुष) प्रतियोगिता में मध्यप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान और गोवा राज्यों के लगभग 150 से अधिक विश्वविद्यालयों की टीमें भाग लेंगी।

उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता में विभिन्न विश्वविद्यालयों से करीब 2000 खिलाड़ी एवं खेल अधिकारी सागर पहुंचेंगे। इतनी बड़ी संख्या में खिलाड़ियों और खेल अधिकारियों के आगमन से सागर की खेल गतिविधियों को नई गति मिलेगी तथा स्थानीय युवाओं और खिलाड़ियों में कबड्डी के प्रति उत्साह बढ़ेगा।


नॉकआउट और लीग पद्धति से होगी प्रतियोगिता

डॉ. साठे ने बताया कि प्रतियोगिता का आयोजन अखिल भारतीय विश्वविद्यालय संघ के निर्धारित खेल नियमों के अनुसार नॉकआउट एवं लीग पद्धति से किया जाएगा। प्रतिभागी टीमों को चार पूल—A, B, C और D में विभाजित किया जाएगा।

प्रत्येक पूल में विभिन्न चरणों में बेहतर प्रदर्शन करने वाली टीमें अगले दौर में प्रवेश करेंगी। प्रतियोगिता के मैचों का निर्णय कबड्डी के आधिकारिक खेल संघ एमेच्योर कबड्डी फेडरेशन ऑफ इंडिया के निर्णायकों द्वारा किया जाएगा।


खिलाड़ियों के लिए व्यापक सुविधाओं की तैयारी


बी.टी.आई.आर.टी. महाविद्यालय के निदेशक डॉ. सत्येन्द्र जैन ने बताया कि प्रतियोगिता का आयोजन वृहद स्तर पर किया जाएगा। विश्वविद्यालय के मार्गदर्शन में खिलाड़ियों के लिए खेल, आवास और अन्य आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था की जा रही है।

उन्होंने कहा कि यह आयोजन संस्थान के लिए गौरव का अवसर है। प्रतियोगिता से विद्यार्थियों और शहरवासियों में खेलों को लेकर नई ऊर्जा का संचार होगा।


विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा के अनुरूप होगा आयोजन

महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. राजू टंडन ने प्रतियोगिता के प्रस्ताव और स्वीकृति की जानकारी देते हुए कहा कि महाविद्यालय विश्वविद्यालय से संबद्ध होने के नाते विश्वविद्यालय की एक इकाई की तरह कार्य करता है। विश्वविद्यालय के निर्देशन और मार्गदर्शन में इतनी बड़ी प्रतियोगिता आयोजित करने का अवसर मिलना गौरव की बात है।

उन्होंने कहा कि महाविद्यालय विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा और गरिमा के अनुरूप प्रतियोगिता के सफल आयोजन के लिए पूरी तैयारी करेगा।

प्रेस वार्ता का संचालन विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. विवेक जायसवाल ने किया। आभार डॉ. राजू टंडन ने व्यक्त किया। इस अवसर पर सागर शहर के विभिन्न मीडिया समूहों के पत्रकारों के अलावा विश्वविद्यालय के मुख्य सुरक्षा अधिकारी प्रो. राजेन्द्र यादव, डॉ. राकेश सोनी, डॉ. संजय शर्मा, डॉ. सुमन पटेल और महेंद्र बाथम सहित अन्य उपस्थित रहे।

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डॉ गौर विवि - आईजीआरएमएस भोपाल के बीच एमओयू : शोध और विद्यार्थियों के लिए खुलेंगे नए अवसर

डॉ गौर विवि - आईजीआरएमएस भोपाल के बीच एमओयू :  शोध और विद्यार्थियों के लिए खुलेंगे नए अवसर


तीनबत्ती न्यूज: 24 अगस्त, 2026

सागर। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की गरिमामयी उपस्थिति में सागर स्थित डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय (आईजीआरएमएस), भोपाल के बीच महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।

यह एमओयू अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान, भोपाल द्वारा आयोजित “समृद्ध मध्यप्रदेश के लिए केंद्र पोषित संस्थानों का योगदान – एक संस्थान, एक वादा” कॉन्क्लेव के दौरान हुआ। कार्यक्रम का आयोजन भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे हॉल, इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में किया गया।

