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प्रो नागेश दुबे बने डॉ गौर विवि सागर के प्रभारी कुलपति

प्रो नागेश दुबे बने डॉ गौर विवि सागर के प्रभारी कुलपति 

तीनबत्ती न्यूज: 30 सितम्बर, 2026

सागर। डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर में बुधवार शाम प्रशासनिक भवन में प्रो. नागेश दुबे को कुलपति का प्रभार सौंपा गया। विश्वविद्यालय के विजिटर के अनुमोदन के बाद भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा प्रेषित पत्र के अनुपालन में निवर्तमान प्रभारी कुलपति प्रो. वाय. एस. ठाकुर ने प्रो. नागेश दुबे को कुलपति का प्रभार सौंपा।

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प्रो. नागेश दुबे विश्वविद्यालय के प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्त्व विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष हैं। इसके साथ ही वे सामाजिक विज्ञान अध्ययनशाला के अधिष्ठाता का दायित्व भी संभाल रहे हैं। प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्त्व के विशेषज्ञ के रूप में प्रो. दुबे का अकादमिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनके अनेक शोध-पत्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में प्रकाशित हो चुके हैं। उन्होंने विभिन्न विषयों पर पुस्तकों का भी लेखन किया है।


पुष्पगुच्छ भेंटकर किया स्वागत

कुलपति का प्रभार ग्रहण करने के अवसर पर विश्वविद्यालय परिवार के शिक्षकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने प्रो. नागेश दुबे का पुष्पगुच्छ भेंटकर स्वागत एवं अभिनंदन किया तथा उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं।


इस अवसर पर कुलसचिव डॉ. एस. पी. उपाध्याय, संयुक्त कुलसचिव संतोष सोहगौरा, छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. डी. के. नेमा, प्रो. अशोक अहिरवार, प्रो. बी. के. श्रीवास्तव, प्रो. रतनेश दास, प्रो. राजेंद्र यादव, प्रो. आर. के. गंगेले, प्रो. मनविंदर सिंह पाहवा, प्रो. अजीत जायसवाल, उपकुलसचिव सतीश कुमार, डॉ. अनिल तिवारी, डॉ. पंकज तिवारी, डॉ. राकेश सोनी, डॉ. अभिषेक जैन, डॉ. सी.पी. उपाध्याय, डॉ. विवेक जायसवाल, डॉ. नवीन सिंह, डॉ. विवेक तिवारी, डॉ. अनुराग श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।


प्रो. वाय. एस. ठाकुर ने साझा किए कार्यकाल के अनुभव

प्रभार सौंपे जाने के अवसर पर निवर्तमान प्रभारी कुलपति प्रो. वाय. एस. ठाकुर ने अपने कार्यकाल के अनुभव साझा किए। उन्होंने विश्वविद्यालय के शिक्षकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा मिले सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के प्रशासनिक एवं अकादमिक कार्यों में सभी के सहयोग से विभिन्न जिम्मेदारियों का निर्वहन संभव हुआ। उन्होंने विश्वविद्यालय परिवार के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।

प्रो. नागेश दुबे ने कहा- सभी के सहयोग से विश्वविद्यालय के विकास के लिए करेंगे प्रयास


कुलपति का प्रभार मिलने के बाद प्रो. नागेश दुबे ने कहा कि डॉ. हरीसिंह गौर के आशीर्वाद से उन्हें विश्वविद्यालय की सेवा करने का नए दायित्व के रूप में अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की प्रगति और उत्तरोत्तर विकास के लिए वे सभी के सहयोग से हर संभव प्रयास करेंगे। उन्होंने विश्वविद्यालय के शिक्षकों, अधिकारियों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों के सहयोग की अपेक्षा व्यक्त की।

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प्रो. दुबे के कुलपति का प्रभार संभालने के साथ ही विश्वविद्यालय प्रशासन में नई जिम्मेदारी का औपचारिक हस्तांतरण हुआ। विश्वविद्यालय परिवार ने उनके कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं व्यक्त कीं।

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MPPSC: डॉ गौर विवि के वाणिज्य विभाग के 5 शोधार्थियों का सहायक प्राध्यापक पद पर चयन

MPPSC: डॉ गौर विवि के वाणिज्य विभाग के 5 शोधार्थियों का सहायक प्राध्यापक पद पर चयन