एमओयू का आदान-प्रदान

डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय की ओर से कुलपति प्रो. वाय. एस. ठाकुर एवं प्रो. अजीत जायसवाल, निदेशक (संकाय कार्य) एवं अध्यक्ष, मानव विज्ञान विभाग तथा आईजीआरएमएस की ओर से निदेशक प्रो. अमिताभ पांडेय ने किया।

इस समझौते के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा, मानव विज्ञान और संस्कृति के विभिन्न आयामों पर संयुक्त शोध एवं अकादमिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। दोनों संस्थान ज्ञान और संसाधनों के आदान-प्रदान के साथ शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों को नई शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य करेंगे।

एमओयू के तहत विद्यार्थियों के लिए इंटर्नशिप, फील्डवर्क और प्रशिक्षण के नए अवसर भी विकसित होंगे। इससे विद्यार्थियों को संग्रहालय, मानव विज्ञान, संस्कृति और भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े विषयों का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

समृद्ध मध्यप्रदेश @2047 के लक्ष्य में सहयोग

इस साझेदारी का उद्देश्य मध्यप्रदेश के विकास में केंद्र पोषित संस्थानों की भूमिका को मजबूत करना और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है। दोनों संस्थान मिलकर “समृद्ध मध्यप्रदेश @2047” के लक्ष्य को साकार करने में योगदान देंगे।

कॉन्क्लेव में प्रदेश के विकास में केंद्र पोषित संस्थानों की भूमिका, नवाचार, शोध और संस्थागत सहयोग जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श किया गया।

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एससी प्रमाण पत्र पर नियुक्ति के आरोप में डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के कॉमर्स विभाग के डीन निलंबित

एससी प्रमाण पत्र पर नियुक्ति के आरोप में डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के कॉमर्स विभाग के डीन निलंबित

फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की रिपोर्ट के बाद कार्रवाई, विश्वविद्यालय ने शुरू की अनुशासनात्मक कार्यवाही



तीनबत्ती न्यूज: 08 अगस्त, 2026

सागर। डॉ. हरीसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय, सागर में अनुसूचित जाति (SC) प्रमाण पत्र के आधार पर नियुक्ति प्राप्त करने के आरोपों से घिरे बिजनेस मैनेजमेंट विभाग के प्रोफेसर डॉ. श्री भागवत (Shree Bhagwat) को विश्वविद्यालय प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। डॉ. भगवान वर्तमान में स्कूल ऑफ कॉमर्स एंड मैनेजमेंट के डीन के पद पर कार्यरत थे।

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विश्वविद्यालय द्वारा 7 अगस्त 2026 को जारी कार्यालय आदेश के अनुसार, डॉ. भागवत की प्रारंभिक नियुक्ति 16 अप्रैल 2005 को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित पद पर लेक्चरर के रूप में हुई थी। उनके द्वारा प्रस्तुत एससी प्रमाण पत्र को लेकर शिकायतों के बाद विश्वविद्यालय ने फैक्ट फाइंडिंग कमेटी गठित की थी।

कमेटी ने बताई ये प्रारंभिक बातें

विश्वविद्यालय के आदेश में कहा गया है कि 30 जुलाई 2026 को गठित फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने 5 अगस्त को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। कमेटी के रिकॉर्ड परीक्षण में प्रथम दृष्टया पाया गया कि—

  • डॉ. भागवत की नियुक्ति अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित पद पर हुई थी।
  • रिकॉर्ड में सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी वैध स्थायी एससी प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं मिला।
  • उनके द्वारा प्रस्तुत प्रमाण पत्र का संबंधित जारीकर्ता प्राधिकारी के रिकॉर्ड से सत्यापन नहीं हो सका।
  • संबंधित प्राधिकारियों से प्राप्त सत्यापन रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया डॉ. भागवत के उत्तर प्रदेश की बिंद समुदाय, जिसे वहां अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) श्रेणी में बताया गया है, से संबंधित होने की बात सामने आई।
  • कमेटी ने प्रथम दृष्टया माना कि एससी आरक्षण के आधार पर नियुक्ति अमान्य अथवा गलत जाति दावे पर प्राप्त किए जाने की आशंका है।

अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश

फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने मामले में अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करने की सिफारिश की थी। साथ ही, यदि सक्षम प्राधिकारी यह संतुष्ट होता है कि नियुक्ति गलत जाति दावे के आधार पर प्राप्त की गई थी तो अनुशासनात्मक कार्यवाही लंबित रहने तक निलंबन सहित आवश्यक कार्रवाई की अनुशंसा की गई।

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विश्वविद्यालय प्रशासन ने रिपोर्ट पर विचार करने के बाद आरोपों को गंभीर और कर्मचारी की एससी आरक्षित पद पर नियुक्ति की पात्रता से जुड़ा हुआ माना। आदेश में यह भी कहा गया कि डॉ. भगवान के डीन पद पर बने रहने से अनुशासनात्मक जांच प्रभावित होने की आशंका हो सकती है।

जांच पूरी होने तक निलंबन

विश्वविद्यालय ने केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1965 के तहत डॉ. श्री भागवत को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर रहेगा और वे सक्षम प्राधिकारी की लिखित अनुमति के बिना मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे।

उन्हें नियमानुसार निर्वाह भत्ता और अन्य अनुमन्य भत्ते मिलेंगे। साथ ही, बिना पूर्व अनुमति विश्वविद्यालय के किसी कार्यालय या प्रशासनिक अनुभाग में प्रवेश पर भी रोक रहेगी, सिवाय अनुशासनात्मक कार्यवाही के संबंध में आवश्यकता होने पर।

अंतिम निर्णय अनुशासनात्मक जांच के बाद

विश्वविद्यालय के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह कार्रवाई प्रारंभिक (prima facie) निष्कर्षों के आधार पर की गई है। मामले में अनुशासनात्मक कार्यवाही पूरी होने के बाद अंतिम निर्णय विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद (Executive Council) द्वारा लिया जाएगा।

​प्रो. भागवत का पक्ष:

​इस कार्रवाई पर अपना पक्ष रखते हुए डॉ. भागवत ने कहा, "मैं लगातार विवि में हो रही गड़बड़ियों और गलतियों के खिलाफ बोलता रहा हूँ। इसीलिए बदले की भावना के तहत यह कार्रवाई की गई है। इस द्वेषपूर्ण कार्रवाई में केवल 8 दिनों के भीतर सारी प्रक्रिया पूरी कर ली गई और मेरा पक्ष तक नहीं सुना गया।"


​अन्य नियुक्तियों की शिकायतों पर उठते सवाल

​इस निलंबन के बाद विवि प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। आमतौर पर महीनों और सालों तक फाइलों को दबाकर रखने वाला प्रशासन इस मामले में मात्र 8 दिनों के भीतर जांच से लेकर निलंबन तक की प्रक्रिया पूरी करने में 'एक्सप्रेस रफ्तार' से चला।



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पीजीटी व्याख्याता परीक्षा-2026 में विश्वविद्यालय के शोधार्थी अजय विश्वकर्मा का चयन, प्रदेश में हासिल की छठी रैंक

पीजीटी व्याख्याता परीक्षा-2026 में विश्वविद्यालय के शोधार्थी अजय विश्वकर्मा का चयन, प्रदेश में हासिल की छठी रैंक


तीनबत्ती न्यूज: 13 जुलाई, 2026

सागर। डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग के शोधार्थी अजय कुमार विश्वकर्मा ने उत्तर प्रदेश शिक्षा चयन आयोग की पीजीटी व्याख्याता परीक्षा-2026 में प्रदेश स्तर पर छठा स्थान प्राप्त कर विश्वविद्यालय और विभाग का नाम रोशन किया है।

अजय की इस उपलब्धि पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वाई.एस. ठाकुर ने उन्हें बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। वहीं समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. कालीनाथ झा ने इसे विभाग के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि अजय की सफलता अन्य शोधार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी। उन्होंने दुष्यंत कुमार की प्रसिद्ध पंक्तियां उद्धृत करते हुए कहा, "कौन कहता है आसमान में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो।"


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वर्तमान में अजय कुमार विश्वकर्मा थारू जनजातीय समुदाय पर शोध कार्य कर रहे हैं। इससे पहले भी वे राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की विभिन्न चयन प्रक्रियाओं में साक्षात्कार तक पहुंच चुके हैं।

अपनी सफलता का श्रेय अजय ने अपने माता-पिता, गुरुजनों के मार्गदर्शन और मित्रों के सहयोग को दिया। उनकी इस उपलब्धि पर इतिहास विभाग के आशु अहिरवार, भूगोल विभाग के मनीष गुप्ता, शिक्षा विभाग के शशांक नागदेव सहित पूजा लोधी, नेहा मालवीय, राकेश गोयल, निखिल शुक्ला एवं अन्य शोधार्थियों ने बधाई और शुभकामनाएं दीं।

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