तीनबत्ती न्यूज: 23 सितम्बर, 2026

सागर। डॉक्टर हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर के वाणिज्य विभाग के पांच शोधार्थियों का मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सहायक प्राध्यापक (वाणिज्य) परीक्षा-2025 में चयन हुआ है। चयनित शोधार्थियों में गरिमा दोहर, अभिलाषा पटेल, लोकेन्द्र पटेल, पूजा साहू एवं अंगद सिंह मारावी शामिल हैं।

शोधार्थियों के चयन पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. यशवंत सिंह ठाकुर एवं कुलसचिव डॉ. सत्य प्रकाश उपाध्याय ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए सभी चयनित अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं दीं।

इस उपलब्धि के उपलक्ष्य में वाणिज्य विभाग में चयनित शोधार्थियों का सम्मान समारोह आयोजित किया गया। विभागाध्यक्ष प्रो. डी. के. नेमा सहित विभाग के शिक्षकों ने चयनित शोधार्थियों का पुष्पगुच्छ एवं फूलमाला पहनाकर अभिनंदन किया और मिठाई खिलाकर खुशी साझा की।

इस अवसर पर प्रो. मनविन्दर सिंह पाहवा (अधिष्ठाता), डॉ. रूपाली सैनी, डॉ. सुषमा यादव, डॉ. अनिता कुमारी, डॉ. शालिनी चौईथरानी, डॉ. पुष्पा सूर्यवंशी, डॉ. भावना रेवाडीकर एवं डॉ. गौतम प्रसाद उपस्थित रहे।

विभागाध्यक्ष प्रो. डी. के. नेमा ने सभी चयनित शोधार्थियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

SEO Title: सागर विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभाग के 5 शोधार्थियों का सहायक प्राध्यापक पद पर चयन

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सागर विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभाग के लिए गौरव का क्षण! 🎓

डॉक्टर हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभाग के 5 शोधार्थियों—गरिमा दोहर, अभिलाषा पटेल, लोकेन्द्र पटेल, पूजा साहू एवं अंगद सिंह मारावी का चयन मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की सहायक प्राध्यापक (वाणिज्य) परीक्षा-2025 में हुआ है।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. यशवंत सिंह ठाकुर एवं कुलसचिव डॉ. सत्य प्रकाश उपाध्याय ने चयनित शोधार्थियों को शुभकामनाएं दीं। विभाग में शिक्षकों ने पुष्पगुच्छ, फूलमाला एवं मिठाई खिलाकर उनका अभिनंदन किया।

चयनित शोधार्थियों को हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं।

पूरी खबर पढ़ें — तीनबत्ती न्यूज.कॉम

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सीएसआईआर-यूजीसी नेट जून 2026 में डॉ. हरिसिंह गौर विवि के 17 विद्यार्थियों का चयन

सीएसआईआर-यूजीसी नेट जून-2026 में डॉ गौर विवि सागर के अनुप्रयुक्त भूविज्ञान विभाग के 17 विद्यार्थियों की शानदार सफलता

तीनबत्ती न्यूज: 15 सितम्बर, 2026

सागर। डॉक्टर हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर के अनुप्रयुक्त भूविज्ञान विभाग के विद्यार्थियों ने संयुक्त सीएसआईआर-यूजीसी नेट जून-2026 परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए विश्वविद्यालय एवं विभाग का नाम रोशन किया है। परीक्षा परिणाम में विभाग के कुल 17 विद्यार्थियों का विभिन्न श्रेणियों में चयन हुआ है।

जेआरएफ श्रेणी में तीन विद्यार्थियों ने हासिल की सफलता

जेआरएफ श्रेणी में सूर्यांचल सिंह, चांदनी चंदा एवं साक्षी पंजवानी ने सफलता प्राप्त की है। वहीं नेट-एलएस श्रेणी में उत्कर्ष चौबे, उज्जवल शुक्ला, राकेश काले एवं खुशी गुप्ता चयनित हुए हैं।

इसके अलावा नेट-पीएचडी पात्रता श्रेणी में विभाग के नीरज दुबे, प्रियांशु कुशवाहा, विवेकराज पटेल, करुणा राय, धृति मिश्रा, एलन जोसेफ, सोनम दीक्षित, निशांत सिन्हा, हर्ष लोधी एवं यशकुमार रजक ने सफलता हासिल की है।

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कुलपति ने दी बधाई

विद्यार्थियों की इस उपलब्धि पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वाई. एस. ठाकुर ने सभी सफल विद्यार्थियों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि यह सफलता विद्यार्थियों की मेहनत, लगन और शिक्षकों के मार्गदर्शन का परिणाम है।

विभागाध्यक्ष प्रो. ए. के. सिंह ने भी चयनित विद्यार्थियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित सीएसआईआर-यूजीसी नेट परीक्षा में विभाग के विद्यार्थियों का उत्कृष्ट प्रदर्शन विभाग की शैक्षणिक एवं शोधपरक गुणवत्ता को दर्शाता है।

उन्होंने विद्यार्थियों को भविष्य में भी इसी प्रकार उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए विश्वविद्यालय एवं विभाग का नाम रोशन करने के लिए प्रेरित किया। विभाग के समस्त शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने सफल अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल अकादमिक एवं शोध भविष्य की कामना की।।

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डॉ गौर विवि - आईजीआरएमएस भोपाल के बीच एमओयू : शोध और विद्यार्थियों के लिए खुलेंगे नए अवसर

डॉ गौर विवि - आईजीआरएमएस भोपाल के बीच एमओयू :  शोध और विद्यार्थियों के लिए खुलेंगे नए अवसर


तीनबत्ती न्यूज: 24 अगस्त, 2026

सागर। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की गरिमामयी उपस्थिति में सागर स्थित डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय (आईजीआरएमएस), भोपाल के बीच महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।

यह एमओयू अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान, भोपाल द्वारा आयोजित “समृद्ध मध्यप्रदेश के लिए केंद्र पोषित संस्थानों का योगदान – एक संस्थान, एक वादा” कॉन्क्लेव के दौरान हुआ। कार्यक्रम का आयोजन भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे हॉल, इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में किया गया।

एमओयू का आदान-प्रदान

डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय की ओर से कुलपति प्रो. वाय. एस. ठाकुर एवं प्रो. अजीत जायसवाल, निदेशक (संकाय कार्य) एवं अध्यक्ष, मानव विज्ञान विभाग तथा आईजीआरएमएस की ओर से निदेशक प्रो. अमिताभ पांडेय ने किया।

इस समझौते के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा, मानव विज्ञान और संस्कृति के विभिन्न आयामों पर संयुक्त शोध एवं अकादमिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। दोनों संस्थान ज्ञान और संसाधनों के आदान-प्रदान के साथ शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों को नई शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य करेंगे।

एमओयू के तहत विद्यार्थियों के लिए इंटर्नशिप, फील्डवर्क और प्रशिक्षण के नए अवसर भी विकसित होंगे। इससे विद्यार्थियों को संग्रहालय, मानव विज्ञान, संस्कृति और भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े विषयों का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

समृद्ध मध्यप्रदेश @2047 के लक्ष्य में सहयोग

इस साझेदारी का उद्देश्य मध्यप्रदेश के विकास में केंद्र पोषित संस्थानों की भूमिका को मजबूत करना और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है। दोनों संस्थान मिलकर “समृद्ध मध्यप्रदेश @2047” के लक्ष्य को साकार करने में योगदान देंगे।

कॉन्क्लेव में प्रदेश के विकास में केंद्र पोषित संस्थानों की भूमिका, नवाचार, शोध और संस्थागत सहयोग जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श किया गया।

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एससी प्रमाण पत्र पर नियुक्ति के आरोप में डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के कॉमर्स विभाग के डीन निलंबित

एससी प्रमाण पत्र पर नियुक्ति के आरोप में डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के कॉमर्स विभाग के डीन निलंबित

फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की रिपोर्ट के बाद कार्रवाई, विश्वविद्यालय ने शुरू की अनुशासनात्मक कार्यवाही



तीनबत्ती न्यूज: 08 अगस्त, 2026

सागर। डॉ. हरीसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय, सागर में अनुसूचित जाति (SC) प्रमाण पत्र के आधार पर नियुक्ति प्राप्त करने के आरोपों से घिरे बिजनेस मैनेजमेंट विभाग के प्रोफेसर डॉ. श्री भागवत (Shree Bhagwat) को विश्वविद्यालय प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। डॉ. भगवान वर्तमान में स्कूल ऑफ कॉमर्स एंड मैनेजमेंट के डीन के पद पर कार्यरत थे।

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विश्वविद्यालय द्वारा 7 अगस्त 2026 को जारी कार्यालय आदेश के अनुसार, डॉ. भागवत की प्रारंभिक नियुक्ति 16 अप्रैल 2005 को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित पद पर लेक्चरर के रूप में हुई थी। उनके द्वारा प्रस्तुत एससी प्रमाण पत्र को लेकर शिकायतों के बाद विश्वविद्यालय ने फैक्ट फाइंडिंग कमेटी गठित की थी।

कमेटी ने बताई ये प्रारंभिक बातें

विश्वविद्यालय के आदेश में कहा गया है कि 30 जुलाई 2026 को गठित फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने 5 अगस्त को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। कमेटी के रिकॉर्ड परीक्षण में प्रथम दृष्टया पाया गया कि—

  • डॉ. भागवत की नियुक्ति अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित पद पर हुई थी।
  • रिकॉर्ड में सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी वैध स्थायी एससी प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं मिला।
  • उनके द्वारा प्रस्तुत प्रमाण पत्र का संबंधित जारीकर्ता प्राधिकारी के रिकॉर्ड से सत्यापन नहीं हो सका।
  • संबंधित प्राधिकारियों से प्राप्त सत्यापन रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया डॉ. भागवत के उत्तर प्रदेश की बिंद समुदाय, जिसे वहां अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) श्रेणी में बताया गया है, से संबंधित होने की बात सामने आई।
  • कमेटी ने प्रथम दृष्टया माना कि एससी आरक्षण के आधार पर नियुक्ति अमान्य अथवा गलत जाति दावे पर प्राप्त किए जाने की आशंका है।

अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश

फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने मामले में अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करने की सिफारिश की थी। साथ ही, यदि सक्षम प्राधिकारी यह संतुष्ट होता है कि नियुक्ति गलत जाति दावे के आधार पर प्राप्त की गई थी तो अनुशासनात्मक कार्यवाही लंबित रहने तक निलंबन सहित आवश्यक कार्रवाई की अनुशंसा की गई।

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विश्वविद्यालय प्रशासन ने रिपोर्ट पर विचार करने के बाद आरोपों को गंभीर और कर्मचारी की एससी आरक्षित पद पर नियुक्ति की पात्रता से जुड़ा हुआ माना। आदेश में यह भी कहा गया कि डॉ. भगवान के डीन पद पर बने रहने से अनुशासनात्मक जांच प्रभावित होने की आशंका हो सकती है।

जांच पूरी होने तक निलंबन

विश्वविद्यालय ने केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1965 के तहत डॉ. श्री भागवत को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर रहेगा और वे सक्षम प्राधिकारी की लिखित अनुमति के बिना मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे।

उन्हें नियमानुसार निर्वाह भत्ता और अन्य अनुमन्य भत्ते मिलेंगे। साथ ही, बिना पूर्व अनुमति विश्वविद्यालय के किसी कार्यालय या प्रशासनिक अनुभाग में प्रवेश पर भी रोक रहेगी, सिवाय अनुशासनात्मक कार्यवाही के संबंध में आवश्यकता होने पर।

अंतिम निर्णय अनुशासनात्मक जांच के बाद

विश्वविद्यालय के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह कार्रवाई प्रारंभिक (prima facie) निष्कर्षों के आधार पर की गई है। मामले में अनुशासनात्मक कार्यवाही पूरी होने के बाद अंतिम निर्णय विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद (Executive Council) द्वारा लिया जाएगा।

​प्रो. भागवत का पक्ष:

​इस कार्रवाई पर अपना पक्ष रखते हुए डॉ. भागवत ने कहा, "मैं लगातार विवि में हो रही गड़बड़ियों और गलतियों के खिलाफ बोलता रहा हूँ। इसीलिए बदले की भावना के तहत यह कार्रवाई की गई है। इस द्वेषपूर्ण कार्रवाई में केवल 8 दिनों के भीतर सारी प्रक्रिया पूरी कर ली गई और मेरा पक्ष तक नहीं सुना गया।"


​अन्य नियुक्तियों की शिकायतों पर उठते सवाल

​इस निलंबन के बाद विवि प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। आमतौर पर महीनों और सालों तक फाइलों को दबाकर रखने वाला प्रशासन इस मामले में मात्र 8 दिनों के भीतर जांच से लेकर निलंबन तक की प्रक्रिया पूरी करने में 'एक्सप्रेस रफ्तार' से चला।



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राज्यपाल ने रानी अवंतीबाई लोधी विश्वविद्यालय की कार्य परिषद में चार संकायाध्यक्ष किए नामित

रानी अवंतीबाई लोधी विश्वविद्यालय, सागर की कार्य परिषद में संकायाध्यक्ष नामित किए गए ::चार डीन बने कार्य परिषद सदस्य 



तीनबत्ती न्यूज: 18 जुलाई, 2026

सागर। मध्यप्रदेश के राज्यपाल तथा प्रदेश के समस्त शासकीय विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति द्वारा रानी अवंतीबाई लोधी विश्वविद्यालय, सागर में चार संकायाध्यक्षों को विश्वविद्यालय की कार्य पारिषद के सदस्य नामित किया है। राज्यपाल के उपसचिव द्वारा 17 जुलाई 2026 को जारी पत्र के माध्यम से मध्यप्रदेश विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 की धारा 23 की उपधारा 1 के खंड-2 के प्रावधान अन्तर्गत विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायाध्यक्षों में से विज्ञान संकाय के डीन डॉ. आलोक कुमार जैन (प्राध्यापक- भौतिकी) ज्ञानचंद्र श्रीवास्तव शासकीय स्नातकोत्‍तर महाविद्यालय, दमोह,  जीवविज्ञान संकाय की डीन डॉ. गोपा जैन (प्राध्यापक- प्राणीशास्त्र) शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय, सागर, कला संकाय के डीन डॉ. विनय कुमार शर्मा (प्राध्यापक- अंग्रेजी) शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय, सागर और वाणिज्य संकाय के डीन डॉ. सुभाष कुमार अग्रवाल (प्राध्यापक-वाणिज्य) शासकीय स्नातकोत्‍तर महाविद्यालय, दमोह को कार्य परिषद का सदस्य नामित किया गया है।

इस अवसर पर कुलगुरू प्रो. विनोद कुमार मिश्रा ने विश्वविद्यालय में सभी सदस्यों का स्वागत करते हुए कहा कि कार्य परिषद में संकाय अध्यक्ष श्रेणी से सदस्यों को नामित किए जाने से कार्य परिषद में अकादमिक प्रतिनिधित्व बढ़ेगा जिससे विश्वविद्यालय के प्रशासनिक और अकादमिक विकास को मजबूती मिलेगी तथा विश्वविद्यालय नए सोपानों को पूर्ण करेगा। 

कुलसचिव प्रो. शक्ति जैन ने सभी का अभिनंदन करते हुए कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय के विकास में कार्य परिषद की अहम भूमिका होती है, आप सभी के सहयोग से निश्चित ही विश्वविद्यालय एक श्रेष्ठ शैक्षणिक संस्थान बनेगा।

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पीजीटी व्याख्याता परीक्षा-2026 में विश्वविद्यालय के शोधार्थी अजय विश्वकर्मा का चयन, प्रदेश में हासिल की छठी रैंक

पीजीटी व्याख्याता परीक्षा-2026 में विश्वविद्यालय के शोधार्थी अजय विश्वकर्मा का चयन, प्रदेश में हासिल की छठी रैंक


तीनबत्ती न्यूज: 13 जुलाई, 2026

सागर। डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग के शोधार्थी अजय कुमार विश्वकर्मा ने उत्तर प्रदेश शिक्षा चयन आयोग की पीजीटी व्याख्याता परीक्षा-2026 में प्रदेश स्तर पर छठा स्थान प्राप्त कर विश्वविद्यालय और विभाग का नाम रोशन किया है।

अजय की इस उपलब्धि पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वाई.एस. ठाकुर ने उन्हें बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। वहीं समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. कालीनाथ झा ने इसे विभाग के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि अजय की सफलता अन्य शोधार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी। उन्होंने दुष्यंत कुमार की प्रसिद्ध पंक्तियां उद्धृत करते हुए कहा, "कौन कहता है आसमान में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो।"


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वर्तमान में अजय कुमार विश्वकर्मा थारू जनजातीय समुदाय पर शोध कार्य कर रहे हैं। इससे पहले भी वे राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की विभिन्न चयन प्रक्रियाओं में साक्षात्कार तक पहुंच चुके हैं।

अपनी सफलता का श्रेय अजय ने अपने माता-पिता, गुरुजनों के मार्गदर्शन और मित्रों के सहयोग को दिया। उनकी इस उपलब्धि पर इतिहास विभाग के आशु अहिरवार, भूगोल विभाग के मनीष गुप्ता, शिक्षा विभाग के शशांक नागदेव सहित पूजा लोधी, नेहा मालवीय, राकेश गोयल, निखिल शुक्ला एवं अन्य शोधार्थियों ने बधाई और शुभकामनाएं दीं।

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